भारत को किस वर्ष उस गंभीर भुगतान संतुलन संकट का सामना करना पड़ा जिसके बाद उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के सुधार हुए?
- A.1985
- B.1991
- C.1997
- D.2008
सही उत्तर
B. 1991
व्याख्या
सही उत्तर B, 1991 है। 1991 के मध्य तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार घटकर लगभग दो सप्ताह के आयात जितना रह गया था, धन जुटाने के लिए विदेश में स्वर्ण गिरवी रखा गया, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से ऋण लिया गया और जुलाई में रुपये का दो चरणों में अवमूल्यन हुआ। इसके बाद 1991 की नई औद्योगिक नीति आई, जिसने अधिकांश औद्योगिक लाइसेंस समाप्त कर अर्थव्यवस्था खोल दी। विकल्प A गलत है क्योंकि 1985 में राजीव गांधी के समय सीमित उदारीकरण हुआ था, पर ऐसा कोई संकट नहीं आया। विकल्प C गलत है क्योंकि 1997 पूर्वी एशियाई मुद्रा संकट का वर्ष है, जिससे भारत काफी हद तक बचा रहा, और पहली तारापोर समिति की रिपोर्ट का वर्ष है। विकल्प D गलत है क्योंकि 2008 वैश्विक वित्तीय संकट है, जिसमें भारत की वृद्धि धीमी हुई पर बाह्य स्थिति नहीं बिगड़ी। 1991 को अवमूल्यन, आईएमएफ ऋण और एलपीजी सुधारों के साथ याद रखें।
पूरा लेख पढ़ें: भुगतान संतुलन और विदेश व्यापार: प्रमुख अवधारणाएँ
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंकिसी अर्थव्यवस्था का भुगतान संतुलन खाता ________ से संबंधित होता है।
- A.कृषि क्षेत्र
- B.बाह्य क्षेत्र
- C.सरकारी क्षेत्र
- D.निजी क्षेत्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बाह्य क्षेत्र
व्याख्या
सही उत्तर B, बाह्य क्षेत्र है। भुगतान संतुलन वह विवरण है जिसमें किसी अवधि में देश के निवासियों और शेष विश्व के बीच हुए सभी आर्थिक लेन-देन दर्ज होते हैं, और अर्थव्यवस्था के बाह्य क्षेत्र का अर्थ ठीक यही है; इसमें वस्तु व्यापार, सेवाएँ, आय, हस्तांतरण और पूँजी प्रवाह आते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि कृषि घरेलू अर्थव्यवस्था का उत्पादक क्षेत्र है और उसे उत्पादन तथा राष्ट्रीय आय लेखों से मापा जाता है, भुगतान संतुलन से नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि सरकारी क्षेत्र का हिसाब बजट और राजकोषीय घाटे से रखा जाता है, जो आंतरिक लेखे हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि निजी क्षेत्र भी घरेलू वर्गीकरण है, जिसमें परिवार और फर्म आते हैं और जो बचत तथा निवेश के आँकड़ों में दिखता है। शेष तीनों आंतरिक अर्थव्यवस्था के भाग हैं, केवल बाह्य क्षेत्र बाहर की ओर देखता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा व्यापार अवरोध नहीं है?
- A.सब्सिडी
- B.प्रतिबंध (एम्बार्गो)
- C.निर्यात सुरक्षा
- D.प्रशुल्क अवरोध
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. निर्यात सुरक्षा
व्याख्या
सही उत्तर C, निर्यात सुरक्षा है। निर्यात सुरक्षा व्यापार अवरोधों की कोई मान्य श्रेणी नहीं है; यह ऐसा कोई उपाय नहीं है जो सीमा पार वस्तुओं की आवाजाही रोकता हो। विकल्प A इसलिए गलत विकल्प है क्योंकि सब्सिडी को अवरोध माना जाता है: घरेलू उत्पादकों की लागत घटाकर वह आयातित वस्तु को प्रतिस्पर्धा से बाहर कर देती है और इसी कारण विश्व व्यापार संगठन उस पर अनुशासन लगाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि एम्बार्गो सबसे कठोर अवरोध है, जिसमें किसी देश या किसी वस्तु के साथ व्यापार पर पूर्ण रोक लगा दी जाती है। विकल्प D गलत है क्योंकि प्रशुल्क अवरोध, मुख्यतः सीमा शुल्क, सबसे प्रचलित अवरोध है, जो घरेलू बाजार में आयातित वस्तु का दाम बढ़ा देता है। दोनों परिवारों को अलग रखें: प्रशुल्क अवरोध कीमत पर काम करते हैं और गैर-प्रशुल्क अवरोध मात्रा या प्रवेश पर।
अंतर्मुखी व्यापार रणनीति में घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए प्रयुक्त संरक्षण के दो मुख्य रूप कौन-से हैं?
