एनएचआरसी के 33वें स्थापना दिवस समारोह के मुख्य अतिथि कौन थे?
- A.भारत के राष्ट्रपति
- B.भारत के मुख्य न्यायाधीश
- C.केंद्रीय गृह मंत्री
- D.भारत के उपराष्ट्रपति
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं, जिन्होंने न्यायमूर्ति सूर्य कांत के रूप में मुख्य अतिथि के तौर पर समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में दी गई गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और न्याय की प्रतिज्ञा हवालात, अस्पताल के वार्ड और सबसे दूर के गांव तक निभाई जानी चाहिए। उन्होंने आयोग की तुलना उस प्रकाश स्तंभ से की, जो अन्याय की लहरें नहीं रोक सकता, लेकिन अंधेरे में भटके लोगों को राह दिखाता है। उन्होंने आयोग के मोबाइल ऐप की शुरुआत और अभिलेखों के डिजिटलीकरण की सराहना भी की। विकल्प A गलत है, क्योंकि राष्ट्रपति ने इस समारोह को संबोधित नहीं किया। विकल्प C गलत है, क्योंकि इस आयोजन में गृह मंत्री की कोई भूमिका नहीं थी। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि उपराष्ट्रपति यहां मुख्य अतिथि नहीं थे। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया था।
पूरा लेख पढ़ें: एनएचआरसी का 33वां स्थापना दिवस, जल अधिकार पर सम्मेलन
अभ्यास प्रश्न
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
- A.1990
- B.1993
- C.1997
- D.2000
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व्याख्या
सही उत्तर 1993 है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना इसी वर्ष 12 अक्टूबर को हुई थी, इसलिए आयोग हर साल 12 अक्टूबर को स्थापना दिवस मनाता है। इस बार नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 33वां स्थापना दिवस मनाया गया, जहां जल के अधिकार पर राष्ट्रीय सम्मेलन भी हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि उस समय आयोग अस्तित्व में नहीं था और 33वें स्थापना दिवस से पीछे गिनने पर स्थापना तीन वर्ष बाद पड़ती है। विकल्प C भी इसी गणना से गलत है, क्योंकि उस वर्ष स्थापना मानने पर यह अवसर उनतीसवां स्थापना दिवस होता। विकल्प D स्पष्ट रूप से बाहर हो जाता है, क्योंकि उस वर्ष तक आयोग कई साल से काम कर रहा था और मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतें देख रहा था। स्थापना वर्ष तय करने का सबसे पक्का तरीका मौजूदा वर्ष से संस्करण संख्या घटाना है।
एनएचआरसी के 33वें स्थापना दिवस पर हुए राष्ट्रीय सम्मेलन का विषय क्या था?
- A.जल जीवन का अमृत: जल के अधिकार के माध्यम से मानव गरिमा को आगे बढ़ाना
- B.सबके लिए गरिमा: डिजिटल युग में मानवाधिकार
- C.स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल, स्वच्छ भविष्य
- D.गरीबों के लिए मानवाधिकार और जलवायु न्याय
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व्याख्या
सही उत्तर जल जीवन का अमृत: जल के अधिकार के माध्यम से मानव गरिमा को आगे बढ़ाना है। आयोग ने अपने स्थापना दिवस समारोह के साथ इसी विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन रखा, जिसमें दो तकनीकी सत्र थे। पहला सत्र जलाशयों के संरक्षण और पुनर्स्थापन पर केंद्रित था तथा दूसरा पेयजल स्रोतों की सुरक्षा पर, ताकि सभी को सुरक्षित और टिकाऊ जल उपलब्ध हो। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने विषय के चयन की सराहना करते हुए कहा कि जल का अधिकार केवल वर्तमान का अधिकार नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति जिम्मेदारी भी है। विकल्प B और D में डिजिटल दुनिया तथा जलवायु और संपन्नता की बात है, जो अध्यक्ष के भाषण में आई थी, पर इनमें से कोई सम्मेलन का घोषित विषय नहीं था। विकल्प C स्वच्छता से जुड़ा सामान्य नारा है और वह भी विषय नहीं था।
केलांग का केंद्र दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवा सुधारने के लिए किस तकनीक को परखेगा?
