निम्नलिखित में से कौन-सी धमनी मानव हृदय की पेशी को रक्त पहुँचाती है?
- A.फुफ्फुस धमनी (पल्मोनरी आर्टरी)
- B.वृक्क धमनी (रीनल आर्टरी)
- C.कोरोनरी धमनी
- D.यकृत धमनी (हेपेटिक आर्टरी)
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, कोरोनरी धमनी। कोरोनरी धमनियाँ ऑक्सीजन-युक्त रक्त को स्वयं हृदय की दीवार की पेशी तक पहुँचाती हैं।
हृदय पूरे शरीर में रक्त पंप करता है, पर उसकी अपनी मोटी पेशी (मायोकार्डियम) को अलग से रक्त चाहिए। बाईं और दाईं कोरोनरी धमनियाँ महाधमनी (एओर्टा) से उसके वाल्व के ठीक ऊपर निकलती हैं और मुकुट की तरह हृदय की सतह पर फैली रहती हैं, इसी से इनका नाम पड़ा। जब वसा जमने से कोई कोरोनरी धमनी सँकरी या बंद हो जाती है, तो हृदय पेशी को कम ऑक्सीजन मिलती है; इससे सीने में दर्द (एंजाइना) या दिल का दौरा पड़ता है, और डॉक्टर स्टेंट या बाईपास सर्जरी करते हैं।
A गलत है क्योंकि फुफ्फुस धमनी दाएँ निलय से अशुद्ध रक्त फेफड़ों तक ले जाती है। B गलत है क्योंकि वृक्क धमनी गुर्दों को रक्त देती है। D गलत है क्योंकि यकृत धमनी लीवर को ऑक्सीजन-युक्त रक्त देती है।
Exam tip: कोरोनरी = हृदय पेशी, पल्मोनरी = फेफड़े, रीनल = गुर्दा, हेपेटिक = यकृत।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. मिट्टी के अकार्बनिक यौगिकों से नाइट्रोजन का पौधों और जंतुओं में प्रोटीन बनाने तक और फिर वापस लौटने का चक्रण नाइट्रोजन चक्र कहलाता है। 2. हैबर प्रक्रम द्वारा अमोनिया बनाना एक ऊष्माशोषी अभिक्रिया है। 3. यूरिया को उच्च ताप और उच्च दाब पर अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड की क्रिया से संश्लेषित किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही नहीं है/हैं?
- A.1 और 3
- B.2 और 3
- C.केवल 2
- D.केवल 1
उत्तर देखें
हैबर प्रक्रम ऊष्माक्षेपी है, ऊष्माशोषी नहीं: नाइट्रोजन और हाइड्रोजन मिलकर अमोनिया बनाते हैं और ऊष्मा छोड़ते हैं। हैबर प्रक्रम में N2 + 3H2 ⇌ 2NH3 अभिक्रिया हर दो मोल अमोनिया पर लगभग 92 kJ ऊष्मा देती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पौधों में जाइलम वाहिकाओं के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही नहीं है?
- A.जाइलम वाहिकाओं की कोशिका भित्ति लिग्निनयुक्त होती है।
- B.फ्लोएम चालनी नलिकाएं संरचना में जाइलम वाहिकाओं के समान होती हैं।
- C.मृत जाइलम वाहिकाएं पौधों को संरचनात्मक सहारा देती हैं।
- D.जाइलम वाहिकाओं से जल का परिवहन होता है।
उत्तर देखें
फ्लोएम की चालनी नलिकाएं जाइलम वाहिकाओं जैसी नहीं होतीं: चालनी नलिकाएं पतली भित्ति और चालनी पट्टिकाओं वाली जीवित कोशिकाएं हैं, जबकि परिपक्व जाइलम वाहिकाएं मोटी लिग्निनयुक्त भित्ति वाली मृत, खोखली नलियां हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सक्रिय रूप से श्वसन करते ऊतकों में कार्बन डाइऑक्साइड के उच्च आंशिक दाब के कारण हीमोग्लोबिन द्वारा ऑक्सीजन छोड़ने की व्याख्या निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्रभाव सबसे अच्छी तरह करता है?
- A.हाल्डेन प्रभाव
- B.एली प्रभाव
- C.बोर प्रभाव
- D.ईगल प्रभाव
उत्तर देखें
कार्बन डाइऑक्साइड और अम्लता बढ़ने पर हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन से बंधने की क्षमता घट जाती है, इसे बोर प्रभाव कहते हैं; इससे ऑक्सीजन वहीं छूटती है जहां ऊतकों को इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →धमनियों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही नहीं है?
- A.इनका भीतरी आस्तर शल्की अंतःकला से बना होता है।
- B.इनकी मध्य परत चिकनी पेशी और प्रत्यास्थ तंतुओं से बनी होती है।
- C.इनकी बाहरी परत कोलेजन तंतुओं वाले तंतुमय संयोजी ऊतक से बनी होती है।
- D.धमनियों की भित्ति अन्य सभी रक्त वाहिकाओं में सबसे पतली होती है।
उत्तर देखें
धमनियों की भित्ति सभी रक्त वाहिकाओं में सबसे मोटी होती है, सबसे पतली नहीं, क्योंकि वे हृदय से रक्त को ऊंचे दाब पर दूर ले जाती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सी एक अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी नहीं है?
- A.जल में कैल्शियम ऑक्साइड का घुलना
- B.वनस्पति पदार्थ का अपघटन होकर कम्पोस्ट बनना
- C.लेड नाइट्रेट का अपघटन
- D.सोडियम हाइड्रॉक्साइड का जल के साथ तनुकरण
उत्तर देखें
लेड नाइट्रेट तेज़ गर्म करने पर ही टूटता है, यानी यह अभिक्रिया ऊष्मा लेती है और ऊष्माशोषी है। गर्म करने पर लेड नाइट्रेट से लेड ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का भूरा धुआं और ऑक्सीजन बनते हैं: 2Pb(NO3)2 → 2PbO + 4NO2 + O2।
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