निम्नलिखित में से कौन सा काम सांख्यिकीय व्यवसाय रजिस्टर का बताया गया कार्य नहीं है?
- A.आर्थिक सर्वेक्षणों के लिए लक्षित समूह की पहचान
- B.सर्वेक्षण के नमूने चुनने में सहायता
- C.छोटे उद्यमों को ऋण गारंटी मंजूर करना
- D.व्यावसायिक जनसांख्यिकी के आंकड़े तैयार करना
सही उत्तर
C. छोटे उद्यमों को ऋण गारंटी मंजूर करना
व्याख्या
सही उत्तर छोटे उद्यमों को ऋण गारंटी मंजूर करना है, क्योंकि यह वित्तपोषण का काम है और किसी सांख्यिकीय रजिस्टर से इसका संबंध नहीं है। यह रजिस्टर निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र के भीतर आर्थिक गतिविधियों में लगी पंजीकृत सांख्यिकीय इकाइयों का केंद्रीय और नियमित रूप से अद्यतन डेटाबेस है, जिसमें व्यवसाय, उद्यम तथा प्रतिष्ठान, उनकी प्रमुख विशेषताएं और इकाइयों के बीच संबंध दर्ज होते हैं। विकल्प A, B और D इस प्रश्न के लिए गलत विकल्प हैं, क्योंकि ये तीनों वास्तव में बताए गए कार्य हैं, अर्थात रजिस्टर आर्थिक सर्वेक्षणों का लक्षित समूह पहचानता है, नमूना चयन में सहायता करता है और व्यावसायिक जनसांख्यिकी आंकड़े तैयार करने में सक्षम बनाता है। वह ऐसी जानकारी के लिए समान ढांचा भी देता है और विभिन्न आंकड़ा स्रोतों में एकरूपता रखता है, इसीलिए उसे आर्थिक सांख्यिकी प्रणाली की मूलभूत अवसंरचना कहा गया है।
पूरा लेख पढ़ें: सांख्यिकीय व्यवसाय रजिस्टर पर एमएसएमई और सांख्यिकी मंत्रालय में करार
अभ्यास प्रश्न
एमएसएमई मंत्रालय और सांख्यिकी मंत्रालय के बीच हुआ समझौता ज्ञापन किसके विकास और सुदृढ़ीकरण के लिए है?
- A.सांख्यिकीय व्यवसाय रजिस्टर
- B.उद्योगों का वार्षिक सर्वेक्षण
- C.औद्योगिक उत्पादन सूचकांक
- D.उपभोक्ता मूल्य सूचकांक
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सांख्यिकीय व्यवसाय रजिस्टर
व्याख्या
सही उत्तर सांख्यिकीय व्यवसाय रजिस्टर है। समझौता ज्ञापन प्रासंगिक आंकड़े साझा करने के तंत्र को संस्थागत रूप देता है, ताकि यह रजिस्टर विकसित और सुदृढ़ हो सके, और इसके लिए उद्यम पंजीकरण का इकाई-वार डेटा दोतरफा एपीआई से सांख्यिकी मंत्रालय तक पहुंचेगा तथा राष्ट्रीय सांख्यिकी व्यवसाय रजिस्टर तैयार करने में लगेगा। विकल्प B गलत है, क्योंकि उद्योगों का वार्षिक सर्वेक्षण कारखानों का सर्वेक्षण है और इस समझौते का विषय नहीं था, चाहे बेहतर रजिस्टर ऐसे सर्वेक्षणों का समूह पहचानने में मदद करता हो। विकल्प C गलत है, क्योंकि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक खनन, निर्माण और बिजली का उत्पादन मापता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक परिवारों के खुदरा मूल्य मापता है और अलग उत्पाद है। रजिस्टर को आर्थिक सांख्यिकी प्रणाली की मूलभूत अवसंरचना बताया गया है, जिसमें निर्धारित क्षेत्र की पंजीकृत सांख्यिकीय इकाइयों का ब्यौरा नियमित रूप से अद्यतन होता रहता है।
समझौते के तहत किस पंजीकरण प्रणाली का इकाई-वार डेटा सांख्यिकी मंत्रालय से साझा होगा?
- A.जीएसटी पंजीकरण
- B.उद्यम पंजीकरण
- C.श्रम सुविधा पंजीकरण
- D.कंपनी रजिस्ट्रार के पास कंपनी पंजीकरण
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. उद्यम पंजीकरण
व्याख्या
सही उत्तर उद्यम पंजीकरण है, जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की वह प्रणाली है जिस पर उद्यम स्वयं को सूक्ष्म, लघु या मध्यम इकाई के रूप में दर्ज कराते हैं। समझौते के तहत उसका इकाई-वार डेटा एपीआई के जरिये सांख्यिकी मंत्रालय से साझा होगा और दोतरफा एपीआई राष्ट्रीय सांख्यिकी व्यवसाय रजिस्टर तैयार करने के लिए आंकड़े देगा। विकल्प A गलत है, क्योंकि वस्तु एवं सेवा कर पंजीकरण कर अधिकारियों के पास है और समझौते में उसका नाम नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि श्रम मंत्रालय के अनुपालन पोर्टल का उल्लेख नहीं हुआ। विकल्प D गलत है, क्योंकि कंपनी निगमन के अभिलेख कॉरपोरेट कार्य तंत्र के पास रहते हैं। समझौते से बताया गया लाभ यह है कि व्यावसायिक जानकारी की व्यापकता, एकरूपता और विश्वसनीयता सुधरेगी।
दस्तावेजों की शुरुआती जांच के अनुसार सिंडिकेट नौ महीनों में कूरियर चैनलों से कितना तस्करी का सोना भेज चुका था?
