इस कार्रवाई में कितना विदेशी सोना जब्त हुआ और उसकी अनुमानित कीमत क्या थी?
- A.3.25 किग्रा, कीमत लगभग 5.10 करोड़ रुपये
- B.6.61 किग्रा, कीमत लगभग 10.36 करोड़ रुपये
- C.12.40 किग्रा, कीमत लगभग 18.75 करोड़ रुपये
- D.18.20 किग्रा, कीमत लगभग 29.50 करोड़ रुपये
सही उत्तर
B. 6.61 किग्रा, कीमत लगभग 10.36 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 6.61 किग्रा, कीमत लगभग 10.36 करोड़ रुपये है। इतना विदेशी मूल का सोना, वह भी पूरी तरह बार के रूप में, समन्वित अभियान के दौरान रोकी गई कूरियर खेपों से बरामद हुआ और सीमा शुल्क कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत जब्त कर लिया गया। बाकी तीनों विकल्पों में दी गई मात्रा और कीमत केवल भ्रमित करने के लिए रखी गई हैं तथा वास्तविक बरामदगी से मेल नहीं खातीं। याद रखने का आसान तरीका यह है कि साढ़े छह किलोग्राम के आसपास की यह जब्ती पूरे गिरोह का केवल दिखाई देने वाला हिस्सा थी, क्योंकि बाद में जांचे गए दस्तावेजों ने इसी कूरियर श्रृंखला से बीते महीनों में कहीं अधिक सोना जाने की बात उजागर की। मामले में ग्यारह लोग गिरफ्तार किए गए, जिनमें एक सरगना भी शामिल बताया गया।
पूरा लेख पढ़ें: डीआरआई ने 10.36 करोड़ का 6.61 किग्रा तस्करी सोना जब्त किया
अभ्यास प्रश्न
कूरियर खेपों के जरिए विदेशी सोना भेजने वाले देशव्यापी तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किस एजेंसी ने किया?
- A.प्रवर्तन निदेशालय
- B.राजस्व खुफिया निदेशालय
- C.केंद्रीय जांच ब्यूरो
- D.राष्ट्रीय जांच एजेंसी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. राजस्व खुफिया निदेशालय
व्याख्या
सही उत्तर राजस्व खुफिया निदेशालय यानी डीआरआई है। यह एजेंसी वित्त मंत्रालय के अधीन काम करती है और सीमा शुल्क से जुड़ी खुफिया जानकारी तथा तस्करी रोकने के काम में विशेषज्ञ मानी जाती है। इसी एजेंसी ने भारत-बांग्लादेश सीमा से आ रहे सोने की सूचना पर कार्रवाई की, कई शहरों में कूरियर पार्सल रोके और सीमा शुल्क कानून के तहत सोना जब्त किया। विकल्प A यानी प्रवर्तन निदेशालय गलत है, क्योंकि वह मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा तथा धनशोधन से जुड़े मामलों को देखता है और इस जब्ती में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। विकल्प C यानी केंद्रीय जांच ब्यूरो गलत है, क्योंकि वह भ्रष्टाचार और गंभीर अपराधों की सामान्य जांच एजेंसी है। विकल्प D यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी गलत है, क्योंकि उसका दायरा आतंकवाद और उससे जुड़े अपराधों तक सीमित है। परीक्षार्थी तस्करी तथा सीमा शुल्क के मामलों को डीआरआई से जोड़कर याद रखें।
दस्तावेजों की शुरुआती जांच के अनुसार सिंडिकेट नौ महीनों में कूरियर चैनलों से कितना तस्करी का सोना भेज चुका था?
- A.करीब 318 किग्रा, कीमत लगभग 475 करोड़ रुपये
- B.करीब 118 किग्रा, कीमत लगभग 160 करोड़ रुपये
- C.करीब 640 किग्रा, कीमत लगभग 900 करोड़ रुपये
- D.करीब 45 किग्रा, कीमत लगभग 70 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. करीब 318 किग्रा, कीमत लगभग 475 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर करीब 318 किग्रा, कीमत लगभग 475 करोड़ रुपये है। गिरफ्तारियों के बाद जांचे गए दस्तावेजों से पता चला कि मौजूदा कैलेंडर वर्ष के नौ महीनों में इतनी मात्रा में तस्करी का सोना उसी कूरियर आधारित नेटवर्क से भेजा और पहुंचाया जा चुका था, और इसी से गिरोह का वास्तविक आकार सामने आया। शेष विकल्पों में दी गई मात्रा तथा कीमत काल्पनिक हैं और मामले से मेल नहीं खातीं। परीक्षार्थियों को दोनों तरह के आंकड़े अलग-अलग रखने चाहिए: छापों के दौरान वास्तव में जब्त की गई मात्रा बहुत कम थी, जबकि इस प्रश्न का आंकड़ा उस कुल आवाजाही को दर्शाता है जो कागजात से उजागर हुई। गिरोह खेपों को छोटे-छोटे पार्सलों में बांटता था, ताकि हर पार्सल सामान्य दिखे।
फास्टैग वार्षिक पास का शुल्क किस ऐप के माध्यम से चुकाया जाता है?