- A.प्रशुल्क और सब्सिडी
- B.कोटा और सब्सिडी
- C.प्रशुल्क और मूल्य नियंत्रण
- D.प्रशुल्क और कोटा
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. प्रशुल्क और कोटा
व्याख्या
सही उत्तर D, प्रशुल्क और कोटा है। अंतर्मुखी व्यापार रणनीति, जिसे आयात प्रतिस्थापन कहा जाता है, वही नीति थी जिसे भारत ने दूसरी पंचवर्षीय योजना से 1991 तक अपनाया, और वह दो उपकरणों पर टिकी थी। प्रशुल्क आयात पर लगने वाला कर है, जो विदेशी वस्तु को महँगा कर देता है, और कोटा वह सीमा है कि कुल कितनी मात्रा आयात की जा सकती है। विकल्प A गलत है क्योंकि सब्सिडी निर्यातकों या घरेलू उत्पादकों की सहायता करती है, पर पाठ्यपुस्तक की संरक्षण परिभाषा में नामित जोड़ी वह नहीं है। विकल्प B इसी कारण गलत है और इसमें प्रशुल्क छूट गया है, जो प्राथमिक उपकरण है। विकल्प C गलत है क्योंकि मूल्य नियंत्रण उपभोक्ताओं और आवश्यक वस्तुओं के लिए घरेलू उपाय है; वह सीमा पर काम नहीं करता। जोड़ी याद रखें: संरक्षण अर्थात प्रशुल्क और कोटा।
आत्मनिर्भरता का सूचक क्या है?
- A.उन वस्तुओं के आयात में वृद्धि जिनका उत्पादन देश में हो सकता है।
- B.उन वस्तुओं के आयात से बचना जिनका उत्पादन देश में हो सकता है।
- C.उन वस्तुओं के निर्यात में वृद्धि जिनका उत्पादन देश में नहीं हो सकता।
- D.उन वस्तुओं के निर्यात से बचना जिनका उत्पादन देश में हो सकता है।
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. उन वस्तुओं के आयात से बचना जिनका उत्पादन देश में हो सकता है।
व्याख्या
सही उत्तर B है। आत्मनिर्भरता, जो भारत की आरंभिक योजनाओं का लक्ष्य थी, का अर्थ है देश के भीतर वह उत्पादन क्षमता खड़ी करना जिसके अभाव में वस्तुएँ विदेश से खरीदनी पड़तीं, इसलिए उसका वास्तविक सूचक यही है कि ऐसी वस्तुओं के आयात से बचा जाए। यह निर्भरता घटाने का कथन है, व्यापार समाप्त करने का नहीं। विकल्प A गलत है क्योंकि जिन वस्तुओं को देश स्वयं बना सकता है उनके आयात का बढ़ना आत्मनिर्भरता के विपरीत है और बढ़ती निर्भरता दिखाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि जो वस्तु देश बनाता ही नहीं उसका बड़ी मात्रा में निर्यात संभव नहीं है, और निर्यात वैसे भी प्रतिस्पर्धात्मकता का संकेत है, आत्मनिर्भरता का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि घरेलू रूप से उत्पादित वस्तुओं के निर्यात से बचना कमाई की क्षमता नष्ट करता है; आत्मनिर्भरता का अर्थ विदेशी बाजार छोड़ना कभी नहीं था। इसी विचार से आयात प्रतिस्थापन की नीति निकली।
किसी देश के व्यापार संतुलन में निम्नलिखित में से क्या सम्मिलित होता है?
- A.केवल वस्तुओं का निर्यात और आयात
- B.वस्तुओं तथा सेवाओं का निर्यात और आयात
- C.चालू और पूँजी खाते के सभी लेन-देन
- D.केवल विदेशी निवेश का प्रवाह
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केवल वस्तुओं का निर्यात और आयात
व्याख्या
सही उत्तर A, केवल वस्तुओं का निर्यात और आयात है। व्यापार संतुलन, जिसे वस्तु या दृश्य संतुलन भी कहते हैं, निर्यात की गई वस्तुओं और आयात की गई वस्तुओं के मूल्य का अंतर है; इसमें और कुछ नहीं आता। विकल्प B गलत है क्योंकि सेवाएँ जोड़ते ही वह आँकड़ा वस्तु एवं सेवा संतुलन बन जाता है, जो चालू खाते की ओर एक कदम है पर व्यापार संतुलन नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि चालू और पूँजी खाते मिलकर पूरा भुगतान संतुलन बनाते हैं, जिसका व्यापार संतुलन केवल एक अंग है। विकल्प D गलत है क्योंकि विदेशी निवेश, चाहे प्रत्यक्ष हो या पोर्टफोलियो, पूँजी खाते में आता है और व्यापार संतुलन में कभी नहीं। यही इस अध्याय की सबसे आम भ्रांति है, इसलिए सीढ़ी क्रम से याद रखें: व्यापार संतुलन, फिर चालू खाता, फिर भुगतान संतुलन।