मोबाइल नेटवर्क गुणवत्ता परखने वाला स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट कौन सी संस्था कराती है?
- A.भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण
- B.भारतीय मानक ब्यूरो
- C.डाक विभाग
- D.सी-डॉट
सही उत्तर
A. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण
व्याख्या
सही उत्तर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई है, जो इस क्षेत्र का नियामक है और नियुक्त एजेंसी के जरिए स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट कराकर नतीजे दूरसंचार उपभोक्ताओं की जानकारी के लिए प्रकाशित करता है। इसका उद्देश्य दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की आवाज और डेटा सेवाओं की गुणवत्ता को वास्तविक समय में परखना तथा कंपनियों पर सेवा सुधारने का दबाव बनाना है। विकल्प B यानी भारतीय मानक ब्यूरो देश की मानक संस्था है और मोबाइल नेटवर्क नहीं परखती। विकल्प C यानी डाक विभाग डाक सेवाएं चलाता है। विकल्प D यानी सी-डॉट दूरसंचार अनुसंधान और विकास संस्था है, जो तकनीक बनाती है, कंपनियों की जांच नहीं करती। ट्राई के परीक्षण में कवरेज, कॉल सेटअप सफलता, कॉल ड्रॉप, ध्वनि गुणवत्ता और डेटा गति शामिल रहती है।
पूरा लेख पढ़ें: ट्राई ने असम के सोनितपुर में मोबाइल नेटवर्क परीक्षण के नतीजे जारी किए
अभ्यास प्रश्न
ट्राई के सोनितपुर ड्राइव टेस्ट में सबसे अधिक औसत डाउनलोड गति किस कंपनी की रही?
- A.एयरटेल
- B.बीएसएनएल
- C.रिलायंस जियो
- D.वोडाफोन आइडिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. रिलायंस जियो
व्याख्या
सही उत्तर रिलायंस जियो है, जिसकी परीक्षण मार्गों पर औसत डाउनलोड गति 221.18 एमबीपीएस रही और यह चारों कंपनियों में सबसे अधिक थी। विकल्प A यानी एयरटेल 116.11 एमबीपीएस के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जो लगभग आधा है, हालांकि अपलोड में एयरटेल 21.09 एमबीपीएस के साथ रिलायंस जियो की 15.98 एमबीपीएस से आगे रहा। विकल्प D यानी वोडाफोन आइडिया की औसत डाउनलोड गति 20.04 और अपलोड 6.69 एमबीपीएस रही। विकल्प B यानी बीएसएनएल 11.72 एमबीपीएस डाउनलोड और 4.32 एमबीपीएस अपलोड के साथ सबसे पीछे रहा तथा आवाज सेवा में भी उसका प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा, क्योंकि उसकी 476 में से 301 कॉल कट गईं। परीक्षा के लिए डाउनलोड और अपलोड के अलग-अलग अव्वल याद रखें, क्योंकि ड्राइव टेस्ट ने इन दोनों स्तंभों में अलग-अलग कंपनियों को शीर्ष पर रखा है।
ड्राइव टेस्ट जिस सोनितपुर जिले में हुआ, वह किस राज्य में है?
- A.मेघालय
- B.असम
- C.त्रिपुरा
- D.मणिपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. असम
व्याख्या
सही उत्तर असम है। यह ड्राइव टेस्ट सोनितपुर जिले के हिस्सों में किया गया, जो असम लाइसेंस सेवा क्षेत्र में आता है, और इसकी निगरानी ट्राई के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने की। लाइसेंस सेवा क्षेत्र वे इकाइयां हैं जिनके आधार पर भारत में दूरसंचार लाइसेंस दिए जाते हैं और ये प्रायः राज्य की सीमाओं का अनुसरण करती हैं, इसीलिए रिपोर्ट में बार-बार असम एलएसए का उल्लेख है। विकल्प A, C और D क्रमशः मेघालय, त्रिपुरा और मणिपुर हैं, जो पूर्वोत्तर के अन्य राज्य हैं और उनके अपने सेवा क्षेत्र हैं, पर इस परीक्षण में वे शामिल नहीं थे। जिला, राज्य और निगरानी कार्यालय को साथ जोड़कर याद रखें, क्योंकि प्रश्न प्रायः स्थान, अवधि और अव्वल कंपनी पर ही बनते हैं और तीनों जानकारियां एक ही विज्ञप्ति से आती हैं।
तकनीक के विकास, सत्यापन और उद्योग द्वारा अपनाए जाने के बीच सेतु के रूप में किस संस्था का नाम लिया गया?
