दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत तुअर, मसूर और उड़द की खरीद के लिए कौन दो एजेंसियां अधिकृत हैं?
- A.एफसीआई और सीडब्ल्यूसी
- B.एनसीसीएफ और नेफेड
- C.नाबार्ड और एसएफएसी
- D.एपीडा और एनसीडीसी
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर एनसीसीएफ और नेफेड है, अर्थात भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड। मिशन के तहत ये दोनों एजेंसियां 2025-26 से 2028-29 तक चार वर्षों के लिए इच्छुक और पंजीकृत किसानों से तुअर, मसूर और उड़द की पूरी मात्रा खरीद सकती हैं, जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर निश्चित बाजार मिलता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि भारतीय खाद्य निगम और केंद्रीय भंडारण निगम को इस मिशन में खरीद एजेंसी नहीं बनाया गया है। विकल्प C गलत है, क्योंकि नाबार्ड कृषि और ग्रामीण ऋण का विकास बैंक है, दालों का खरीदार नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि एपीडा कृषि उत्पादों के निर्यात संवर्धन का काम करता है। इसलिए केवल विकल्प B सही है।
पूरा लेख पढ़ें: दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन ने पूरा किया अपना पहला वर्ष
अभ्यास प्रश्न
दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन का कुल परिव्यय कितना है?
- A.7,047 करोड़ रुपये
- B.11,440 करोड़ रुपये
- C.14,217 करोड़ रुपये
- D.6,431 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 11,440 करोड़ रुपये है। दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के लिए 2025-26 से 2030-31 तक छह वर्षों की अवधि के लिए यही राशि स्वीकृत की गई है और इससे बीज किट, प्रमाणित बीज, 489 जिलों में क्लस्टर आधारित खेती तथा एक हजार दाल मिलों का खर्च पूरा किया जाएगा। विकल्प A गलत है, क्योंकि 7,047 करोड़ रुपये वह न्यूनतम समर्थन मूल्य राशि है जो एनसीसीएफ ने सीधे किसानों को जारी की, मिशन का परिव्यय नहीं। विकल्प C भी गलत है, क्योंकि 14,217 करोड़ रुपये रबी 2026-27 की खरीद में किसानों को दी गई राशि है, यानी खरीद का आंकड़ा है। विकल्प D इसी कारण गलत है, क्योंकि वह खरीफ 2025-26 में खरीदी गई दालों का मूल्य है। इसलिए केवल विकल्प B मिशन का स्वीकृत परिव्यय बताता है।
दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत 2030-31 तक दालों के उत्पादन का लक्ष्य क्या है?
- A.274.09 लाख टन
- B.286.46 लाख टन
- C.350 लाख टन
- D.310 लाख टन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 350 लाख टन है। मिशन ने 2030-31 के लिए यही उत्पादन लक्ष्य रखा है, जिसे 1,130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उपज और 310 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल के साथ हासिल किया जाना है। विकल्प A गलत है, क्योंकि 274.09 लाख टन वह उत्पादन है जो तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार 2025-26 में पहले ही प्राप्त हो चुका है, यह शुरुआती स्तर है और लक्ष्य नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि 286.46 लाख हेक्टेयर 2025-26 में दालों का बोया गया क्षेत्र है, जो भूमि का माप है, उत्पादन का नहीं। विकल्प D में भी यही भ्रम है, क्योंकि 310 लाख हेक्टेयर 2030-31 के लिए क्षेत्रफल का लक्ष्य है, उत्पादन का नहीं। परीक्षा में ये तीनों आंकड़े आपस में बदलकर पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें अलग-अलग याद रखें।
दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत बीज प्रमाणन और ट्रेसेबिलिटी के लिए किस पोर्टल का उपयोग होता है?
- A.साथी पोर्टल
- B.कृषि मैपर
- C.विस्तार
- D.ई-समृद्धि
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर साथी पोर्टल है, जिसका पूरा नाम सीड ऑथेंटिकेशन, ट्रेसेबिलिटी एंड होलिस्टिक इन्वेंटरी है। यह बीज उत्पादन से लेकर प्रमाणन और बिक्री तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को स्वचालित करके बीज की हर पीढ़ी पर नजर रखता है, जिससे किसानों को जांची-परखी गुणवत्ता वाला बीज मिलता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि कृषि मैपर एक मोबाइल ऐप है जो जियो-फेंसिंग, भूमि की भू-टैगिंग तथा बीज किस्मों के प्रदर्शन और उपज की वास्तविक समय निगरानी के लिए है, बीज प्रमाणन के अभिलेख के लिए नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि विस्तार भी ई-समृद्धि की तरह सीधे भुगतान, बाजार के ताजा आंकड़े और कीमतों में स्थिरता के लिए बना मंच है। विकल्प D इसी कारण गलत है। याद रखें: साथी का संबंध बीज से, कृषि मैपर का भू-टैगिंग से और ई-समृद्धि तथा विस्तार का भुगतान एवं बाजार सूचना से है।
युवा संगम चरण सात के प्रतिनिधियों ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल से भेंट की। वे कौन हैं?
- A.श्री आर. एन. रवि
- B.श्री सी. वी. आनंद बोस
- C.श्री गुरमीत सिंह
- D.श्री ला. गणेशन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर श्री आर. एन. रवि है, जिन्होंने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में आए हुए दल से भेंट की। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उनसे सीखने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा देश के विभिन्न हिस्सों के युवाओं के बीच संबंध बनाने के महत्व पर चर्चा की, और इस भेंट से उन्हें मेजबान राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान की झलक मिली। विकल्प B, C और D गलत हैं, क्योंकि इस भेंट के संदर्भ में जिन राज्यपाल का नाम बताया गया है वे श्री आर. एन. रवि ही हैं, कोई अन्य नहीं। परीक्षार्थियों को यह युग्म ध्यान से याद रखना चाहिए, क्योंकि युवा संगम पर प्रश्न अक्सर भेंट करने वाले पदाधिकारी, मेजबान राज्य, नोडल संस्थान और मेजबान संस्थान को मिलाकर पूछे जाते हैं।
युवा संगम चरण सात की यात्रा में उत्तराखंड के दल की मेजबानी कौन सा संस्थान कर रहा है?
- A.जादवपुर विश्वविद्यालय
- B.विश्व-भारती विश्वविद्यालय
- C.आईआईटी खड़गपुर
- D.प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर आईआईटी खड़गपुर है, जो आने वाले दल की मेजबानी कर रहा है और उसे मेजबान राज्य के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक तथा शैक्षिक जीवन से परिचित कराने की व्यवस्था कर रहा है। उत्तराखंड की ओर से इस दल का नोडल संस्थान हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय है, इसलिए यह युग्म इन दोनों संस्थानों पर आधारित है। विकल्प A यानी जादवपुर विश्वविद्यालय गलत है, क्योंकि विज्ञप्ति में मेजबान के रूप में खड़गपुर स्थित राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का नाम है। विकल्प B यानी विश्व-भारती विश्वविद्यालय भी इसी कारण गलत है, भले वह भी उसी राज्य में है। विकल्प D यानी प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय भी गलत है। दलों को ऐसे संस्थानों के माध्यम से भेजना सोची-समझी व्यवस्था है, जिससे सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ शैक्षणिक आदान-प्रदान भी हो सके।