परीक्षण में सुरक्षित कुंजियां किस दर से बनीं और लिंक ने एरर रेट कितना रखा?
- A.230 से 260 बिट प्रति सेकंड, एरर रेट 5% से कम
- B.1,000 से 1,200 बिट प्रति सेकंड, एरर रेट 2% से कम
- C.50 से 80 बिट प्रति सेकंड, एरर रेट 12% से कम
- D.400 से 450 बिट प्रति सेकंड, एरर रेट 8% से कम
सही उत्तर
A. 230 से 260 बिट प्रति सेकंड, एरर रेट 5% से कम
व्याख्या
सही उत्तर 230 से 260 बिट प्रति सेकंड, और क्वांटम बिट एरर रेट 5% से कम है। दोनों आंकड़े लिंक की गुणवत्ता बताते हैं। कुंजी दर बताती है कि एन्क्रिप्शन के लिए नया गुप्त पदार्थ कितनी तेजी से बन सकता है, और एरर रेट बताता है कि फोटॉन कितनी बार गलत पढ़ा गया, जो क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन में यह संकेत भी देता है कि चैनल में किसी ने दखल दिया है या नहीं। विकल्प B, C और D में ऐसे आंकड़े जोड़े में रखे गए हैं जो दर्ज किए गए आंकड़े नहीं हैं, और जिस परीक्षार्थी को दोनों में से केवल एक मान याद रह जाता है वह बेमेल जोड़ी से पकड़ा जा सकता है, इसलिए दोनों साथ याद करने चाहिए। इसी दर से बनी कुंजियां वैदिक कवच प्लेटफॉर्म को दी गईं, जहां पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी ने परीक्षण संदेशों का एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और डिक्रिप्शन पूरा किया।
पूरा लेख पढ़ें: भारत में 5.56 km का पहला फ्री-स्पेस क्वांटम की लिंक सफल
अभ्यास प्रश्न
भारत का पहला फ्री-स्पेस क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन लिंक कितनी दूरी पर प्रदर्शित किया गया?
- A.2.5 km
- B.5.56 km
- C.10.2 km
- D.25 km
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सही उत्तर: B. 5.56 km
व्याख्या
सही उत्तर 5.56 km है। इतनी ही दूरी पर देश का पहला फ्री-स्पेस क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन लिंक बीआईएसएजी-एन परिसर और आईआईटी गांधीनगर के बीच बनाया गया, और यह क्षेत्र परीक्षण 27 और 28 सितंबर की रात चला। विकल्प A, C और D गलत हैं, क्योंकि इनमें से हर एक उस दूरी के बजाय कोई और दूरी बताता है जो वास्तव में हासिल हुई, और इस तरह के प्रश्न में आंकड़ा ही पूरा उत्तर होता है। यह दूरी केवल रटने की बात नहीं, समझने की भी है। खुली हवा में एकल फोटॉन भेजने का अर्थ है वायुमंडल की हलचल, बिखराव और किरण को दूर रखे रिसीवर पर टिकाए रखने की चुनौती से लड़ना, और इसी कारण पॉइंटिंग, एक्विजिशन तथा ट्रैकिंग सिस्टम की जरूरत पड़ी। दल ने इस परिणाम को लंबी दूरी के क्वांटम सुरक्षित नेटवर्क और उपग्रह से क्वांटम संचार की दिशा में कदम बताया, इसलिए आगे के आंकड़े बड़े हो सकते हैं।
भारत का पहला फ्री-स्पेस क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन लिंक किन तीन संस्थाओं ने मिलकर दिखाया?
- A.इसरो, डीआरडीओ और आईआईटी बॉम्बे
- B.QNu लैब्स, बीआईएसएजी-एन और आईआईटी गांधीनगर
- C.सी-डॉट, बीईएल और आईआईएससी बेंगलुरु
- D.बार्क, टीआईएफआर और आईआईटी मद्रास
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सही उत्तर: B. QNu लैब्स, बीआईएसएजी-एन और आईआईटी गांधीनगर
व्याख्या
सही उत्तर QNu लैब्स, बीआईएसएजी-एन और आईआईटी गांधीनगर है। QNu लैब्स ने हार्डवेयर क्यूकेडी उपकरण आर्मोस दिया, बीआईएसएजी-एन ने पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी प्लेटफॉर्म वैदिक कवच के साथ लिंक का एक सिरा संभाला, और आईआईटी गांधीनगर ने दूसरा सिरा तथा क्षेत्र वातावरण उपलब्ध कराया। विकल्प A गलत है, क्योंकि इस प्रदर्शन में न अंतरिक्ष एजेंसी का नाम है और न रक्षा अनुसंधान संगठन का, भले ही दोनों मिलती-जुलती तकनीकों पर काम करते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि उसमें बताए दूरसंचार अनुसंधान केंद्र, सार्वजनिक क्षेत्र की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी और बेंगलुरु के संस्थान की इस विशेष परीक्षण में कोई भूमिका नहीं थी। विकल्प D इसी आधार पर गलत है। इस साझेदारी को सूची के साथ-साथ ढांचे के रूप में याद रखें, यानी एक निजी क्वांटम तकनीक कंपनी, मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था और एक आईआईटी।
क्वांटम लिंक से बनी कुंजियां परीक्षण संदेशों के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के लिए किस प्लेटफॉर्म को दी गईं?
