संस्थानों को नया डी.एमआरआईटी पाठ्यक्रम किस शैक्षणिक वर्ष से अनिवार्य रूप से अपनाना होगा?
- A.2025-26
- B.2026-27
- C.2027-28
- D.2028-29
सही उत्तर
C. 2027-28
व्याख्या
सही उत्तर 2027-28 है। आयोग ने मेडिकल रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा का दक्षता आधारित पाठ्यक्रम 30 सितंबर 2026 को एक राष्ट्र, एक पाठ्यक्रम के तहत अधिसूचित किया था, और यह पाठ्यक्रम चला रहे या चलाने के इच्छुक संस्थानों को इसे शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से अनिवार्य रूप से अपनाना होगा। जो संस्थान पहले अपनाना चाहें, वे 2026-27 से भी अपना सकते हैं, इसलिए विकल्प ख अनिवार्य वर्ष नहीं बल्कि वैकल्पिक वर्ष है और गलत है। विकल्प क उस समय का है जब पाठ्यक्रम अधिसूचित ही नहीं हुआ था, और विकल्प घ अधिसूचना में तय समय सीमा से पूरा एक वर्ष बाद का है। यह डिप्लोमा दो वर्ष का है, भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान के साथ कक्षा 12 उत्तीर्ण छात्रों के लिए है, तथा इसमें छह माह की क्लीनिकल इंटर्नशिप शामिल है।
पूरा लेख पढ़ें: एनसीएएचपी ने स्वायत्त बोर्ड व डी.एमआरआईटी नियम अधिसूचित किए
अभ्यास प्रश्न
राष्ट्रीय संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग ने स्वायत्त बोर्ड तथा केंद्रीय मूल्यांकन समिति के विनियम किस अधिनियम के तहत अधिसूचित किए हैं?
- A.एनसीएएचपी अधिनियम, 2021
- B.क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स अधिनियम, 2010
- C.राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम, 2019
- D.संबद्ध स्वास्थ्य सेवा अधिनियम, 2015
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. एनसीएएचपी अधिनियम, 2021
व्याख्या
सही उत्तर एनसीएएचपी अधिनियम, 2021 है। आयोग ने व्यवसायियों के पंजीकरण संबंधी विनियम तथा स्वायत्त बोर्ड और केंद्रीय मूल्यांकन समिति से जुड़े विनियम, दोनों इसी राष्ट्रीय संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग अधिनियम, 2021 के तहत अधिसूचित किए हैं। यही अधिनियम इस क्षेत्र का मूल कानून है और इससे आयोग को शिक्षा, संस्थागत मूल्यांकन, व्यावसायिक नैतिकता तथा पंजीकरण पर नियम बनाने की शक्ति मिलती है। विकल्प ख यानी क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स अधिनियम अस्पतालों और निदान केंद्रों के पंजीकरण से जुड़ा है, संबद्ध व्यवसायियों से नहीं, इसलिए वह गलत है। विकल्प ग यानी राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा व्यवसाय को नियंत्रित करता है, जो एक अलग ढांचा है। विकल्प घ में जिस अधिनियम का नाम दिया गया है, उसका इस विज्ञप्ति में कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए केवल विकल्प क ही सही है।
नए विनियमों के तहत गठित केंद्रीय मूल्यांकन समिति में कितने सदस्य होंगे?
- A.अध्यक्ष सहित 10 से 20 सदस्य
- B.अध्यक्ष सहित 10 से 30 सदस्य
- C.सभापति सहित 15 से 25 सदस्य
- D.सभापति सहित 20 से 40 सदस्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अध्यक्ष सहित 10 से 30 सदस्य
व्याख्या
सही उत्तर अध्यक्ष सहित 10 से 30 सदस्य है। विनियमों में उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्रीय मूल्यांकन समिति का प्रावधान है, जहां कोई कार्यशील राज्य संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा परिषद नहीं है। यह समिति आयोग की समग्र निगरानी में काम करती है, आयोग सचिवालय की सहायता लेती है और वही कार्य करती है जो अन्यथा स्वायत्त बोर्ड करते हैं, यानी निर्धारित सत्यापन, निरीक्षण और रेटिंग प्रक्रियाओं का पालन। इसमें व्यावसायिक श्रेणियों का प्रतिनिधित्व रहेगा और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त प्रतिनिधित्व भी, ताकि परिषद रहित क्षेत्रों को कवर किया जा सके। विकल्प क राज्य परिषद के अधीन स्वायत्त बोर्ड की सदस्य संख्या बताता है, इसलिए वह दूसरी संस्था से जुड़ा है और गलत है। विकल्प ग तथा घ में दी गई संख्याएं विनियमों में नहीं हैं और इनमें पद का नाम भी सभापति लिखा है, जबकि विनियमों में अध्यक्ष का प्रावधान है।
8वें पीएम मोमेंटोज के छत्तीसगढ़ संग्रह में निम्नलिखित में से कौन-सा समकालीन विषय शामिल है?
