भारत के कृषि क्षेत्र में जहाँ आवश्यकता से अधिक लोग काम में लगे होते हैं, उस प्रकार की बेरोजगारी को क्या कहा जाता है?
- A.प्रच्छन्न बेरोजगारी
- B.मौसमी बेरोजगारी
- C.संरचनात्मक बेरोजगारी
- D.सीमांत बेरोजगारी
सही उत्तर
A. प्रच्छन्न बेरोजगारी
व्याख्या
सही उत्तर है A, प्रच्छन्न बेरोजगारी। प्रच्छन्न बेरोजगारी वह स्थिति है जिसमें किसी काम पर उससे अधिक लोग लगे होते हैं जितने की वास्तव में जरूरत है, इसलिए उनमें से कुछ को हटा देने पर भी उत्पादन घटता नहीं है। भारतीय कृषि इसका सबसे जाना-पहचाना उदाहरण है: दो हेक्टेयर की पारिवारिक जोत पर पाँच-छह सदस्य लगे रहते हैं, जबकि वही काम दो लोग पूरा कर सकते हैं। अतिरिक्त लोग उपज में हिस्सा पाकर जीते हैं, पर उत्पादन में कुछ जोड़ते नहीं। उनकी सीमांत उत्पादकता लगभग शून्य होती है, इसीलिए इसे छिपी हुई या प्रच्छन्न बेरोजगारी कहा जाता है। NCERT की कक्षा 9 की अर्थशास्त्र की किताब में ‘संसाधन के रूप में लोग’ अध्याय में यही उदाहरण दिया गया है। B गलत है क्योंकि मौसमी बेरोजगारी में लोग वर्ष के कुछ महीनों, जैसे बुवाई और कटाई के बीच, खाली रहते हैं। C गलत है क्योंकि संरचनात्मक बेरोजगारी कामगारों के कौशल और उपलब्ध नौकरियों के बेमेल से पैदा होती है। D गलत है क्योंकि सीमांत बेरोजगारी इस तरह की कोई मानक श्रेणी नहीं है। परीक्षा टिप: प्रच्छन्न बेरोजगारी — अतिरिक्त श्रमिक, सीमांत उत्पादकता लगभग शून्य।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंभारतीय जीवन बीमा निगम अधिनियम संसद द्वारा किस वर्ष पारित किया गया था?
- A.1956
- B.1948
- C.1971
- D.1965
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 1956
व्याख्या
सही उत्तर है A, 1956। संसद ने भारतीय जीवन बीमा निगम अधिनियम 1956 में पारित किया, और भारतीय जीवन बीमा निगम ने उसी वर्ष 1 सितंबर से काम शुरू किया। इससे पहले 245 निजी बीमा कंपनियों और भविष्य निधि समितियों का जीवन बीमा कारोबार अधिग्रहीत कर निगम में मिला दिया गया था। इसका उद्देश्य बीमा को गाँवों तक पहुँचाना और बीमाधारकों की बचत पर सरकारी गारंटी की सुरक्षा देना था। एलआईसी का मुख्यालय मुंबई में है और इसका ध्येय वाक्य ‘योगक्षेमं वहाम्यहम्’ है। साधारण बीमा का राष्ट्रीयकरण इससे बहुत बाद, 1972 में हुआ, और नियामक संस्था आईआरडीएआई 1999 में बनी। B गलत है क्योंकि 1948 में जीवन बीमा पूरी तरह निजी हाथों में था। C गलत है क्योंकि 1971 तक एलआईसी पंद्रह वर्ष काम कर चुका था। D गलत है क्योंकि 1965 भी अधिनियम के बाद का वर्ष है, उसके पारित होने का वर्ष नहीं। परीक्षा टिप: एलआईसी अधिनियम 1956, निगम 1 सितंबर 1956 से; साधारण बीमा राष्ट्रीयकरण 1972, आईआरडीएआई 1999।
अमूल दूध और दुग्ध उत्पादों में सहकारिता की एक सफल कहानी है, जो _______ से शुरू हुई और जिसने देश में श्वेत क्रांति लाई।
- A.दिल्ली
- B.कर्नाटक
- C.उत्तर प्रदेश
- D.गुजरात
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. गुजरात
व्याख्या
सही उत्तर है D, गुजरात। अमूल की शुरुआत खेड़ा जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ से हुई, जो 1946 में गुजरात के आनंद में बना, जब खेड़ा जिले के किसानों ने बिचौलियों द्वारा दिए जाने वाले कम दामों के विरुद्ध संगठित होकर अपना संघ खड़ा किया। त्रिभुवनदास पटेल ने किसानों का नेतृत्व किया और वर्गीज कुरियन ने इस डेयरी को आधुनिक उद्यम का रूप दिया, जिससे लाखों छोटे उत्पादकों का दूध इकट्ठा कर, ठंडा कर, संसाधित कर एक ही ब्रांड के नाम से बेचा जा सका। 1970 से ऑपरेशन फ्लड के जरिए आनंद का यही ढाँचा पूरे देश में फैलाया गया, जिसने भारत को विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बनाया। कुरियन को श्वेत क्रांति के जनक के रूप में याद किया जाता है। A गलत है क्योंकि दिल्ली दूध का बाजार है, इस सहकारी संस्था का उद्गम नहीं। B गलत है क्योंकि कर्नाटक का सहकारी ब्रांड नंदिनी है। C गलत है क्योंकि उत्तर प्रदेश में दूध बहुत होता है, पर अमूल वहाँ से शुरू नहीं हुआ। परीक्षा टिप: अमूल — आनंद, गुजरात, 1946; ऑपरेशन फ्लड 1970, वर्गीज कुरियन।
योजना आयोग की स्थापना कब की गई थी?
