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एपीडा ने पूर्णिया से यूनान भेजा बिहार का मखाना

एपीडा ने बिहार के पूर्णिया से यूनान के लिए एक टन फूल मखाना की खेप रवाना कराई, जो भारत के मुंद्रा बंदरगाह से यूनान के पीरियस बंदरगाह तक जाएगी।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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एपीडा ने पूर्णिया से यूनान भेजा बिहार का मखाना — GK24 title card

चर्चा में क्यों

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 2 अक्टूबर 2026 को बताया कि एपीडा ने बिहार के पूर्णिया से यूनान के लिए फूल मखाना की खेप रवाना कराई, जिसकी अध्यक्षता बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एपीडा अध्यक्ष अभिषेक देव की उपस्थिति में की।

बिहार के मखाने को दक्षिणी यूरोप में नया खरीदार मिल गया है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी एपीडा ने बिहार के पूर्णिया से यूनान के लिए एक मीट्रिक टन फूल मखाना की खेप रवाना कराई।

खेप का रास्ता

यह खेप पूर्णिया के बेलौरी स्थित इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट से ली गई है और नई दिल्ली की एस. एस. फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिये भेजी जा रही है। इसका समुद्री रास्ता भारतीय तट के मुंद्रा बंदरगाह से यूनान के पीरियस बंदरगाह तक जाता है। निर्यातक को जो कीमत मिली वह घरेलू बाजार में उसी माल को मिल रही कीमत से ऊंची है, और परंपरागत फसल को विदेशी बाजार तक पहुंचाने का पूरा तर्क यही है।

मखाना कहां से आता है

मखाना उत्पादन में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है और देश के कुल उत्पादन में अकेले बिहार का हिस्सा करीब 80 से 85 प्रतिशत है। राज्य में इसकी खेती 10 जिलों में 35,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है। फसल के पीछे का विज्ञान दो संस्थान देते हैं: सबौर का बिहार कृषि विश्वविद्यालय, और दरभंगा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र।

निर्यात के आंकड़े

विवरणआंकड़ा
रवाना हुई खेप1 मीट्रिक टन फूल मखाना
वित्त वर्ष 2025-26 में मखाना निर्यात7000 मीट्रिक टन से अधिक
उस निर्यात का मूल्यलगभग 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर
कितने देशों तक20 से अधिक
उत्पादन में बिहार का हिस्साकरीब 80 से 85 प्रतिशत

कौन मौजूद रहा

रवानगी कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने की। एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव तथा राज्य कृषि विभाग में उद्यान निदेशक अभिषेक कुमार भी राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उपस्थित रहे। सिन्हा ने इस खेप को राज्य के मखाना क्षेत्र के लिए एक पड़ाव बताया, कहा कि राज्य सरकार निर्यात के जरिये किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि निर्यात नीति पर काम कर रही है, और बताया कि मखाना निर्यात श्रृंखला के लिए पैकहाउस बनाए गए हैं।

यह क्यों मायने रखता है

मखाना का बिहार से गहरा परंपरागत और सांस्कृतिक नाता है और यह भारतीय कृषि निर्यात की टोकरी में एक अहम वस्तु बन चुका है। इस तरह की खेपें अब यूरोपीय बाजारों तक पहुंच रही हैं, जिससे उन ठिकानों की सूची चौड़ी हो रही है जहां यह फसल परंपरागत रूप से जाती थी।

महत्वपूर्ण तथ्य

सुविधा देने वाली संस्थाकृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा)
उत्पादफूल मखाना, 1 मीट्रिक टन की खेप
कहां सेपूर्णिया, बिहार
गंतव्य देशयूनान
रवानगी बंदरगाहमुंद्रा बंदरगाह, भारत
पहुंच बंदरगाहपीरियस बंदरगाह, यूनान
उत्पादन में बिहार का हिस्साभारत के उत्पादन का करीब 80 से 85 प्रतिशत
बिहार में खेती का क्षेत्र10 जिलों में 35,000 हेक्टेयर से अधिक
अनुसंधान सहयोगबिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर तथा आईसीएआर राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा
वित्त वर्ष 2025-26 का निर्यात20 से अधिक देशों को लगभग 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का 7000 मीट्रिक टन से अधिक
अध्यक्षताविजय कुमार सिन्हा, कृषि मंत्री, बिहार सरकार
एपीडा अध्यक्षअभिषेक देव

