भू-विज्ञान मंत्रालय के कितने संस्थानों को एसीएसआईआर से संबद्ध शोध संस्थान की मान्यता मिली है?
- A.पांच
- B.सात
- C.दस
- D.बारह
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर दस है। समझौते के तहत मंत्रालय के सभी प्रमुख शोध संस्थानों को एसीएसआईआर से संबद्ध शोध संस्थान की मान्यता दी गई है और ये सभी अकादमी के चालू पीएचडी नामांकन चक्र में भाग ले रहे हैं। इसी कारण यह व्यवस्था किसी एक संस्थान का समझौता नहीं, बल्कि देशव्यापी नेटवर्क बन जाती है, क्योंकि डॉक्टरेट छात्र इनमें से किसी भी संस्थान में काम कर सकता है और डिग्री अकादमी से मिलेगी, जिसके प्रमाणपत्र पर मेजबान संस्थान का नाम दर्ज रहेगा। बाकी विकल्प संख्या कम या अधिक बताते हैं और घोषणा में उनका कोई आधार नहीं है। हर संस्थान में नोडल समन्वयक नियुक्त हुआ है और मंत्रालय में एक केंद्रीय समन्वयक पूरे नेटवर्क का शैक्षणिक कामकाज देखेगा। समझौता 21 अगस्त 2026 को निष्पादित हुआ था और 13 अक्टूबर 2026 को इसकी घोषणा हुई।
पूरा लेख पढ़ें: एसीएसआईआर समझौता: भू-विज्ञान के दस संस्थानों में पीएचडी
अभ्यास प्रश्न
भू-विज्ञान मंत्रालय और एसीएसआईआर के समझौते की औपचारिक घोषणा कहां हुई?
- A.विज्ञान भवन, नई दिल्ली
- B.पृथ्वी भवन, नई दिल्ली
- C.कृषि भवन, नई दिल्ली
- D.शास्त्री भवन, नई दिल्ली
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समझौता ज्ञापन इससे पहले 21 अगस्त 2026 को निष्पादित हो चुका था, इसलिए समारोह में हस्ताक्षर नहीं, बल्कि औपचारिक घोषणा और दस्तावेजों का आदान-प्रदान हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →इस साझेदारी के तहत मंत्रालय के संस्थान में शोध करने वाले छात्र को डॉक्टरेट की डिग्री कौन देगा?
- A.मेजबान संस्थान स्वयं
- B.एसीएसआईआर
- C.विश्वविद्यालय अनुदान आयोग
- D.जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय
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अकादमी के पीएचडी कार्यक्रम में चुना गया छात्र भू-विज्ञान मंत्रालय के किसी संस्थान में शोध करता है और उसका मार्गदर्शन वे वैज्ञानिक करते हैं जिन्हें अकादमी के संकाय के रूप में मान्यता मिली है, लेकिन डिग्री अकादमी ही देती है और प्रमाणपत्र पर मेजबान संस्थान का नाम स्पष्ट रूप से…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुशंसित कृषि पद्धतियों के तहत कुफरी जामुनिया की उपज कितनी बताई गई है?
- A.12-15 टन प्रति हेक्टेयर
- B.22-25 टन प्रति हेक्टेयर
- C.32-35 टन प्रति हेक्टेयर
- D.52-55 टन प्रति हेक्टेयर
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अनुशंसित कृषि पद्धतियां अपनाने पर यह किस्म इतनी उपज देती है और परीक्षणों में कुल उत्पादन का करीब 90% हिस्सा विपणन योग्य निकला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कुफरी जामुनिया के गूदे में प्रति 100 ग्राम कितना विटामिन सी पाया जाता है?
- A.23.15 मिलीग्राम
- B.32.23 मिलीग्राम
- C.42.75 मिलीग्राम
- D.80.66 मिलीग्राम
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कुफरी जामुनिया के गूदे में प्रति 100 ग्राम इतना ही विटामिन सी, यानी एस्कॉर्बिक एसिड, मिलता है, जो पारंपरिक पीले छिलके वाले आलू की मात्रा से लगभग दोगुना है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बायोफोर्टिफाइड बैंगनी गूदे वाली आलू किस्म कुफरी जामुनिया किस वर्ष आधिकारिक रूप से जारी की गई थी?
- A.2018
- B.2021
- C.2024
- D.2026
उत्तर देखें
आईसीएआर-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने बैंगनी गूदे वाली बायोफोर्टिफाइड किस्म कुफरी जामुनिया इसी वर्ष जारी की थी और इसमें संस्थान की दोनों पुरानी रंगीन किस्मों से अधिक एस्कॉर्बिक एसिड, एंथोसायनिन तथा कैरोटीनॉयड पाया जाता है।
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