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GK24
रक्षामध्यम

उन्नत स्लिपवे-4 से हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड अब अधिकतम किस आकार के पोत बना और लॉन्च कर सकता है?

  1. A.25,000 डीडब्ल्यूटी तक
  2. B.35,000 डीडब्ल्यूटी तक
  3. C.45,000 डीडब्ल्यूटी तक
  4. D.60,000 डीडब्ल्यूटी तक

सही उत्तर

C. 45,000 डीडब्ल्यूटी तक

व्याख्या

सही उत्तर 45,000 डीडब्ल्यूटी तक है। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के स्लिपवे-4 को लंबा और मजबूत किया गया, जिससे शिपयार्ड बड़े पोतों का निर्माण कर सके। रक्षा मंत्री ने उसी दिन इस उन्नत स्लिपवे का उद्घाटन किया, जिस दिन उन्होंने सूर्य को लॉन्च किया और पाँचवें सहायक पोत की कील रखी। इसके साथ ही उन्होंने स्लिपवे-3 और 4 के बीच लगी 300 टन की गोलियथ क्रेन का उद्घाटन किया, जिसे मेक इन इंडिया के अंतर्गत एल एंड टी जियोस्ट्रक्चर ने कोनक्रेंस के साथ बनाया है और जिसमें पीएलसी नियंत्रण, वेरिएबल फ्रीक्वेंसी ड्राइव, टेंडम लिफ्टिंग तथा दूरस्थ जाँच की सुविधा है। विकल्प A और B गलत हैं क्योंकि वे नई सीमा को कम दिखाते हैं और इतनी सीमा वाला शिपयार्ड बड़े कार्यक्रम नहीं ले सकता। विकल्प D गलत है क्योंकि वह क्षमता को बढ़ा-चढ़ा कर बताता है। स्लिपवे और क्रेन के दोनों आँकड़े साथ याद रखें।

पूरा लेख पढ़ें: पहला बेड़ा सहायक पोत सूर्य विशाखापत्तनम में लॉन्च हुआ

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Q1.रक्षाआसान

अक्टूबर 2026 में लॉन्च किए गए भारत के पहले स्वदेशी बेड़ा सहायक पोत का नाम क्या है?

  1. A.जल उषा
  2. B.सूर्य
  3. C.वरुण
  4. D.समुद्र
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सूर्य

व्याख्या

सही उत्तर सूर्य है। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा स्वदेश में डिज़ाइन और निर्मित बेड़ा सहायक पोतों में पहले पोत का नाम सूर्य रखा गया और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अक्टूबर 2026 को विशाखापत्तनम में इसे लॉन्च किया। लॉन्च की परंपरागत रस्म नेवी वाइव्स वेलनेस एसोसिएशन की अध्यक्ष लैला स्वामीनाथन ने निभाई और पोत बंगाल की खाड़ी के जल में उतरा। विकल्प A गलत है, पर भ्रमित करने वाला है: जल उषा स्वतंत्र भारत में बना पहला पोत था, जो 1948 में विशाखापत्तनम में लॉन्च हुआ था और रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में उसका स्मरण किया, किंतु वह यह नया सहायक पोत नहीं है। विकल्प C और D गलत हैं क्योंकि इन नामों का कोई पोत इस कार्यक्रम से जुड़ा नहीं है; ये केवल नौसेना जैसे लगने वाले नाम हैं। परीक्षार्थी सूर्य को पहले सहायक पोत से और जल उषा को 1948 से अलग-अलग जोड़कर याद रखें।

Q2.रक्षाआसान

जिस शिपयार्ड में पहला बेड़ा सहायक पोत लॉन्च हुआ, वह किस शहर में स्थित है?

  1. A.कोच्चि
  2. B.मुंबई
  3. C.विशाखापत्तनम
  4. D.कोलकाता
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. विशाखापत्तनम

व्याख्या

सही उत्तर विशाखापत्तनम है। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में है और वहीं सूर्य को बंगाल की खाड़ी में उतारा गया, पाँचवें सहायक पोत की कील रखी गई तथा उन्नत स्लिपवे-4 और 300 टन की गोलियथ क्रेन का उद्घाटन हुआ। रक्षा मंत्री ने कहा कि पूर्वी नौसेना कमान, नौसेना डॉकयार्ड, शिपयार्ड और बड़े बंदरगाह वाले इस शहर को बड़े समुद्री औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, और उन्होंने स्मरण कराया कि स्वतंत्र भारत का पहला पोत जल उषा 1948 में यहीं लॉन्च हुआ था। विकल्प A गलत है क्योंकि कोच्चि में दूसरा सार्वजनिक शिपयार्ड है। विकल्प B गलत है क्योंकि मुंबई का नौसैनिक जहाज निर्माण अलग शिपयार्ड करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि कोलकाता का रक्षा जहाज निर्माण किसी अन्य कंपनी के पास है। यह भी याद रखें कि शिपयार्ड को 2025 में मिनीरत्न श्रेणी-एक का दर्जा मिला।

Q3.रक्षामध्यम

भारतीय नौसेना में ब्रह्मोस मुख्य रूप से किस प्रकार की हथियार प्रणाली है?

