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GK24

SSC MTS GK प्रश्न 2026

SSC MTS में General Awareness का स्कोर स्थैतिक GK तय करता है। 2025 सूचना पाठ्यक्रम को 10वीं कक्षा तक रखती है: सामाजिक अध्ययन के अंतर्गत इतिहास, भूगोल, कला और संस्कृति, नागरिक शास्त्र और अर्थशास्त्र, तथा सामान्य विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन। Session-II के 25 में से अधिकांश प्रश्न इन्हीं क्षेत्रों से आते हैं। इतिहास में हड़प्पा स्थल, मौर्य और गुप्त, सल्तनत और मुग़ल शासक और स्वतंत्रता आंदोलन पूछे जाते हैं। भूगोल में नदियाँ, मिट्टी, फसलें, खनिज, राष्ट्रीय उद्यान, राज्य, राजधानियाँ और पड़ोसी देश आते हैं। नागरिक शास्त्र में संविधान के भाग, अनुसूचियाँ और अनुच्छेद, मौलिक अधिकार और कर्तव्य, राष्ट्रपति, संसद, सर्वोच्च न्यायालय और स्थानीय शासन पूछे जाते हैं। अर्थशास्त्र में बुनियादी शब्दावली, RBI, कर और योजनाएँ आती हैं। सामान्य विज्ञान में कक्षा 6 से 10 की भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान, और पर्यावरण अध्ययन में पारितंत्र, प्रदूषण और संरक्षण पूछे जाते हैं। इस पेज पर GK24 के SSC MTS के विषयवार GK नोट्स हैं, जो ठीक इसी स्तर पर छोटे तथ्यों और तालिकाओं के रूप में लिखे गए हैं ताकि एक विषय एक बैठक में पूरा हो और दस मिनट में दोहराया जा सके। एक विषय पढ़ें, फिर इस साइट पर उसके पिछले वर्षों के प्रश्न और क्विज़ हल करके देखें कि क्या याद रहा, और CBE से पहले अंतिम सप्ताह की रिवीज़न के लिए नोट्स सँभालकर रखें।

SSC MTS GK प्रश्न उत्तर सहित

Q101.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CPO · 5 अक्टूबर 2023, शिफ्ट 2आसान

भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार निम्नलिखित में से किस देश के ‘अधिकार पत्र’ (बिल ऑफ राइट्स) से प्रेरित हैं?

  1. A.ऑस्ट्रेलिया
  2. B.जापान
  3. C.सोवियत संघ
  4. D.संयुक्त राज्य अमेरिका
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. संयुक्त राज्य अमेरिका

व्याख्या

सही उत्तर संयुक्त राज्य अमेरिका है। अमेरिका के संविधान में 1791 में जोड़े गए पहले दस संशोधनों को अधिकार पत्र (बिल ऑफ राइट्स) कहा जाता है, जो वाक् और धर्म जैसी स्वतंत्रताओं को सरकार से सुरक्षित रखते हैं। भारत के संविधान निर्माताओं ने इससे ऐसे अधिकारों की लिखित सूची का विचार लिया जिनका राज्य उल्लंघन न कर सके और जिन्हें न्यायालय लागू कराएं। हमारे संविधान का भाग III, अनुच्छेद 12 से 35, इसी का परिणाम है, और इसे अक्सर भारत का मैग्नाकार्टा कहा जाता है।

बाकी देशों से भारत ने दूसरे प्रावधान लिए। ऑस्ट्रेलिया से समवर्ती सूची, व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता, और संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक ली गई। जापान से अनुच्छेद 21 में प्रयुक्त वाक्यांश "विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया" लिया गया। पूर्व सोवियत संघ से मौलिक कर्तव्य और प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय का आदर्श लिया गया। इसलिए भाग III में भी दो स्रोत याद रखें: पूरा अध्याय अमेरिका से प्रेरित, और अनुच्छेद 21 की शब्दावली जापान से।

Q102.सरकारी योजनाएंकठिन

नमस्ते योजना के हस्तक्षेप किस निगम द्वारा कार्यान्वित किए जाते हैं?

