भीड़भाड़ वाले 2.4 गीगाहर्ट्ज़ बैंड में व्यवधान घटाने के लिए ब्लूटूथ कौन-सी तकनीक अपनाता है?
- A.एक स्थिर चैनल पर समय विभाजन बहुसंकेतन
- B.आवृत्ति उछाल विस्तारित स्पेक्ट्रम
- C.तरंगदैर्घ्य विभाजन बहुसंकेतन
- D.अनुज्ञप्ति वाले बैंड पर आयाम मॉडुलन
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, आवृत्ति उछाल विस्तारित स्पेक्ट्रम। ब्लूटूथ कड़ी एक ही आवृत्ति पर नहीं रहती। मास्टर और स्लेव एक छद्म यादृच्छिक क्रम पर सहमत होते हैं और 2.4 गीगाहर्ट्ज़ बैंड के संकरे चैनलों के बीच प्रति सेकंड कई सौ बार साथ-साथ उछलते रहते हैं। यदि कोई चैनल किसी वाई-फाई नेटवर्क या माइक्रोवेव ओवन ने घेर रखा हो तो केवल उसी पर पड़े पैकेट नष्ट होते हैं और अगली उछाल पर दोबारा भेजे जाते हैं; और जो छिपकर सुन रहा है, वह क्रम न जानने के कारण बातचीत का पीछा नहीं कर सकता। विकल्प A गलत है क्योंकि एक स्थिर चैनल पर टिकना ही वह बात है जिसे उछाल टालता है। विकल्प C, तरंगदैर्घ्य विभाजन बहुसंकेतन, प्रकाशिक तंतु की तकनीक है जिसमें लेजर प्रकाश के कई रंग एक ही तंतु साझा करते हैं; रेडियो में उसका स्थान नहीं। विकल्प D दोनों दृष्टि से गलत है: ब्लूटूथ अंकीय मॉडुलन करता है, सादा आयाम मॉडुलन नहीं, और वह अनुज्ञप्ति-मुक्त बैंड में चलता है जिसके लिए स्पेक्ट्रम अनुज्ञप्ति नहीं चाहिए।
पूरा लेख पढ़ें: वायरलेस तकनीकें: वाई-फाई, ब्लूटूथ, एनएफसी और आरएफआईडी
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंवाई-फाई नेटवर्क निम्नलिखित में से किस आवृत्ति पर कार्य करता है?
- A.2.4 मेगाहर्ट्ज़
- B.5 मेगाहर्ट्ज़
- C.10 गीगाहर्ट्ज़
- D.5 गीगाहर्ट्ज़
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है D, 5 गीगाहर्ट्ज़। वाई-फाई अनुज्ञप्ति-मुक्त औद्योगिक, वैज्ञानिक और चिकित्सा बैंड में चलता है और उसके दो प्रमुख बैंड 2.4 गीगाहर्ट्ज़ तथा 5 गीगाहर्ट्ज़ हैं; नवीनतम उपकरणों में 6 गीगाहर्ट्ज़ भी जुड़ा है। दिए गए चार विकल्पों में केवल 5 गीगाहर्ट्ज़ ही वास्तविक वाई-फाई बैंड है, इसलिए वही उत्तर है। विकल्प A, 2.4 मेगाहर्ट्ज़, आकर्षित करता है क्योंकि 2.4 परिचित संख्या है, पर इकाई हजार गुना गलत है; 2.4 मेगाहर्ट्ज़ मध्यम और लघु तरंग रेडियो प्रसारण की सीमा में आता है, वायरलेस नेटवर्किंग की नहीं। विकल्प B, 5 मेगाहर्ट्ज़, भी लघु तरंग आवृत्ति है और वायरलेस लैन की आवश्यक बैंडविड्थ के लिए बहुत कम है। विकल्प C, 10 गीगाहर्ट्ज़, रडार और उपग्रह कड़ियों में प्रयुक्त माइक्रोवेव एक्स बैंड में आता है; कोई वाई-फाई मानक वहां नहीं चलता। परीक्षा की सीख यह है कि संख्या जितनी ध्यान से पढ़ें, इकाई भी उतनी ही ध्यान से पढ़ें।
ब्लूटूथ से कौन-सा आईईईई मानक संबंधित है?
- A.आईईईई 802.3
- B.आईईईई 802.11
- C.आईईईई 802.15.1
- D.आईईईई 802.16
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, आईईईई 802.15.1। 802.15 मानक समूह वायरलेस वैयक्तिक क्षेत्र नेटवर्क पर है और 802.15.1 वही है जो ब्लूटूथ विशिष्टि से लिया गया था; तकनीक का विकास अब ब्लूटूथ विशेष हित समूह करता है। विकल्प A, आईईईई 802.3, ईथरनेट है, यानी तार वाला स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क मानक जो ट्विस्टेड पेयर या फाइबर केबल पर चलता है, अतः वह वायरलेस ही नहीं है। विकल्प B, आईईईई 802.11, वाई-फाई है, जो एक्सेस पॉइंट के माध्यम से दसियों मीटर तक पहुंचने वाला वायरलेस स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क है और ब्लूटूथ के वैयक्तिक क्षेत्र से भिन्न पैमाने का है। विकल्प D, आईईईई 802.16, वाईमैक्स है, जो महानगरीय क्षेत्र में वायरलेस ब्रॉडबैंड के लिए बना। याद रखने का सरल क्रम है — 802.3 तार वाला लैन, 802.11 वाई-फाई, 802.15.1 ब्लूटूथ, 802.15.4 जिगबी और 802.16 वाईमैक्स।
एक ब्लूटूथ पिकोनेट अधिकतम कितने सक्रिय स्लेव उपकरणों को सहारा दे सकता है?
