निम्नलिखित में से कौन-सा एक मृद्भांड (पॉटरी) प्रकार नहीं है?
- A.OCP
- B.CCE
- C.NBP
- D.BRW
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, CCE। CCE किसी मृद्भांड परंपरा का नाम नहीं है; बाकी तीनों प्रारंभिक भारत के प्रसिद्ध मृद्भांड प्रकार हैं।
पुरातत्वविद प्रारंभिक भारतीय स्थलों की परतों में मिले मृद्भांडों से उनका काल और समूह तय करते हैं। OCP यानी गेरुए रंग के मृद्भांड ऊपरी गंगा–यमुना दोआब में लगभग दूसरी सहस्राब्दी ई.पू. में मिलते हैं और ताम्र निधियों से जुड़े हैं। BRW यानी काले और लाल मृद्भांड भीतर और किनारे से काले तथा बाहर से लाल होते हैं, जो उल्टा रखकर पकाने से बनते हैं; ये ताम्रपाषाण से महापाषाण स्थलों तक मिलते हैं। NBP यानी उत्तरी काले पॉलिशदार मृद्भांड महाजनपदों और मौर्यों के काल (लगभग 700–200 ई.पू.) के चमकीले, उत्कृष्ट बर्तन हैं। उत्तर वैदिक काल से जुड़े चित्रित धूसर मृद्भांड (PGW) भी ऐसा ही एक प्रकार है।
A गलत है क्योंकि OCP गेरुए रंग के मृद्भांड हैं, एक प्रसिद्ध प्रकार। C गलत है क्योंकि NBP उत्तरी काले पॉलिशदार मृद्भांड हैं, द्वितीय नगरीकरण के उत्कृष्ट बर्तन। D गलत है क्योंकि BRW काले और लाल मृद्भांड हैं, जो पूरे भारत में मिलते हैं।
Exam tip: गंगा घाटी का मृद्भांड क्रम: OCP, फिर BRW, फिर PGW (उत्तर वैदिक), फिर NBP (महाजनपद, मौर्य)।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंकथन I: अंग्रेज़ों ने भारत पर भारतीय सिविल सेवा के नेतृत्व वाली एक आधुनिक नौकरशाही के माध्यम से शासन किया, जिसके सदस्यों की भर्ती खुली प्रतियोगिता पर आधारित योग्यता से होती थी कथन II: भारतीय सिविल सेवा भारतीयों की पूरे मन से भागीदारी पर आधारित थी
- A.दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है
- B.दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं, परंतु कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है
- C.कथन I सत्य है, परंतु कथन II असत्य है
- D.कथन I असत्य है, परंतु कथन II सत्य है
उत्तर देखें
भारतीय सिविल सेवा एक आधुनिक, योग्यता-आधारित नौकरशाही थी, जिसमें 1853 से खुली प्रतियोगी परीक्षाओं से भर्ती होती थी, पर व्यवहार में भारतीय दशकों तक इससे बाहर रखे गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सोलहवीं शताब्दी के ग्रंथ चंडीमंगल की रचना किसने की थी?
- A.हेम सरस्वती
- B.माधव कंदली
- C.तुकाराम
- D.मुकुंदराम चक्रवर्ती
उत्तर देखें
'कविकंकण' उपाधि से सम्मानित बांग्ला कवि मुकुंदराम चक्रवर्ती ने सोलहवीं शताब्दी में चंडीमंगल की रचना की। मंगलकाव्य किसी देवता की स्तुति में लिखी गई लंबी बांग्ला कथा-कविताएँ हैं, और चंडीमंगल देवी चंडी का गुणगान करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →महात्मा गांधी के दांडी मार्च से प्रेरित होकर तमिलनाडु में सी. राजगोपालाचारी ने नमक यात्रा कहाँ से कहाँ तक निकाली?
- A.तिरुनेलवेली से नागरकोइल
- B.कांचीपुरम से महाबलीपुरम
- C.त्रिचिनापल्ली से तंजौर तट पर वेदारण्यम
- D.चेन्नई से वेल्लोर
उत्तर देखें
अप्रैल 1930 में सी. राजगोपालाचारी स्वयंसेवकों के एक दल को तिरुचिरापल्ली, जिसे तब त्रिचिनापल्ली कहा जाता था, से तंजौर तट पर वेदारण्यम ले गए, जहाँ उन्होंने नमक कानून तोड़ा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किस विदेशी यात्री ने भारत के हीरों और हीरे की खानों के बारे में विस्तार से चर्चा की है?
- A.फ्रांस्वा बर्नियर
- B.जीन-बैप्टिस्ट टैवर्नियर
- C.जीन डी थेवेनो
- D.अब्बे बार्थेलेमी कैरे
उत्तर देखें
वे फ्रांसीसी रत्न व्यापारी थे और उनके यात्रा वृत्तांत में भारत के हीरों और खानों का विस्तृत वर्णन है। टैवर्नियर ने लगभग 1630 से 1668 के बीच पूर्व की छह यात्राएँ कीं और शाहजहाँ व औरंगज़ेब के शासनकाल में कई बार भारत आए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए : (शब्द : विवरण) 1. एरिपत्ति : वह भूमि, जिसका राजस्व गाँव के तालाब के रखरखाव के लिए अलग रखा जाता था 2. तनियूर : किसी एक ब्राह्मण या ब्राह्मणों के समूह को दान किए गए गाँव 3. घटिका : सामान्यतः मंदिरों से जुड़े विद्यालय उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
- A.1 और 2
- B.केवल 3
- C.2 और 3
- D.1 और 3
उत्तर देखें
एरिपत्ति और घटिका का विवरण सही है, पर तनियूर ब्राह्मणों को दान किए गए गाँव नहीं थे। ये शब्द आरंभिक मध्यकालीन दक्षिण भारत, विशेषकर पल्लव और चोल काल के अभिलेखों में मिलते हैं।
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