किराना दुकानों को खरीदार के रूप में डिजिटल बनाने वाली डिजीदुकान पहल किस खुले नेटवर्क की है?
- A.ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी)
- B.गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम)
- C.भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम
- D.ओपन क्रेडिट इनेबलमेंट नेटवर्क
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स है। डिजीदुकान ओएनडीसी का वह प्रयास है जो खुदरा क्षेत्र के सामान्य व्यापार के लिए डिजिटल ढांचा बनाता है और किराना दुकानों को खरीदार मानकर उनकी खरीद डिजिटल करता है, वह भी मौजूदा वितरक तंत्र को हटाए बिना, उसे मजबूत करते हुए। इससे दुकानदार एक ही इंटरफेस पर कई ब्रांड, वितरकों और थोक विक्रेताओं से सामान खोज और मंगा सकता है तथा कीमत, व्यापार योजनाएं और उपलब्धता देख सकता है। यह मंच हैदराबाद, जयपुर और मुंबई में 21,000 से अधिक दुकानदारों को 450 से अधिक ब्रांड से जोड़ चुका है। विकल्प B गलत है, क्योंकि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस सरकारी खरीद का पोर्टल है, डिजीदुकान का नेटवर्क नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि वहां नामित भुगतान संस्था इस खुदरा पहल की संचालक नहीं है। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि वह एक अलग व्यवस्था है और डीपीआईआईटी के साथ इस गोलमेज बैठक की सह-आयोजक ओएनडीसी थी।
पूरा लेख पढ़ें: डिजीदुकान से 21,000 किराना दुकानें 450 ब्रांड से जुड़ीं
अभ्यास प्रश्न
भारत कॉमर्स चिंतन शिविर में बताया गया कि ओएनडीसी डिजीदुकान से कितने दुकानदार और ब्रांड जुड़े हैं?
- A.12,000 से अधिक दुकानदार और 300 से अधिक ब्रांड
- B.21,000 से अधिक दुकानदार और 450 से अधिक ब्रांड
- C.45,000 से अधिक दुकानदार और 800 से अधिक ब्रांड
- D.16,000 से अधिक दुकानदार और 250 से अधिक ब्रांड
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हैदराबाद, जयपुर और मुंबई में डिजीदुकान की यही पहुंच बताई गई, जो पिछली तिमाही के 12,000 से अधिक दुकानदारों से बढ़कर यहां तक आई है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ओएनडीसी के साथ भारत कॉमर्स चिंतन शिविर किस विभाग ने बुलाया था?
- A.उपभोक्ता मामले विभाग
- B.राजस्व विभाग
- C.उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग
- D.खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग
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इसी विभाग ने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स के साथ मिलकर नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में भारत कॉमर्स चिंतन शिविर बुलाया था और बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने की।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मौजूदा नीतियों के आधार पर नीति आयोग 2050 तक भारत की कोयला मांग कितनी आंकता है?
- A.1.5 अरब टन से अधिक
- B.2.6 अरब टन से अधिक
- C.3.4 अरब टन से अधिक
- D.4.2 अरब टन से अधिक
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बैठक में रखे अनुमान के अनुसार मौजूदा नीतियों के चलते मांग 2025 के करीब 1.25 अरब टन से बढ़कर 2050 तक 2.6 अरब टन से ऊपर पहुंच जाएगी, और शुद्ध शून्य की राह पर भी यह 1.8 अरब टन से अधिक बनी रहेगी, क्योंकि कोयले के तीन सबसे बड़े उपभोक्ता…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में कितना कोयला उत्पादन किया?
- A.778 मिलियन टन
- B.893 मिलियन टन
- C.1,041 मिलियन टन
- D.1,250 मिलियन टन
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यही आंकड़ा बैठक में रखा गया, जहां अधिकारियों ने यह भी बताया कि देश की 70 प्रतिशत से अधिक बिजली कोयले से बनती है, इसलिए बंद पड़े खंड और भी अहम हो जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कोयला मंत्रालय के अनुसार 2020 से आवंटित वाणिज्यिक कोयला खदानों में से कितनी उत्पादन कर रही हैं?
- A.137 में से 25
- B.125 में से 37
- C.137 में से 52
- D.90 में से 25
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गोवा की परामर्श बैठक में मंत्रालय ने बताया कि सुधारों की व्यवस्था आने के बाद आवंटित वाणिज्यिक खदानों में से थोड़ी ही उत्पादन तक पहुंची हैं, और कोयला सचिव ने कहा कि आवंटित पर बंद पड़ा खंड वह क्षमता है जो देश ने अलग रखी है पर उपयोग में नहीं…
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