  1. A.एनएसएफडीसी
  2. B.एनएसकेएफडीसी
  3. C.एनबीसीएफडीसी
  4. D.एनएमडीएफसी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. एनएसकेएफडीसी

व्याख्या

सही उत्तर एनएसकेएफडीसी यानी राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव ने बताया कि यह योजना इसी निगम द्वारा किए जाने वाले हस्तक्षेपों के माध्यम से स्थायी आजीविका, क्षमता निर्माण, सुरक्षा उपकरणों तक पहुंच और मशीनीकरण को बढ़ावा देती है। निगम के नाम में ही संकेत छिपा है, क्योंकि सफाई कर्मचारी ही इस योजना के केंद्र में हैं। विकल्प क गलत है, क्योंकि वह निगम सामान्य रूप से अनुसूचित जाति के लाभार्थियों के लिए काम करता है और यहां उसका उल्लेख नहीं है। विकल्प ग गलत है, क्योंकि वह पिछड़े वर्गों के लिए कार्यरत है। विकल्प घ गलत है, क्योंकि वह अल्पसंख्यक समुदायों के लिए काम करता है। योजना और उसके कार्यान्वयन निगम का मिलान परीक्षा का सामान्य प्रश्न प्रारूप है।

Q103.सरकारी योजनाएंमध्यम

स्वच्छता उद्यमी योजना के तहत 983 लाभार्थियों को कितनी पूंजीगत सहायता दी गई है?

  1. A.12.40 करोड़ रुपये
  2. B.21.75 करोड़ रुपये
  3. C.34.16 करोड़ रुपये
  4. D.48.90 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 34.16 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 34.16 करोड़ रुपये है। मशीनीकरण के लिए पूंजीगत सब्सिडी संबंधी हस्तक्षेप स्वच्छता उद्यमी योजना के माध्यम से दिया जाता है और मंत्रालय ने बताया कि इसके अंतर्गत 983 लाभार्थियों को इतनी राशि की सहायता प्रदान की गई है। इस सब्सिडी का उद्देश्य स्वच्छता कर्मियों को मशीनें उपलब्ध कराना है, ताकि जोखिम भरा हाथ से किया जाने वाला काम मशीनों से होने वाली सफाई में बदले, जो नमस्ते योजना का केंद्रीय विचार है। शेष तीनों विकल्प इसलिए गलत हैं कि इस हस्तक्षेप के लिए ऐसी कोई राशि दर्ज नहीं है; वे केवल यह परखने के लिए रखे गए हैं कि अभ्यर्थी को सही संख्या याद है या नहीं। राशि और लाभार्थियों की संख्या को जोड़ी बनाकर याद रखना उपयोगी रहता है।

Q104.सरकारी योजनाएंमध्यम

नमस्ते योजना के अंतर्गत कितने सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों का सत्यापन किया जा चुका है?

  1. A.58,412
  2. B.90,186
  3. C.1,24,530
  4. D.2,51,756
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 90,186

व्याख्या

सही उत्तर 90,186 है। मंत्रालय के सचिव ने बताया कि सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों से संबंधित घटक अब सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है तथा इतने कर्मियों का सत्यापन हो चुका है। सत्यापित कर्मियों में 86,468 पुरुष, 3,713 महिलाएं और 5 ट्रांसजेंडर व्यक्ति शामिल हैं, और ये उप-आंकड़े जोड़ने पर सही विकल्प की संख्या ही बनती है, जिससे उत्तर की जांच तुरंत हो जाती है। विकल्प क और ग गलत हैं, क्योंकि इस घटक के लिए ऐसा कोई आंकड़ा जारी नहीं किया गया। विकल्प घ जानबूझकर रखा गया भ्रम है, क्योंकि वह संख्या कचरा बीनने वालों के अलग घटक की है, जिसकी प्रोफाइलिंग 36 नहीं बल्कि 34 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में हुई है। दोनों घटकों को अलग-अलग याद रखना ही सही उत्तर की कुंजी है।

Q105.सरकारी योजनाएंआसान

स्वच्छता कर्मियों से जुड़ी नमस्ते योजना का पूरा नाम क्या है?