- A.ड्रोन से दवा की आपूर्ति
- B.भूमिगत वायुचालित नली परिवहन
- C.उपग्रह से छोड़े गए मौसम गुब्बारे
- D.हाइपरलूप एंबुलेंस गलियारे
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व्याख्या
सही उत्तर ड्रोन से दवा की आपूर्ति है, जिसे डिजिटल स्वास्थ्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ उन उभरती तकनीकों में गिना गया जिन्हें केंद्र दुर्गम तथा कठिन इलाकों तक पहुंच के लिए परखेगा। हिमालयी क्षेत्र के लिए ये व्यावहारिक विकल्प हैं, क्योंकि वहां बस्तियां महीनों तक कट जाती हैं और नक्शे पर छोटी दूरी तय करने में घंटों लग जाते हैं। विकल्प B, C और D ऐसी परिवहन या निगरानी प्रणालियों की बात करते हैं जिनका इस योजना में कोई स्थान नहीं है; मौसम गुब्बारे तो ऊंचाई वाले केंद्र के लिए सही भी लगते हैं, पर घोषणा में उनका जिक्र नहीं है। केंद्र का व्यापक दायित्व यह है कि ऑक्सीजन की कमी, अत्यधिक ठंड और बदलती जलवायु के स्वास्थ्य पर असर के प्रमाण जुटाए, और अनुकूलन, मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य, बच्चों की वृद्धि व पोषण तथा हिमालयी समुदायों में बीमारियों के ढर्रे पर शोध करे।
केलांग के उच्च ऊंचाई शोध केंद्र की स्थापना में मुख्य साझेदार कौन दो संस्थाएं हैं?
- A.डीआरडीओ और भारतीय वायु सेना
- B.आईसीएमआर और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा
- C.सीएसआईआर और भारतीय सेना
- D.आईसीएआर और सीमा सड़क संगठन
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व्याख्या
सही उत्तर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा हैं, और यह जोड़ी इसलिए बनी कि वैज्ञानिक शोध क्षमता के साथ उन कर्मियों का व्यावहारिक अनुभव जुड़ सके जो अत्यधिक ऊंचाई पर काम करते हैं। तीसरा संस्थान एम्स बिलासपुर है, जिसकी भूमिका इस क्षेत्र में आने वाले रोगियों पर ऊंचाई की स्थितियों के असर का अध्ययन करना है। विकल्प A गलत है क्योंकि भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी समारोह में थे और डीजीएफएमएस एयर मार्शल हैं, पर शोध साझेदारी चिकित्सा सेवा के साथ है, डीआरडीओ के साथ नहीं। विकल्प C और D ऐसी परिषदों तथा संगठनों के नाम हैं जो औद्योगिक शोध, कृषि और सीमा सड़कों पर काम करते हैं, और इनमें से कोई इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं है। शोध से सैनिकों के लिए अनुकूलन के नियम, शुरुआती पहचान और इलाज के साथ स्थानीय समुदायों की देखभाल में भी मदद मिलेगी।
आईसीएमआर उच्च ऊंचाई चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य शोध केंद्र किस राज्य में स्थापित हो रहा है?
- A.उत्तराखंड
- B.हिमाचल प्रदेश
- C.सिक्किम
- D.अरुणाचल प्रदेश
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व्याख्या
सही उत्तर हिमाचल प्रदेश है, जहां यह केंद्र लाहौल-स्पीति के मुख्यालय केलांग में बन रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने वहीं भूमि पूजन करके शिलान्यास किया, और समारोह में राज्य के एक पूर्व मुख्यमंत्री तथा मंडी से सांसद ने भी विचार रखे। विकल्प A, C और D सभी हिमालयी राज्य हैं जिनके लोगों को इस केंद्र के नतीजों से लाभ की उम्मीद है, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के साथ, और इसी वजह से ये अच्छे भ्रम पैदा करते हैं: लाभ पूरे हिमालयी क्षेत्र में फैला है, पर संस्थान एक ही राज्य में है। यह केंद्र उस क्षेत्र केंद्र पर आधारित है जो भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने लगभग एक दशक पहले केलांग में बनाया था, और अब यह आधुनिक प्रयोगशालाओं तथा विशेषज्ञ कर्मियों वाला स्थायी, साल भर चलने वाला संस्थान बनेगा।