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GK24
शिखर सम्मेलनमध्यम

भारतीय अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 के उद्घाटन पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कौन-सा फ्रेमवर्क लॉन्च किया?

  1. A.राष्ट्रीय जल नीति 2026
  2. B.सतत शहरी नदी प्रबंधन (SURM) फ्रेमवर्क
  3. C.अटल भूजल फ्रेमवर्क
  4. D.नमामि गंगे 3.0

सही उत्तर

B. सतत शहरी नदी प्रबंधन (SURM) फ्रेमवर्क

व्याख्या

सही उत्तर सतत शहरी नदी प्रबंधन (SURM) फ्रेमवर्क है। 22 सितंबर 2026 को उद्घाटन के समय उपराष्ट्रपति ने SURM फ्रेमवर्क के साथ AI/ML आधारित एकीकृत जलाशय तलछट प्रबंधन प्रणाली लॉन्च की, जिन्हें प्रौद्योगिकी-सक्षम और जलवायु अनुकूल जल प्रबंधन की दिशा में कदम बताया गया। शहरी नदी प्रबंधन इसलिए अहम है क्योंकि अधिकांश भारतीय शहरों ने अपनी नदियों को नालों में बदल दिया है, और तलछट प्रबंधन तय करता है कि जलाशय अपनी भंडारण क्षमता कितने समय तक बनाए रखेंगे।

बाकी विकल्प आधिकारिक लगने के लिए बनाए गए हैं। आयोजन में कोई राष्ट्रीय जल नीति लॉन्च नहीं हुई; अटल भूजल एक मौजूदा भूजल योजना है, यहां लॉन्च हुआ फ्रेमवर्क नहीं; और नमामि गंगे गंगा कार्यक्रम है, जिसका कोई "3.0" घोषित नहीं हुआ। लॉन्च के प्रश्न ध्यान से पढ़ें: दस्तावेज़ का नाम और लॉन्च करने वाला व्यक्ति ही आम तौर पर पूछा जाता है।

पूरा लेख पढ़ें: उपराष्ट्रपति ने 9वां भारतीय अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 शुरू किया

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अभ्यास प्रश्न

Q1.शिखर सम्मेलनआसान

9वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 की थीम क्या है?

  1. A.सतत विकास के लिए जल
  2. B.जलवायु अनुकूल जल प्रबंधन
  3. C.शांति के लिए जल सुरक्षा
  4. D.जल संचय जन भागीदारी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. जलवायु अनुकूल जल प्रबंधन

व्याख्या

सही उत्तर जलवायु अनुकूल जल प्रबंधन है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 22 से 26 सितंबर 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित 9वां भारतीय अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह इसी थीम पर केंद्रित है। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 22 सितंबर को इसका उद्घाटन किया और कहा कि जलवायु परिवर्तन, तेज़ शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि जल प्रबंधन को जटिल बना रहे हैं, इसलिए नदी-बेसिन प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन और कुशल सिंचाई ज़रूरी हैं।

बाकी विकल्प विश्वसनीय लगने वाले नारे हैं। "जल संचय जन भागीदारी" असली है पर अलग: यह जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का प्रधानमंत्री का आह्वान है, जिसे उपराष्ट्रपति ने अपने भाषण में उद्धृत किया। बाकी दो अंतरराष्ट्रीय जल दिवस की थीम जैसे सामान्य वाक्य हैं। थीम हर संस्करण में बदलती है, इसलिए इसे 9वें संस्करण और 2026 से जोड़कर याद रखें।

Q2.शिखर सम्मेलनमध्यम

उपराष्ट्रपति के अनुसार भारत के पास दुनिया की लगभग 18% आबादी है, लेकिन वैश्विक मीठे पानी के संसाधनों का लगभग कितना हिस्सा?

  1. A.2.4%
  2. B.4%
  3. C.10%
  4. D.18%
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 4%

व्याख्या

सही उत्तर 4% है। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बताया कि भारत के पास दुनिया की लगभग 2.4 प्रतिशत भूमि और 18 प्रतिशत आबादी है, जबकि वैश्विक मीठे पानी के संसाधनों का केवल लगभग 4 प्रतिशत। इसी असंतुलन के कारण उन्होंने कहा कि भारत के जल उपयोग की तुलना ज़्यादा पानी और कम आबादी वाले देशों से नहीं हो सकती, और नागरिकों से ब्रश करते समय नल बंद रखने जैसी सरल आदतें अपनाने को कहा।

बाकी संख्याएं उसी वाक्य से उठाकर भ्रम के लिए रखी गई हैं: 2.4% दुनिया की भूमि में भारत का हिस्सा है, 18% आबादी का हिस्सा, और 10% भ्रम है। ये तीनों आंकड़े लगभग हर भारतीय जल-नीति दस्तावेज़ में आते हैं, इसलिए इन्हें तिकड़ी के रूप में याद करें: 2.4% भूमि, 18% लोग, 4% मीठा पानी।

Q3.शिखर सम्मेलनमध्यम

मानवाधिकारों पर पांचवें आईटीईसी क्षमता-निर्माण कार्यक्रम में समापन भाषण किसने दिया?