- A.आर्मोस
- B.वैदिक कवच
- C.संचार सेतु
- D.क्वांटम शील्ड
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सही उत्तर: B. वैदिक कवच
व्याख्या
सही उत्तर वैदिक कवच है, जो बीआईएसएजी-एन का बनाया पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी प्लेटफॉर्म है। क्वांटम लिंक से बनी कुंजियां इसी से जोड़ी गईं और फिर परीक्षण संदेशों का एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन तथा डिक्रिप्शन किया गया। विकल्प A ध्यान देने लायक जाल है, क्योंकि आर्मोस भी इसी कहानी का हिस्सा है, पर वह QNu लैब्स का हार्डवेयर क्यूकेडी उपकरण है जो फ्री-स्पेस ऑप्टिकल चैनल पर कुंजियां बनाता है, वह सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म नहीं है जो उन्हें उपयोग करता है। इन दोनों नामों को अलग-अलग रखना ही इस प्रश्न की मुख्य परीक्षा है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इस नाम का कोई प्लेटफॉर्म इस प्रदर्शन में नहीं आता। विकल्प D भी गलत है और केवल भरोसेमंद लगने वाला गढ़ा हुआ नाम है। काम का बंटवारा याद रखें, आर्मोस हार्डवेयर है और कुंजियां बनाता है, वैदिक कवच सॉफ्टवेयर है और उन्हें उपयोग करता है।
डिजिटल भारत निधि पहले किस नाम से जानी जाती थी?
- A.राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन कोष
- B.सार्वभौमिक सेवा बाध्यता कोष
- C.दूरसंचार विकास कोष
- D.डिजिटल इंडिया अवसंरचना कोष
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सही उत्तर: B. सार्वभौमिक सेवा बाध्यता कोष
व्याख्या
सही उत्तर सार्वभौमिक सेवा बाध्यता कोष है। यह कोष भारतीय टेलीग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत बना और दूरसंचार अधिनियम, 2023 ने इसका नाम डिजिटल भारत निधि कर दिया। यह दूरसंचार विभाग का संलग्न कार्यालय है और इसका काम वंचित ग्रामीण, दूरदराज तथा शहरी क्षेत्रों में दूरसंचार सेवा की पहुँच बढ़ाना है। विकल्प A, C और D सुनने में सही लगते हैं, पर इनमें से कोई इस कोष का पुराना नाम नहीं है। याद रखें कि भारतनेट के अलावा यह कोष 4जी सैचुरेशन परियोजना तथा आकांक्षी जिलों, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों, हिमालयी व सीमावर्ती इलाकों, द्वीपों और पूर्वोत्तर राज्यों में मोबाइल सेवाओं के लिए भी धन देता है। महाराष्ट्र का करार इसी कोष ने महाराष्ट्र सरकार, एमडीआईएल, बीएसएनएल और महाआईटी के साथ किया, इसलिए B सही है।
महाराष्ट्र में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम किस कंपनी के जरिये लागू होगा?
- A.महानेट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड
- B.भारत संचार निगम लिमिटेड
- C.महाराष्ट्र सूचना प्रौद्योगिकी निगम लिमिटेड
- D.रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड
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सही उत्तर: A. महानेट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड
व्याख्या
सही उत्तर महानेट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड है, जिसे एमडीआईएल लिखा जाता है। महाराष्ट्र में परियोजना एमडीआईएल के जरिये लागू होगी, इसीलिए वह करार के पाँच पक्षों में से एक है। विकल्प B गलत है: भारत संचार निगम लिमिटेड ने करार पर हस्ताक्षर किए और उसके उद्यम व्यवसाय निदेशक समारोह में मौजूद थे, पर क्रियान्वयन की जिम्मेदारी एमडीआईएल की है। विकल्प C इसी कारण गलत है, क्योंकि महाआईटी हस्ताक्षरकर्ता है और उसकी प्रबंध निदेशक उपस्थित थीं, क्रियान्वयन एजेंसी नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह कंपनी पाँच हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल ही नहीं है; बाकी दो पक्ष हैं दूरसंचार विभाग की डिजिटल भारत निधि और महाराष्ट्र सरकार। ध्यान रखें कि करार संचार भवन, नई दिल्ली में हुआ और इसका पूरा दायरा राज्य की 28,237 ग्राम पंचायतें हैं, जिसके लिए केंद्र ने 10,520 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर की है। हस्ताक्षरकर्ताओं की सूची और क्रियान्वयन एजेंसी की पंक्ति को अलग-अलग पढ़ने पर A ही सही बैठता है।