किस पूर्व राष्ट्रपति ने सुझाया था कि 2 अक्टूबर का दिन कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए रखा जाए?
- A.प्रणब मुखर्जी
- B.रामनाथ कोविंद
- C.ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
- D.द्रौपदी मुर्मू
सही उत्तर
B. रामनाथ कोविंद
व्याख्या
सही उत्तर रामनाथ कोविंद है। सीएसआर दिवस मनाने की बात उनके उस सुझाव से निकली जो उन्होंने राष्ट्रपति के रूप में 2019 के राष्ट्रीय सीएसआर पुरस्कार समारोह में रखा था कि 2 अक्टूबर का दिन कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए समर्पित किया जाए। इस तारीख के चुनाव से आयोजन महात्मा गांधी की जयंती और उनकी ट्रस्टीशिप की सोच से जुड़ जाता है, जिसे भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान देश में कॉरपोरेट जिम्मेदारी की नींव मानता है। विकल्प A उनसे पहले पद पर रहे राष्ट्रपति का नाम है और विकल्प C उससे भी पहले के राष्ट्रपति का, जबकि विकल्प D मौजूदा राष्ट्रपति का नाम है। इनमें से किसी का इस सुझाव से नाता नहीं है। संस्थान ने अब तक तीन बार सीएसआर दिवस मनाया है और ताजा आयोजन नई दिल्ली में होने वाले एनसीसीएसआर 2026 से पहले का कार्यक्रम था। इसलिए केवल विकल्प B सही है।
पूरा लेख पढ़ें: आईआईसीए ने तीसरा सीएसआर दिवस मनाया, एनसीसीएसआर 2026 दिल्ली में
अभ्यास प्रश्न
कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पर तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी एनसीसीएसआर 2026 की थीम क्या है?
- A.सतत विकास लक्ष्यों के लिए सीएसआर
- B.रि-एनविजनिंग द स्पिरिट ऑफ सीएसआर फॉर विकसित भारत: फ्रॉम कंप्लायंस टू कमिटमेंट
- C.ट्रस्टीशिप और भारतीय कंपनी
- D.खर्च से बदलाव तक
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सही उत्तर: B. रि-एनविजनिंग द स्पिरिट ऑफ सीएसआर फॉर विकसित भारत: फ्रॉम कंप्लायंस टू कमिटमेंट
व्याख्या
सही उत्तर रि-एनविजनिंग द स्पिरिट ऑफ सीएसआर फॉर विकसित भारत: फ्रॉम कंप्लायंस टू कमिटमेंट है। भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की ओर से यह सम्मेलन 6 और 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के द अशोक में हो रहा है, जिसमें देश भर से 550 से अधिक प्रतिनिधि जुट रहे हैं। विकल्प C ट्रस्टीशिप की गांधीवादी सोच की बात करता है, जिसे संस्थान देश में सीएसआर की जड़ मानता है, मगर वह थीम नहीं है। विकल्प D संबोधन में उठी उस मांग की झलक है कि खर्च से बदलाव और पालन से प्रतिबद्धता की ओर बढ़ा जाए, जो थीम का हिस्सा है मगर पूरी थीम नहीं। विकल्प A ऐसे सम्मेलनों में चलने वाला आम वाक्य है। थीम के साथ तारीखें, स्थान और प्रदर्शनी के चार विषय क्षेत्र युवा, गरीब, अन्नदाता तथा नारी शक्ति जोड़कर याद रखें।
कंपनी अधिनियम, 2013 की किस धारा का हवाला देकर कहा गया कि कंपनी की जिम्मेदारी कर्मचारियों, समुदाय और पर्यावरण के प्रति भी है, केवल शेयरधारकों के प्रति नहीं?
- A.धारा 135
- B.धारा 149
- C.धारा 166(2)
- D.धारा 173
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सही उत्तर: C. धारा 166(2)
व्याख्या
सही उत्तर धारा 166(2) है। भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कंपनी अधिनियम, 2013 के इसी प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि कानून खुद यह मानता है कि कंपनी समाज के भीतर काम करती है और उसकी जिम्मेदारी अपने कर्मचारियों, समुदाय तथा पर्यावरण के प्रति है, केवल शेयरधारकों के प्रति नहीं। विकल्प A, B और D इसी अधिनियम के दूसरे प्रावधानों के नाम हैं और मिलते-जुलते विकल्प के तौर पर रखे गए हैं, क्योंकि सीएसआर पर सवाल अक्सर उद्धृत धारा पर ही टिकते हैं। संबोधन में ढांचे का सफर भी बताया गया, पालन करो या कारण बताओ वाले शुरुआती दौर से 2019 के संशोधनों और 2021 के नियमों तक, जो अव्ययित सीएसआर खाता, कई साल की परियोजनाएं, धन के इस्तेमाल का प्रमाणन तथा प्रभाव आकलन लेकर आए। खर्च करीब 10 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में लगभग 35 हजार करोड़ रुपये हो गया।
कोल इंडिया के सीएचपी-साइलो से कितनी मशीनीकृत क्लोज्ड-लूप निकासी क्षमता मिलती है?