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखने वाली जोड़ी है मखाना, बिहार का पूर्णिया और यूनान, जिसमें रवानगी का बंदरगाह मुंद्रा और पहुंच का बंदरगाह पीरियस है। आंकड़े: 1 मीट्रिक टन की खेप, राष्ट्रीय उत्पादन में बिहार का करीब 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा, 10 जिलों में 35,000 हेक्टेयर से अधिक खेती, और वित्त वर्ष 2025-26 में 20 से अधिक देशों को लगभग 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का 7000 मीट्रिक टन से अधिक निर्यात। सबौर का बिहार कृषि विश्वविद्यालय तथा दरभंगा का आईसीएआर केंद्र, और बिहार के कृषि मंत्री एवं एपीडा अध्यक्ष के नाम कहानी पूरी करते हैं।

अभ्यास प्रश्न

Q1.अर्थव्यवस्थाआसान

एपीडा ने बिहार के पूर्णिया से फूल मखाना किस देश को निर्यात कराया?

  1. A.यूनान
  2. B.स्पेन
  3. C.कनाडा
  4. D.इटली
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. यूनान

व्याख्या

सही उत्तर यूनान है। फूल मखाना की खेप बिहार के पूर्णिया से यूनान के लिए निकली, जो भारत के मुंद्रा बंदरगाह से यूनानी छोर पर पीरियस बंदरगाह तक जाएगी। विकल्प B और D यूरोप के दूसरे भूमध्यसागरीय देश हैं और विकल्प C उत्तर अमेरिकी ठिकाना, तीनों भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य के संभावित बाजार हैं, पर इस खेप का खरीदार इनमें कोई नहीं। परीक्षार्थी यह भी देखें कि गंतव्य के अलावा यह समाचार क्यों बना: निर्यात पर मिली कीमत घरेलू बाजार में उसी माल को मिल रही दर से ऊंची रही, और परंपरागत फसल को विदेशी खरीदारों से जोड़ने का आधारभूत तर्क यही है। ध्यान रहे कि मखाना का निर्यात अब यूरोपीय बाजारों तक फैल रहा है, इसलिए किसी यूरोपीय गंतव्य का आना स्वयं खबर का हिस्सा और प्रश्न का संभावित आधार है।

Q2.अर्थव्यवस्थाआसान

भारत के मखाना उत्पादन में करीब 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा किस राज्य का है?

  1. A.पश्चिम बंगाल
  2. B.असम
  3. C.बिहार
  4. D.ओडिशा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. बिहार

व्याख्या

सही उत्तर बिहार है, जिसका हिस्सा राष्ट्रीय उत्पादन में अस्सी से पचासी प्रतिशत के बीच है, और मखाना उत्पादन में भारत स्वयं दुनिया में अग्रणी है। राज्य में खेती दस जिलों में पैंतीस हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैली है। विकल्प A, B और D उन राज्यों के नाम हैं जहां आर्द्रभूमि और तालाब आधारित खेती होती है, जहां यह फसल होती भी है या हो सकती है, इसलिए वे ठीक-ठाक भ्रमक हैं, पर बिहार के हिस्से के आसपास कोई नहीं। फसल को वैज्ञानिक आधार देने वाले दो संस्थान राज्य के साथ याद रखने योग्य हैं: सबौर का बिहार कृषि विश्वविद्यालय, और दरभंगा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र। प्रश्न हिस्सा, क्षेत्र, जिलों की संख्या या अनुसंधान केंद्र, किसी पर भी बन सकता है।

Q3.अर्थव्यवस्थामध्यम

यूनान जाने वाली मखाना खेप भारत के किस बंदरगाह से रवाना हुई?