- A.2019
- B.2000
- C.1947
- D.1950
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 1950
व्याख्या
सही उत्तर है D, 1950। योजना आयोग की स्थापना मार्च 1950 में केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव से हुई थी, न संविधान से और न संसद के किसी अधिनियम से। इसी कारण यह एक संविधानेतर सलाहकार संस्था थी। प्रधानमंत्री इसका अध्यक्ष होता था; जवाहरलाल नेहरू पहले अध्यक्ष और गुलजारीलाल नंदा पहले उपाध्यक्ष बने। इसका काम देश के संसाधनों का आकलन करना और पंचवर्षीय योजनाएँ बनाना था। पहली पंचवर्षीय योजना 1951 से 1956 तक चली, जो हैरोड-डोमर मॉडल पर आधारित थी और जिसमें कृषि तथा सिंचाई को पहली प्राथमिकता दी गई। 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग की जगह नीति आयोग बना, जो धन आवंटित नहीं करता, केवल सलाह देता है। A गलत है क्योंकि 2019 आयोग की स्थापना से दशकों बाद का वर्ष है। B गलत है क्योंकि 2000 में ऐसी कोई संस्था नहीं बनी। C गलत है क्योंकि 1947 स्वतंत्रता का वर्ष है, आयोग के बनने से तीन वर्ष पहले। परीक्षा टिप: योजना आयोग मार्च 1950, पहली योजना 1951-56, नीति आयोग 1 जनवरी 2015।
बहुआयामी गरीबी सूचकांक किन तीन आयामों में वंचना मापता है?
- A.आय, बचत और रोजगार
- B.स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर
- C.भोजन, वस्त्र और आवास
- D.कृषि, उद्योग और सेवाएं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर है। यह सूचकांक किसी परिवार को तब गरीब मानता है जब वह इन तीन शीर्षकों के अंतर्गत आने वाले पर्याप्त संकेतकों में वंचित हो, जैसे स्वास्थ्य में पोषण और बाल मृत्यु, शिक्षा में विद्यालय के वर्ष और उपस्थिति, तथा जीवन स्तर में रसोई ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास और संपत्ति। विकल्प A गलत है क्योंकि यह सूचकांक बना ही आय और बचत से आगे देखने के लिए है, जिन्हें उपभोग आधारित गरीबी रेखा पहले ही समेट लेती है। विकल्प C गलत है क्योंकि भोजन, वस्त्र और आवास पारंपरिक मूलभूत आवश्यकताएं हैं और प्रयुक्त संकेतकों से जुड़ी होने पर भी वे तीन आयामों के नाम नहीं हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि कृषि, उद्योग और सेवाएं अर्थव्यवस्था के क्षेत्र हैं, जिनका परिवार की वंचना मापने से कोई संबंध नहीं।
गरीबी के माप के रूप में शीर्ष गणना अनुपात क्या दर्शाता है?
- A.गरीब लोग गरीबी रेखा से कितने नीचे हैं
- B.गरीबी रेखा से नीचे जनसंख्या का अनुपात
- C.गरीबों के बीच आय की असमानता
- D.बेरोजगार लोगों की संख्या
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गरीबी रेखा से नीचे जनसंख्या का अनुपात
व्याख्या
सही उत्तर B, गरीबी रेखा से नीचे जनसंख्या का अनुपात है। शीर्ष गणना अनुपात केवल यह गिनता है कि कितने लोग रेखा से नीचे हैं और उसे कुल जनसंख्या से भाग देता है, इसीलिए इसे समझना और राज्यों के बीच तुलना करना आसान है। विकल्प A गलत है क्योंकि गरीबी की गहराई, यानी गरीबों का रेखा से औसत अंतर, गरीबी अंतराल सूचकांक से मापी जाती है, और यही वह बात है जो शीर्ष गणना अनुपात नहीं बताता। विकल्प C गलत है क्योंकि गरीबों के बीच की असमानता वर्गित गरीबी अंतराल या गिनी गुणांक जैसे मापों से देखी जाती है। विकल्प D गलत है क्योंकि बेरोजगारी अलग अवधारणा है, जिसे श्रम बल सर्वेक्षण मापते हैं; व्यक्ति रोजगार में रहते हुए भी गरीब हो सकता है, जो दिहाड़ी श्रमिकों में आम है।