शिल्प समागम मेला 2026 में प्रचारित भारत-ट्यूलिप का पूरा नाम क्या है?
- A.पारंपरिक कारीगरों के उत्थान और आजीविका कार्यक्रम
- B.जनजातीय उत्थान और स्थानीय उद्योग प्रोत्साहन
- C.वस्त्र इकाई आजीविका सुधार योजना
- D.पारंपरिक एकीकृत करघा निवेश कार्यक्रम
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर पारंपरिक कारीगरों के उत्थान और आजीविका कार्यक्रम है। मंत्रालय ने भारत-ट्यूलिप को गुवाहाटी मेले का मुख्य जोर बताया। यह पहल लक्षित समूहों के कारीगरों द्वारा बनाए उत्पादों को दुकानों के साथ-साथ ई-कॉमर्स मंचों के जरिये खरीदारों तक पहुंचाती है। बड़े बाजारों और डिजिटल माध्यमों तक पहुंच बढ़ाकर इसका उद्देश्य बाजार के संबंध मजबूत करना, ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाना और कारीगरों के लिए कमाई के नए अवसर बनाना है, साथ ही पारंपरिक कला और शिल्प को बदलते उपभोक्ता बाजार से जोड़कर उनका संरक्षण करना भी है। विकल्प B, C और D ऐसे गढ़े हुए नाम हैं जो शिल्प योजना के लिए सुनने में ठीक लगते हैं, जैसे जनजातीय उत्थान, वस्त्र इकाई और करघा, पर इनमें से कोई भी आधिकारिक नाम से मेल नहीं खाता। पूरे नाम परीक्षकों को प्रिय होते हैं क्योंकि इन्हें बिना किसी संदर्भ के पूछा जा सकता है, इसलिए अभ्यर्थी सटीक शब्द याद रखें। यह भी ध्यान रखें कि लक्षित समूह अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सफाई मित्र और विमुक्त जनजाति हैं।
पूरा लेख पढ़ें: गुवाहाटी में शिल्प समागम मेला 2026, 75 कारीगर लेंगे हिस्सा
अभ्यास प्रश्न
शिल्प समागम मेला 2026 का दूसरा संस्करण किस शहर में लग रहा है?
- A.मैसूर
- B.गुवाहाटी
- C.जोधपुर
- D.लखनऊ
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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने बताया कि आठ दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 असम की राजधानी गुवाहाटी में शुरू होगा और बुधवार, 28 अक्टूबर तक चलेगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →शिल्प समागम मेला अपने तीन राष्ट्रीय निगमों के माध्यम से कौन सा मंत्रालय आयोजित करता है?
- A.वस्त्र मंत्रालय
- B.संस्कृति मंत्रालय
- C.सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
- D.सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय
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यह मेला उसी मंत्रालय का विपणन सहायता मंच है, जो अपने तीन राष्ट्रीय निगमों से जुड़े कारीगरों और लाभार्थियों के लिए चलाया जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय किस वर्ष से शिल्प समागम मेले लगा रहा है?
- A.2015
- B.2019
- C.2022
- D.2024
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मंत्रालय इसी वर्ष से ये मेले लगा रहा है और अब तक 13 मेले हो चुके हैं, जिनसे 975 कारीगरों को अपना सामान ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का BHARAT TULIP किस कार्यक्रम का नाम है?
- A.पारंपरिक कारीगर उत्थान जीविका कार्यक्रम
- B.जनजातीय उत्थान और स्थानीय उद्योग प्रोत्साहन योजना
- C.वस्त्र इकाई जीविका सुधार कार्यक्रम
- D.पारंपरिक उपयोगिता और स्थानीय निवेश योजना
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BHARAT TULIP वह ब्रांड है जिसके नाम से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अपने लक्षित वर्गों के उत्पाद देश और विदेश के डिजिटल मंचों पर बेचता है, ताकि कारीगर मेले के मैदान से बहुत आगे के ग्राहकों तक पहुंच सके।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मैसूरु के शिल्प समागम मेला 2026 में कुल 83 स्टॉल में से कितने कारीगरों को दिए गए थे?
- A.60
- B.75
- C.80
- D.83, सभी
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मेले में कुल 83 स्टॉल लगाए गए थे और इनमें 80 स्टॉल कारीगरों को दिए गए, बाकी में खाने के स्टॉल शामिल थे जहां पारंपरिक व्यंजन परोसे गए।
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