भारत में, कोयला नियंत्रक संगठन (CCO) की क्या भूमिका है? 1. CCO भारत सरकार में कोयला सांख्यिकी का प्रमुख स्रोत है। 2. यह कैप्टिव कोयला/लिग्नाइट ब्लॉकों के विकास की प्रगति की निगरानी करता है। 3. यह कोयला-धारक क्षेत्रों के अधिग्रहण से संबंधित सरकार की अधिसूचना पर किसी भी आपत्ति की सुनवाई करता है। 4. यह सुनिश्चित करता है कि कोयला खनन कंपनियां अंतिम उपयोगकर्ताओं को निर्धारित समय में कोयला पहुंचाएं। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.1, 2 और 3
- B.केवल 3 और 4
- C.केवल 1 और 2
- D.1, 2 और 4
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, 1, 2 और 3। कथन 1, 2 और 3 कोयला नियंत्रक संगठन का सही वर्णन करते हैं, जबकि कथन 4 नहीं। CCO कोयला मंत्रालय का अधीनस्थ कार्यालय है, जिसका मुख्यालय कोलकाता में है। यह भारत सरकार में कोयला सांख्यिकी का मुख्य स्रोत है, जो कोयले और लिग्नाइट के उत्पादन, प्रेषण, भंडार और कीमतों के आंकड़े इकट्ठा करके प्रकाशित करता है और हर वर्ष कोल डायरेक्टरी ऑफ इंडिया निकालता है, इसलिए कथन 1 सही है। यह कंपनियों को आवंटित कैप्टिव कोयला और लिग्नाइट ब्लॉकों के विकास की प्रगति पर नज़र रखता है, इसलिए कथन 2 सही है। कोयला धारक क्षेत्र (अर्जन और विकास) अधिनियम, 1957 के तहत कोयला नियंत्रक वह सक्षम प्राधिकारी है जो कोयला-धारक भूमि के अधिग्रहण की अधिसूचना पर आपत्तियां सुनता है, इसलिए कथन 3 सही है। कथन 4 गलत है क्योंकि उपभोक्ताओं तक कोयला पहुंचाना कोयला कंपनियों और खरीदारों के बीच ईंधन आपूर्ति समझौतों से तय होता है, CCO इसे लागू नहीं करता। विकल्प B गलत है क्योंकि इसमें कथन 4 है और 1 व 2 नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि इसमें कथन 3 छूट गया। विकल्प D गलत है क्योंकि इसमें कथन 4 है। Exam tip: कोयला नियंत्रक (कोलकाता) यानी कोयला सांख्यिकी, कैप्टिव ब्लॉक निगरानी और 1957 के अधिनियम के तहत आपत्तियों की सुनवाई।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंवर्षण की संघट्टन-संलयन (कोलिज़न-कोलेसेंस) प्रक्रिया निम्नलिखित में से किस पर लागू होती है?
- A.वे बादल जो हिमांक स्तर से ऊपर नहीं फैलते
- B.वे बादल जो हिमांक स्तर से ऊपर फैलते हैं
- C.सभी प्रकार के बादल
- D.पक्षाभ कपासी (सिरोक्यूम्यूलस) बादल
उत्तर देखें
संघट्टन-संलयन गर्म बादलों में वर्षा बनने की प्रक्रिया है, जिनका ऊपरी भाग उस स्तर से नीचे रहता है जहाँ पानी जमता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दी गई विशेषताओं के आधार पर अपवाह प्रतिरूप के प्रकार की पहचान कीजिए :
1. यह नदियों और उनकी सहायक नदियों का सबसे सामान्य प्रतिरूप है
2. यह एकसमान शैल प्रकार और नियमित ढाल वाले क्षेत्रों में पाया जाता है
3. मानचित्र या हवाई फ़ोटोग्राफ़ में यह पत्ती की शिराओं जैसा दिखता है — छोटी धाराएँ मुख्य धारा से न्यून कोण पर मिलती हैं
सही उत्तर चुनिए।
- A.द्रुमाकृतिक (डेंड्रिटिक)
- B.अरीय (रेडियल)
- C.जालीनुमा (ट्रेलिस)
- D.अभिकेंद्री (सेंट्रिपेटल)
उत्तर देखें
एकसमान चट्टान और नियमित ढाल वाले क्षेत्र में बना, पेड़ की शाखाओं या पत्ती की शिराओं जैसा प्रतिरूप द्रुमाकृतिक कहलाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) निम्नलिखित में से किस संगठन की अनुसंधान एवं विकास शाखा है?
- A.भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र
- B.भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
- C.भारतीय रेल
- D.रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन
उत्तर देखें
अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) रेल मंत्रालय की एकमात्र अनुसंधान एवं विकास शाखा है। RDSO का मुख्यालय लखनऊ में है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जनगणना 2011 के अनुसार निम्नलिखित में से किस भारतीय राज्य ने ऋणात्मक जनसंख्या वृद्धि दर्ज की?
- A.मणिपुर
- B.मिज़ोरम
- C.त्रिपुरा
- D.नागालैंड
उत्तर देखें
2001 से 2011 के बीच नागालैंड भारत का एकमात्र राज्य था जिसकी जनसंख्या घटी; जनगणना 2011 में इसकी दशकीय वृद्धि दर लगभग −0.6 प्रतिशत थी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भूवैज्ञानिक काल की पहेली को जोड़कर पृथ्वी के ऐतिहासिक मानचित्र बनाना और उनका विश्लेषण करना क्या कहलाता है?
- A.पुराजलवायु विज्ञान (पेलियोक्लाइमेटोलॉजी)
- B.पुराभूआकृति विज्ञान (पेलियोजियोमॉर्फोलॉजी)
- C.पुराशैलिकी (पेलियोलिथोलॉजी)
- D.पुराभूगोल (पेलियोजियोग्राफी)
उत्तर देखें
पुराभूगोल भूवैज्ञानिक अतीत में पृथ्वी के भूगोल का अध्ययन है, और इसका मुख्य परिणाम ऐसे मानचित्र हैं जो दिखाते हैं कि अलग-अलग समय में महाद्वीप, महासागर, पर्वत और तटरेखाएँ कहाँ थीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →