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GK24
विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

एनएसएएम के तहत भारत वैश्विक एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग बाजार में कितनी हिस्सेदारी का लक्ष्य रखता है?

  1. A.2 प्रतिशत
  2. B.5 प्रतिशत
  3. C.10 प्रतिशत
  4. D.15 प्रतिशत

सही उत्तर

B. 5 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर 5 प्रतिशत है। राष्ट्रीय रणनीति ने समयबद्ध लक्ष्य रखा है कि भारत वैश्विक एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग बाजार का बीसवां हिस्सा हासिल करे और देश के सकल घरेलू उत्पाद में करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर जोड़े। इसी के साथ अन्य लक्ष्य भी जुड़े हैं—सामग्री, मशीन, प्रक्रिया और सॉफ्टवेयर को समेटते हुए भारत की जरूरत के अनुरूप 50 प्रौद्योगिकियां, 100 नए स्टार्ट-अप, 500 नए उत्पाद, एक लाख कुशल कर्मियों का प्रशिक्षण और 10 मौजूदा तथा उभरते विनिर्माण क्षेत्रों में क्षमता निर्माण। विकल्प क लक्ष्य को कम आंकता है, और विकल्प ग तथा घ उसे बढ़ाकर बताते हैं; रणनीति में ऐसी कोई हिस्सेदारी नहीं दी गई है। यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रगति इसी के सापेक्ष मापी जाती है और अगला चरण एनएसएएम 2.0 बाजार में और तेजी लाने के लिए तैयार किया जा रहा है।

पूरा लेख पढ़ें: एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग: एनएसएएम 2.0 चरण में भारत की रणनीति

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Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

राष्ट्रीय एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग रणनीति (एनएसएएम) किस मंत्रालय ने जारी की थी?

  1. A.भारी उद्योग मंत्रालय
  2. B.इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
  3. C.विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
  4. D.वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

व्याख्या

सही उत्तर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय है। इसी मंत्रालय ने फरवरी 2022 में राष्ट्रीय एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग रणनीति जारी की, जो देश में 3डी प्रिंटिंग के लिए मार्गदर्शक नीतिगत ढांचा है और मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत के अनुरूप बनाई गई है। यही मंत्रालय विशेषीकृत विकास और परिनियोजन केंद्रों को सहायता देता है और इसने नई दिल्ली में दूसरा राष्ट्रीय एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग सिम्पोजियम भी आयोजित किया। विकल्प क, भारी उद्योग मंत्रालय, इसलिए भ्रमित करता है क्योंकि एएम से मशीन के पुर्जे बनते हैं, पर यह रणनीति उसका दस्तावेज नहीं है। विकल्प ग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, गलत है, हालांकि उसके अधीन वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद ईएसटीआईसी सम्मेलन आयोजित करती है। विकल्प घ, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, व्यापार और निवेश से जुड़ा है और इस रणनीति से उसका संबंध नहीं है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

भारत मंडपम, नई दिल्ली में 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक होने वाला ईएसटीआईसी-2026 किस संस्था द्वारा आयोजित किया जा रहा है?

  1. A.भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
  2. B.रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन
  3. C.वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद
  4. D.भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद

व्याख्या

सही उत्तर वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) है। ईएसटीआईसी भारत का उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन है और इसका दूसरा संस्करण सीएसआईआर 'रचनात्मक मस्तिष्क, विज्ञान को गति, प्रौद्योगिकियों को सशक्त बनाना' विषय पर आयोजित कर रही है। यह सम्मेलन 12 विषयगत क्षेत्रों में पूर्ण सत्र, तकनीकी चर्चाओं और प्रदर्शनियों के साथ होगा, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाएगा और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को समर्थन देगा। विकल्प क, इसरो, अंतरिक्ष एजेंसी है और एएम से उसका नाता प्रिंटेड रॉकेट हार्डवेयर तक सीमित है। विकल्प ख, डीआरडीओ, रक्षा अनुसंधान करता है और आयोजक नहीं है। विकल्प घ, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि अनुसंधान की शीर्ष संस्था है। परीक्षा के लिए आयोजक संस्था, स्थान भारत मंडपम, तारीखें और सम्मेलन का विषय चारों अलग-अलग पूछे जा सकते हैं, इसलिए इन्हें एक साथ याद रखना उपयोगी रहता है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

एनएसएएम के तहत अब तक कितने एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग स्टार्ट-अप को सहायता दी गई है?

