दृश्य प्रकाश, पराबैंगनी (UV) प्रकाश और एक्स-किरणों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्घ्य एक्स-किरणों की तरंगदैर्घ्य से अधिक होती है। 2. एक्स-किरण फोटॉनों की ऊर्जा पराबैंगनी प्रकाश के फोटॉनों से अधिक होती है। 3. पराबैंगनी प्रकाश के फोटॉनों की ऊर्जा दृश्य प्रकाश के फोटॉनों से कम होती है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.1, 2 और 3
- B.केवल 1 और 2
- C.केवल 2 और 3
- D.केवल 1
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, केवल 1 और 2। दृश्य प्रकाश → पराबैंगनी → एक्स-किरण के क्रम में तरंगदैर्घ्य घटती है और फोटॉन की ऊर्जा बढ़ती है, इसलिए कथन 1 और 2 सही हैं और कथन 3 गलत है।
फोटॉन की ऊर्जा E = hc/λ होती है, यानी तरंगदैर्घ्य जितनी छोटी, ऊर्जा उतनी अधिक। दृश्य प्रकाश लगभग 400 से 700 nm, पराबैंगनी लगभग 10 से 400 nm और एक्स-किरणें लगभग 10 nm से नीचे होती हैं। इसीलिए पराबैंगनी फोटॉन त्वचा को झुलसा सकते हैं और ऐसे रासायनिक बंध तोड़ सकते हैं जिन्हें दृश्य प्रकाश नहीं तोड़ पाता, और एक्स-किरणें कोमल ऊतकों के पार निकल जाती हैं।
A गलत है, क्योंकि कथन 3 उलटी बात कहता है: पराबैंगनी फोटॉन की ऊर्जा दृश्य फोटॉन से अधिक होती है।
C गलत है, क्योंकि इसमें गलत कथन 3 है और सही कथन 1 छूट गया है।
D गलत है, क्योंकि कथन 2 भी सही है।
Exam tip: रेडियो से गामा किरणों की ओर तरंगदैर्घ्य घटती है, जबकि आवृत्ति और फोटॉन ऊर्जा बढ़ती है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंहाइड्रोजन बम और यूरेनियम बम क्रमशः किस पर आधारित हैं?
- A.नाभिकीय संलयन और विखंडन
- B.विखंडन और तापनाभिकीय संलयन
- C.भूतापीय विखंडन और संलयन
- D.भूतापीय संलयन और विखंडन
उत्तर देखें
हाइड्रोजन बम हल्के हाइड्रोजन नाभिकों को जोड़ता है, जबकि यूरेनियम बम भारी यूरेनियम-235 नाभिकों को तोड़ता है। नाभिकीय विखंडन में यूरेनियम-235 जैसा भारी नाभिक एक न्यूट्रॉन सोखकर दो हल्के नाभिकों में टूटता है और ऊर्जा तथा दो-तीन नए न्यूट्रॉन छोड़ता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आवृतबीजी पौधों के बीजांड में निम्नलिखित में से कौन-सी अगुणित कोशिका नहीं है?
- A.बीजांडकाय (न्यूसेलस)
- B.सहायक कोशिका
- C.अंड
- D.प्रतिमुखी कोशिका
उत्तर देखें
बीजांडकाय यानी न्यूसेलस बीजांड का अपना द्विगुणित ऊतक है, जबकि सहायक कोशिकाएँ, अंड और प्रतिमुखी कोशिकाएँ भ्रूणकोष की अगुणित कोशिकाएँ हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एक द्विध्रुवी संधि ट्रांजिस्टर में
- A.तीनों क्षेत्रों (उत्सर्जक, आधार और संग्राहक) में अशुद्धि की सांद्रता बराबर होती है
- B.उत्सर्जक में अशुद्धि की सांद्रता सबसे कम होती है
- C.संग्राहक में अशुद्धि की सांद्रता सबसे कम होती है
- D.आधार में अशुद्धि की सांद्रता सबसे कम होती है
उत्तर देखें
आधार को पतला और हल्का अपमिश्रित रखा जाता है ताकि उत्सर्जक से आए अधिकांश आवेश वाहक उसे पार कर संग्राहक तक पहुँच जाएँ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रकाशिक उपकरण बनाने में निम्नलिखित में से किस प्रकार के काँच का प्रयोग होता है?
- A.पाइरेक्स काँच
- B.मृदु काँच
- C.कठोर काँच
- D.फ्लिंट काँच
उत्तर देखें
फ्लिंट काँच में लेड ऑक्साइड होता है, जिससे इसका अपवर्तनांक ऊँचा और पारदर्शिता अच्छी होती है, इसलिए यह प्रकाशिक उपकरणों के लेंस और प्रिज़्म में लगता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लाइसोसोम निम्नलिखित में से किस कोशिकांग से बनता है?
- A.केंद्रक
- B.अंतर्द्रव्यी जालिका
- C.गॉल्जी काय
- D.राइबोसोम
उत्तर देखें
लाइसोसोम गॉल्जी उपकरण से छोटी झिल्लीदार थैलियों के रूप में अलग होते हैं, जिनमें पाचक एंजाइम भरे रहते हैं। लाइसोसोम के जल-अपघटक एंजाइम पहले खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका से जुड़े राइबोसोम पर बनते हैं।
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