भारत का पहला WASH सामाजिक बॉन्ड जारी करने वाली नाबकिसान फाइनेंस लिमिटेड किस संस्था की अनुषंगी है?
- A.भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक
- B.राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
- C.राष्ट्रीय आवास बैंक
- D.भारतीय निर्यात-आयात बैंक
सही उत्तर
B. राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
व्याख्या
सही उत्तर राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक यानी नाबार्ड है। नाबकिसान फाइनेंस लिमिटेड नाबार्ड की अनुषंगी कंपनी है, और इस बॉन्ड की सूचीबद्धता को ऐसा कदम बताया गया जो ग्रामीण विकास के लिए नए वित्तीय तरीकों के प्रति नाबार्ड तथा नाबकिसान, दोनों की प्रतिबद्धता को मज़बूत करता है। नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी ने समारोह में कहा कि विकास संस्थाएँ ऐसी परियोजनाओं को इतना कर्ज़-योग्य बना देती हैं कि वाणिज्यिक बैंक और पूंजी बाज़ार भी उनमें हिस्सा लेने लगते हैं। विकल्प A यानी भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए काम करता है, इस कंपनी से उसका कोई नाता नहीं है। विकल्प C यानी राष्ट्रीय आवास बैंक आवास वित्त का पुनर्वित्त करता है और विकल्प D यानी भारतीय निर्यात-आयात बैंक विदेश व्यापार को सहारा देता है; यहाँ इनकी कोई भूमिका नहीं है। मूल संस्था याद रखना ज़रूरी है क्योंकि उसी से समझ आता है कि यह रकम ग्रामीण और वंचित परिवारों पर क्यों केंद्रित है।
पूरा लेख पढ़ें: नाबकिसान ने भारत के पहले WASH सामाजिक बॉन्ड से ₹180 करोड़ जुटाए
अभ्यास प्रश्न
नाबकिसान फाइनेंस लिमिटेड ने भारत के पहले WASH सामाजिक बॉन्ड से कितनी राशि जुटाई?
- A.₹90 करोड़
- B.₹180 करोड़
- C.₹250 करोड़
- D.₹360 करोड़
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ₹180 करोड़
व्याख्या
सही उत्तर ₹180 करोड़ है। नाबार्ड की अनुषंगी नाबकिसान फाइनेंस लिमिटेड ने जल, स्वच्छता और साफ-सफाई के काम के लिए समर्पित देश का पहला सामाजिक बॉन्ड बाज़ार में उतारा और निवेशकों ने बिक्री के लिए रखे बॉन्ड से 1.8 गुना अधिक की बोली लगाई। इसी मांग के कारण कंपनी ₹180 करोड़ जुटा सकी, जो गाँवों और उन इलाकों में सुरक्षित पानी, शौचालय तथा साफ-सफाई की सेवाओं पर कर्ज़ के रूप में लगेगी जिन्हें कर्ज़दाता आमतौर पर छोड़ देते हैं। विकल्प A यानी ₹90 करोड़ असली रकम का आधा है और निर्गम से इसका कोई संबंध नहीं है। विकल्प C यानी ₹250 करोड़ तथा विकल्प D यानी ₹360 करोड़ बड़ी गोल संख्याएँ हैं, जो कभी जुटाई ही नहीं गईं; मांग अधिक रहने पर भी निर्गम तय राशि पर ही बंद हुआ। परीक्षा के लिहाज़ से इस रकम को बॉन्ड की बाकी शर्तों के साथ याद रखें — पाँच वर्ष की अवधि, 8.10% वार्षिक ब्याज, सितंबर 2031 में परिपक्वता तथा क्रिसिल और केयर दोनों से AAA (स्थिर) रेटिंग।
अक्टूबर 2026 में सूचीबद्ध नाबकिसान के WASH सामाजिक बॉन्ड की ब्याज दर क्या है?
- A.7.10% वार्षिक
- B.7.75% वार्षिक
- C.8.10% वार्षिक
- D.8.60% वार्षिक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 8.10% वार्षिक
व्याख्या
सही उत्तर 8.10% वार्षिक है। नाबकिसान ने जो बॉन्ड मुंबई के राष्ट्रीय शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध कराया, वह पाँच वर्ष चलता है और परिपक्वता यानी सितंबर 2031 तक अपने धारकों को यही दर देता रहेगा। क्रिसिल और केयर, दोनों रेटिंग एजेंसियों ने इस बॉन्ड को घरेलू स्तर की सर्वोच्च गुणवत्ता का माना और AAA (स्थिर) श्रेणी दी। इसी वजह से इस स्तर की ब्याज दर पर बिक्री के लिए रखी रकम से 1.8 गुना अधिक बोलियाँ आईं और कंपनी ₹180 करोड़ जुटा सकी। विकल्प A और B में दी गई 7.10% तथा 7.75% दरें वास्तविक दर से कम हैं, जबकि विकल्प D की 8.60% दर उससे अधिक है; इनमें से कोई भी दर इस निर्गम में नहीं दी गई। परीक्षा में बॉन्ड से जुड़े प्रश्न आमतौर पर पाँच आंकड़ों में से किसी एक पर होते हैं, इसलिए ब्याज दर के साथ अवधि, परिपक्वता का महीना, अभिदान और जुटाई गई रकम भी साथ ही याद करें।
नए अधिनियम के अनुसार बैंक अधिकारी को गवाह के रूप में पेश होने या बैंकर्स बुक देने के लिए कब कहा जा सकता है?