  1. A.राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्रवाई योजना
  2. B.राष्ट्रीय उन्नत स्वच्छता एवं प्रौद्योगिकी मिशन
  3. C.राष्ट्रीय नगरीय स्वच्छता एवं प्रशिक्षण उद्यम अभिकरण
  4. D.राष्ट्रीय मशीनीकृत मलजल शोधन प्राधिकरण
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्रवाई योजना

व्याख्या

सही उत्तर राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्रवाई योजना है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय नमस्ते योजना को इसी नाम से परिभाषित करता है और इसका उद्देश्य ऐसा सक्षम इकोसिस्टम बनाना बताता है, जो स्वच्छता अवसंरचना के संचालन तथा रखरखाव में कर्मियों के योगदान को मान्यता दे और उनकी सुरक्षा एवं गरिमा सुनिश्चित करे। विकल्प ख गलत है, क्योंकि यह योजना किसी प्रौद्योगिकी मिशन के रूप में गठित नहीं है और इसके नाम में मिशन शब्द नहीं आता। विकल्प ग गलत है, क्योंकि यह कोई नगरीय प्रशिक्षण अभिकरण नहीं है और न ही केवल शहरी निकायों तक सीमित है। विकल्प घ भी गलत है, क्योंकि नमस्ते कोई मलजल शोधन प्राधिकरण नहीं, बल्कि कर्मियों पर केंद्रित योजना है। कल्याणकारी योजनाओं के पूरे नाम परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।

Q106.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

भारत के संविधान की प्रस्तावना में अब तक कितनी बार संशोधन हुआ है?

  1. A.कभी नहीं
  2. B.एक बार
  3. C.दो बार
  4. D.तीन बार
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. एक बार

व्याख्या

सही उत्तर एक बार है। प्रस्तावना में केवल एक बार, 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 से, संशोधन हुआ है। उस संशोधन ने तीन शब्द जोड़े: भारत के वर्णन में "समाजवादी" और "पंथनिरपेक्ष", तथा "राष्ट्र की एकता और अखंडता" वाक्यांश में "अखंडता"।

"कभी नहीं" गलत है, क्योंकि 1976 का बदलाव दर्ज है; इसी कारण आज उद्धृत की जाने वाली प्रस्तावना 26 नवंबर 1949 को अपनाए गए पाठ से अलग है, जिसमें भारत को केवल "संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य" कहा गया था। "दो बार" और "तीन बार" संशोधनों की संख्या को जोड़े गए शब्दों की संख्या, यानी तीन, से मिला देते हैं। दोनों संख्याओं को अलग रखें: एक संशोधन, तीन शब्द। प्रस्तावना में संशोधन हो सकता है, यह बात सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती मामले (1973) में तय की, जिसमें कहा गया कि यह संविधान का हिस्सा है और इसकी मूल विशेषताएं नष्ट किए बिना इसमें संशोधन हो सकता है।

Q107.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

प्रस्तावना को ‘संविधान का पहचान पत्र’ किसने कहा?

  1. A.एन.ए. पालकीवाला
  2. B.के.एम. मुंशी
  3. C.सर अर्नेस्ट बार्कर
  4. D.डॉ. बी.आर. आंबेडकर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. एन.ए. पालकीवाला

व्याख्या

सही उत्तर एन.ए. पालकीवाला है। भारत के सबसे प्रतिष्ठित विधिवेत्ताओं और संवैधानिक वकीलों में से एक नानी अर्देशिर पालकीवाला ने प्रस्तावना को "संविधान का पहचान पत्र" कहा, क्योंकि यह एक ही वाक्य में बता देती है कि संविधान क्या है, उसका अधिकार कहां से आता है और वह क्या हासिल करना चाहता है।

