एनएचएआई के दस्तावेज के अनुसार पिछले पांच वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर वन्यजीव शमन ढांचे में कितना निवेश हुआ?
- A.लगभग 9,700 करोड़ रुपये
- B.लगभग 19,700 करोड़ रुपये
- C.लगभग 29,700 करोड़ रुपये
- D.लगभग 39,700 करोड़ रुपये
सही उत्तर
B. लगभग 19,700 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर लगभग 19,700 करोड़ रुपये है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के दस्तावेज में दर्ज है कि पिछले पांच वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर वन्यजीव शमन ढांचे तथा संबंधित पर्यावरण सुरक्षा उपायों पर यह राशि लगाई गई है। यह खर्च आवासों के बंटने, सड़कों के बाधा बनने तथा वन्यजीवों और वाहनों की टकराहट से निपटने के लिए है, साथ ही यातायात सुरक्षित रूप से चलता रहे। विकल्प ए, सी और डी ऐसे आंकड़े हैं जिनमें शुरुआती अंक बदल दिए गए हैं, और प्रश्न इसी तरह बनाए जाते हैं, इसलिए सही संख्या याद रखनी चाहिए। इसे मदवार ब्योरे से जोड़कर याद रखना आसान है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा वायाडक्ट का लगभग 8,300 करोड़ रुपये है, उसके बाद पशु अंडरपास लगभग 4,600 करोड़, सुरंगें लगभग 2,800 करोड़ तथा बड़े पुल लगभग 2,500 करोड़ रुपये हैं।
पूरा लेख पढ़ें: एनएचएआई का वन्यजीव शमन दस्तावेज: 19,700 करोड़ का निवेश
अभ्यास प्रश्न
‘वन्यजीव शमन उपाय एवं संरचना’ दस्तावेज किसने और किस आयोजन में जारी किया?
- A.पर्यावरण मंत्री ने, राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में
- B.नितिन गडकरी ने, गुजरात के एकता नगर में चिंतन शिविर में
- C.एनएचएआई अध्यक्ष ने, नई दिल्ली में पत्रकार वार्ता में
- D.प्रधानमंत्री ने, गांधीनगर में वन्यजीव सम्मेलन में
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर नितिन गडकरी ने, गुजरात के एकता नगर में चिंतन शिविर में है। वे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री हैं और दस्तावेज उन्होंने उसी चिंतन शिविर में जारी किया; इसके बाद प्राधिकरण ने इसे 2 से 8 अक्टूबर 2026 तक मनाए गए राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह के उपलक्ष्य में प्रकाशित किया। विकल्प ए गलत है क्योंकि इस प्रकाशन में पर्यावरण मंत्रालय अथवा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की कोई भूमिका नहीं थी, हालांकि वन्यजीव उसी मंत्रालय का विषय है और इसी कारण यह विकल्प आकर्षक लगता है। विकल्प सी गलत है क्योंकि प्राधिकरण के अध्यक्ष की किसी पत्रकार वार्ता का उल्लेख नहीं है। विकल्प डी गलत है क्योंकि गांधीनगर में ऐसा कोई सम्मेलन शामिल नहीं है; गुजरात से जुड़ाव एकता नगर का है। दस्तावेज एनएचएआई की वेबसाइट पर संदर्भ ढांचे के रूप में उपलब्ध है।
एनएचएआई दस्तावेज में संरचनात्मक वन्यजीव शमन खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा किस मद का है?
- A.पशु अंडरपास
- B.पशु ओवरपास
- C.वायाडक्ट
- D.सुरंगें
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर वायाडक्ट है, जिन पर लगभग 8,300 करोड़ रुपये लगे हैं और यह संरचनात्मक ब्योरे की सबसे बड़ी एकल मद है। विकल्प ए पशु अंडरपास दूसरे स्थान पर है, जिन पर लगभग 4,600 करोड़ रुपये खर्च हुए, इसलिए जो अभ्यर्थी मान लेता है कि पशुओं के नाम वाली संरचना पर ही सबसे अधिक खर्च होगा, वह चूक जाता है। विकल्प डी सुरंगों पर लगभग 2,800 करोड़ रुपये हैं। विकल्प बी पशु ओवरपास इनमें सबसे कम लगभग 650 करोड़ रुपये हैं, जबकि बड़े पुल लगभग 2,500 करोड़ और छोटे पुल लगभग 500 करोड़ रुपये के साथ सूची पूरी करते हैं। ये संरचनाएं पशुओं को राजमार्ग गलियारे सुरक्षित पार करने देती हैं और दोनों ओर के आवासों को जोड़े रखती हैं। 2,150 से अधिक संरचनाओं की कुल संख्या तथा 300 किलोमीटर से अधिक गाइड फेंसिंग व ध्वनि अवरोधक के आंकड़े भी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
विंडर्जी इंडिया 2026 में किन तीन देशों ने अपने अलग देश मंडप लगाए?
