भारत का पहला संगठित वायदा बाज़ार किसे माना जाता है?
- A.बॉम्बे कॉटन ट्रेड एसोसिएशन, 1875
- B.मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज, 2003
- C.कलकत्ता हेसियन एक्सचेंज, 1919
- D.बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, 1875
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर A, बॉम्बे कॉटन ट्रेड एसोसिएशन, 1875 है। भारत में संगठित वायदा कारोबार 1875 में बंबई में कपास से शुरू हुआ और उसी वर्ष बना यह संगठन देश का पहला संगठित वायदा बाज़ार माना जाता है; उसके बाद के दशकों में तिलहन, जूट और सर्राफा आए। विकल्प B गलत है क्योंकि 2003 में बना मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज आधुनिक राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक एक्सचेंजों में है और पहला होने से बहुत दूर है। विकल्प C गलत है क्योंकि जूट उत्पादों का कारोबार करने वाला कलकत्ता हेसियन एक्सचेंज 1919 में बना, अर्थात् बंबई के कपास बाज़ार के कई दशक बाद। विकल्प D जाल है, क्योंकि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भी अपनी शुरुआत 1875 से जोड़ता है, किंतु वह प्रतिभूति एक्सचेंज है, कमोडिटी वायदा बाज़ार नहीं। स्वतंत्रता के बाद कई जिंसों में वायदा कारोबार पर रोक लगी और वह 1990 के दशक से ही फिर खुला।
पूरा लेख पढ़ें: कमोडिटी बाज़ार और डेरिवेटिव्स: परीक्षा नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंडेरिवेटिव ऐसा वित्तीय साधन है जिसका मूल्य किससे प्राप्त होता है?
- A.सरकार द्वारा तय किया जाता है
- B.किसी अंतर्निहित परिसंपत्ति से व्युत्पन्न होता है
- C.शेयर के अंकित मूल्य के बराबर होता है
- D.भारतीय रिज़र्व बैंक तय करता है
उत्तर देखें
डेरिवेटिव का अपना कोई स्वतंत्र मूल्य नहीं होता; वह ऐसा अनुबंध है जिसका मूल्य किसी और वस्तु के भाव से आता है, जो सोना या कच्चे तेल जैसी जिंस, शेयर, शेयर सूचकांक, मुद्रा या ब्याज दर हो सकती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कौन सा डेरिवेटिव अनुबंध क्रेता को अंतर्निहित परिसंपत्ति खरीदने या बेचने का अधिकार देता है, बाध्यता नहीं?
- A.फॉरवर्ड
- B.फ्यूचर
- C.ऑप्शन
- D.स्वैप
उत्तर देखें
ऑप्शन अपने क्रेता को यह अधिकार देता है, बाध्यता नहीं, कि वह अंतर्निहित परिसंपत्ति को स्ट्राइक मूल्य पर निर्धारित तिथि को या उससे पहले खरीदे या बेचे, और इस अधिकार के बदले क्रेता विक्रेता को प्रीमियम देता है, जिसे राइटर कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कॉल ऑप्शन अपने धारक को क्या अधिकार देता है?
- A.स्ट्राइक मूल्य पर अंतर्निहित परिसंपत्ति खरीदने का
- B.स्ट्राइक मूल्य पर अंतर्निहित परिसंपत्ति बेचने का
- C.अंतर्निहित परिसंपत्ति ब्याजमुक्त उधार लेने का
- D.बिना प्रीमियम दिए अनुबंध रद्द करने का
उत्तर देखें
कॉल का अर्थ है परिसंपत्ति को विक्रेता से माँग लेना, अर्थात् खरीदना, और क्रेता कॉल तब लेता है जब उसे अंतर्निहित भाव के स्ट्राइक मूल्य से ऊपर जाने की आशा हो।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन सी विशेषता फ्यूचर अनुबंध की है, फॉरवर्ड अनुबंध की नहीं?
- A.यह भविष्य की तिथि का अनुबंध है
- B.यह मानक शर्तों के साथ मान्यता प्राप्त एक्सचेंज पर होता है
- C.इससे भाव जोखिम का हेजिंग किया जा सकता है
- D.इसमें कोई अंतर्निहित परिसंपत्ति होती है
उत्तर देखें
फ्यूचर मानकीकृत अनुबंध है जिसमें मात्रा, गुणवत्ता, सुपुर्दगी तिथि और सुपुर्दगी केंद्र एक्सचेंज तय करता है, दोनों पक्ष मार्जिन जमा करते हैं, स्थिति प्रतिदिन बाज़ार भाव पर आँकी जाती है और क्लियरिंग निगम दोनों ओर का प्रतिपक्ष बन जाता है, जिससे चूक का जोखिम समाप्त हो जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में कमोडिटी डेरिवेटिव्स का नियमन कौन सा प्राधिकरण करता है?
- A.भारतीय रिज़र्व बैंक
- B.वायदा बाज़ार आयोग
- C.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
- D.उपभोक्ता मामले मंत्रालय
उत्तर देखें
वायदा बाज़ार आयोग का 28 सितंबर 2015 को सेबी में विलय हो गया, 1952 का वायदा संविदा (विनियमन) अधिनियम 2015 के वित्त अधिनियम से निरस्त हुआ, और कमोडिटी डेरिवेटिव्स को प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 की प्रतिभूति की परिभाषा में लाया गया, इसलिए अब उनका नियमन सेबी करता है।
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