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GK24

भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेष अरुणाचल प्रदेश में दर्शन के लिए

भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष 31 अक्टूबर से 21 नवंबर 2026 तक अरुणाचल प्रदेश के तवांग, बोमडिला और नामसाई में संस्कृति मंत्रालय के आयोजन में जनदर्शन हेतु रखे जाएंगे।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेष अरुणाचल प्रदेश में दर्शन के लिए

चर्चा में क्यों

संस्कृति मंत्रालय ने 30 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में रखे भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेष 31 अक्टूबर से 21 नवंबर 2026 तक जनदर्शन के लिए अरुणाचल प्रदेश के तवांग, बोमडिला और नामसाई ले जाए जाएंगे।

संस्कृति मंत्रालय ने 30 अक्टूबर 2026 को बताया कि नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित भगवान शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेष अरुणाचल प्रदेश ले जाए जाएंगे। जनदर्शन 31 अक्टूबर को शुरू होकर 21 नवंबर 2026 को समाप्त होगा। यह आयोजन अरुणाचल प्रदेश सरकार, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ और राष्ट्रीय संग्रहालय के साथ मिलकर किया जा रहा है।

राज्य के तीन स्थल

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत 31 अक्टूबर 2026 को गादेन नामग्याल ल्हात्से यानी तवांग मठ में उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। अगले दिन होने वाले दूसरे उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पेमा खांडू होंगे। यह अवसर ल्हाबाब दुचेन के निकट पड़ता है, जो तिब्बती बौद्ध परंपरा में भगवान बुद्ध के स्वर्गलोक से अवतरण का पर्व है।

1 से 7 नवंबरतवांग मठ
8 से 13 नवंबरटीजीएल मठ (निचला गोंपा), बोमडिला
14 से 20 नवंबरस्वर्ण पैगोडा, नामसाई
21 नवंबरराष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली वापसी

अवशेष कैसे पहुंचेंगे

वायु सेना का विशेष विमान 31 अक्टूबर को तड़के पालम वायु सेना स्टेशन से अवशेष लेकर गुवाहाटी के पास बोरझार वायु सेना स्टेशन उतरेगा और आगे का रास्ता हेलीकॉप्टर से तय होगा। सुरक्षा तथा संरक्षण के लिए संस्कृति मंत्रालय रक्षा मंत्रालय, वायु सेना, राज्य सरकार और राष्ट्रीय संग्रहालय के साथ समन्वय कर रहा है। मौसम और परिचालन कारणों से समय बदल सकता है।

पिपरहवा का महत्व

ये अवशेष उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के पिपरहवा से मिले थे, जो प्राचीन कपिलवस्तु और शाक्य परंपरा से जुड़ा स्थल है। विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने 1898 में वहां एक स्तूप की खुदाई कर अस्थि अवशेष तथा बहुमूल्य वस्तुएं पाई थीं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने पुरातत्वविद के. एम. श्रीवास्तव के निर्देशन में 1971 से 1977 के बीच गहरी खुदाई कर दो और मंजूषाएं निकालीं। बड़ी मंजूषा में 12 तथा छोटी में 10 अस्थि खंड मिले, यानी कुल 22 अवशेष। इनमें से 20 राष्ट्रीय संग्रहालय और दो कोलकाता के भारतीय संग्रहालय में हैं।

सम्मेलन और प्रदर्शनी

तवांग के कलावांग्पो कन्वेंशन हॉल में 2 नवंबर 2026 को 'बौद्ध धर्म: हिमालयी क्षेत्र और उससे आगे प्रसार' विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होगा, जिसमें भारत, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, मलेशिया, इंडोनेशिया और जर्मनी के भिक्षु, विद्वान तथा प्रतिनिधि जुटेंगे। 'अनअर्थिंग द सेक्रेड पिपरहवा' नाम की प्रदर्शनी तीनों स्थानों पर अवशेषों के साथ जाएगी। इसमें पिपरहवा रत्न संग्रह की कहानी भी है, जो नीलामी का प्रस्ताव आने के बाद लगभग 127 वर्ष बीतने पर 2025 में भारत लौटा।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजनअरुणाचल प्रदेश में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का जनदर्शन
अवधि31 अक्टूबर से 21 नवंबर 2026
स्थलतवांग मठ, टीजीएल मठ (निचला गोंपा) बोमडिला, स्वर्ण पैगोडा नामसाई
अवशेषपिपरहवा अवशेष, सामान्यत: राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में
आयोजकसंस्कृति मंत्रालय के साथ अरुणाचल प्रदेश सरकार, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ और राष्ट्रीय संग्रहालय
उद्घाटनकेंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, तवांग, 31 अक्टूबर 2026
1 नवंबर के मुख्य अतिथिअरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू
पहली खुदाईविलियम क्लैक्सटन पेप्पे, पिपरहवा, 1898
एएसआई खुदाईके. एम. श्रीवास्तव के निर्देशन में 1971 से 1977
प्राप्त अवशेषकुल 22, बड़ी मंजूषा में 12 और छोटी में 10
सम्मेलनबौद्ध धर्म: हिमालयी क्षेत्र और उससे आगे प्रसार, कलावांग्पो कन्वेंशन हॉल, तवांग, 2 नवंबर 2026
प्रदर्शनीअनअर्थिंग द सेक्रेड पिपरहवा, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ द्वारा

