गेहूँ के आटे और गुड़ से बनने वाला छठ का मुख्य प्रसाद कौन-सा है?
- A.ठेकुआ
- B.तिलकुट
- C.अनरसा
- D.खाजा
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर A, ठेकुआ है। ठेकुआ गेहूँ के आटे और गुड़ से बना कड़ा पकवान है, जो घी या तेल में तला जाता है और लकड़ी के साँचे में दबाकर बनाया जाता है, और यही छठ से सर्वाधिक जुड़ा प्रसाद है। इसे बाँस के सूप और दउरा में चावल के लड्डू, गन्ना, केला, नारियल तथा मौसमी फलों के साथ घाट तक ले जाया जाता है और प्रातः के अर्घ्य के बाद बाँटा जाता है।
विकल्प B, तिलकुट, गया का तिल और गुड़ का पकवान है, जो मुख्यतः मकर संक्रांति पर खाया जाता है, इसलिए वह इसी राज्य के दूसरे पर्व का है। विकल्प C, अनरसा, इस क्षेत्र का चावल के आटे का पकवान है, और विकल्प D, खाजा, नालंदा जिले के सिलाव से जुड़ा परतदार तला पकवान है। सभी बिहार के पकवान हैं, इसी कारण इन्हें साथ रखा जाता है, परंतु छठ का प्रसाद केवल ठेकुआ है।
पूरा लेख पढ़ें: छठ, सोनपुर मेला और बिहार के त्योहार: प्रमुख तथ्य
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंबिहार का छठ पर्व मुख्य रूप से किस देवता को समर्पित है?
- A.विष्णु
- B.सूर्य
- C.शिव
- D.इंद्र
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छठ सूर्य देव के लिए छठी मैया के साथ किया जाता है, और पूरा विधान सूर्य के चारों ओर बना है: व्रती पानी में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं, अर्थात जल और प्रसाद अर्पित करते हैं, पहले षष्ठी की संध्या को डूबते सूर्य को और अगली सुबह उगते सूर्य को।
पूरी व्याख्या पढ़ें →छठ की मुख्य पूजा कार्तिक मास के किस दिन होती है?
- A.शुक्ल पक्ष की चतुर्थी
- B.शुक्ल पक्ष की पंचमी
- C.शुक्ल पक्ष की षष्ठी
- D.पूर्णिमा
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इस पर्व का नाम ही कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी से बना है, जिस दिन संध्या को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सोनपुर मेला किन दो नदियों के संगम पर लगता है?
- A.गंगा और सोन
- B.गंगा और गंडक
- C.गंगा और कोसी
- D.गंगा और पुनपुन
उत्तर देखें
सारण जिले का सोनपुर पटना के सामने उस स्थान पर है जहाँ नेपाल से उतरती गंडक गंगा में मिलती है, और मेला उसी तट पर कार्तिक पूर्णिमा से लगता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला कहा जाने वाला सोनपुर मेला किस दिन से आरंभ होता है?
- A.मकर संक्रांति
- B.कार्तिक पूर्णिमा
- C.वैशाख पूर्णिमा
- D.शरद पूर्णिमा
उत्तर देखें
सोनपुर का हरिहर क्षेत्र मेला कार्तिक की पूर्णिमा से आरंभ होता है और लगभग एक मास चलता है, जिसमें पशु, घोड़े, पक्षी और हस्तशिल्प बिकते हैं, रंगमंच सजता है और कई राज्यों के व्यापारी आते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →श्रावणी मेले में कांवरिया बिहार के किस स्थान से देवघर के बैद्यनाथ धाम तक गंगाजल ले जाते हैं?
- A.सुल्तानगंज
- B.मुंगेर
- C.बाढ़
- D.बक्सर
उत्तर देखें
भागलपुर जिले का सुल्तानगंज श्रावणी मेले का आरंभ स्थल है। केसरिया वस्त्र पहने तीर्थयात्री वहाँ गंगा से जल भरते हैं, जहाँ नदी उत्तरवाहिनी होकर बहती है, और श्रावण मास भर लगभग सौ किलोमीटर पैदल चलकर अब झारखंड में स्थित देवघर के बैद्यनाथ लिंग पर जल चढ़ाते हैं।
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