  1. A.कांडला बंदरगाह
  2. B.मुंद्रा बंदरगाह
  3. C.न्हावा शेवा बंदरगाह
  4. D.कोलकाता बंदरगाह
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मुंद्रा बंदरगाह

व्याख्या

सही उत्तर मुंद्रा बंदरगाह है, जहां से यह खेप यूनान के पीरियस बंदरगाह के लिए जाती है। विकल्प A यानी कांडला उसी गुजरात तट पर है और इसी कारण सबसे मजबूत भ्रमक है। विकल्प C मुंबई के पास का बड़ा कंटेनर बंदरगाह है और विकल्प D पूर्वी नदी बंदरगाह, दोनों सिद्धांत रूप में ऐसा माल संभाल सकते हैं पर इस खेप को इनमें से किसी ने नहीं भेजा। बंदरगाहों की जोड़ी वह विवरण है जो परीक्षक को पसंद आता है, क्योंकि इससे पता चलता है कि परीक्षार्थी ने शीर्षक से आगे पढ़ा या नहीं: भारतीय छोर पर मुंद्रा और यूनानी छोर पर पीरियस। साथ में यह भी याद रखें कि खेप पूर्णिया के बेलौरी स्थित इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट से ली गई और नई दिल्ली की एस. एस. फूड्स एक्सपोर्ट्स के जरिये भेजी गई, तथा रवानगी की अध्यक्षता बिहार के कृषि मंत्री ने एपीडा अध्यक्ष की उपस्थिति में की।

Q4.अर्थव्यवस्थामध्यम

बिहार के कृषि मंत्री के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने कितना मखाना तथा मूल्यवर्धित मखाना उत्पाद निर्यात किया?

  1. A.4000 मीट्रिक टन से अधिक, मूल्य लगभग 12 मिलियन अमेरिकी डॉलर
  2. B.7000 मीट्रिक टन से अधिक, मूल्य लगभग 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर
  3. C.9000 मीट्रिक टन से अधिक, मूल्य लगभग 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर
  4. D.12000 मीट्रिक टन से अधिक, मूल्य लगभग 45 मिलियन अमेरिकी डॉलर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 7000 मीट्रिक टन से अधिक, मूल्य लगभग 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर

व्याख्या

सही उत्तर 7000 मीट्रिक टन से अधिक, मूल्य लगभग 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो उस वित्त वर्ष में बीस से अधिक अंतरराष्ट्रीय ठिकानों पर भेजा गया। बाकी तीन विकल्पों में गढ़े गए वजन और मूल्य हैं, जैसे परीक्षक यह देखने के लिए रखता है कि परीक्षार्थी ने दोनों आंकड़े साथ याद किए हैं या किसी एक को अलग-अलग। मंत्री ने इन आंकड़ों को बड़े संदर्भ में रखा: राज्य सरकार कृषि निर्यात नीति तैयार कर रही है जिसका उद्देश्य निर्यात संवर्धन से किसानों की आय बढ़ाना है, और मखाना निर्यात मूल्य श्रृंखला के लिए पैकहाउस पहले ही विकसित किए गए हैं। उन्होंने यूनान भेजी गई खेप को राज्य के मखाना क्षेत्र का पड़ाव बताया। दोहराते समय मात्रा, मूल्य और ठिकानों की संख्या को एक पंक्ति में जोड़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार के किस जिले से यूनान को मखाना भेजा गया?

पूर्णिया। एपीडा ने पूर्णिया से 1 मीट्रिक टन फूल मखाना रवाना कराया, खेप बेलौरी की इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट से ली गई।

मखाना की खेप किन बंदरगाहों के बीच जाएगी?

यह भारत के मुंद्रा बंदरगाह से यूनान के पीरियस बंदरगाह तक जाएगी।

भारत के मखाना उत्पादन में बिहार का हिस्सा कितना है?

करीब 80 से 85 प्रतिशत। राज्य में खेती 10 जिलों में 35,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होती है और सहयोग सबौर के बिहार कृषि विश्वविद्यालय तथा दरभंगा के आईसीएआर राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र से मिलता है।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने कितना मखाना निर्यात किया?

7000 मीट्रिक टन से अधिक मखाना तथा मूल्यवर्धित मखाना उत्पाद, जिनका मूल्य लगभग 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, और ये 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय ठिकानों पर भेजे गए।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS