केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने नवप्रवर्तकों के सामने वायु प्रदूषण प्रबंधन के कितने प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ी समस्याएँ रखीं?
- A.5
- B.7
- C.9
- D.12
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 9 है। श्री भूपेंद्र यादव ने वायु प्रदूषण प्रबंधन के नौ प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ी विशिष्ट समस्याएँ रखीं और नवप्रवर्तकों से चर्चा की कि उनकी तकनीकों को इन सभी के लिए कैसे ढाला, बड़े पैमाने पर फैलाया और जमीन पर उतारा जा सकता है। शेष विकल्पों में दी गई संख्याएँ नहीं बताई गईं। ये क्षेत्र प्रदूषण प्रबंधन की पूरी श्रृंखला को छूते हैं, अर्थात पहचान और निगरानी से लेकर पूर्वानुमान, प्रवर्तन तथा न्यूनीकरण तक; इसी कारण प्रस्तुत समाधान भी विविध थे। इनमें ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली, वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण और पीयूसी जाँच की छेड़छाड़-रोधी व्यवस्था, औद्योगिक उत्सर्जन उल्लंघनों की पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दहन दक्षता तथा डीजल जनरेटर उपकरणों की वास्तविक समय निगरानी, निर्माण एवं विध्वंस स्थलों पर धूल नियंत्रण, सस्ती मशीनी सड़क सफाई, सड़क धूल के पुनः उड़ने की निगरानी, गड्ढों की मरम्मत और मॉड्यूलर धूल नियंत्रण प्रणालियाँ शामिल थीं।
पूरा लेख पढ़ें: वायु प्रदूषण: भूपेंद्र यादव की स्टार्टअप्स से चर्चा
अभ्यास प्रश्न
17 अक्टूबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण के सस्ते और व्यापक समाधानों पर स्टार्टअप्स से बातचीत किसने की?
- A.श्री कीर्ति वर्धन सिंह
- B.श्री भूपेंद्र यादव
- C.सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा
- D.सीएक्यूएम के अध्यक्ष
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उन्होंने वायु प्रदूषण कम करने पर काम कर रहे स्टार्टअप्स तथा नवाचार कंपनियों से बातचीत की और स्वयं नौ प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ी समस्याएँ उनके सामने रखीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पर्यावरण मंत्रालय की स्टार्टअप्स के साथ यह बातचीत किस अभियान विषयवस्तु के अंतर्गत हुई?
- A.साफ हवा में हिस्सेदारी, हम सभी की है जिम्मेदारी
- B.स्वच्छ वायु, स्वस्थ जीवन
- C.मेरा शहर, मेरी हवा
- D.हवा बदलो, देश बदलो
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17 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और स्टार्टअप्स के बीच हुई बातचीत इसी अभियान विषयवस्तु के तहत चल रही हितधारक बैठकों की श्रृंखला का हिस्सा थी, जो स्वच्छ हवा की जिम्मेदारी हर नागरिक पर डालती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के अनुसार औद्योगिक उत्सर्जन में गड़बड़ी पकड़ने के लिए क्या आवश्यक है?
- A.ओसीईएमएस आँकड़ों को संयंत्र के संचालन आँकड़ों से जोड़ना
- B.पीयूसी प्रमाणपत्र का शुल्क बढ़ाना
- C.दिल्ली-एनसीआर में डीजल जनरेटर पूरी तरह बंद करना
- D.हर औद्योगिक इकाई का साप्ताहिक मानवीय निरीक्षण
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तकनीक आधारित प्रवर्तन पर बल देते हुए श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली की रीडिंग को इस आँकड़े से जोड़ना आवश्यक है कि संयंत्र वास्तव में कैसे चलाया जा रहा है, तभी गड़बड़ी पकड़ी जा सकेगी, और इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सीएक्यूएम की समीक्षा में पराली जलाने की निगरानी के लिए किन दो तकनीकों पर बल दिया गया?
- A.उपग्रह और भूमि रडार
- B.ड्रोन और कम लागत वाले सेंसर
- C.मौसम गुब्बारे और लिडार
- D.चल प्रयोगशालाएं और स्मॉग टावर
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समीक्षा में इनकी तैनाती पर चर्चा हुई ताकि तकनीक आधारित निगरानी हो सके और खेतों में आग की प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया जा सके।
पूरी व्याख्या पढ़ें →समीक्षा में चर्चा में आई सीआरएम मशीनों का पूरा नाम क्या है?
- A.फसल चक्र प्रबंधन मशीनें
- B.फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें
- C.जलवायु जोखिम न्यूनीकरण मशीनें
- D.केंद्रीय ग्रामीण मशीनीकरण उपकरण
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ये वही मशीनें हैं जो कटाई के बाद खेत में बची पराली को संभालती हैं, और आयोग ने दोनों जिलों में इनकी उपलब्धता तथा वास्तविक तैनाती दोनों की समीक्षा की।
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