राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति में 2022 में संशोधन मुख्यतः किस उद्देश्य से किया गया?
- A.इथेनॉल के लिए शीरे के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने
- B.20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 2025-26 तक आगे बढ़ाने
- C.बायोडीजल मिश्रण कार्यक्रम समाप्त करने
- D.जैव ईंधन को कृषि मंत्रालय को हस्तांतरित करने
सही उत्तर
B. 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 2025-26 तक आगे बढ़ाने
व्याख्या
सही उत्तर B, 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 2025-26 तक आगे बढ़ाने है। राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018 ने पेट्रोल में बीस प्रतिशत इथेनॉल के लिए 2030 का वर्ष रखा था; 2022 के संशोधन ने उसे आगे बढ़ाकर इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 कर दिया, साथ ही अनुमत कच्चे माल का दायरा बढ़ाया और निर्यात के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्रों में जैव ईंधन उत्पादन की अनुमति दी। विकल्प A गलत है क्योंकि शीरा भारतीय इथेनॉल का मुख्य आधार बना हुआ है और उस पर कभी प्रतिबंध नहीं लगा। विकल्प C गलत है क्योंकि डीजल में 2030 तक पांच प्रतिशत बायोडीजल मिश्रण का लक्ष्य उसी नीति में चलता रहा। विकल्प D गलत है क्योंकि यह नीति पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय चलाता है, जो बदला नहीं गया।
पूरा लेख पढ़ें: जैव ईंधन और इथेनॉल मिश्रण: पीढ़ियां और योजनाएं
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंपेट्रोल में मिश्रण के लिए प्रयुक्त इथेनॉल रासायनिक रूप से क्या है?
- A.मेथिल ऐल्कोहॉल, CH3OH
- B.एथिल ऐल्कोहॉल, C2H5OH
- C.ग्लिसरॉल, C3H8O3
- D.एसीटिक अम्ल, CH3COOH
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एथिल ऐल्कोहॉल, C2H5OH
व्याख्या
सही उत्तर B, एथिल ऐल्कोहॉल, C2H5OH है। इथेनॉल दो कार्बन वाला ऐल्कोहॉल है जो यीस्ट द्वारा शर्करा के किण्वन से प्राप्त होता है, और यही वह ऐल्कोहॉल है जो इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के अंतर्गत पेट्रोल में मिलाया जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि मेथिल ऐल्कोहॉल अर्थात मेथनॉल एक भिन्न, एक कार्बन वाला ऐल्कोहॉल है; वह अत्यंत विषैला है और उसका अलग मेथनॉल मिश्रण कार्यक्रम है, इथेनॉल का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि ग्लिसरॉल तीन कार्बन वाला त्रिहाइड्रिक ऐल्कोहॉल है और इस अध्याय में वह बायोडीजल निर्माण के सहउत्पाद के रूप में आता है, ईंधन मिश्रण के रूप में नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि एसीटिक अम्ल एक कार्बोक्सिलिक अम्ल है, सिरके का अम्ल, जो इथेनॉल के ऑक्सीकरण से बनता है; वह ईंधन नहीं है। स्मरण रखें कि इथेनॉल पेट्रोल की ऑक्टेन संख्या भी बढ़ाता है।
निम्नलिखित में से कौन द्वितीय पीढ़ी के जैव ईंधन का कच्चा माल है?
- A.गन्ने का रस
- B.मक्का का दाना
- C.धान की पुआल
- D.खाद्य सरसों तेल
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. धान की पुआल
व्याख्या
सही उत्तर C, धान की पुआल है। द्वितीय पीढ़ी के जैव ईंधन उस लिग्नोसेल्युलोसिक जैवभार से बनते हैं जो भोजन नहीं है, जैसे धान की पुआल, गेहूं का भूसा, खोई, कपास की डंठल और नगरीय ठोस कचरा; सेल्युलोज को पहले किण्वन योग्य शर्करा में तोड़ना पड़ता है, जिससे प्रक्रिया महंगी होती है और इन ईंधनों को उन्नत जैव ईंधन कहा जाता है। विकल्प A और B गलत हैं क्योंकि गन्ने का रस तथा मक्का का दाना खाद्य या खाद्य फसल सामग्री हैं और उनसे सामान्य प्रथम पीढ़ी का इथेनॉल बनता है। विकल्प D गलत है क्योंकि खाद्य सरसों तेल से प्रथम पीढ़ी का बायोडीजल बनेगा, और भारतीय नीति खाद्य तेलों से बचते हुए जेट्रोफा जैसे अखाद्य बीजों पर टिकती है। भारत का पहला व्यावसायिक द्वितीय पीढ़ी इथेनॉल संयंत्र, जो पुआल पर चलता है, हरियाणा के पानीपत में बना।
भारत सरकार की सतत (SATAT) पहल किससे संबंधित है?
