भारतीय नौसेना द्वारा कराए जाने वाले इंडो-पैसिफिक क्षेत्रीय संवाद 2026 का विषय क्या है?
- A.समुद्री सुरक्षा और नीली अर्थव्यवस्था
- B.इंडो-पैसिफिक में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग
- C.महासागर शासन के लिए सहयोगात्मक तरीके
- D.पावरिंग द ग्लोबल साउथ
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर इंडो-पैसिफिक में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग है। भारतीय नौसेना यह संवाद नई दिल्ली में 3 से 5 नवंबर 2026 तक इसी विषय पर कराएगी, जिसकी मुख्य आयोजक राष्ट्रीय समुद्री संस्था है और जिसमें क्षेत्र के 18 देशों के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। यह विषय इसलिए चुना गया कि महासागर एक-दूसरे से जुड़े हैं, पर उन्हें समझने और संभालने के लिए जरूरी वैज्ञानिक ज्ञान, तकनीकी क्षमता और संस्थान असमान रूप से बंटे हैं, इसलिए यह संवाद विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित तक सीमित न रहकर सामाजिक विज्ञान, जीव विज्ञान और मानविकी को भी जोड़ेगा। विकल्प A समुद्री मामलों से जुड़ा सुनने में ठीक लगने वाला वाक्यांश है, पर इस संस्करण के लिए यह विषय नहीं रखा गया। विकल्प C इस सम्मेलन के भीतर प्रस्तावित पांच विषयगत सत्रों में से एक का शीर्षक है, पूरे सम्मेलन का विषय नहीं, और यही अंतर प्रश्न पत्र में सबसे ज्यादा पूछा जाता है। विकल्प D अक्टूबर 2026 में नई दिल्ली में हुए एक पूरी तरह अलग सम्मेलन का विषय है, जो खेती में सौर ऊर्जा से जुड़ा था।
पूरा लेख पढ़ें: इंडो-पैसिफिक क्षेत्रीय संवाद 2026 नई दिल्ली में होगा
अभ्यास प्रश्न
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडो-पैसिफिक महासागर पहल की घोषणा किस शिखर सम्मेलन में की थी?
- A.बैंकॉक में 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में
- B.ओसाका में 14वें जी-20 शिखर सम्मेलन में
- C.सिंगापुर में 13वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में
- D.हनोई में 15वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में
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इस पहल में सात परस्पर जुड़े समुद्री क्षेत्रों पर जोर दिया गया है, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्रीय संवाद के पिछले संस्करणों ने इन क्षेत्रों के चुनिंदा पहलुओं को बारी-बारी से उठाया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →इंडो-पैसिफिक क्षेत्रीय संवाद 2026 में कितने देशों के विशेषज्ञ आएंगे और इसमें कितने विषयगत सत्र हैं?
- A.12 देश और तीन सत्र
- B.18 देश और पांच सत्र
- C.25 देश और सात सत्र
- D.18 देश और सात सत्र
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इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के 18 देशों से समुद्री क्षेत्र के व्यवहारकर्ता, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, नीति निर्माता और विशेषज्ञ इस संवाद में योगदान देंगे, और सम्मेलन में तीन दिनों में फैले पांच विषयगत सत्र रखे गए हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मालदीव ठहराव के दौरान भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के प्रशिक्षुओं ने किस प्रशिक्षण केंद्र का दौरा किया?
- A.गिरिफुशी प्रशिक्षण केंद्र
- B.हुलहुमाले नौसैनिक अकादमी
- C.अड्डू समुद्री प्रशिक्षण विद्यालय
- D.कड्ढू रक्षा संस्थान
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बंदरगाह ठहराव के दौरान तय प्रशिक्षण आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के प्रशिक्षुओं ने इसी केंद्र का दौरा किया, जबकि स्क्वाड्रन के वरिष्ठ अधिकारी ने मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल के रक्षा प्रमुख, एमएनडीएफ तटरक्षक बल के कमांडेंट और भारत के उच्चायुक्त जी. बालासुब्रमण्यम से मुलाकात की।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की मालदीव यात्रा के संदर्भ में उल्लिखित महासागर दृष्टिकोण का अर्थ क्या है?
- A.क्षेत्रों में सद्भाव, सुरक्षा और विकास के लिए समुद्री गठबंधन
- B.क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति
- C.साझा विकास और क्षेत्रीय सुरक्षा की उन्नति के लिए मिशन
- D.सुरक्षा, विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए समुद्री राजमार्ग
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रक्षा मंत्रालय ने स्क्वाड्रन की माले यात्रा को भारत की समुद्री पहुंच के इसी ढांचे में रखते हुए ठीक यही अर्थ दिया और कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बढ़ते समुद्री सहयोग को रेखांकित करती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्टूबर 2026 में मालदीव पहुंचे भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन में निम्नलिखित में से कौन शामिल था?
- A.आईएनएस विक्रांत
- B.आईएनएस सुजाता
- C.आईएनएस विक्रमादित्य
- D.आईएनएस अरिहंत
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माले के निकट पहुंचे प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन में आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता और भारतीय तटरक्षक बल का जहाज सारथी शामिल थे, और ये तीनों 21 अक्टूबर 2026 को लंबी दूरी की प्रशिक्षण तैनाती के तहत मालदीव पहुंचे।
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