विशेष ग्राम सभाओं में शुरू हो रहे जन योजना अभियान का नाम क्या है?
- A.सबका साथ, सबका विकास
- B.सबकी योजना, सबका विकास
- C.मेरा गांव, मेरी योजना
- D.ग्राम स्वराज, ग्राम विकास
सही उत्तर
B. सबकी योजना, सबका विकास
व्याख्या
सही उत्तर सबकी योजना, सबका विकास है। दो अक्टूबर को विशेष ग्राम सभाएं जुटने पर इसी नाम से इस वर्ष का जन योजना अभियान शुरू किया जाता है और इसके तहत हर ग्राम पंचायत सहभागी तथा साक्ष्य आधारित नियोजन से अगले वित्त वर्ष की अपनी विकास योजना बनाती है। विकल्प A गलत है, यह सरकार के एक जाने-पहचाने नारे से मिलता-जुलता है, जिसमें सबके साथ विकास की बात है, इसी कारण यह भ्रमित करता है, मगर इस अभियान का नाम यह नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि अभियान को ऐसा कोई नाम नहीं दिया गया है, हालांकि यह गांव के नियोजन से जुड़े किसी कार्यक्रम के नाम जैसा लगता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि ग्राम स्वराज पंचायतों की क्षमता बढ़ाने वाले एक अलग कार्यक्रम, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान, के नाम का हिस्सा है, जो सभाओं में चर्चा की जाने वाली योजनाओं में है, स्वयं अभियान नहीं।
पूरा लेख पढ़ें: विशेष ग्राम सभाएं जन योजना अभियान 2026-27 शुरू करेंगी
अभ्यास प्रश्न
इस अभियान के तहत ग्राम पंचायतें किस वित्त वर्ष के लिए अपनी विकास योजनाएं तैयार करेंगी?
- A.2025-26
- B.2026-27
- C.2027-28
- D.2028-29
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2027-28
व्याख्या
सही उत्तर 2027-28 है। अभियान का नाम चालू दौर पर रखा गया है, लेकिन उसमें ग्राम पंचायत जो योजना बनाती है वह आगे आने वाले वित्त वर्ष की होती है। गांव का नियोजन इसी तरह काम करता है, सभा उस वर्ष का पैसा तय होने से काफी पहले प्राथमिकताएं तय कर देती है। विकल्प B इसी कारण गलत है और यही सबसे आम जाल है, क्योंकि अभियान का नाम चालू वर्ष पर है और जल्दबाजी करने वाला अभ्यर्थी दोनों को एक मान लेता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि वह वर्ष अभियान के पिछले दौर का है और बीत चुका है। विकल्प D गलत है, क्योंकि इस कवायद में नियोजन दो वर्ष आगे नहीं जाता। जो योजना बनती है उसे ग्राम पंचायत विकास योजना कहते हैं और ढाई लाख से अधिक पंचायतें अपनी योजना ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर अपलोड करती हैं।
ग्राम सभाओं के सामने रखी जाने वाली वीबी-जी राम जी योजना में कितने दिन के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी है?
- A.100 दिन
- B.125 दिन
- C.150 दिन
- D.180 दिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 125 दिन
व्याख्या
सही उत्तर 125 दिन है। ग्रामीण विकास विभाग की ओर से विशेष ग्राम सभाओं के सामने रखी जाने वाली ग्रामीण रोजगार और आजीविका की विकसित भारत गारंटी में इतने दिन के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी है और इसके साथ स्थानीय स्तर पर तय कामों तथा आजीविका के लिए विकसित ग्राम पंचायत योजना की भी चर्चा होती है। विकल्प A गलत है और यही सबसे मजबूत भ्रमकारी विकल्प है, क्योंकि सौ दिन का आंकड़ा ग्रामीण मजदूरी रोजगार के साथ अभ्यर्थियों के मन में पहले की पढ़ाई से जुड़ा रहता है। विकल्प C और D में बड़े आंकड़े हैं, जो किसी गारंटी में नहीं आते, ये केवल इसलिए संभव लगते हैं कि राज्य सूखा प्रभावित या अनुसूचित क्षेत्रों में कभी अतिरिक्त दिन जोड़ते हैं, जो प्रशासनिक बढ़ोतरी है, यहां पूछी जा रही वैधानिक गारंटी नहीं। परीक्षा के लिए एक सौ पच्चीस दिन का वैधानिक आंकड़ा पक्का कर लें।
परनूर टोल प्लाजा किस राष्ट्रीय राजमार्ग खंड पर स्थित है?