- A.जब भी मुकदमे का कोई पक्षकार इसकी मांग करे
- B.केवल अदालत के लिखित आदेश पर, जिसमें विशेष कारण दर्ज हो
- C.केवल रिज़र्व बैंक की पूर्व अनुमति से
- D.केवल तभी जब बैंक स्वयं कार्यवाही में पक्षकार हो
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केवल अदालत के लिखित आदेश पर, जिसमें विशेष कारण दर्ज हो
व्याख्या
सही उत्तर है केवल अदालत के लिखित आदेश पर, जिसमें विशेष कारण दर्ज हो। अधिनियम बैंकर्स बुक की विषय-वस्तु को मूल पुस्तक पेश किए बिना प्रमाणित प्रति से सिद्ध करने की अनुमति देता है, इसलिए अधिकारी को सामान्यतः पेश होने के लिए बाध्य नहीं किया जाता, विशेषकर तब जब बैंक पक्षकार न हो। अधिनियम ने विशेष कारण भी गिनाए हैं, यानी प्रविष्टि की सटीकता या प्रामाणिकता पर संदेह, अभिलेख रखने की नियमितता में बाधा, या बैंक द्वारा अदालत के पिछले आदेश का पालन न करना। विकल्प A इस संरक्षण को ही समाप्त कर देता है। विकल्प C ऐसी अनुमति जोड़ता है जिसकी अधिनियम में कोई आवश्यकता नहीं। विकल्प D एक परिस्थिति बताता है, विधिक कसौटी नहीं, इसलिए वह भी गलत है।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 2026 किस पुराने कानून की जगह ले रहा है?
- A.बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 1891
- B.भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
- C.बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949
- D.परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 1891
व्याख्या
सही उत्तर है बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 1891। नया अधिनियम उसी नाम के साथ नए वर्ष में आया है और उस औपनिवेशिक कानून का स्थान लेता है, जो उस समय बना था जब बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह कागज पर चलती थी। विकल्प B गलत है, क्योंकि भारतीय साक्ष्य अधिनियम साक्ष्य का सामान्य कानून है और यहां उसकी जगह नहीं ली जा रही। विकल्प C गलत है, क्योंकि बैंकिंग विनियमन अधिनियम बैंकिंग कंपनियों के विनियमन से जुड़ा है, न कि उनके अभिलेखों की ग्राह्यता से। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि परक्राम्य लिखत अधिनियम चेक, विनिमय पत्र और वचन पत्र से संबंधित है। दोनों वर्ष, यानी पुराना 1891 और नया 2026, जोड़कर याद रखें। परीक्षा में प्रायः यही पूछा जाता है कि नए अधिनियम ने किस पुराने कानून का स्थान लिया, इसलिए नाम के साथ दोनों वर्ष भी ठीक-ठीक स्मरण रखने चाहिए।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 2026 किस तिथि से लागू हो रहा है?
- A.पहली अप्रैल 2026
- B.पहली अक्टूबर 2026
- C.पहली जनवरी 2027
- D.पंद्रह अगस्त 2026
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पहली अक्टूबर 2026
व्याख्या
सही उत्तर है पहली अक्टूबर 2026। सरकारी जानकारी में स्पष्ट कहा गया है कि अधिनियम इसी तिथि से लागू होगा और उसी दिन से यह पुराने कानून का स्थान ले लेगा। विकल्प A वित्तीय वर्ष की पहली तारीख है, जो लागू होने से जुड़े हर प्रश्न में सामान्य भ्रामक विकल्प के रूप में रखी जाती है, इसलिए यहां गलत है। विकल्प C तिथि को अगले कैलेंडर वर्ष में खिसका देता है और गलत है। विकल्प D एक राष्ट्रीय तिथि है, जिसका इस कानून से कोई संबंध नहीं। किसी नए कानून के बारे में लागू होने की तिथि सबसे अधिक पूछे जाने वाले विवरणों में है, इसलिए तिथि के साथ यह भी याद रखें कि उसी दिन से यह ढांचा विधिक कार्यवाही, मध्यस्थता और जांच पर लागू होगा।