तटरक्षक कार्य के संदर्भ में एम-एसएआर का पूरा रूप क्या है?
- A.समुद्री सुरक्षा एवं विनियमन
- B.समुद्री निगरानी एवं टुकड़ी-जाँच
- C.समुद्री खोज एवं बचाव
- D.समुद्री रिसाव आकलन प्रतिक्रिया
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है समुद्री खोज एवं बचाव। 14वीं उच्चस्तरीय बैठक में गहरे सहयोग के लिए गिनाए गए क्षेत्रों में यह पहला था, और इसके साथ समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया, समुद्री विधि प्रवर्तन, क्षमता निर्माण तथा परिचालन समन्वय भी शामिल थे। खोज एवं बचाव का काम समुद्र में संकट में फँसे लोगों और जहाजों को ढूँढकर बचाना है, इसीलिए दोनों पक्षों ने वास्तविक समय में सूचना साझा करने पर भी सहमति दी। विकल्प A गलत है, क्योंकि समुद्री सुरक्षा का विनियमन ध्वज राज्य और पत्तन राज्य का कार्य है, इस संक्षेपाक्षर का अर्थ नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि निगरानी तटरक्षक कार्य का हिस्सा होने पर भी एम-एसएआर का विस्तार नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि रिसाव से जुड़ा काम अलग मद, समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया यानी एमपीआर के अंतर्गत आता है।
पूरा लेख पढ़ें: भारत-कोरिया तटरक्षक बलों की 14वीं उच्चस्तरीय बैठक इंचियोन में
अभ्यास प्रश्न
भारतीय तटरक्षक बल और कोरिया तटरक्षक बल की 14वीं उच्चस्तरीय बैठक किस शहर में हुई?
- A.बुसान
- B.इंचियोन
- C.सियोल
- D.जेजू
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भारतीय तटरक्षक बल और कोरिया तटरक्षक बल के बीच 14वीं उच्चस्तरीय बैठक इसी कोरियाई बंदरगाह शहर में 14 अक्तूबर 2026 को हुई, जब भारतीय शिष्टमंडल 13 से 16 अक्तूबर 2026 तक कोरिया गणराज्य की आधिकारिक यात्रा पर था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कोरिया तटरक्षक बल के साथ 14वीं उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय तटरक्षक बल के शिष्टमंडल का नेतृत्व किसने किया?
- A.वरिष्ठ अधीक्षक जनरल इम म्योंग गिल
- B.महानिरीक्षक टी. शशि कुमार
- C.भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक
- D.नौसेना प्रमुख
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सही उत्तर है महानिरीक्षक टी. शशि कुमार, जिन्होंने कोरिया गणराज्य की आधिकारिक यात्रा पर गए भारतीय तटरक्षक शिष्टमंडल का नेतृत्व किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →15 अक्तूबर 2026 को स्वीकृत जीसैट-7सी किस सेना के लिए समर्पित संचार उपग्रह है?
- A.थल सेना
- B.नौसेना
- C.वायुसेना
- D.तटरक्षक बल
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बेंगलुरु की न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड के साथ हुए 2,563 करोड़ रुपये के अनुबंध से वायुसेना को अपना संचार उपग्रह मिलेगा, जो भारत में ही डिजाइन, विकसित और निर्मित है और जो उसके विमानों तथा ठिकानों को सुरक्षित एवं निर्बाध संचार कड़ी देगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वरुणास्त्र भारी वजन वाले टॉरपीडो को किस प्रयोगशाला ने विकसित किया है?
- A.नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला
- B.वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान
- C.रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला
- D.टर्मिनल बैलिस्टिक अनुसंधान प्रयोगशाला
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वरुणास्त्र इसी प्रयोगशाला में विकसित पोत से छोड़ा जाने वाला पनडुब्बी रोधी स्वदेशी टॉरपीडो है, जिसकी खरीद के लिए हैदराबाद की भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के साथ 1,543 करोड़ रुपये का अनुबंध हुआ है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत डायनेमिक्स लिमिटेड से 1,543 करोड़ रुपये में खरीदा जा रहा वरुणास्त्र किस प्रकार का हथियार है?
- A.सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल
- B.पोत से छोड़ा जाने वाला पनडुब्बी रोधी भारी वजन वाला टॉरपीडो
- C.टैंक रोधी निर्देशित मिसाइल
- D.पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल
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वरुणास्त्र को युद्धपोत से छोड़ा जाता है और इसका लक्ष्य दुश्मन की पनडुब्बियां होती हैं। इसे नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है।
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