- A.एनएच-48 का सूरत-भरूच खंड
- B.एनएच-179बी का तांबरम-तिंडीवनम खंड
- C.एनएच-44 का पानीपत-जालंधर खंड
- D.दिल्ली-एनसीआर की अर्बन एक्सटेंशन रोड-II
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एनएच-179बी का तांबरम-तिंडीवनम खंड
व्याख्या
सही उत्तर एनएच-179बी का तांबरम-तिंडीवनम खंड है। यह खंड तमिलनाडु में पड़ता है और एनएचएआई ने यहीं से राज्य में फ्री फ्लो टोल वसूली की शुरुआत की है। परनूर टोल प्लाजा इसी खंड पर खड़ा है और यही वह हिस्सा है, जहां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने तमिलनाडु को उसकी पहली बैरियर-मुक्त टोल व्यवस्था दी है। विकल्प A गलत है, क्योंकि एनएच-48 के सूरत-भरूच खंड पर गुजरात का चोर्यासी प्लाजा पड़ता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के पानीपत-जालंधर खंड पर हरियाणा का घरौंडा प्लाजा है। विकल्प D गलत है, क्योंकि दिल्ली-एनसीआर की अर्बन एक्सटेंशन रोड-II पर मुंडका-बक्करवाला प्लाजा है। ये तीनों असली फ्री फ्लो स्थल हैं, इसी कारण ये अच्छे भ्रमकारी विकल्प बनते हैं, लेकिन प्रश्न विशेष रूप से परनूर के बारे में है और वह प्लाजा तमिलनाडु में एनएच-179बी के तांबरम-तिंडीवनम खंड का हिस्सा है।
मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल प्रणाली गुजरते वाहन की पहचान मुख्य रूप से किस तकनीक से करती है?
- A.ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन
- B.हर वाहन की उपग्रह आधारित जीपीएस निगरानी
- C.चेसिस नंबर का रेडियो प्रसारण
- D.टोल कर्मचारियों द्वारा नंबर हाथ से दर्ज करना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन
व्याख्या
सही उत्तर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन है, जिसे संक्षेप में एएनपीआर कहा जाता है। प्लाजा पर लगे कैमरे हर गुजरते वाहन की नंबर प्लेट पढ़ लेते हैं और फिर फास्टैग आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन उस वाहन से जुड़े खाते से शुल्क काट लेता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि परनूर में लागू फ्री फ्लो व्यवस्था नंबर प्लेट पढ़ने और फास्टैग पर टिकी है, अलग-अलग वाहनों की उपग्रह निगरानी पर नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि इस व्यवस्था में चेसिस नंबर का कोई प्रसारण नहीं होता, चेसिस नंबर निर्माण से जुड़ी पहचान है और टोल वसूली में उसकी कोई भूमिका नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि बदलाव का मकसद इसका उलट है, फ्री फ्लो प्रणाली वसूली में मानवीय हस्तक्षेप घटाने के लिए है, इसलिए कर्मचारी गुजरते वाहनों के नंबर टाइप नहीं करते। एएनपीआर और फास्टैग मिलकर बिना रुके शुल्क लेना संभव बनाते हैं।
तमिलनाडु की पहली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोल प्रणाली किस टोल प्लाजा पर शुरू की गई है?
- A.चोर्यासी टोल प्लाजा
- B.घरौंडा टोल प्लाजा
- C.परनूर टोल प्लाजा
- D.मनोहरपुरा टोल प्लाजा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. परनूर टोल प्लाजा
व्याख्या
सही उत्तर परनूर टोल प्लाजा है। यह एनएच-179बी के तांबरम-तिंडीवनम खंड पर स्थित है और तमिलनाडु का वह पहला स्थल बन गया है, जहां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण बैरियर के बिना टोल वसूलता है, यानी वाहन चलते रहते हैं और कैमरे तथा फास्टैग मिलकर शुल्क निपटा देते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि चोर्यासी प्लाजा एनएच-48 के सूरत-भरूच खंड पर गुजरात में पड़ता है, तमिलनाडु में नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि घरौंडा प्लाजा राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के पानीपत-जालंधर खंड पर हरियाणा में है। विकल्प D गलत है, क्योंकि मनोहरपुरा एनएच-48 के दिल्ली-जयपुर खंड पर राजस्थान के तीन प्लाजा में से एक है, बाकी दो शाहजहांपुर और दौलतपुरा हैं। ये तीनों पहले ही फ्री फ्लो प्रणाली में बदले गए थे, लेकिन इनमें कोई तमिलनाडु में नहीं है, इसलिए यहां पूछे गए प्रश्न का उत्तर केवल परनूर ही है।