गाजर का खाया जाने वाला भाग किसका रूपांतरण है?
- A.शंकु रूप मूसला जड़
- B.झकड़ा जड़
- C.तना कंद
- D.अपस्थानिक जड़
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर A, शंकु रूप मूसला जड़ है। गाजर अपनी प्राथमिक जड़ में भोजन संचित करती है, जो ऊपर से चौड़ी और नीचे की ओर क्रमश: पतली होकर नुकीली हो जाती है, और इस आकार को शंकु रूप कहा जाता है। मूसला जड़ के संबंधित संचयी रूप मूली की तर्कु रूप जड़ है, जो मध्य में फूली और दोनों सिरों पर पतली होती है, तथा शलजम और चुकंदर की कुंभी रूप जड़ है, जो लगभग गोल और नीचे अचानक पतली होती है। B ग़लत है, क्योंकि झकड़ा मूल तंत्र, जैसे गेहूं और घास में, पतली जड़ों का गुच्छा है जो कुछ संचित नहीं करता। C ग़लत है, क्योंकि आलू जैसे तना कंद में पर्वसंधि और कलिकाएं होती हैं, जो गाजर में नहीं होतीं। D ग़लत है, क्योंकि अपस्थानिक संचयी जड़, जैसे शकरकंद या डहलिया की गुच्छित जड़ें, मूलांकुर से नहीं निकलती, जबकि गाजर का संचयी अंग स्वयं प्राथमिक जड़ है।
पूरा लेख पढ़ें: पुष्पी पादपों की आकारिकी: जड़, तना और पुष्प
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन से पौधे अत्यधिक लवणीय परिस्थितियों में जीवित रह सकते हैं?
- A.अधिपादप
- B.लवणोद्भिद
- C.मरुद्भिद
- D.जलोद्भिद
उत्तर देखें
लवणोद्भिद लवणीय मिट्टी के पौधे हैं, मुख्यत: ज्वारीय खाड़ियों और डेल्टाओं के मैंग्रोव जैसे राइज़ोफोरा तथा एविसेनिया, और उनकी आकारिकी उसी आवास से बनी है: उनमें श्वसन मूल होती हैं, जो ऋण गुरुत्वानुवर्ती होकर जलमग्न कीचड़ से ऊपर निकलती हैं, साथ ही सहारे के लिए आरोही और अवस्तंभ जड़ें तथा…
पूरी व्याख्या पढ़ें →आलू पौधे के किस अंग का रूपांतरण है?
- A.जड़
- B.तना
- C.पत्ती
- D.फल
उत्तर देखें
आलू भूमिगत तना कंद है, अर्थात किसी भूमिगत शाखा का फूला हुआ सिरा, और प्रमाण उसकी आकारिकी में है: उसमें पर्वसंधियां होती हैं, जिन्हें आंखें कहा जाता है, और प्रत्येक आंख में कक्षस्थ कलिका होती है, जो नया प्ररोह बना सकती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →फैली शाखाओं से लटककर उन्हें यांत्रिक सहारा देने वाली अवस्तंभ जड़ें किस वृक्ष की जानी-मानी विशेषता हैं?
- A.मक्का
- B.बरगद
- C.केवड़ा
- D.राइज़ोफोरा
उत्तर देखें
बरगद की क्षैतिज शाखाएं इतनी लंबी और भारी हो जाती हैं कि वे मोटी वायवीय जड़ें नीचे भेजती हैं, जो मिट्टी तक पहुंचकर खंभों में बदल जाती हैं और शाखा का भार उठाती हैं; इन्हें अवस्तंभ या स्तंभ जड़ें कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ऋण गुरुत्वानुवर्ती श्वसन मूल किसकी विशेषता हैं?
- A.राइज़ोफोरा जैसे मैंग्रोव पौधे
- B.नागफनी जैसे मरुस्थलीय पौधे
- C.वांडा जैसे अधिपादप ऑर्किड
- D.अमरबेल जैसे परजीवी पौधे
उत्तर देखें
ज्वारीय दलदल का कीचड़ जलमग्न और लगभग ऑक्सीजन रहित होता है, इसलिए ये पौधे ऐसी जड़ें ऊपर भेजते हैं जो मिट्टी से निकलकर सीधी वायु में बढ़ती हैं और छिद्रों से ऑक्सीजन लेती हैं; ऐसी जड़ें गुरुत्व के विपरीत बढ़ती हैं, इसलिए उन्हें ऋण गुरुत्वानुवर्ती कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नागफनी का चपटा, हरा, पत्ती जैसा तना, जो प्रकाश संश्लेषण करता है, क्या कहलाता है?
- A.पर्णाभवृंत
- B.पर्णकाय स्तंभ
- C.पर्णाभ स्तंभ
- D.पर्णाधार गद्दी
उत्तर देखें
नागफनी तथा यूफोर्बिया की अनेक जातियों में पत्तियां वाष्पोत्सर्जन घटाने के लिए कंटकों में बदल जाती हैं और तना चपटा, हरा तथा मांसल होकर प्रकाश संश्लेषण का कार्य संभाल लेता है; ऐसा तना पर्णकाय स्तंभ कहलाता है।
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