- A.तीन
- B.सात
- C.आठ
- D.सोलह
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है B, सात। पिकोनेट में एक उपकरण मास्टर की भूमिका निभाता है और घड़ी तथा उछाल क्रम तय करता है, और उसके साथ एक समय में अधिकतम सात अन्य उपकरण सक्रिय स्लेव रह सकते हैं, जिससे पिकोनेट में कुल आठ उपकरण होते हैं। क्लासिक ब्लूटूथ में पता तीन बिट के सक्रिय सदस्य पते से दिया जाता है और तीन बिट से आठ मान बनते हैं, जिनमें से एक मास्टर के लिए आरक्षित रहता है; यही इस संख्या का गणित है। अतिरिक्त उपकरण पार्क अवस्था में रखे जा सकते हैं और स्थान खाली होने पर जोड़े जा सकते हैं। विकल्प A, तीन, बहुत कम है। विकल्प C, आठ, सबसे प्रिय भ्रम है: आठ पिकोनेट का कुल आकार है, जिसमें मास्टर भी शामिल है, स्लेव की संख्या नहीं। विकल्प D, सोलह, तीन बिट पते की अनुमति से अधिक है। जब कोई साझा उपकरण दो पिकोनेट को जोड़ देता है तो उस संयोजन को स्कैटरनेट कहते हैं।
निकट क्षेत्र संचार, यानी एनएफसी, किस आवृत्ति पर कार्य करता है?
- A.13.56 मेगाहर्ट्ज़
- B.125 किलोहर्ट्ज़
- C.2.4 गीगाहर्ट्ज़
- D.865 मेगाहर्ट्ज़
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है A, 13.56 मेगाहर्ट्ज़। एनएफसी रेडियो आवृत्ति पहचान के उच्च आवृत्ति बैंड पर बना है और 13.56 मेगाहर्ट्ज़ पर दो लूप एंटीनाओं के बीच चुंबकीय प्रेरण से काम करता है, इसीलिए उपकरणों को लगभग चार सेंटीमीटर के भीतर लाना पड़ता है। विकल्प B, 125 किलोहर्ट्ज़, निम्न आवृत्ति आरएफआईडी बैंड है जो पशु टैग और पुराने प्रवेश कार्डों में प्रयुक्त होता है; उसकी पठन दूरी अधिक पर आंकड़ा अंतरण बहुत धीमा है। विकल्प C, 2.4 गीगाहर्ट्ज़, वह बैंड है जिसे वाई-फाई, ब्लूटूथ और माइक्रोवेव ओवन साझा करते हैं; उसकी पहुंच मीटरों में है, जो ऐसी तकनीक के लिए बहुत अधिक है जिसकी सुरक्षा केवल स्पर्श पर पढ़े जाने में निहित है। विकल्प D, 865 मेगाहर्ट्ज़, भारत में माल ढुलाई तथा विंडस्क्रीन के फास्टैग के लिए आवंटित अति उच्च आवृत्ति आरएफआईडी बैंड है। एनएफसी और उच्च आवृत्ति आरएफआईडी कार्ड, दोनों के लिए 13.56 मेगाहर्ट्ज़ याद रख लेना कई प्रश्न एक साथ हल कर देता है।
निष्क्रिय आरएफआईडी टैग को आवश्यक ऊर्जा कहां से मिलती है?
- A.भीतरी लिथियम बैटरी से
- B.रीडर के रेडियो संकेत से
- C.टैग पर लगे सौर सेल से
- D.पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है B, रीडर के रेडियो संकेत से। निष्क्रिय टैग केवल एक चिप और एंटीना होता है। जब वह रीडर के क्षेत्र में आता है तो आती हुई रेडियो तरंगें एंटीना में धारा प्रेरित करती हैं, वह धारा क्षण भर के लिए चिप को शक्ति देती है और चिप परावर्तित संकेत में परिवर्तन करके उत्तर देता है, जिसे बैकस्कैटर कहते हैं। बैटरी न होने से टैग बहुत सस्ता पड़ता है, स्टिकर के रूप में छापा जा सकता है और वर्षों चलता है, पर उसकी पठन दूरी कम रहती है और वह स्वयं बातचीत आरंभ नहीं कर सकता। विकल्प A सक्रिय टैग का वर्णन है, जिसमें बैटरी होती है और जो दसियों मीटर तक स्वयं प्रसारण करता है; उसका प्रयोग माल कंटेनरों और वाहनों पर होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि सौर सेल को प्रकाश चाहिए, जो डिब्बे के भीतर रखे या पुस्तकालय की पुस्तक पर लगे टैग के लिए निरर्थक है। विकल्प D गलत है क्योंकि पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र इतना क्षीण और स्थिर है कि उससे न शक्ति मिलती है न आंकड़े जाते हैं।