परीक्षा की दृष्टि से

तिथियां (31 अक्टूबर से 21 नवंबर 2026), तीनों स्थल (तवांग मठ, बोमडिला, नामसाई का स्वर्ण पैगोडा), मूल स्थान (उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर का पिपरहवा), 1898 में विलियम क्लैक्सटन पेप्पे की खुदाई, 1971 से 1977 की एएसआई खुदाई, कुल 22 अवशेष जिनमें 20 राष्ट्रीय संग्रहालय में, उद्घाटन करने वाले मंत्री और 2 नवंबर 2026 के तवांग सम्मेलन को याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयआसान

31 अक्टूबर 2026 से भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष किस राज्य में जनदर्शन के लिए रखे जा रहे हैं?

  1. A.सिक्किम
  2. B.अरुणाचल प्रदेश
  3. C.हिमाचल प्रदेश
  4. D.मिजोरम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अरुणाचल प्रदेश

संस्कृति मंत्रालय इसी राज्य में 31 अक्टूबर से 21 नवंबर 2026 तक भगवान शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों का जनदर्शन करा रहा है, और इसके तीन केंद्र हैं: तवांग मठ, बोमडिला का टीजीएल मठ निचला गोंपा तथा नामसाई का स्वर्ण पैगोडा।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेष उत्तर प्रदेश के किस वर्तमान जिले से प्राप्त हुए थे?

  1. A.कुशीनगर
  2. B.सिद्धार्थनगर
  3. C.श्रावस्ती
  4. D.गोरखपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सिद्धार्थनगर

पिपरहवा इसी जिले में है और यह प्राचीन कपिलवस्तु तथा भगवान बुद्ध की शाक्य परंपरा से जुड़ा हुआ है।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

'बौद्ध धर्म: हिमालयी क्षेत्र और उससे आगे प्रसार' विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2 नवंबर 2026 को कहां हो रहा है?

  1. A.स्वर्ण पैगोडा, नामसाई
  2. B.कलावांग्पो कन्वेंशन हॉल, तवांग
  3. C.टीजीएल मठ, बोमडिला
  4. D.राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कलावांग्पो कन्वेंशन हॉल, तवांग

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ और अरुणाचल प्रदेश सरकार वहीं 2 नवंबर 2026 को यह सम्मेलन कर रहे हैं, जिसमें भारत, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, मलेशिया, इंडोनेशिया तथा जर्मनी के भिक्षु, विद्वान और प्रतिनिधि तीन विषयों पर चर्चा करेंगे: महापरिनिर्वाण के बाद बुद्ध की विरासत को आगे ले जाना, बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक…

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरुणाचल प्रदेश में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष कहां रखे जाएंगे?

गादेन नामग्याल ल्हात्से यानी तवांग मठ, बोमडिला के टीजीएल मठ निचला गोंपा और नामसाई के स्वर्ण पैगोडा में, 31 अक्टूबर से 21 नवंबर 2026 के बीच।

पिपरहवा अवशेष कहां से मिले थे?

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के पिपरहवा से, जो प्राचीन कपिलवस्तु से जुड़ा स्थल है। विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने 1898 में स्तूप की खुदाई की और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 1971 से 1977 के बीच फिर खुदाई की।

कुल कितने पिपरहवा अवशेष मिले और वे कहां रखे हैं?

बाईस अस्थि अवशेष मिले, बड़ी मंजूषा में 12 और छोटी में 10। इनमें से 20 नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में और दो कोलकाता के भारतीय संग्रहालय में सुरक्षित हैं।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLSSC CHSL