- A.करीब 318 किग्रा, कीमत लगभग 475 करोड़ रुपये
- B.करीब 118 किग्रा, कीमत लगभग 160 करोड़ रुपये
- C.करीब 640 किग्रा, कीमत लगभग 900 करोड़ रुपये
- D.करीब 45 किग्रा, कीमत लगभग 70 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. करीब 318 किग्रा, कीमत लगभग 475 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर करीब 318 किग्रा, कीमत लगभग 475 करोड़ रुपये है। गिरफ्तारियों के बाद जांचे गए दस्तावेजों से पता चला कि मौजूदा कैलेंडर वर्ष के नौ महीनों में इतनी मात्रा में तस्करी का सोना उसी कूरियर आधारित नेटवर्क से भेजा और पहुंचाया जा चुका था, और इसी से गिरोह का वास्तविक आकार सामने आया। शेष विकल्पों में दी गई मात्रा तथा कीमत काल्पनिक हैं और मामले से मेल नहीं खातीं। परीक्षार्थियों को दोनों तरह के आंकड़े अलग-अलग रखने चाहिए: छापों के दौरान वास्तव में जब्त की गई मात्रा बहुत कम थी, जबकि इस प्रश्न का आंकड़ा उस कुल आवाजाही को दर्शाता है जो कागजात से उजागर हुई। गिरोह खेपों को छोटे-छोटे पार्सलों में बांटता था, ताकि हर पार्सल सामान्य दिखे।
इस कार्रवाई में कितना विदेशी सोना जब्त हुआ और उसकी अनुमानित कीमत क्या थी?
- A.3.25 किग्रा, कीमत लगभग 5.10 करोड़ रुपये
- B.6.61 किग्रा, कीमत लगभग 10.36 करोड़ रुपये
- C.12.40 किग्रा, कीमत लगभग 18.75 करोड़ रुपये
- D.18.20 किग्रा, कीमत लगभग 29.50 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 6.61 किग्रा, कीमत लगभग 10.36 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 6.61 किग्रा, कीमत लगभग 10.36 करोड़ रुपये है। इतना विदेशी मूल का सोना, वह भी पूरी तरह बार के रूप में, समन्वित अभियान के दौरान रोकी गई कूरियर खेपों से बरामद हुआ और सीमा शुल्क कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत जब्त कर लिया गया। बाकी तीनों विकल्पों में दी गई मात्रा और कीमत केवल भ्रमित करने के लिए रखी गई हैं तथा वास्तविक बरामदगी से मेल नहीं खातीं। याद रखने का आसान तरीका यह है कि साढ़े छह किलोग्राम के आसपास की यह जब्ती पूरे गिरोह का केवल दिखाई देने वाला हिस्सा थी, क्योंकि बाद में जांचे गए दस्तावेजों ने इसी कूरियर श्रृंखला से बीते महीनों में कहीं अधिक सोना जाने की बात उजागर की। मामले में ग्यारह लोग गिरफ्तार किए गए, जिनमें एक सरगना भी शामिल बताया गया।
कूरियर खेपों के जरिए विदेशी सोना भेजने वाले देशव्यापी तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किस एजेंसी ने किया?
- A.प्रवर्तन निदेशालय
- B.राजस्व खुफिया निदेशालय
- C.केंद्रीय जांच ब्यूरो
- D.राष्ट्रीय जांच एजेंसी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. राजस्व खुफिया निदेशालय
व्याख्या
सही उत्तर राजस्व खुफिया निदेशालय यानी डीआरआई है। यह एजेंसी वित्त मंत्रालय के अधीन काम करती है और सीमा शुल्क से जुड़ी खुफिया जानकारी तथा तस्करी रोकने के काम में विशेषज्ञ मानी जाती है। इसी एजेंसी ने भारत-बांग्लादेश सीमा से आ रहे सोने की सूचना पर कार्रवाई की, कई शहरों में कूरियर पार्सल रोके और सीमा शुल्क कानून के तहत सोना जब्त किया। विकल्प A यानी प्रवर्तन निदेशालय गलत है, क्योंकि वह मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा तथा धनशोधन से जुड़े मामलों को देखता है और इस जब्ती में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। विकल्प C यानी केंद्रीय जांच ब्यूरो गलत है, क्योंकि वह भ्रष्टाचार और गंभीर अपराधों की सामान्य जांच एजेंसी है। विकल्प D यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी गलत है, क्योंकि उसका दायरा आतंकवाद और उससे जुड़े अपराधों तक सीमित है। परीक्षार्थी तस्करी तथा सीमा शुल्क के मामलों को डीआरआई से जोड़कर याद रखें।