- A.संपीडित जैव गैस
- B.सौर छत बिजली
- C.परमाणु ईंधन पुनर्संसाधन
- D.हरित हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. संपीडित जैव गैस
व्याख्या
सही उत्तर A, संपीडित जैव गैस है। सतत का पूरा रूप सस्टेनेबल ऑल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन है और इसे अक्टूबर 2018 में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आरंभ किया; इसके अंतर्गत तेल विपणन कंपनियां उद्यमियों को कृषि अवशेष, गोबर और नगरीय कचरे से संपीडित जैव गैस संयंत्र लगाने के लिए आमंत्रित करती हैं और उस गैस को अपने खुदरा केंद्रों पर बेचने के लिए खरीदने का प्रस्ताव देती हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि छत पर सौर ऊर्जा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की अलग योजनाओं से बढ़ाई जाती है। विकल्प C गलत है क्योंकि परमाणु ईंधन पुनर्संसाधन परमाणु ऊर्जा विभाग का काम है और उसका जैवभार से कोई संबंध नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि हरित हाइड्रोजन का अपना राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन है। संपीडित जैव गैस में नब्बे प्रतिशत से अधिक मेथेन होती है।
जैव गैस का मुख्य अवयव कौन है?
- A.कार्बन डाइऑक्साइड
- B.हाइड्रोजन सल्फाइड
- C.मेथेन
- D.कार्बन मोनोऑक्साइड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. मेथेन
व्याख्या
सही उत्तर C, मेथेन है। जैव गैस कार्बनिक पदार्थ के अवायवीय पाचन से बनती है, और मेथेन उसका सबसे बड़ा अवयव है, आयतन के अनुसार लगभग आधे से तीन चौथाई तक; यही जैव गैस को ज्वलनशील बनाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड दूसरा सबसे बड़ा अवयव है, सामान्यतः एक चौथाई से आधे तक, और वह जलती नहीं; कच्ची जैव गैस को संपीडित जैव गैस में बदलते समय उसे हटा दिया जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि हाइड्रोजन सल्फाइड केवल अंश मात्र में होती है और उसे हटाया जाता है क्योंकि वह क्षरणकारी तथा दुर्गंधयुक्त है। विकल्प D गलत है क्योंकि कार्बन मोनोऑक्साइड ईंधनों के अपूर्ण दहन का उत्पाद है और जैव गैस का सामान्य अवयव नहीं है। उन्नत संपीडित जैव गैस में नब्बे प्रतिशत से अधिक मेथेन होती है।
वनस्पति तेलों से बायोडीजल किस प्रक्रिया द्वारा बनाया जाता है?
- A.ट्रांसएस्टरीकरण
- B.प्रभाजी आसवन
- C.हाइड्रोजनीकरण
- D.किण्वन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ट्रांसएस्टरीकरण
व्याख्या
सही उत्तर A, ट्रांसएस्टरीकरण है। ट्रांसएस्टरीकरण में वनस्पति तेल या पशु वसा को पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड जैसे क्षारीय उत्प्रेरक की उपस्थिति में मेथनॉल या इथेनॉल से क्रिया कराई जाती है, जिससे वसा अम्ल मिथाइल एस्टर अर्थात बायोडीजल और सहउत्पाद के रूप में ग्लिसरॉल बनते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि प्रभाजी आसवन से कच्चे पेट्रोलियम को पेट्रोल, केरोसिन और डीजल में अलग किया जाता है; वह पहले से बने मिश्रण को अलग करता है, नया एस्टर नहीं बनाता। विकल्प C गलत है क्योंकि हाइड्रोजनीकरण द्विबंधों पर हाइड्रोजन जोड़ता है और वही प्रक्रिया तरल तेलों को वनस्पति घी में बदलती है। विकल्प D गलत है क्योंकि किण्वन शर्करा पर यीस्ट की अवायवीय क्रिया है, जिससे इथेनॉल बनता है, बायोडीजल नहीं। शुद्ध बायोडीजल को B100 कहा जाता है।