  1. A.केंद्रीय गृह मंत्री
  2. B.न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन, अध्यक्ष, एनएचआरसी भारत
  3. C.भारत के मुख्य न्यायाधीश
  4. D.केंद्रीय विदेश मंत्री
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन, अध्यक्ष, एनएचआरसी भारत

व्याख्या

उत्तर हैं न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन, जो भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हैं और जिन्होंने कार्यक्रम का समापन किया। उनका विषय वैश्विक दक्षिण की मानवाधिकार संस्थाओं के बीच सहयोग था, और तर्क यह कि ये संस्थाएं तभी बेहतर होती हैं जब अपना अनुभव खुलकर साझा करें, अपनी कठिनाइयों को नाम दें और अपनी भूलों से सीखें।

शेष विकल्प ऐसे पदों के हैं जो मानवाधिकार से जुड़े आयोजन के लिए विश्वसनीय लगते हैं, पर यहाँ उनकी कोई भूमिका नहीं थी। विदेश मंत्रालय इस कार्यक्रम में सहयोगी अवश्य था, जिससे विकल्प D सबसे प्रबल भ्रम बनता है, किंतु समापन भाषण आयोग के अपने अध्यक्ष ने दिया। सत्र में संयुक्त सचिव श्री समीर कुमार और श्रीमती सैदिंगपुई छकछुआक भी उपस्थित रहे। परीक्षा की दृष्टि से अध्यक्ष का नाम यहाँ सबसे उपयोगी तथ्य है, क्योंकि वह इस समाचार से आगे भी काम आता है - एनएचआरसी से जुड़ा कोई भी प्रश्न प्रायः अध्यक्ष के नाम पर ही टिकता है।

Q4.शिखर सम्मेलनमध्यम

कार्यक्रम में कितनी राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं ने प्रतिभागी भेजे?

  1. A.आठ
  2. B.ग्यारह
  3. C.चौदह
  4. D.बीस
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. चौदह

व्याख्या

उत्तर है चौदह। इस समाचार में दो संख्याएं साथ चलती हैं और आपस में बदल जाना आसान है - अड़तीस वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, और वे चौदह राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से आए थे। संस्थाएं छोटी संख्या हैं, लोग बड़ी। जो अभ्यर्थी केवल एक अंक याद रखेगा, वह दूसरे पर अटक जाएगा, इसलिए दोनों को जोड़ी की तरह याद रखना चाहिए।

भाग लेने वाले देशों को महाद्वीप के हिसाब से देखें तो याद रखना आसान हो जाता है। अफ्रीका से अल्जीरिया, इथियोपिया, केन्या, दक्षिण अफ्रीका तथा जिम्बाब्वे; लैटिन अमेरिका से चिली और इक्वाडोर; एशिया से इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मलेशिया, ओमान और ताजिकिस्तान; और प्रशांत क्षेत्र से समोआ। यानी फैलाव अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, एशिया और प्रशांत तक है। यही विविधता कार्यक्रम की मूल सोच बताती है - अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं में लगभग एक जैसा काम करने वाली संस्थाएं किसी एक आदर्श से अधिक एक-दूसरे से सीख सकती हैं। इसी आधार पर आयोग के अध्यक्ष ने वैश्विक दक्षिण की संस्थाओं के बीच और गहरे सहयोग की बात रखी।

Q5.शिखर सम्मेलनमध्यम

एनएचआरसी ने मानवाधिकारों पर यह आईटीईसी कार्यक्रम किस मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया?

  1. A.गृह मंत्रालय
  2. B.विदेश मंत्रालय
  3. C.विधि एवं न्याय मंत्रालय
  4. D.सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. विदेश मंत्रालय

व्याख्या

उत्तर है विदेश मंत्रालय। यह जोड़ी संयोग नहीं है - भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम विदेश नीति का एक साधन है, जिसके जरिए अन्य विकासशील देशों के अधिकारियों को प्रशिक्षण और विशेषज्ञता दी जाती है। इसलिए विदेशी मानवाधिकार संस्थाओं के लिए बना कोई भी पाठ्यक्रम स्वाभाविक रूप से विदेश मंत्रालय से होकर चलता है।

सूची में दिए गए बाकी मंत्रालयों का भारत के भीतर मानवाधिकार कार्य से किसी न किसी रूप में संबंध है, इसीलिए वे भ्रम पैदा करते हैं, पर यहाँ सहयोगी के रूप में उनका नाम नहीं है। परीक्षा के लिए आईटीईसी और विदेश मंत्रालय को एक स्थिर जोड़ी मानकर चलें, और यह भी याद रखें कि यह कार्यक्रम का पांचवां संस्करण था, जो नई दिल्ली में 14 सितंबर 2026 से छह दिन चला।