बाकी नाम दूसरे वर्णनों से जुड़े हैं, और परीक्षक इन्हें इसीलिए रखते हैं क्योंकि ये सही लगते हैं। प्रारूप समिति के सदस्य के.एम. मुंशी ने प्रस्तावना को संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य की "राजनीतिक कुंडली" कहा। ब्रिटिश राजनीतिशास्त्री सर अर्नेस्ट बार्कर ने इसे संविधान का "मूल स्वर" (की-नोट) बताया। डॉ. बी.आर. आंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे, और उनका सबसे प्रसिद्ध वर्णन अनुच्छेद 32 का है, जिसे उन्होंने संविधान का हृदय और आत्मा कहा। इन्हें जोड़ियों में याद करें, क्योंकि प्रश्न अक्सर वाक्यांश देकर व्यक्ति पूछते हैं, या इसका उल्टा।

Q108.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB NTPC · 17 मार्च 2026, शिफ्ट 3मध्यम

प्रस्तावना मुख्य रूप से निम्नलिखित में से किस रूप में काम करती है?

  1. A.संविधान की एक अनुसूची
  2. B.व्याख्या के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत
  3. C.एक वित्तीय दिशानिर्देश
  4. D.कानून का एक प्रवर्तनीय हिस्सा
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. व्याख्या के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत

व्याख्या

सही उत्तर व्याख्या के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत है। प्रस्तावना को न्यायालय में लागू नहीं कराया जा सकता: यह न विधायिका की शक्तियों का स्रोत है और न उन पर रोक। इसका मुख्य कानूनी उपयोग व्याख्या में सहायता के रूप में है। जब संविधान के किसी प्रावधान का अर्थ स्पष्ट न हो, तो न्यायालय संविधान निर्माताओं के उद्देश्यों को समझने के लिए प्रस्तावना की ओर देखते हैं।

बाकी विकल्प वे चीज़ें बताते हैं जो प्रस्तावना नहीं है। यह कोई अनुसूची नहीं है: संविधान की अनुसूचियां पाठ के अंत में दी गई अलग सूचियां हैं, जैसे भाषाओं की सूची। यह कोई वित्तीय दिशानिर्देश नहीं है। और यह कानून का प्रवर्तनीय हिस्सा भी नहीं है, जो सबसे आकर्षक गलत उत्तर है: केशवानंद भारती मामले (1973) में प्रस्तावना को संविधान का हिस्सा माने जाने के बाद भी यह न्यायालय में अप्रवर्तनीय ही रही। संविधान का हिस्सा होना और न्यायालय में लागू कराया जा सकना, दो अलग बातें हैं, और यह प्रश्न ठीक यही अंतर परखता है।

Q109.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

किस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अपना पुराना मत पलटते हुए कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा है?

  1. A.बेरुबारी यूनियन मामला (1960)
  2. B.गोलकनाथ मामला (1967)
  3. C.एलआईसी ऑफ इंडिया मामला (1995)
  4. D.केशवानंद भारती मामला (1973)
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. केशवानंद भारती मामला (1973)

व्याख्या

सही उत्तर केशवानंद भारती मामला (1973) है। 1960 के बेरुबारी यूनियन मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है, हालांकि यह संविधान निर्माताओं के मन को समझने की कुंजी है। केशवानंद भारती मामले में न्यायालय ने यह मत अस्वीकार किया और कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा है और इसमें संशोधन हो सकता है, बशर्ते इसकी मूल विशेषताएं न बदलें।

बेरुबारी यूनियन मामला वही पुराना निर्णय है जिसे पलटा गया, इसलिए यह उत्तर नहीं हो सकता। एलआईसी ऑफ इंडिया मामला 1995 में बाद में आया और उसने केवल दोहराया कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न हिस्सा है; उसने कुछ पलटा नहीं। 1967 का गोलकनाथ मामला मौलिक अधिकारों में संशोधन की संसद की शक्ति से जुड़ा था, प्रस्तावना की स्थिति से नहीं। प्रश्न में "पलटते हुए" शब्द ही संकेत है: यह उस मामले की ओर इशारा करता है जिसने बेरुबारी का निर्णय पलटा, यानी केशवानंद भारती।

Q110.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय का आदर्श किस स्रोत से आया?

