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GK24
सामान्य विज्ञानआसान

श्वेत प्रकाश कांच के प्रिज्म से गुजरने पर सबसे अधिक विचलन किस रंग का होता है?

  1. A.लाल
  2. B.पीला
  3. C.हरा
  4. D.बैंगनी

सही उत्तर

D. बैंगनी

व्याख्या

सही उत्तर D, बैंगनी है। किसी पारदर्शी माध्यम का अपवर्तनांक प्रत्येक रंग के लिए समान नहीं होता; तरंगदैर्घ्य घटने के साथ वह बढ़ता है। दृश्य रंगों में बैंगनी की तरंगदैर्घ्य सबसे कम है, इसलिए कांच उसके लिए सर्वाधिक अपवर्तनांक रखता है, वह प्रिज्म के दोनों पृष्ठों पर सबसे अधिक मुड़ता है और सबसे अधिक विचलन के साथ बाहर निकलता है। इसी कारण पर्दे पर स्पेक्ट्रम के निचले सिरे पर बैंगनी रहता है। विकल्प A इसका विपरीत स्थिति है: लाल की तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक, कांच में अपवर्तनांक सबसे कम और इसलिए विचलन सबसे कम होता है। विकल्प B और C, पीला तथा हरा, तरंगदैर्घ्य में लाल और बैंगनी के बीच आते हैं, इसलिए उनका विचलन भी मध्यम रहता है, लाल से अधिक पर बैंगनी से कम। बैंगनी से लाल तक का क्रम याद रखने पर इस प्रकार के सभी प्रश्न हल हो जाते हैं।

पूरा लेख पढ़ें: मानव नेत्र, लेंस और प्रकाश का विक्षेपण: नोट्स और प्रश्न

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Q1.सामान्य विज्ञानपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 13 Feb 2019, Shift 1मध्यम

मायोपिया के विषय में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. A.इस दृष्टि को अवतल लेंस की सहायता से ठीक किया जा सकता है।
  2. B.इसे निकट दृष्टि दोष भी कहा जाता है।
  3. C.प्रभावित नेत्र में दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है।
  4. D.इससे प्रभावित व्यक्ति कुछ मीटर से आगे नहीं देख पाता।
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. प्रभावित नेत्र में दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है।

व्याख्या

सही उत्तर C है। मायोपिया या निकट दृष्टि दोष वह दोष है जिसमें निकट की वस्तुएं स्पष्ट दिखती हैं पर दूर की वस्तुएं धुंधली लगती हैं। यह दोष तब होता है जब नेत्र लेंस अधिक अभिसारी हो जाए, अर्थात उसकी फोकस दूरी बहुत कम हो जाए, अथवा नेत्रगोलक आगे से पीछे तक लंबा हो जाए। ऐसे नेत्र में दूर की वस्तु की किरणें समय से पहले मिल जाती हैं और प्रतिबिंब रेटिना के सामने बनता है, पीछे नहीं, इसलिए कथन C ही गलत है और वही उत्तर है। विकल्प A सही कथन है, क्योंकि उचित ऋणात्मक क्षमता का अवतल या अपसारी लेंस प्रतिबिंब को पीछे खिसकाकर रेटिना पर ले आता है। विकल्प B सही है, क्योंकि निकट दृष्टि दोष मायोपिया का ही सामान्य नाम है। विकल्प D भी सही है, क्योंकि मायोपिया में नेत्र का दूर बिंदु अनंत से हटकर कुछ मीटर पर आ जाता है।

Q2.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · 6 Sep 2020आसान

प्रकाश नेत्र में एक पतली झिल्ली से प्रवेश करता है, जिसे कहते हैं

  1. A.रेटिना
  2. B.कॉर्निया
  3. C.पुतली
  4. D.आइरिस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कॉर्निया

व्याख्या

सही उत्तर B, कॉर्निया है। कॉर्निया वह पतली, पारदर्शी और कुछ उभरी झिल्ली है जो नेत्रगोलक का अग्र पृष्ठ बनाती है, और प्रकाश को किसी भी अन्य भाग तक पहुंचने से पहले इससे गुजरना पड़ता है। वायु से कॉर्निया में माध्यम का परिवर्तन पूरे नेत्र में सबसे तीव्र होने के कारण प्रकाश का अधिकतम अपवर्तन भी यहीं होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि रेटिना नेत्र के पीछे का प्रकाश संवेदी पर्दा है जिस पर अंत में प्रतिबिंब बनता है, अर्थात प्रकाश वहां सबसे बाद में पहुंचता है। विकल्प C गलत है क्योंकि पुतली कोई झिल्ली नहीं बल्कि एक छिद्र है, जिससे प्रकाश कॉर्निया पार करने के बाद गुजरता है। विकल्प D गलत है क्योंकि आइरिस वह रंगीन पेशीय पर्दा है जो पुतली को छोटा या बड़ा करके नेत्र में जाने वाले प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करता है।

