विशाखापत्तनम में पहले बेड़ा सहायता पोत एफएसएस-1 का जलावतरण
भारतीय नौसेना के लिए बना 43,500 टन का पहला बेड़ा सहायता पोत एफएसएस-1, 6 अक्टूबर 2026 को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम में उतारा जाएगा।

चर्चा में क्यों
रक्षा मंत्रालय ने 5 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारतीय नौसेना के पहले बेड़ा सहायता पोत एफएसएस-1 का जलावतरण 6 अक्टूबर 2026 को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम में करेंगे और एफएसएस-5 की कील रखेंगे।
भारतीय नौसेना का पहला बेड़ा सहायता पोत (एफएसएस-1) 6 अक्टूबर 2026 को विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में जल में उतारा जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस पोत का जलावतरण करेंगे, एफएसएस-5 की कील रखेंगे और उसी कार्यक्रम में शिपयार्ड की दो उन्नत सुविधाओं का उद्घाटन भी करेंगे। रक्षा मंत्रालय ने इसकी घोषणा 5 अक्टूबर 2026 को की।
यह पोत क्या करता है
एफएसएस-1 नौसेना के लिए बनाए जा रहे पांच बेड़ा सहायता पोतों में पहला है। ये 43,500 टन के पोत हैं, जिनका काम समुद्र में तैनात युद्धपोतों को ईंधन, सामग्री और रसद पहुंचाना है, ताकि किसी बेड़े को इसके लिए बंदरगाह लौटना न पड़े। इसी क्षमता से हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की तैनाती की अवधि और पहुंच बढ़ती है। यह पोत स्टील कटिंग के मात्र 18 महीने बाद बंगाल की खाड़ी के जल में उतरेगा, जो इस आकार के पोत के लिए कम समय है।
एफएसएस-5 की कील
इसी समारोह में श्रेणी के अंतिम पोत एफएसएस-5 की कील रखी जाएगी। पहला पोत पानी में और पांचवां शुरू होने के साथ यह कार्यक्रम श्रृंखलाबद्ध उत्पादन के चरण में पहुंच जाएगा, यानी तय डिजाइन पर एक के बाद एक पोत बनाने की अवस्था।
शिपयार्ड की क्षमता बढ़ी
दो बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन भी होगा। उन्नत स्लिपवे-4 की लंबाई बढ़ाई गई है और भार वहन क्षमता भी, और इसके साथ 300 टन की गोलियाथ क्रेन जोड़ी गई है। दोनों मिलकर हिंदुस्तान शिपयार्ड को 45,000 डेडवेट टन तक के पोत बनाने और उतारने में सक्षम बनाएंगे, जिससे शिपयार्ड पहले से बड़े और जटिल प्लेटफॉर्म ले सकेगा।
कौन उपस्थित रहेंगे
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार कार्यक्रम में उपस्थित रहने वालों में हैं। मंत्रालय ने इसे स्वदेशी पोत निर्माण के खाते में रखा है — बेड़ा सहायता पोत किसी नौसेना के बड़े पोतों में गिना जाता है, और पूरी श्रेणी देश के शिपयार्ड में बनने से डिजाइन, निर्माण और आगे का रखरखाव देश में ही रहता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पोत | बेड़ा सहायता पोत एफएसएस-1, नौसेना के पांच पोतों में पहला |
|---|---|
| निर्माता | हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम |
| जलावतरण तिथि | 6 अक्टूबर 2026 |
| भार | 43,500 टन |
| निर्माण अवधि | स्टील कटिंग के 18 महीने बाद जलावतरण |
| कार्य | हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्र में तैनात युद्धपोतों को पुन: आपूर्ति |
| उद्घाटित सुविधाएं | उन्नत स्लिपवे-4 और 300 टन की गोलियाथ क्रेन, 45,000 डेडवेट टन तक के पोत संभव |
| जलावतरण करेंगे | रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह |
परीक्षा की दृष्टि से
पोत (एफएसएस-1, पांच में पहला), निर्माता (हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम), भार (43,500 टन), निर्माण अवधि (स्टील कटिंग के 18 महीने बाद), उसी दिन रखी कील (एफएसएस-5), क्रेन (300 टन), शिपयार्ड की नई सीमा (45,000 डेडवेट टन), समुद्र (बंगाल की खाड़ी) और मंत्री का नाम याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
भारतीय नौसेना का पहला बेड़ा सहायता पोत एफएसएस-1 किस शिपयार्ड में उतारा जा रहा है?