  1. A.फ्रांसीसी क्रांति
  2. B.अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणा
  3. C.रूसी क्रांति
  4. D.ब्रिटिश मैग्ना कार्टा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रूसी क्रांति

व्याख्या

सही उत्तर रूसी क्रांति है। प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय का आदर्श 1917 की रूसी क्रांति से प्रेरित है, इसीलिए पुस्तकों में इसका स्रोत अक्सर पूर्व सोवियत संघ बताया जाता है। यह फ्रांस से लिए गए तीन उद्देश्यों के साथ प्रस्तावना में है।

फ्रांसीसी क्रांति बाकी तीन उद्देश्यों, स्वतंत्रता, समता और बंधुता, का स्रोत है, इसलिए यह सबसे आकर्षक गलत उत्तर है। अमेरिका से जुड़ाव प्रस्तावना रखने के विचार का है, जो अमेरिका के संविधान से लिया गया, न्याय के आदर्श का नहीं। मैग्ना कार्टा अंग्रेज़ी संवैधानिक इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, लेकिन प्रस्तावना की किसी बात का स्रोत नहीं है। बंटवारा याद रखने का आसान तरीका: चार उद्देश्यों में से न्याय पूरब की ओर, यानी रूस की ओर, इशारा करता है, जबकि स्वतंत्रता, समता और बंधुता पश्चिम की ओर, यानी फ्रांस की ओर।

Q111.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CPO · 11 नवंबर 2022, शिफ्ट 3आसान

स्वतंत्रता, समता और बंधुता के सिद्धांत किस देश के संविधान से लिए गए हैं?

  1. A.यूनाइटेड किंगडम
  2. B.फ्रांस
  3. C.कनाडा
  4. D.आयरलैंड
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. फ्रांस

व्याख्या

सही उत्तर फ्रांस है। प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्श फ्रांस से लिए गए, जहां ये फ्रांसीसी क्रांति के मूल नारे थे। गणराज्य का विचार भी फ्रांस से ही आया है।

बाकी विकल्पों से भारत ने दूसरे प्रावधान लिए। यूनाइटेड किंगडम संसदीय शासन, विधि के शासन, मंत्रिमंडल प्रणाली और एकल नागरिकता का स्रोत है। कनाडा से सशक्त केंद्र वाले संघ और केंद्र के पास अवशिष्ट शक्तियों का विचार लिया गया। आयरलैंड से राज्य के नीति निदेशक तत्व और राष्ट्रपति के चुनाव की पद्धति ली गई। प्रस्तावना के चौथे उद्देश्य, न्याय, का स्रोत अलग है: रूसी क्रांति। इस तरह चार उद्देश्यों में से तीन (स्वतंत्रता, समता और बंधुता) फ्रांस से और एक (न्याय) पूर्व सोवियत संघ से जुड़ता है, और परीक्षक यह बंटवारा परखना पसंद करते हैं।

Q112.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 9 मार्च 2023, शिफ्ट 3आसान

भारतीय संविधान की प्रस्तावना का विचार ______ के संविधान से लिया गया है।

  1. A.सोवियत संघ (वर्तमान रूस)
  2. B.कनाडा
  3. C.ब्रिटेन
  4. D.संयुक्त राज्य अमेरिका
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. संयुक्त राज्य अमेरिका

व्याख्या

सही उत्तर संयुक्त राज्य अमेरिका है। संविधान की शुरुआत प्रस्तावना से करने का विचार अमेरिका के संविधान से लिया गया, जिसका पाठ खुद "We the People" शब्दों से शुरू होता है। लेकिन भारत की प्रस्तावना की विषय-वस्तु जवाहरलाल नेहरू के उद्देश्य प्रस्ताव से आई, जो 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में पेश हुआ और 22 जनवरी 1947 को स्वीकार हुआ।

बाकी देश प्रस्तावना या संविधान के दूसरे हिस्सों के स्रोत हैं। सोवियत संघ सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय के आदर्श का स्रोत है। ब्रिटेन से संसदीय शासन, विधि का शासन और एकल नागरिकता ली गई। कनाडा से सशक्त केंद्र वाले संघ का मॉडल लिया गया। दो मिलते-जुलते प्रश्नों को अलग रखें: प्रस्तावना रखने का विचार अमेरिका से आया, जबकि इसके भीतर लिखे स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्श फ्रांसीसी क्रांति से आए।

Q113.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 27 जुलाई 2023, शिफ्ट 1मध्यम

भारत के संविधान की प्रस्तावना में निम्नलिखित में से किसका उल्लेख है?

