न्यूजीलैंड सीमा शुल्क सेवा के साथ मूल-स्थान डेटा के इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान पर सहयोग ज्ञापन किस भारतीय संस्था ने किया?
- A.विदेश व्यापार महानिदेशालय
- B.केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड
- C.नीति आयोग
- D.भारतीय रिज़र्व बैंक
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड है। वस्तुओं के व्यापार से जुड़े मूल-स्थान डेटा के इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान वाले ज्ञापन पर भारत की ओर से सीबीआईसी और दूसरी ओर न्यूजीलैंड सीमा शुल्क सेवा ने हस्ताक्षर किए, जिनमें सीबीआईसी अध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी तथा एनजेडसीएस की नियंत्रक एवं मुख्य कार्यकारी क्रिस्टीन स्टीवेंसन शामिल थे। सीबीआईसी भारत में सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष करों का प्रशासन देखता है, इसलिए सीमा शुल्क से सीमा शुल्क की यह व्यवस्था उसी के अधिकार क्षेत्र में आती है। विकल्प A यानी विदेश व्यापार महानिदेशालय आयात-निर्यात नीति बनाता है पर इस ज्ञापन का पक्ष नहीं था। विकल्प C यानी नीति आयोग नीति से जुड़ा संस्थान है जिसकी सीमा शुल्क में कोई भूमिका नहीं, और विकल्प D यानी भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय बैंक है जो बैंकिंग तथा मुद्रा का नियमन करता है। इस व्यवस्था की घोषणा वित्त मंत्रालय ने की।
पूरा लेख पढ़ें: भारत-न्यूजीलैंड: मूल-स्थान डेटा साझा करने पर सहयोग ज्ञापन
अभ्यास प्रश्न
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता किस तिथि से लागू हुआ?
- A.19 अक्टूबर 2026
- B.20 अक्टूबर 2026
- C.21 अक्टूबर 2026
- D.1 नवंबर 2026
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सीमा शुल्क ज्ञापन से जुड़ी विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता इसी तिथि से लागू हुआ और ज्ञापन इसी समझौते के अंतर्गत किया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए सहयोग ज्ञापन का विषय क्या है?
- A.वस्तु व्यापार के मूल-स्थान डेटा का इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान
- B.शैक्षणिक उपाधियों की पारस्परिक मान्यता
- C.डेयरी उत्पादों पर सभी शुल्क हटाना
- D.हिंद महासागर में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास
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यह ज्ञापन इस बात से जुड़ा है कि दोनों सीमा शुल्क प्रशासन वह डेटा अग्रिम और इलेक्ट्रॉनिक रूप से कैसे साझा करेंगे जिससे पता चलता है कि वस्तु कहां बनी, क्योंकि मूल-स्थान प्रमाणपत्र ही तय करता है कि किसी खेप को व्यापार समझौते में उपलब्ध रियायती शुल्क मिलेगा या नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिजली क्षेत्र में ईएचवी का पूरा नाम क्या है?
- A.इलेक्ट्रिकल हाइब्रिड वोल्टेज
- B.अति उच्च वोल्टेज
- C.एफिशिएंट हाई वोल्टेज
- D.एनहांस्ड हाइड्रो वोल्टेज
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सऊदी अरब ने भारतीय विद्युत मंत्रालय के साथ बैठक में ऐसी पारेषण प्रणालियों पर सहयोग को अपनी प्राथमिकताओं में गिनाया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →इस बैठक में सऊदी अरब ने निम्न में से किस क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग की इच्छा नहीं जताई?
- A.अति उच्च वोल्टेज पारेषण प्रणालियां
- B.उभरते डेटा केंद्रों की बिजली जरूरतें
- C.ग्रिड कोड का अद्यतन
- D.परमाणु बिजली रिएक्टरों का निर्माण
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सऊदी पक्ष ने नजदीकी काम के लिए चार विषय गिनाए और पहले तीन विकल्प उन्हीं में से तीन हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत-सऊदी अरब विद्युत इंटरकनेक्शन पहल की समीक्षा वाली वर्चुअल द्विपक्षीय बैठक में भारतीय पक्ष का नेतृत्व किस अधिकारी ने किया?
- A.सचिव, विद्युत मंत्रालय
- B.सचिव, विदेश मंत्रालय
- C.अध्यक्ष, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण
- D.सचिव, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
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सही उत्तर सचिव, विद्युत मंत्रालय यानी पंकज अग्रवाल हैं, जिन्होंने प्रस्तावित सीमा पार कड़ी की प्रगति देखने के लिए अपने सऊदी समकक्ष के साथ वर्चुअल द्विपक्षीय बैठक की।
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