- A.मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, मुंबई
- B.हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम
- C.कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि
- D.गार्डन रीच शिपबिल्डर्स, कोलकाता
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम
व्याख्या
सही उत्तर हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम है। भारतीय नौसेना के लिए पांचों बेड़ा सहायता पोत यही शिपयार्ड बना रहा है, और एफएसएस-1 वहीं 6 अक्टूबर 2026 को बंगाल की खाड़ी के जल में उतारा जाएगा, स्टील कटिंग के अठारह महीने बाद। उसी समारोह में एफएसएस-5 की कील रखी जाएगी और शिपयार्ड की दो सुविधाओं का उद्घाटन होगा — उन्नत स्लिपवे-4 और 300 टन की गोलियाथ क्रेन, जो मिलकर शिपयार्ड की निर्माण सीमा 45,000 डेडवेट टन तक पहुंचा देती हैं। बाकी तीनों विकल्प भारत के वास्तविक रक्षा शिपयार्ड हैं, इसीलिए वे भ्रम पैदा करते हैं, लेकिन बेड़ा सहायता पोत का ऑर्डर उनमें किसी के पास नहीं है। याद रखें — बेड़ा सहायता पोत का जोड़ा विशाखापत्तनम के हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड से है।
भारतीय नौसेना के लिए बन रहे प्रत्येक बेड़ा सहायता पोत का भार कितना है?
- A.25,000 टन
- B.37,000 टन
- C.43,500 टन
- D.52,000 टन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 43,500 टन
व्याख्या
सही उत्तर 43,500 टन है। पांचों बेड़ा सहायता पोत इसी आकार के हैं और इनका काम समुद्र में तैनात युद्धपोतों को ईंधन, सामग्री और रसद पहुंचाकर उनकी पुन: आपूर्ति करना है, जिससे बेड़े को बंदरगाह लौटे बिना अभियान जारी रखने की सुविधा मिलती है। इसी से हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की तैनाती अवधि और पहुंच बढ़ती है। अभ्यर्थी इस आंकड़े को उसी घोषणा में दिए दूसरे आंकड़े से न मिलाएं — उन्नत स्लिपवे-4, 300 टन की नई गोलियाथ क्रेन के साथ, शिपयार्ड को 45,000 डेडवेट टन तक के पोत बनाने और उतारने देता है, जो शिपयार्ड की सीमा है, इस श्रेणी का भार नहीं। विकल्प A, B और D इस घोषणा के आंकड़े नहीं हैं। पोत का भार और शिपयार्ड की निर्माण सीमा दो अलग-अलग आंकड़े हैं, इसलिए परीक्षा में इन्हें आपस में मिलाने की गलती नहीं करनी चाहिए।
एफएसएस-1 के जलावतरण के दिन किस बेड़ा सहायता पोत की कील रखी जा रही है?
- A.एफएसएस-2
- B.एफएसएस-3
- C.एफएसएस-4
- D.एफएसएस-5
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. एफएसएस-5
व्याख्या
सही उत्तर एफएसएस-5 है। विशाखापत्तनम के समारोह में रक्षा मंत्री श्रेणी के पहले पोत का जलावतरण करेंगे और उसी दिन पांचवें तथा अंतिम पोत की कील रखेंगे, जिससे यह कार्यक्रम एक-एक पोत बनाने के बजाय श्रृंखलाबद्ध उत्पादन की दिशा में बढ़ जाता है। कील रखना किसी पोत के ढांचे के निर्माण की औपचारिक शुरुआत है, इसलिए पहला पोत पानी में और पांचवां शुरू होना बताता है कि पूरा ऑर्डर साथ-साथ चल रहा है। विकल्प A, B और C श्रेणी के बीच के पोत हैं, इस आयोजन में उनकी कील नहीं रखी जा रही। एक ही दिन के दोनों पड़ाव याद रखें — एफएसएस-1 का जलावतरण और एफएसएस-5 की कील, साथ में उन्नत स्लिपवे-4 तथा 300 टन की गोलियाथ क्रेन का उद्घाटन।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बेड़ा सहायता पोत क्या होता है?
यह पुन: आपूर्ति पोत है जो समुद्र में तैनात युद्धपोतों को ईंधन, सामग्री और रसद देता है, जिससे बेड़े को बंदरगाह लौटना नहीं पड़ता। एफएसएस-1 नौसेना के पांच 43,500 टन वाले पोतों में पहला है।
एफएसएस-1 कहां बन रहा है और कहां उतरेगा?
हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम में। यह 6 अक्टूबर 2026 को बंगाल की खाड़ी में उतारा जाएगा, स्टील कटिंग के मात्र 18 महीने बाद।
उन्नत स्लिपवे-4 से शिपयार्ड को क्या क्षमता मिलती है?
300 टन की नई गोलियाथ क्रेन के साथ लंबा और मजबूत स्लिपवे-4 शिपयार्ड को 45,000 डेडवेट टन तक के पोत बनाने और उतारने में सक्षम बनाता है।
स्रोत
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