  1. A.सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली
  2. B.सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली
  3. C.पनडुब्बी रोधी रॉकेट प्रणाली
  4. D.हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली

व्याख्या

सही उत्तर सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है। नौसेना के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर लगी ब्रह्मोस प्रणाली समुद्री हमले के लिए उसकी प्रमुख सतह से सतह मिसाइल प्रणाली है। यह सुपरसोनिक गति से उड़ती है, विस्तारित रेंज में सटीक निशाना लगाती है और ज़मीन तथा समुद्र दोनों के लक्ष्यों को भेद सकती है। विकल्प A गलत है क्योंकि सतह से हवा में मार करने वाली प्रणाली विमानों और आती हुई मिसाइलों को गिराने के लिए होती है, जो युद्धपोत के अन्य हथियारों का काम है। विकल्प C गलत है क्योंकि पनडुब्बी रोधी रॉकेट और टॉरपीडो पानी के भीतर के लक्ष्यों के लिए अलग वर्ग के हथियार हैं और ब्रह्मोस की यह भूमिका नहीं बताई गई। विकल्प D गलत है क्योंकि हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल एक विमान से दूसरे विमान पर छोड़ी जाती है, जिसका पोत पर लगे लॉन्चर से कोई संबंध नहीं। 661.50 करोड़ रुपये में खरीदे गए उपकरण ठीक वही हैं जो युद्धपोत को यह मिसाइल चलाने योग्य बनाते हैं।

Q4.रक्षामध्यम

रक्षा मंत्रालय ने ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम की खरीद किस श्रेणी के अंतर्गत की?

  1. A.बाय (ग्लोबल)
  2. B.बाय एंड मेक (इंडियन)
  3. C.बाय (इंडियन-आईडीडीएम)
  4. D.मेक-दो
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. बाय (इंडियन-आईडीडीएम)

व्याख्या

सही उत्तर बाय (इंडियन-आईडीडीएम) है। ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर का आदेश ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड को इसी श्रेणी में दिया गया, जो स्वदेश में डिज़ाइन, विकसित और निर्मित उपकरणों के लिए रखी गई है। अनुबंध में कम से कम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री अनिवार्य है और इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों सहित भारतीय उद्योग इस परियोजना से जुड़ते हैं, जिससे तीन वर्ष की अवधि में रोजगार बनता है। विकल्प A गलत है क्योंकि वैश्विक खरीद में विदेशी विक्रेता भी शामिल होते हैं, जो इस आदेश के उद्देश्य के विपरीत है। विकल्प B गलत है क्योंकि उस रास्ते में पहले कुछ उपकरण खरीदे जाते हैं और बाकी लाइसेंस पर बनाए जाते हैं, जो यहाँ नहीं हुआ। विकल्प D गलत है क्योंकि वह उद्योग द्वारा वित्त पोषित प्रारूप विकास का मार्ग है, कोई खरीद आदेश नहीं। श्रेणी और स्वदेशी प्रतिशत को साथ याद रखें।

Q5.रक्षाआसान

भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर का अनुबंध कितने मूल्य का है?

  1. A.451.20 करोड़ रुपये
  2. B.661.50 करोड़ रुपये
  3. C.1,061.50 करोड़ रुपये
  4. D.266.15 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 661.50 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 661.50 करोड़ रुपये है। रक्षा मंत्रालय ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ यह अनुबंध किया और भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम तथा लॉन्चर की खरीद का मूल्य इतना ही तय हुआ। हस्ताक्षर के समय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह उपस्थित रहे और खरीद बाय (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी में हुई, जिसमें कम से कम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री अनिवार्य है। विकल्प A गलत है क्योंकि इस आदेश से इतनी राशि जुड़ी हुई नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि यह राशि को एक हजार करोड़ से ऊपर बढ़ा देता है, जो इस अनुबंध का मूल्य नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि यह असली अंकों को उलट-पलट कर रख देता है और अनुबंध को बहुत कम दिखाता है। परीक्षा में अक्सर पूरे करोड़ का गोल आँकड़ा भी विकल्प में रखा जाता है, इसलिए पचास लाख सहित सही मूल्य याद रखना चाहिए।