भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. इसने विधि-निर्माण के प्रयोजन से गवर्नर जनरल की परिषद का विस्तार किया। 2. गवर्नर जनरल को सदस्यों की संख्या बढ़ाने का अधिकार नहीं दिया गया था। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1, न ही 2
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, केवल 1। 1861 के अधिनियम ने विधि-निर्माण के लिए गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद में अतिरिक्त सदस्य जोड़कर उसका विस्तार किया, और इन सदस्यों को गवर्नर जनरल ही नामित करता था।
भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 के तहत गवर्नर जनरल विधि-निर्माण के समय अपनी परिषद में कम से कम छह और अधिकतम बारह अतिरिक्त सदस्य जोड़ सकता था, जिनमें कम से कम आधे गैर-सरकारी होने थे। लॉर्ड कैनिंग ने 1862 में तीन भारतीयों को नामित किया: बनारस के राजा, पटियाला के महाराजा और सर दिनकर राव। इस अधिनियम ने बंबई और मद्रास प्रेसीडेंसी को विधायी शक्तियां लौटाईं और गवर्नर जनरल को अध्यादेश जारी करने का अधिकार भी दिया।
B गलत है, क्योंकि कथन 2 असत्य है: गवर्नर जनरल को छह से बारह सदस्य जोड़ने का अधिकार था।
C गलत है, क्योंकि केवल कथन 1 सही है।
D गलत है, क्योंकि कथन 1 सही है।
Exam tip: 1861 के अधिनियम से भारतीयों का विधि-निर्माण से जुड़ाव शुरू हुआ, 6 से 12 अतिरिक्त सदस्यों के साथ।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. संत फ़्रांसिस ज़ेवियर जेसुइट संघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 2. संत फ़्रांसिस ज़ेवियर की मृत्यु गोवा में हुई और वहाँ उन्हें समर्पित एक चर्च है। 3. गोवा में प्रति वर्ष संत फ़्रांसिस ज़ेवियर का पर्व मनाया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
फ़्रांसिस ज़ेवियर जेसुइट संघ के सह-संस्थापक थे और गोवा में हर वर्ष उनका पर्व मनाया जाता है, पर उनकी मृत्यु गोवा में नहीं हुई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. इल्तुतमिश के शासनकाल में चंगेज़ ख़ान भगोड़े ख़्वारिज़्म राजकुमार का पीछा करते हुए सिंधु तक पहुँचा था। 2. मुहम्मद बिन तुग़लक़ के शासनकाल में तैमूर ने मुल्तान पर अधिकार किया और सिंधु पार की। 3. विजयनगर साम्राज्य के देवराय द्वितीय के शासनकाल में वास्को द गामा केरल के तट पर पहुँचा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.1 और 2
- C.केवल 3
- D.2 और 3
उत्तर देखें
चंगेज़ ख़ान इल्तुतमिश के समय सिंधु तक आया, पर तैमूर और वास्को द गामा बताए गए शासकों के बहुत बाद आए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए : (ऐतिहासिक स्थल) (किसके लिए प्रसिद्ध) 1. बुर्ज़होम : शैलकृत देवस्थान 2. चंद्रकेतुगढ़ : मृण्मूर्ति (टेराकोटा) कला 3. गणेश्वर : ताम्र कलाकृतियाँ उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
- A.केवल 1
- B.1 और 2
- C.केवल 3
- D.2 और 3
उत्तर देखें
चंद्रकेतुगढ़ टेराकोटा के लिए और गणेश्वर ताँबे की वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध है, पर बुर्ज़होम में कोई शैलकृत देवस्थान नहीं है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तत्त्वबोधिनी पत्रिका के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.इसने बांग्ला भाषा में भारत के अतीत के व्यवस्थित अध्ययन को बढ़ावा दिया।
- B.इसने संस्कृत स्रोतों के माध्यम से भारत के अतीत के व्यवस्थित अध्ययन को बढ़ावा दिया।
- C.इसने फ़ारसी स्रोतों के माध्यम से भारत के अतीत के व्यवस्थित अध्ययन को बढ़ावा दिया।
- D.इसने पश्चिमी स्रोतों के माध्यम से भारत के अतीत के व्यवस्थित अध्ययन को बढ़ावा दिया।
उत्तर देखें
तत्त्वबोधिनी पत्रिका ने बांग्ला भाषा में भारत के अतीत के व्यवस्थित अध्ययन को बढ़ावा दिया। यह पत्रिका 1843 में रवींद्रनाथ टैगोर के पिता देवेंद्रनाथ टैगोर ने तत्त्वबोधिनी सभा के मुखपत्र के रूप में शुरू की थी, जिसकी स्थापना उन्होंने 1839 में की थी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भक्ति आंदोलन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.भक्ति आंदोलन ने विविधता को बढ़ावा देने वाली परंपराओं से परहेज़ किया
- B.उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन राम और कृष्ण की उपासना के इर्द-गिर्द केंद्रित था
- C.भक्ति आंदोलन सगुण और निर्गुण, दोनों प्रकार की ईश्वर भक्ति पर आधारित था
- D.जहां तुलसीदास सगुण भक्ति परंपरा के प्रतिनिधि थे, वहीं संत कबीर ने निर्गुण भक्ति का मार्ग अपनाया
उत्तर देखें
भक्ति आंदोलन ने विविधता से परहेज़ नहीं किया, बल्कि अनेक क्षेत्रीय भाषाओं, संप्रदायों और सामाजिक समूहों को अपनाया, इसलिए यही कथन गलत है।
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