- A.डेनमार्क, जर्मनी और स्पेन
- B.नॉर्वे, फ्रांस और जापान
- C.डेनमार्क, नीदरलैंड और स्वीडन
- D.जर्मनी, इटली और पुर्तगाल
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व्याख्या
सही उत्तर डेनमार्क, जर्मनी और स्पेन है। चेन्नई के इस आयोजन में इन्हीं तीन देशों के अलग मंडप लगे, जहां 20 से अधिक देशों के करीब 400 प्रदर्शक और 500 प्रतिनिधि भी जुटे। विकल्प B, C और D में पवन ऊर्जा के जाने-माने देशों के नाम मिलाए गए हैं, इसलिए वे सही लगते हैं, लेकिन इस संस्करण के लिए बताई गई सूची पहली ही है। उसी समारोह में घोषित समझौते भी याद रखने चाहिए, क्योंकि परीक्षा में वे भी पूछे जा सकते हैं: आईडब्ल्यूटीएमए-बीडब्ल्यूई वैश्विक समझौता ज्ञापन, आईडब्ल्यूटीएमए-पीटीबी आशय पत्र और आईडब्ल्यूटीएमए-ओईसीडी सहयोग, जिनका मकसद भारतीय पवन क्षेत्र में बेहतर तकनीक लाना है। कई राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों को भूमि उपलब्ध कराने, समय पर मंजूरी देने और रास्ते के अधिकार के विवाद सुलझाने के लिए सम्मानित भी किया गया।
विंडर्जी इंडिया 2026 के 8वें संस्करण का उद्घाटन किस शहर में हुआ?
- A.चेन्नई
- B.अहमदाबाद
- C.नई दिल्ली
- D.बेंगलुरु
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर चेन्नई है। पवन ऊर्जा के इस वैश्विक सम्मेलन का 8वां संस्करण वहीं 8 अक्टूबर 2026 को खुला और यह 7 से 9 अक्टूबर तक चला। शहर का चुनाव तमिलनाडु की पवन ऊर्जा में भूमिका से मेल खाता है, और उद्घाटन समारोह में राज्य के ऊर्जा संसाधन तथा विधि मंत्री सी. टी. आर. निर्मल कुमार शामिल हुए और उन्होंने राज्य की रीपावरिंग नीति पर बात की। विकल्प B अहमदाबाद, विकल्प C नई दिल्ली और विकल्प D बेंगलुरु में ऊर्जा से जुड़े कई आयोजन होते हैं, लेकिन यह सम्मेलन वहां नहीं हुआ। इस संस्करण का आकार भी ध्यान रखें: 20 से अधिक देशों के करीब 400 प्रदर्शक, 500 प्रतिनिधि तथा डेनमार्क, जर्मनी और स्पेन के अलग देश मंडप। उद्घाटन पर तमिलनाडु में ऊर्जा परिवर्तन और भारतीय पवन क्षेत्र की संविदा व्यवस्था पर दो रिपोर्ट भी जारी हुईं।
30 सितंबर 2026 तक भारत की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता कितनी थी?
- A.48.75 गीगावाट
- B.59.20 गीगावाट
- C.68.40 गीगावाट
- D.75.10 गीगावाट
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व्याख्या
सही उत्तर 59.20 गीगावाट है। चेन्नई में विंडर्जी इंडिया 2026 के उद्घाटन पर केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने 30 सितंबर 2026 तक स्थापित पवन क्षमता इसी स्तर पर बताई और कहा कि देश 2030 तक 100 गीगावाट पवन क्षमता पार करने की मजबूत स्थिति में है। विकल्प A, C और D में दिए आंकड़े इस मौके पर बताए ही नहीं गए थे। उसी संबोधन से दो और आंकड़े याद रखने लायक हैं: वित्त वर्ष 2026 में जुड़ी 6.05 गीगावाट क्षमता, जो किसी एक साल में भारत की सबसे बड़ी पवन बढ़ोतरी है, और यह उम्मीद कि वित्त वर्ष 2027 में बढ़ोतरी इससे भी अधिक रहेगी। स्थापित क्षमता, सालाना रिकॉर्ड बढ़ोतरी और 2030 का लक्ष्य, ये तीनों आंकड़े परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाने वाले हैं, इसलिए इन्हें एक साथ याद करना चाहिए।