C₂H₂O₄·2H₂O में ऑक्सैलिक अम्ल का तुल्यांकी भार है
- A.45
- B.63
- C.90
- D.126
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, 63। जलयोजित ऑक्सैलिक अम्ल का मोलर द्रव्यमान 126 है और यह द्विक्षारकीय अम्ल है, इसलिए इसका तुल्यांकी भार 126 ÷ 2 = 63 है।
C₂H₂O₄·2H₂O का मोलर द्रव्यमान (2 × 12) + (2 × 1) + (4 × 16) + 2 × 18 = 24 + 2 + 64 + 36 = 126 g/mol है। ऑक्सैलिक अम्ल, (COOH)₂, में दो प्रतिस्थापनीय हाइड्रोजन परमाणु हैं, इसलिए इसकी क्षारकता 2 है। किसी अम्ल का तुल्यांकी भार उसके मोलर द्रव्यमान को उसकी क्षारकता से भाग देकर मिलता है। क्रिस्टलीय ऑक्सैलिक अम्ल पोटैशियम परमैंगनेट और सोडियम हाइड्रॉक्साइड के अनुमापन में प्राथमिक मानक के रूप में प्रयोग होता है।
A गलत है, क्योंकि 45 निर्जल ऑक्सैलिक अम्ल (90 ÷ 2) का तुल्यांकी भार है, जिसमें जल के दो अणु नहीं गिने गए।
C गलत है, क्योंकि 90 निर्जल ऑक्सैलिक अम्ल का मोलर द्रव्यमान है, तुल्यांकी भार नहीं।
D गलत है, क्योंकि 126 जलयोजित अम्ल का मोलर द्रव्यमान है; इसे क्षारकता से भाग नहीं दिया गया।
Exam tip: अम्ल का तुल्यांकी भार = मोलर द्रव्यमान ÷ क्षारकता; जलयोजित ऑक्सैलिक अम्ल: 126 ÷ 2 = 63।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा कार्बन का शुद्धतम रूप है?
- A.चारकोल (काष्ठ कोयला)
- B.कोक
- C.फ़ुलरीन
- D.कार्बन ब्लैक
उत्तर देखें
फ़ुलरीन केवल कार्बन परमाणुओं से बने होते हैं और उनकी कोई ऐसी सतह नहीं होती जो दूसरे पदार्थों को फँसाए, इसलिए इन्हें कार्बन का शुद्धतम रूप माना जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एक ग्रह का द्रव्यमान M₁ और त्रिज्या R₁ है। इसकी सतह पर गुरुत्वीय त्वरण का मान g₁ है। एक अन्य ग्रह 2 का द्रव्यमान और त्रिज्या दोनों पहले ग्रह के दोगुने हैं। ग्रह 2 की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- A.g₁
- B.2g₁
- C.g₁/2
- D.g₁/4
उत्तर देखें
सतह पर गुरुत्वीय त्वरण g = GM/R² है, इसलिए द्रव्यमान दोगुना होने से g दोगुना होता है और त्रिज्या दोगुनी होने से चार गुना घटता है, यानी g₁ × 2/4 = g₁/2।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा बायोगैस का प्रमुख घटक है?
- A.कार्बन डाइऑक्साइड
- B.नाइट्रस ऑक्साइड
- C.मीथेन
- D.ऑक्सीजन
उत्तर देखें
बायोगैस का सबसे बड़ा भाग मीथेन होता है, प्रायः 55 से 75 प्रतिशत, और यही गैस जलती है। बायोगैस तब बनती है जब बंद डाइजेस्टर में ऑक्सीजन के अभाव में जीवाणु गोबर, रसोई का कचरा या फ़सल अवशेष को तोड़ते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →काँच के गिलास में पानी में रखा नींबू अपने वास्तविक आकार से बड़ा दिखाई देता है। इसका कारण है
- A.प्रकाश का परावर्तन
- B.प्रकाश का प्रकीर्णन
- C.प्रकाश का अपवर्तन
- D.प्रकाश का ध्रुवण
उत्तर देखें
नींबू बड़ा इसलिए दिखता है कि उससे आने वाला प्रकाश पानी से वक्र काँच होकर हवा में जाते समय मुड़ जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष रदरफ़ोर्ड के α-कण प्रकीर्णन प्रयोग से नहीं निकाला जा सकता था?
- A.परमाणु का अधिकांश भाग खाली होता है।
- B.परमाणु की त्रिज्या नाभिक की त्रिज्या की लगभग 10⁵ गुना होती है।
- C.इलेक्ट्रॉन नियत ऊर्जा वाले वृत्ताकार पथों में घूमते हैं, जिन्हें कक्षाएँ कहते हैं।
- D.परमाणु का लगभग पूरा द्रव्यमान नाभिक में रहता है।
उत्तर देखें
। नियत ऊर्जा वाली कक्षाओं का प्रस्ताव नील्स बोर ने 1913 में दिया था; रदरफ़ोर्ड का प्रयोग इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा के बारे में कुछ नहीं बताता था।
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