  1. A.विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता
  2. B.मानवीय गरिमा सुनिश्चित करने वाली बंधुता
  3. C.प्रतिष्ठा और रोज़गार की समता
  4. D.सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक न्याय
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता

व्याख्या

सही उत्तर विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता है। प्रस्तावना स्वतंत्रता के लिए ठीक यही शब्द इस्तेमाल करती है।

बाकी हर विकल्प मूल पाठ का एक शब्द बदल देता है, और यह प्रश्न इसी तरह लोगों को फंसाता है। प्रस्तावना "व्यक्ति की गरिमा" और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता की बात करती है, "मानवीय गरिमा" की नहीं। वह "प्रतिष्ठा और अवसर की समता" का वादा करती है, प्रतिष्ठा और रोज़गार की नहीं। और प्रस्तावना में न्याय "सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक" है; "प्रशासनिक" शब्द उसमें है ही नहीं। जब कोई विकल्प लगभग सही लगे, तो उसे पाठ से शब्द-दर-शब्द मिलाएं: न्याय (सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक), स्वतंत्रता (विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, उपासना), समता (प्रतिष्ठा, अवसर) और बंधुता (व्यक्ति की गरिमा, राष्ट्र की एकता और अखंडता)।

Q114.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 15 जून 2023, शिफ्ट 3आसान

भारतीय संविधान के 42वें संशोधन द्वारा प्रस्तावना में निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द जोड़ा गया?

  1. A.समाजवादी
  2. B.लोकतांत्रिक
  3. C.गणराज्य
  4. D.संप्रभु
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. समाजवादी

व्याख्या

सही उत्तर समाजवादी है। 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने प्रस्तावना में तीन शब्द जोड़े: भारत के वर्णन में "समाजवादी" और "पंथनिरपेक्ष", तथा "राष्ट्र की एकता और अखंडता" वाक्यांश में "अखंडता"। प्रस्तावना में अब तक किया गया यह एकमात्र संशोधन है।

लोकतांत्रिक, गणराज्य और संप्रभु शब्द शुरुआत से ही प्रस्तावना में थे: 26 नवंबर 1949 को अपनाई गई प्रस्तावना में भारत को "संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य" कहा गया था। इसीलिए ये यहां गलत हैं। इस संशोधन पर प्रश्न कई रूपों में आते हैं: कौन-सा शब्द जोड़ा गया, कौन-सा नहीं जोड़ा गया, या कितने शब्द जोड़े गए। तीनों को साथ याद रखें: समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता, 1976 में जोड़े गए। इससे जुड़ा एक और तथ्य केशवानंद भारती मामला (1973) है, जिसने तीन साल पहले कहा था कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा है और मूल विशेषताएं बदले बिना इसमें संशोधन हो सकता है।

Q115.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 10 जुलाई 2024, शिफ्ट 3मध्यम

प्रस्तावना के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द-क्रम सही है?

  1. A.संप्रभु, पंथनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक, गणराज्य
  2. B.संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य
  3. C.पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, पंथनिरपेक्ष, समाजवादी, संप्रभु
  4. D.समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य, संप्रभु
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य

व्याख्या

सही उत्तर संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य है। प्रस्तावना भारत का वर्णन इसी क्रम में करती है: "संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य"। समाजवादी और पंथनिरपेक्ष शब्द 1976 में 42वें संशोधन से संप्रभु और लोकतांत्रिक के बीच जोड़े गए; उससे पहले यह वाक्यांश "संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य" था।