- A.एआरएआई
- B.सीएसआईआर
- C.डीआरडीओ
- D.आईसीएआर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. एआरएआई
व्याख्या
सही उत्तर एआरएआई यानी भारतीय वाहन अनुसंधान संघ है। कार्यक्रम में एच. डी. कुमारस्वामी ने एआरएआई जैसी संस्थाओं की भूमिका रेखांकित की, जो किसी तकनीक के विकास, उसके सत्यापन और उद्योग द्वारा उसे अपनाने के बीच की दूरी पाटती हैं। यह भूमिका समर्थित तकनीकों के गतिशीलता संबंधी दायरे से स्वाभाविक रूप से मेल खाती है। विकल्प B यानी सीएसआईआर वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद है, जो सामान्य वैज्ञानिक शोध नेटवर्क है और यहां उसका नाम नहीं आया। विकल्प C यानी डीआरडीओ रक्षा अनुसंधान और विकास से जुड़ा है। विकल्प D यानी आईसीएआर कृषि अनुसंधान और शिक्षा की शीर्ष संस्था है। मंत्री ने सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप की पूरक भूमिकाओं की भी चर्चा की, जिसमें सत्यापन की कड़ी एआरएआई ने जोड़ी।
एमएचआई इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर कार्यक्रम ने दस तकनीकों के लिए कितनी अनुदान सहायता दी?
- A.12.50 करोड़ रुपये
- B.35.72 करोड़ रुपये
- C.120 करोड़ रुपये
- D.500 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 35.72 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 35.72 करोड़ रुपये है। एक्सेलेरेटर कार्यक्रम के तहत दस तकनीकों को यही राशि अनुदान सहायता के रूप में दी गई, जिसका उद्देश्य उन्हें प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर तीन से स्तर नौ तक ले जाना था, यानी प्रयोगशाला के शुरुआती चरण से बाजार के लिए तैयार उत्पाद तक। विकल्प A, C और D में दी गई राशियां इस कार्यक्रम से जुड़ी नहीं हैं। ध्यान रखने वाली बड़ी संख्या मूल योजना का परिव्यय है, यानी भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना के चरण दो का परिव्यय, जो कहीं अधिक है और कई परियोजनाओं में साझा प्रौद्योगिकी विकास तथा सेवा अवसंरचना को सहारा देता है। परीक्षा में अक्सर ये दोनों आंकड़े आपस में उलझाकर पूछे जाते हैं, इसलिए छोटी राशि को एक्सेलेरेटर से और बड़ी राशि को योजना से जोड़कर याद रखें।
एक्सेलेरेटर का लक्ष्य तकनीकों को किन प्रौद्योगिकी तैयारी स्तरों के बीच ले जाना था?
- A.स्तर एक से स्तर पांच
- B.स्तर दो से स्तर छह
- C.स्तर तीन से स्तर नौ
- D.स्तर पांच से स्तर सात
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. स्तर तीन से स्तर नौ
व्याख्या
सही उत्तर स्तर तीन से स्तर नौ है। अनुदान सहायता का उद्देश्य दस तकनीकों को प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर तीन से, जहां अवधारणा प्रयोगशाला में सिद्ध होती है, स्तर नौ तक पहुंचाना था, जहां तकनीक अपने वास्तविक परिवेश में सिद्ध होकर बेची जा सकती है। मंत्री ने इसे सरल शब्दों में शुरुआती प्रोटोटाइप से व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादों की ओर बढ़ना बताया, जो इलेक्ट्रिक पावरट्रेन, हाई वोल्टेज मोटर नियंत्रण और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में हुआ। विकल्प A, B और D में बताई गई यात्रा बीच में ही रुक जाती है और बाजार के लिए तैयार उत्पाद तक नहीं पहुंचती, इसलिए वे कार्यक्रम की बनावट से मेल नहीं खातीं। सबसे ऊंचे स्तर तक की पूरी छलांग ही इस पहल की खास बात रही।