  1. A.26
  2. B.36
  3. C.46
  4. D.56
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 56

व्याख्या

सही उत्तर 56 है। रणनीति जारी होने के चार वर्ष से अधिक समय बाद सरकार के अनुसार 56 एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग स्टार्ट-अप को सहायता दी गई है, जिससे देश में नवाचार और उद्यमिता का आधार मजबूत हुआ है। इसके साथ 1,54,000 से अधिक लोगों को एएम से जुड़े कौशल का प्रशिक्षण मिला है और राष्ट्रीय केंद्रों के नेटवर्क ने सामग्री, मशीन, एएम के लिए डिजाइन और प्रिंटेड उत्पादों सहित 65 भारत-विशिष्ट प्रौद्योगिकियां विकसित की हैं, जो एयरोस्पेस, चिकित्सा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और फोटोनिक्स में काम आ रही हैं। विकल्प क, ख और ग में दी गई संख्याएं इस प्रगति से मेल नहीं खातीं। यह भी याद रखें कि रणनीति का लक्ष्य 100 नए स्टार्ट-अप है, इसलिए 56 का आंकड़ा उस लक्ष्य की दिशा में प्रगति दिखाता है।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

अध्ययन में OJ 287 के केंद्रीय ब्लैक होल का न्यूनतम द्रव्यमान कितना आँका गया?

  1. A.3.89 लाख सौर द्रव्यमान
  2. B.3.89 अरब सौर द्रव्यमान
  3. C.18 अरब सौर द्रव्यमान
  4. D.106 लाख सौर द्रव्यमान
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 3.89 अरब सौर द्रव्यमान

व्याख्या

सही उत्तर 3.89 अरब सौर द्रव्यमान है। अमेरिका के स्टीवर्ड वेधशाला में 2017 के अक्टूबर और नवंबर में, जब पिंड की चमक कम थी, आठ प्रकाशिक स्पेक्ट्रम लिए गए; उनकी ऑक्सीजन उत्सर्जन रेखा की चौड़ाई से दल ने केंद्रीय ब्लैक होल का द्रव्यमान कम से कम इतना आँका। विकल्प A गलत है क्योंकि वह उन्हीं अंकों को हजार गुना घटा देता है; अति विशाल ब्लैक होल का द्रव्यमान सूर्य से लाखों से अरबों गुना तक हो सकता है, इसलिए इकाई पर ध्यान न देने वाला परीक्षार्थी इसमें फँसता है। विकल्प C गलत है क्योंकि अठारह इस अध्ययन में शामिल देशों की संख्या है, कोई द्रव्यमान नहीं। विकल्प D इसी कारण गलत है, क्योंकि एक सौ छह दल में शामिल वैज्ञानिकों की संख्या है। सीख यही है कि इस अध्ययन के तीन बड़े आँकड़े अलग-अलग याद रखें: दल का आकार, देशों की संख्या और द्रव्यमान का अनुमान।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

OJ 287 के केंद्र में स्थित दो अति विशाल ब्लैक होल एक-दूसरे का चक्कर कितने वर्ष में पूरा करते हैं?

  1. A.पाँच वर्ष
  2. B.आठ वर्ष
  3. C.बारह वर्ष
  4. D.बीस वर्ष
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. बारह वर्ष

व्याख्या

सही उत्तर बारह वर्ष है। OJ 287 पृथ्वी से लगभग 4 अरब प्रकाश वर्ष दूर एक दुर्लभ पिंड है, जिसमें दो अति विशाल ब्लैक होल बारह वर्ष की कक्षा में एक-दूसरे के चारों ओर घूमकर युगल प्रणाली बनाते हैं। इसी कक्षा के कारण इस ब्लेज़ार की चमक दो शिखरों वाले विशिष्ट क्रम में बढ़ती है। फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने 1988 में यह लय पहचानी थी, जब उन्होंने 1880 तक पीछे जाते लगभग 100 वर्ष के प्रकाशिक प्रेक्षण देखे, और तब से खगोलविद हर बारह वर्ष के दोहरे उत्सर्जन चक्र पर नज़र रखकर कक्षीय गति का नक्शा बनाते रहे हैं। हाल के अभियान ने 2015 से 2019 के बीच पड़े शिखर पकड़े। विकल्प A, B और D गलत हैं क्योंकि इनमें से कोई भी इस युगल की अवधि नहीं है; जो परीक्षार्थी केवल इतना याद रखता है कि कोई दोहराव वाला चक्र है, वह अनुमान लगाकर इनमें फँस सकता है। कक्षीय अवधि और दूरी साथ याद रखें।