- A.महतारी वंदन योजना पर काष्ठ उत्कीर्ण पट्टिका
- B.नए संसद भवन का प्रतिरूप
- C.जल जीवन मिशन पर पट्टिका
- D.स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की प्रतिकृति
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. महतारी वंदन योजना पर काष्ठ उत्कीर्ण पट्टिका
व्याख्या
सही उत्तर महतारी वंदन योजना पर काष्ठ उत्कीर्ण पट्टिका है। संग्रह इस कृति को राज्य विधानसभा की रजत जयंती की स्मृति वस्तु और नई राजधानी क्षेत्र की संस्थाओं के प्रतिरूपों के साथ रखता है, जिससे राज्य का वर्तमान उसकी पुरानी परंपराओं के बगल में दिखे। विकल्प B गलत है, क्योंकि इन कृतियों में राष्ट्रीय विधायिका का कोई प्रतिरूप सूचीबद्ध नहीं है। विकल्प C भी गलत है, क्योंकि उस जल योजना पर कोई पट्टिका नहीं बताई गई। विकल्प D गलत है, क्योंकि उस स्मारक की कोई प्रतिकृति इस विवरण में नहीं आती। संग्रह का व्यापक संदेश निरंतरता का है, जिसमें पीढ़ियों में गढ़ी परंपराएं नई वस्तुओं में रूप पाती रहती हैं। कुल सोलह कृतियां, चार हजार वर्ष से पुरानी ढोकरा शिल्प परंपरा, अक्टूबर के अंत तक बढ़ी बोली और गंगा सफाई के लिए आय का उपयोग भी याद रखें।
पीएम मोमेंटोज नीलामी से होने वाली आय किस परियोजना को सहारा देगी?
- A.नमामि गंगे परियोजना
- B.स्वच्छ भारत मिशन
- C.एडॉप्ट ए हेरिटेज परियोजना
- D.प्रोजेक्ट टाइगर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नमामि गंगे परियोजना
व्याख्या
सही उत्तर नमामि गंगे परियोजना है। स्मृति वस्तुओं की नीलामी चालू है, इसे अक्टूबर के अंत तक बढ़ाया गया है, और इससे होने वाली सारी आय इसी परियोजना को जाती है, जिसमें बोली आधिकारिक ई-नीलामी पोर्टल पर ऑनलाइन लगाई जाती है। विकल्प B एक स्वच्छता मिशन है, जिसे लाभार्थी नहीं बताया गया। विकल्प C विरासत गोद लेने की योजना है और इन निधियों का गंतव्य नहीं है। विकल्प D वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा है और यहां नामित प्राप्तकर्ता नहीं है। इसके साथ संग्रह का आकार और स्वरूप भी याद रखें, क्योंकि इसमें एक ही राज्य की सोलह कृतियां हैं, जिनका आधार चार हजार वर्ष से अधिक पुरानी धातु ढलाई परंपरा है, और जिनमें भक्ति, जनजातीय तथा समकालीन धाराएं मिलती हैं। प्रधानमंत्री को मिले उपहारों की नीलामी हर संस्करण में होती है और प्रत्येक दौर किसी विषय पर आधारित रहता है।
8वें पीएम मोमेंटोज संग्रह के केंद्र में छत्तीसगढ़ का कौन-सा पारंपरिक शिल्प है, जिसका इतिहास भारत में 4,000 वर्ष से अधिक पुराना है?
- A.बीदरी कार्य
- B.ढोकरा धातु ढलाई
- C.पट्टचित्र चित्रकला
- D.बीदरीवेयर जड़ाऊ कार्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ढोकरा धातु ढलाई
व्याख्या
सही उत्तर ढोकरा धातु ढलाई है। यह लुप्त मोम ढलाई की परंपरा है, जिसका देश में इतिहास चार हजार वर्ष से अधिक पुराना है, और संग्रह की कई कृतियां इसकी विविधता दिखाती हैं, जिनमें हाथी मुख नंदी, खड़ा नंदी तथा मड़िया-मड़िन जनजातीय युगल की प्रतिमा शामिल हैं। विकल्प A किसी अन्य क्षेत्र से जुड़ी धातु शिल्प परंपरा है और यहां उल्लिखित शिल्प नहीं है। विकल्प C पूर्वी भारत की चित्र परंपरा है, जो इस विवरण में नहीं आती। विकल्प D भी कहीं और की जड़ाऊ शिल्प परंपरा का नाम है। परीक्षा के लिए संग्रह का शेष हिस्सा भी ध्यान में रखें, जैसे मोरपंख, कौड़ियों, धातु की डिस्क और पीतल की घंटियों वाला पारंपरिक शिरोवेश, भक्ति के शब्दों से अंकित रामनामी समाज का जप वस्त्र, हाटकेश्वर महादेव तथा मड़ेश्वर महादेव जैसे स्थलों का चित्रण, और महतारी वंदन योजना तथा राज्य विधानसभा की रजत जयंती पर बनी कृतियां।