Q3.सामान्य विज्ञानपूछा गया: उत्तर प्रदेश · 10th April 2022कठिन

श्वेत प्रकाश में देखे जाने पर साबुन के बुलबुले रंगीन दिखते हैं। इसके लिए उत्तरदायी परिघटना निम्नलिखित है

  1. A.प्रकीर्णन
  2. B.व्यतिकरण
  3. C.विक्षेपण
  4. D.विवर्तन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. व्यतिकरण

व्याख्या

सही उत्तर B, व्यतिकरण है। साबुन की झिल्ली अत्यंत पतली होती है, और उसके अग्र पृष्ठ से परावर्तित प्रकाश उसके पश्च पृष्ठ से परावर्तित प्रकाश से मिलता है। दोनों तरंगों ने कुछ भिन्न दूरी तय की होती है, इसलिए प्रत्येक तरंगदैर्घ्य के लिए वे कहीं एक दूसरे को प्रबल और कहीं निरस्त कर देती हैं। यह पतली फिल्म व्यतिकरण झिल्ली के प्रत्येक बिंदु पर एक रंग को उभारता और दूसरे को मिटा देता है, इसीलिए बुलबुले पर बदलती रंगीन पट्टियां दिखती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि प्रकीर्णन कणों द्वारा प्रकाश का बिखरना है और वह नीला आकाश तथा लाल सूर्यास्त समझाता है, झिल्ली के रंग नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि विक्षेपण प्रिज्म या वर्षा की बूंद जैसे माध्यम में अपवर्तन से रंग अलग करता है, और साबुन की झिल्ली इतनी पतली है कि इस प्रकार विक्षेपण नहीं कर सकती। विकल्प D गलत है क्योंकि विवर्तन अवरोधों के किनारों और सूक्ष्म झिर्रियों से प्रकाश का मुड़ना है, जैसे सीडी की पटरियों या ग्रेटिंग में।

Q4.सामान्य विज्ञानआसान

मानव नेत्र का कौन सा भाग पुतली के आकार और इस प्रकार नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करता है?

  1. A.कॉर्निया
  2. B.आइरिस
  3. C.रेटिना
  4. D.पक्ष्माभी पेशियां
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आइरिस

व्याख्या

सही उत्तर B, आइरिस है। आइरिस कॉर्निया के ठीक पीछे स्थित पेशियों का रंगीन छल्ला है। सिकुड़कर और फैलकर यह बीच के छिद्र, अर्थात पुतली, को तेज प्रकाश में छोटा और मंद प्रकाश में बड़ा कर देता है, और इस प्रकार यह नियंत्रित करता है कि रेटिना पर कितना प्रकाश पड़े। विकल्प A गलत है क्योंकि कॉर्निया सामने की स्थिर पारदर्शी झिल्ली है; वह प्रकाश का प्रबल अपवर्तन करती है पर किसी छिद्र का आकार नहीं बदल सकती। विकल्प C गलत है क्योंकि रेटिना नेत्र के पीछे शलाका और शंकु कोशिकाओं का पर्दा है, जहां प्रतिबिंब बनता है और तंत्रिका संकेतों में बदलता है। विकल्प D गलत है क्योंकि पक्ष्माभी पेशियां क्रिस्टलीय लेंस पर कार्य करती हैं और उसकी वक्रता तथा फोकस दूरी बदलकर भिन्न दूरियों की वस्तुओं को फोकस करती हैं, जो समंजन है, प्रकाश नियंत्रण नहीं।

Q5.सामान्य विज्ञानआसान

सामान्य वयस्क मानव नेत्र के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी लगभग कितनी होती है?

  1. A.10 सेंटीमीटर
  2. B.15 सेंटीमीटर
  3. C.25 सेंटीमीटर
  4. D.50 सेंटीमीटर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 25 सेंटीमीटर

व्याख्या

सही उत्तर C, 25 सेंटीमीटर है। स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी, जिसे निकट बिंदु भी कहते हैं, वह सबसे कम दूरी है जिस पर वस्तु रखकर उसे बिना जोर डाले स्पष्ट देखा जा सके। सामान्य वयस्क नेत्र के लिए यह दूरी लगभग 25 सेंटीमीटर मानी जाती है और आवर्धक लेंस तथा सूक्ष्मदर्शी के प्रत्येक संख्यात्मक प्रश्न में यही मानक मान लिया जाता है। विकल्प A, 10 सेंटीमीटर, वयस्क नेत्र के सुविधापूर्वक फोकस करने की सीमा से निकट है, हालांकि छोटा बच्चा इसके आसपास तक फोकस कर लेता है। विकल्प B, 15 सेंटीमीटर, भी मानक वयस्क मान से कम है। विकल्प D, 50 सेंटीमीटर, स्वस्थ नेत्र के निकट बिंदु से बहुत अधिक है और यह दूर दृष्टि दोष या जरा दूर दृष्टिता वाले व्यक्ति के हटे हुए निकट बिंदु के अधिक निकट है, जिसकी पक्ष्माभी पेशियां लेंस को पर्याप्त मोटा नहीं कर पातीं।