पहला विकल्प समाजवादी और पंथनिरपेक्ष की जगह आपस में बदल देता है, जो सबसे आम गलती है, क्योंकि दोनों शब्द एक साथ जोड़े गए थे। तीसरा विकल्प "पंथनिरपेक्ष" को दोहराता है और गलत शब्द से शुरू होता है, और चौथा "संप्रभु" को आगे से हटाकर अंत में रख देता है। क्रम याद रखने का आसान तरीका: 1976 में जोड़े गए दोनों शब्द बीच में साथ-साथ हैं, पहले समाजवादी फिर पंथनिरपेक्ष, मूल पहले शब्द (संप्रभु) और मूल अंतिम दो शब्दों (लोकतांत्रिक गणराज्य) के बीच।

Q116.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB NTPC · 14 जून 2022, शिफ्ट 2आसान

भारत के संविधान की प्रस्तावना के शब्दों से रिक्त स्थान भरें: हम, ______, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को....

  1. A.सर्वोच्च न्यायालय
  2. B.भारतीय संसद
  3. C.केंद्र सरकार
  4. D.भारत के लोग
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. भारत के लोग

व्याख्या

सही उत्तर भारत के लोग है। प्रस्तावना "हम, भारत के लोग" शब्दों से शुरू होती है, जो बताते हैं कि संविधान अपना अधिकार जनता से प्राप्त करता है। संविधान किसी सरकार, न्यायालय या विधायिका ने नहीं दिया; जनता ने अपनी संविधान सभा के माध्यम से 26 नवंबर 1949 को इसे अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया।

सर्वोच्च न्यायालय, भारतीय संसद और केंद्र सरकार, तीनों संविधान द्वारा बनाए गए हैं, इसलिए इनमें से कोई भी उसके अधिकार का स्रोत नहीं हो सकता। ये केवल वही शक्तियां इस्तेमाल करते हैं जो संविधान इन्हें देता है। प्रस्तावना हमें जो चार बातें बताती है, उनमें यह पहली है; बाकी तीन हैं भारतीय राज्य की प्रकृति (संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य), उसके उद्देश्य (न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता) और अपनाने की तिथि। ऐसा रिक्त स्थान वाला प्रश्न सटीक आरंभिक शब्दों को परखता है, इसलिए पाठ को जैसा लिखा है वैसा याद करें।

Q117.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

कैबिनेट मिशन योजना द्वारा तय संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या कितनी थी?

  1. A.299
  2. B.389
  3. C.296
  4. D.395
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 389

व्याख्या

सही उत्तर 389 है। 1946 की कैबिनेट मिशन योजना ने संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 तय की: ब्रिटिश भारत के लिए 296 और देसी रियासतों के लिए 93। ब्रिटिश भारत की 296 सीटों में से 292 गवर्नर वाले ग्यारह प्रांतों के लिए और 4 चीफ कमिश्नर वाले प्रांतों के लिए थीं।

बाकी हर विकल्प इसी अध्याय की कोई वास्तविक संख्या है, जो जल्दबाज़ी में पढ़ने वाले को फंसाने के लिए रखी गई है। 299 विभाजन के बाद सभा की सदस्य संख्या है, जब पाकिस्तान में गए क्षेत्रों के सदस्य अलग हो गए। 296 केवल ब्रिटिश भारत का हिस्सा है, जिसमें रियासतें शामिल नहीं हैं। 395 सदस्यों की संख्या है ही नहीं: यह मूल रूप से अपनाए गए संविधान के अनुच्छेदों की संख्या है। इस विषय के प्रश्नों में ये संख्याएं अक्सर साथ-साथ रखी जाती हैं, इसलिए हर संख्या को उसके अर्थ से जोड़कर याद करें: शुरुआत में 389 सदस्य, विभाजन के बाद 299, ब्रिटिश भारत की 296 सीटें और मूल संविधान के 395 अनुच्छेद।

Q118.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

1934 में भारत के लिए संविधान सभा का विचार सबसे पहले किसने रखा?

