नाभिकीय रिएक्टर के पीछे मूल वैज्ञानिक सिद्धांत है
- A.नाभिकीय संलयन
- B.नियंत्रित नाभिकीय संलयन
- C.अनियंत्रित नाभिकीय विखंडन
- D.नियंत्रित नाभिकीय विखंडन
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है D, नियंत्रित नाभिकीय विखंडन। नाभिकीय रिएक्टर यूरेनियम-235 जैसे भारी नाभिकों को एक नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया में तोड़ता है, जिससे ऊष्मा एक स्थिर दर से निकलती है।
जब कोई धीमा न्यूट्रॉन यूरेनियम-235 के नाभिक से टकराता है, तो नाभिक दो हल्के नाभिकों में टूट जाता है, बहुत ऊर्जा छोड़ता है और दो-तीन नए न्यूट्रॉन बाहर फेंकता है, जो और नाभिकों को तोड़ सकते हैं। रिएक्टर में भारी जल या ग्रेफ़ाइट जैसा मंदक न्यूट्रॉनों को धीमा करता है, और कैडमियम या बोरॉन की नियंत्रक छड़ें अतिरिक्त न्यूट्रॉन सोख लेती हैं, ताकि हर विखंडन से औसतन केवल एक न्यूट्रॉन अगला विखंडन करे। बनी ऊष्मा से पानी उबलता है और भाप टरबाइन घुमाकर बिजली बनाती है।
A गलत है, क्योंकि हल्के नाभिकों के जुड़ने, यानी नाभिकीय संलयन, से सूर्य और हाइड्रोजन बम चलते हैं, आज के रिएक्टर नहीं।
B गलत है, क्योंकि नियंत्रित संलयन अभी ITER जैसे प्रयोगों में विकसित हो रहा है और इससे कोई बिजली रिएक्टर नहीं चलता।
C गलत है, क्योंकि अनियंत्रित विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया परमाणु बम का सिद्धांत है।
Exam tip: रिएक्टर = नियंत्रित विखंडन; परमाणु बम = अनियंत्रित विखंडन; सूर्य और हाइड्रोजन बम = संलयन।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंएक कप में स्थिर पड़े तरल के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. तरल के सभी बिंदुओं पर दाब समान होता है 2. दीवारों पर दाब लगता है। 3. तरल में हर जगह दाब होता है। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
स्थिर तरल दीवारों पर दाब डालता है और उसके हर बिंदु पर दाब होता है, पर यह दाब सभी गहराइयों पर बराबर नहीं होता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →परम शून्य ताप 0 केल्विन है। °C मात्रक में निम्नलिखित में से कौन-सा परम शून्य ताप है?
- A.0 °C
- B.-100 °C
- C.-273.15 °C
- D.-173.15 °C
उत्तर देखें
केल्विन पैमाने का शून्य जल के हिमांक से 273.15 डिग्री नीचे होता है। केल्विन और सेल्सियस पैमानों में एक डिग्री का मान बराबर होता है, इसलिए T(K) = t(°C) + 273.15।
पूरी व्याख्या पढ़ें →डाइनाइट्रोजन (N₂) और डाइऑक्सीजन (O₂) वायु के मुख्य घटक हैं, फिर भी वे आपस में अभिक्रिया करके नाइट्रोजन के ऑक्साइड नहीं बनाते, क्योंकि
- A.अभिक्रिया को आरंभ करने के लिए उत्प्रेरक चाहिए
- B.नाइट्रोजन के ऑक्साइड अस्थायी होते हैं
- C.अभिक्रिया ऊष्माशोषी है और इसके लिए बहुत ऊंचा ताप चाहिए
- D.वायु में N₂ और O₂ का स्टॉइकियोमीट्री अनुपात इस अभिक्रिया के लिए आदर्श नहीं है
उत्तर देखें
नाइट्रोजन और ऑक्सीजन तभी मिलते हैं जब बहुत अधिक ऊर्जा दी जाए। नाइट्रोजन अणु बहुत मजबूत त्रिबंध से बंधा होता है, इसलिए उसे तोड़ने में बहुत ऊर्जा लगती है, और अभिक्रिया N₂ + O₂ → 2NO ऊष्मा अवशोषित करती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निकल उत्प्रेरक की उपस्थिति में वनस्पति तेलों का हाइड्रोजनीकरण किसका उदाहरण है?
- A.प्रतिस्थापन अभिक्रिया।
- B.विलोपन अभिक्रिया।
- C.योगात्मक अभिक्रिया।
- D.मुक्त-मूलक बहुलकीकरण।
उत्तर देखें
तेल के कार्बन–कार्बन द्विबंधों पर हाइड्रोजन जुड़ जाती है। वनस्पति तेल असंतृप्त होते हैं: उनकी वसीय अम्ल श्रृंखलाओं में C=C द्विबंध होते हैं, जिनके कारण वे द्रव रहते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एक धनात्मक आवेश ऐसे स्थान में दक्षिण की ओर गतिमान है जहां चुंबकीय क्षेत्र उत्तर दिशा की ओर है। गतिमान आवेश अनुभव करेगा :
- A.उत्तर दिशा की ओर एक विक्षेपक बल।
- B.पूर्व दिशा की ओर एक विक्षेपक बल।
- C.पश्चिम दिशा की ओर एक विक्षेपक बल।
- D.कोई विक्षेपक बल नहीं।
उत्तर देखें
आवेश ठीक क्षेत्र की उल्टी दिशा में चल रहा है, और चुंबकीय क्षेत्र अपनी रेखा पर चलते आवेश पर कोई बल नहीं लगाता।
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