निम्नलिखित में से कौन भारत के एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (IGMDP) के प्रणेता थे?
- A.हरगोविंद खुराना
- B.विक्रम साराभाई
- C.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
- D.होमी जे. भाभा
सही उत्तर
C. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
व्याख्या
सही उत्तर है C, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम। एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम 1983 में स्वीकृत हुआ और डीआरडीओ ने इसे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में चलाया, इसीलिए उन्हें भारत का मिसाइल पुरुष कहा जाता है। इस कार्यक्रम में पाँच मिसाइलें बनीं, जिन्हें P-A-T-N-A से याद रखा जाता है - पृथ्वी (सतह से सतह), अग्नि (बैलिस्टिक), त्रिशूल (कम दूरी की सतह से हवा), नाग (टैंक रोधी) और आकाश (मध्यम दूरी की सतह से हवा)। मुख्य लक्ष्य पूरे होने पर 2008 में इसे औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया गया। कलाम ने 1998 के पोखरण-द्वितीय परीक्षणों का भी मार्गदर्शन किया और 2002 से 2007 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। विकल्प A गलत है, क्योंकि हरगोविंद खुराना को आनुवंशिक कूट पर कार्य के लिए 1968 का नोबेल पुरस्कार मिला था। विकल्प B गलत है, क्योंकि विक्रम साराभाई भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक कहे जाते हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि होमी जे. भाभा ने भारत का परमाणु कार्यक्रम खड़ा किया। परीक्षा टिप: कलाम - मिसाइल; साराभाई - अंतरिक्ष; भाभा - परमाणु ऊर्जा।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंभारत की कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल पृथ्वी-II का सफल परीक्षण ______ से किया गया।
- A.रटलैंड द्वीप, अंडमान
- B.श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश
- C.चांदीपुर, ओडिशा
- D.मछलीपट्टनम, आंध्र प्रदेश
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चांदीपुर, ओडिशा
व्याख्या
सही उत्तर है C, चांदीपुर, ओडिशा। पृथ्वी-II का परीक्षण ओडिशा के तट पर स्थित चांदीपुर के एकीकृत परीक्षण रेंज से किया जाता है, जो डीआरडीओ की मिसाइल और रॉकेट परीक्षण रेंज है। पृथ्वी-II भारतीय वायुसेना की सतह से सतह पर मार करने वाली कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में चले एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम के अंतर्गत बनाया गया। यह तरल ईंधन से चलती है, इसकी मारक क्षमता लगभग 350 किलोमीटर है और यह 500 से 1,000 किलोग्राम तक का आयुध ले जा सकती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि अंडमान के रटलैंड द्वीप पर कोई मिसाइल परीक्षण रेंज नहीं है। विकल्प B गलत है, क्योंकि श्रीहरिकोटा इसरो का उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र है, मिसाइल रेंज नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि मछलीपट्टनम एक तटीय नगर है, वहां ऐसी कोई सुविधा नहीं है। परीक्षा टिप: आईजीएमडीपी की मिसाइलें - पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, आकाश और नाग; परीक्षण चांदीपुर में, उपग्रह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा से।
भारत सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा तय मानकों के अनुसार, मोबाइल हैंडसेट के सभी नए डिजाइनों के लिए 1 सितंबर 2012 से 1 ग्राम मानव ऊतक पर औसत अनुमेय विशिष्ट अवशोषण दर (SAR) सीमा ______ है।
- A.1.8 W/kg
- B.2.1 W/kg
- C.2.2 W/kg
- D.1.6 W/kg
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 1.6 W/kg
व्याख्या
सही उत्तर है D, 1.6 W/kg। विशिष्ट अवशोषण दर यह मापती है कि हैंडसेट से निकलने वाली रेडियो ऊर्जा शरीर कितनी मात्रा में सोखता है, और इसकी इकाई वाट प्रति किलोग्राम ऊतक है। दूरसंचार विभाग ने 1 सितंबर 2012 से भारत में बिकने वाले हर नए मोबाइल हैंडसेट डिजाइन के लिए 1 ग्राम मानव ऊतक पर औसत 1.6 W/kg की सीमा तय की। इससे पहले भारत में 10 ग्राम ऊतक पर औसत 2.0 W/kg की पुरानी सीमा लागू थी। नियमों के अनुसार SAR मान हैंडसेट और उसके डिब्बे पर छपा होना चाहिए, और खरीदार निर्माता द्वारा बताए गए कोड से इसे जांच सकता है। भारत की यह सीमा अमेरिका के मानक के समान है। विकल्प A गलत है, क्योंकि 1.8 W/kg कहीं निर्धारित सीमा नहीं है। विकल्प B गलत है, क्योंकि 2.1 W/kg कोई SAR मानक नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि 2.2 W/kg केवल भ्रमित करने वाला विकल्प है। परीक्षा टिप: भारत में SAR सीमा 1 ग्राम ऊतक पर 1.6 W/kg है, जो 1 सितंबर 2012 से लागू है।
भारत के सौर अभियान आदित्य-एल1 को किस बिंदु के चारों ओर हेलो कक्षा में स्थापित किया गया है?