- A.राजमार्गयात्रा ऐप
- B.एमपरिवहन ऐप
- C.उमंग ऐप
- D.भीम ऐप
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. राजमार्गयात्रा ऐप
व्याख्या
सही उत्तर राजमार्गयात्रा ऐप है। वार्षिक पास का एकमुश्त भुगतान इसी के माध्यम से होता है और राशि मिलते ही पास उस वाहन से पहले से जुड़े फास्टैग पर सक्रिय हो जाता है, इसलिए गाड़ी में कोई नया उपकरण लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। विकल्प B गलत है क्योंकि एमपरिवहन वाहन और चालक अनुज्ञप्ति के दस्तावेज़ों से जुड़ा ऐप है, इस पास को सक्रिय करने का मार्ग नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि उमंग अनेक सरकारी सेवाओं का साझा प्रवेश द्वार है और यहाँ उसका नाम नहीं आता। विकल्प D गलत है क्योंकि भीम एकीकृत भुगतान इंटरफेस पर बना भुगतान ऐप है, यह पास खरीदने का माध्यम नहीं। यह भी ध्यान रखें कि वैध फास्टैग वाले सभी गैर-व्यावसायिक वाहन इसके पात्र हैं।
फास्टैग वार्षिक पास एक वर्ष या कितनी बार टोल प्लाज़ा आवाजाही तक वैध रहता है?
- A.100
- B.150
- C.200
- D.250
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 200
व्याख्या
सही उत्तर 200 है। इस पास में दो सीमाएँ साथ-साथ चलती हैं - एक वर्ष की कालावधि और टोल प्लाज़ा पर दो सौ बार की आवाजाही; धारक तब तक यात्रा करता है जब तक इनमें से किसी एक में गुंजाइश बची रहे। विकल्प A गलत है क्योंकि सौ बार की सीमा वास्तविक सीमा की आधी होगी और इससे यह पास उन लोगों के लिए बहुत कम उपयोगी रह जाएगा जिनके लिए इसे बनाया गया है। विकल्प B गलत है क्योंकि योजना की बनावट में इस तरह का कोई बीच का आँकड़ा नहीं आता। विकल्प D गलत है क्योंकि सीमा दो सौ से आगे नहीं बढ़ाई गई है; मंत्रालय ने दोनों शर्तों को सरल और जोड़े में रखा है। इसके साथ 3,075 रुपये का शुल्क और 15 अगस्त 2025 की शुरुआत भी याद रखें।
फास्टैग वार्षिक पास का एकमुश्त शुल्क कितना है?
- A.2,000 रुपये
- B.3,075 रुपये
- C.4,500 रुपये
- D.5,000 रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 3,075 रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 3,075 रुपये है। यह एक ही बार का भुगतान धारक को एक वर्ष का उपयोग देता है, या टोल प्लाज़ा पर दो सौ बार की आवाजाही, इनमें से जो सीमा पहले पूरी हो जाए; इससे बार-बार टैग रिचार्ज कराने की ज़रूरत समाप्त हो जाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने जो शुल्क घोषित किया है वह कोई गोल-मटोल दो हज़ार रुपये नहीं है; उसमें अंत में पचहत्तर का अंश जुड़ा है और परीक्षा में यही बारीकी पूछी जाती है। विकल्प C गलत है, और वह कीमत को काफी बढ़ाकर भी दिखाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि इस पास से पाँच हज़ार रुपये का कोई शुल्क किसी चरण पर नहीं जुड़ता; इतनी ऊँची राशि निजी वाहन मालिकों के लिए यात्रा सस्ती बनाने के उद्देश्य से मेल भी नहीं खाती।