  1. A.एम.एन. रॉय
  2. B.जवाहरलाल नेहरू
  3. C.महात्मा गांधी
  4. D.सुभाष चंद्र बोस
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. एम.एन. रॉय

व्याख्या

सही उत्तर एम.एन. रॉय है। भारत में साम्यवादी आंदोलन के अग्रणी नेता मानवेंद्र नाथ रॉय ने 1934 में सबसे पहले संविधान सभा का विचार रखा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस विचार को अपनाकर 1935 में इसे अपनी आधिकारिक मांग बनाया, और ब्रिटिश सरकार ने 1940 के अगस्त प्रस्ताव में इसे सिद्धांत रूप में स्वीकार किया। आखिरकार 1946 में कैबिनेट मिशन योजना के तहत सभा का गठन हुआ।

जवाहरलाल नेहरू यहां सबसे आकर्षक गलत उत्तर हैं, क्योंकि वे इस मांग से गहराई से जुड़े रहे और बाद में 13 दिसंबर 1946 को सभा में उद्देश्य प्रस्ताव पेश किया; लेकिन यह विचार सबसे पहले रॉय ने रखा था। महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस को इसका पहला प्रस्तावक नहीं माना जाता। जब प्रश्न में "सबसे पहले" या "मूल रूप से" जैसे शब्द हों, तो वह अक्सर यही अंतर परखता है: विचार किसने दिया और उसे आगे किसने बढ़ाया।

Q119.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 25 मार्च 2018, शिफ्ट 2मध्यम

भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों के निलंबन की अवधारणा किस देश के संविधान से ली गई है?

  1. A.फ्रांस
  2. B.जर्मनी
  3. C.रूस
  4. D.ऑस्ट्रेलिया
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. जर्मनी

व्याख्या

सही उत्तर जर्मनी है। आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों को निलंबित करने का प्रावधान जर्मनी के वाइमर संविधान से लिया गया है। भारतीय संविधान का यही प्रावधान आमतौर पर इस स्रोत से जोड़ा जाता है।

बाकी विकल्प दूसरे प्रावधानों के स्रोत हैं। फ्रांस से गणतंत्र का विचार और प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के आदर्श लिए गए। रूस, यानी पूर्व सोवियत संघ, से मौलिक कर्तव्य और सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक न्याय का आदर्श लिया गया। ऑस्ट्रेलिया से समवर्ती सूची, व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता और संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक ली गई। आपातकालीन प्रावधान कुल मिलाकर मुख्य रूप से भारत शासन अधिनियम, 1935 से आए हैं, इसलिए सामान्य रूप से "आपातकालीन प्रावधानों" का प्रश्न उस अधिनियम की ओर इशारा करता है, जबकि "आपातकाल में मौलिक अधिकारों के निलंबन" का प्रश्न जर्मनी की ओर। उत्तर चुनने से पहले प्रश्न के शब्द ध्यान से पढ़ें।

Q120.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 24 जुलाई 2023, शिफ्ट 3आसान

भारतीय संविधान के राज्य के नीति निदेशक तत्व किस देश से लिए गए हैं?

  1. A.सोवियत संघ
  2. B.अमेरिका
  3. C.आयरलैंड
  4. D.चीन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. आयरलैंड

व्याख्या

सही उत्तर आयरलैंड है। संविधान के भाग 4 में दिए गए राज्य के नीति निदेशक तत्व आयरलैंड के संविधान के आधार पर बनाए गए। भारत ने आयरलैंड से दो और प्रावधान लिए: राज्यसभा में सदस्यों का मनोनयन और राष्ट्रपति के चुनाव की पद्धति।

बाकी देशों से अलग प्रावधान लिए गए हैं। सोवियत संघ से मौलिक कर्तव्य और प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का आदर्श लिया गया। अमेरिका से मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और राष्ट्रपति पर महाभियोग लिए गए। चीन को भारतीय संविधान के स्रोतों में गिना ही नहीं जाता। सबसे अधिक भ्रम अधिकारों और निदेशक तत्वों को लेकर होता है: मौलिक अधिकार अमेरिका से आए हैं, जबकि नीति निदेशक तत्व आयरलैंड से। याद रखने का आसान तरीका: "अधिकार अमेरिका से, निदेशक तत्व आयरलैंड से"।