- A.द्वितीय लैग्रांज बिंदु, एल2
- B.प्रथम लैग्रांज बिंदु, एल1
- C.सूर्य के चारों ओर ध्रुवीय कक्षा
- D.पृथ्वी के चारों ओर भूस्थिर कक्षा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रथम लैग्रांज बिंदु, एल1
व्याख्या
सही उत्तर B, प्रथम लैग्रांज बिंदु एल1 है, जो सूर्य-पृथ्वी निकाय का वह बिंदु है और सूर्य की दिशा में पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है। लैग्रांज बिंदु वह स्थान है जहाँ दोनों पिंडों का गुरुत्वाकर्षण और कक्षीय गति संतुलित हो जाते हैं, इसलिए यान वहाँ बहुत कम ईंधन से बना रह सकता है, और एल1 से सूर्य को बिना ग्रहण या अवरोध लगातार देखा जा सकता है। आदित्य-एल1 2 सितंबर 2023 को पीएसएलवी से छोड़ा गया।
विकल्प A, एल2, सूर्य से पृथ्वी के दूसरी ओर है और उसका उपयोग वे दूरबीनें करती हैं जो सूर्य से विपरीत दिशा में देखती हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि यान सूर्य-पृथ्वी निकाय के एक बिंदु की परिक्रमा करता है, सूर्य की नहीं। विकल्प D उसे पृथ्वी की कक्षा में रख देता, जहाँ प्रतिदिन कुछ समय पृथ्वी दृश्य रोक देती, और अभियान को ठीक यही टालना था। जोड़ी याद रखें: सूर्य देखने के लिए एल1, दूरी 15 लाख किलोमीटर।
नाविक तारामंडल कितने उपग्रहों के साथ बनाया गया था?
- A.चार
- B.सात
- C.नौ
- D.चौबीस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सात
व्याख्या
सही उत्तर B, सात है। प्रणाली सात उपग्रहों के तारामंडल के रूप में बनाई गई, जिनमें तीन भूस्थिर कक्षा में और चार भूमध्यरेखीय तल से झुकी भूतुल्यकालिक कक्षाओं में हैं; इतनी छोटी संख्या पर्याप्त है क्योंकि सेवा क्षेत्र क्षेत्रीय है, वैश्विक नहीं। अप्रैल 2016 में छोड़े गए आईआरएनएसएस-1जी ने सातों का समूह पूरा किया।
विकल्प A, चार, केवल झुके उपग्रहों की संख्या है और उस अभ्यर्थी के लिए जाल है जिसे बँटवारा याद है पर कुल संख्या नहीं। विकल्प D, चौबीस, जीपीएस जैसी वैश्विक प्रणाली के आकार के लगभग बराबर है, जिसे पूरी पृथ्वी पर फैले उपग्रह चाहिए। विकल्प C, नौ, किसी प्रणाली से मेल नहीं खाता। बँटवारा तीन और चार के रूप में याद रखें, और यह भी कि दूसरी पीढ़ी के एनवीएस उपग्रह पहली पीढ़ी के पुराने होते उपग्रहों की जगह ले रहे हैं।
सितंबर 2015 में छोड़ा गया एस्ट्रोसैट भारत का किस प्रकार का पहला उपग्रह था?
- A.रडार प्रतिबिंबन उपग्रह
- B.समर्पित बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला
- C.नौवहन उपग्रह
- D.शैक्षिक उपग्रह
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. समर्पित बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला
व्याख्या
सही उत्तर B, समर्पित बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला है। एस्ट्रोसैट 28 सितंबर 2015 को पीएसएलवी से छोड़ा गया और उसके उपकरण एक ही ब्रह्मांडीय स्रोत को पराबैंगनी, दृश्य तथा एक्स-किरण बैंड में साथ देखते हैं, बहु-तरंगदैर्ध्य का अर्थ यही है और इसी से यह अभियान अपने आकार की अंतरिक्ष दूरबीनों में विशिष्ट बनता है।
विकल्प A रीसैट श्रेणी का वर्णन करता है, जो रडार से बादल के पार और रात में भी भूमि का चित्र लेती है। विकल्प C नाविक तारामंडल के आईआरएनएसएस और एनवीएस उपग्रहों का वर्णन है। विकल्प D 2004 के एडुसैट का वर्णन है, जो केवल शिक्षा और कक्षा प्रसारण के लिए बना पहला भारतीय उपग्रह था। इसी प्रथम सूची में दो और विज्ञान अभियान आते हैं: 2023 की आदित्य-एल1, पहली सौर वेधशाला, और 2024 का एक्सपोसैट, जो ब्रह्मांडीय एक्स-किरणों के ध्रुवण का अध्ययन करता है।