- A.26 साइलो से 232 मिलियन टन
- B.36 साइलो से 332 मिलियन टन
- C.46 साइलो से 432 मिलियन टन
- D.56 साइलो से 532 मिलियन टन
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सही उत्तर: C. 46 साइलो से 432 मिलियन टन
व्याख्या
सही उत्तर 46 साइलो से 432 मिलियन टन है। मंत्रालय के वक्तव्य में दर्ज है कि 46 सीएचपी-साइलो कोल इंडिया को 432 मिलियन टन की मशीनीकृत क्लोज्ड-लूप निकासी क्षमता देते हैं और कंपनी शुरू होने वाली ग्रीनफील्ड खदानों में ऐसे और साइलो बनाने पर विचार कर रही है। ये साइलो उस व्यापक निवेश का हिस्सा हैं जिसका लक्ष्य अधिक आपूर्ति से सुनिश्चित आपूर्ति की ओर बढ़ना है, और जिसमें फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी, तेज लोडिंग प्रणाली तथा डिजिटल निगरानी भी शामिल हैं। विकल्प ए, बी और डी में गढ़े गए आंकड़े जोड़े गए हैं, इसलिए वे गलत हैं। निकासी क्यों महत्वपूर्ण है, यह भी समझें: कोयला पिटहेड से उठाकर उपभोक्ता तक पहुंचाना होता है और इस छमाही में कंपनी ने 63 मिलियन टन पिटहेड भंडार का उपयोग किया, जो तभी संभव है जब उसे ढोने की क्षमता मौजूद हो।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में घरेलू कोयले से बिजली उत्पादन कितना रहा?
- A.582.5 बिलियन यूनिट
- B.610.2 बिलियन यूनिट
- C.640.05 बिलियन यूनिट
- D.668.4 बिलियन यूनिट
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सही उत्तर: C. 640.05 बिलियन यूनिट
व्याख्या
सही उत्तर 640.05 बिलियन यूनिट है। घरेलू कोयले से बिजली उत्पादन वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में 640.05 बिलियन यूनिट रहा, जबकि एक वर्ष पहले की समान अवधि में यह 582.5 बिलियन यूनिट था; यानी लगभग 57.5 बिलियन यूनिट या 9.9 प्रतिशत की वृद्धि। विकल्प ए यानी 582.5 बिलियन यूनिट पिछले वर्ष का आंकड़ा है और अपेक्षित जाल है। विकल्प बी और डी गढ़ी गई संख्याएं हैं, जो वक्तव्य में नहीं हैं। मंत्रालय इस तुलना से यह निष्कर्ष निकालता है कि कोयला आपूर्ति प्रणाली की अंतिम परीक्षा यही है कि वह बिजली उत्पादन को सहारा दे पाती है या नहीं, इसलिए उत्पादन का आंकड़ा उठाव और प्रेषण के आंकड़ों के साथ पढ़ा जाता है। इकाई भी याद रखें: कोयला मिलियन टन में और बिजली उत्पादन बिलियन यूनिट में मापा जाता है।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कोल इंडिया के उठाव का लगभग कितना हिस्सा बिजली क्षेत्र को गया?
- A.59 प्रतिशत
- B.69 प्रतिशत
- C.79 प्रतिशत
- D.89 प्रतिशत
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सही उत्तर: C. 79 प्रतिशत
व्याख्या
सही उत्तर लगभग 79 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कोल इंडिया ने जो कोयला उठाया, उसका करीब 79 प्रतिशत बिजली क्षेत्र को भेजा गया, जिससे पता चलता है कि कंपनी की वितरण रणनीति में बिजली उत्पादन सबसे ऊपर है। संख्या में देखें तो बिजली क्षेत्र को प्रेषण 302.8 मिलियन टन रहा, जबकि एक वर्ष पहले यह 285.4 मिलियन टन था, यानी 17.4 मिलियन टन या 6.1 प्रतिशत की वृद्धि। वक्तव्य में यह भी कहा गया है कि कंपनी सामान्यतः अपना लगभग चार-पांचवां कोयला बिजली क्षेत्र को देती है, और चार-पांचवां कहना इसी अनुपात को कहने का दूसरा तरीका है, इसलिए दोनों को जोड़कर याद रखें। विकल्प ए और बी हिस्सा कम बताते हैं, विकल्प डी अधिक। दूसरी तिमाही में कंपनी ने बिजली संयंत्रों को 148.20 मिलियन टन भेजा, पिछले वर्ष 133.50 मिलियन टन।