औसत खुदरा चीनी कीमतें अगस्त के शिखर से कितनी घट चुकी हैं?
- A.5 प्रतिशत
- B.10 प्रतिशत
- C.15 प्रतिशत
- D.28 प्रतिशत
सही उत्तर
C. 15 प्रतिशत
व्याख्या
सही उत्तर है 15 प्रतिशत। औसत खुदरा चीनी कीमतें अगस्त में छुए शिखर से इतनी घट चुकी हैं और मिल की सस्ती दरों का असर नीचे तक पहुंचने पर इनमें और नरमी की उम्मीद है। विकल्प D यानी 28 प्रतिशत इस प्रश्न का जाल है, क्योंकि यह मिल से बाहर की कीमतों में आई गिरावट है, जो पिछले तीन हफ्तों से स्थिर भी बनी हुई है; खुदरा और मिल गेट आपूर्ति श्रृंखला के दो अलग पड़ाव हैं और इनके आंकड़े आपस में नहीं बदलने चाहिए। विकल्प A और B गिरावट को कम करके बताते हैं, इसलिए गलत हैं। सरकार ने थोक तथा खुदरा विक्रेताओं से कहा है कि मिल की कीमतों में आई गिरावट का लाभ बिना देरी खरीदारों तक पहुंचाएं, और गन्ना किसान तथा उपभोक्ता को देश की चीनी नीति के दो स्तंभ बताया है।
पूरा लेख पढ़ें: चीनी व्यापारियों के लिए भंडारण सीमा 1,000 क्विंटल तय हुई
अभ्यास प्रश्न
देश के अधिकांश हिस्सों में चीनी व्यापारी के लिए संशोधित भंडारण सीमा क्या है?
- A.500 क्विंटल
- B.1,000 क्विंटल
- C.2,000 क्विंटल
- D.5,000 क्विंटल
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सही उत्तर: B. 1,000 क्विंटल
व्याख्या
सही उत्तर है 1,000 क्विंटल। संशोधित मानदंडों के तहत कोई व्यापारी देश में किसी भी समय या किसी भी स्थान पर इससे अधिक चीनी नहीं रख सकता, और यह नियम 15 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा। विकल्प C यानी 2,000 क्विंटल सबसे निकट का गलत उत्तर है और इसे ध्यान से पढ़ना चाहिए, क्योंकि यह ऊंची सीमा केवल कोलकाता तथा उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्रों और असम राज्य पर लागू होती है, जहां भौगोलिक स्थिति, परिवहन और पूर्वोत्तर के उपभोक्ताओं का हित ध्यान में रखा गया। विकल्प A और D यानी 500 तथा 5,000 क्विंटल के आंकड़े आसपास के लगते हैं, मगर आदेश में ये तय नहीं किए गए। मात्रा के साथ समय सीमा भी याद रखें — स्टॉक मिलने की तारीख से 15 दिन से अधिक उसे नहीं रखा जा सकता, यानी आदेश मात्रा और अवधि दोनों पर अंकुश लगाता है।
चीनी भंडारण की ऊंची सीमा किसे दी गई है?
- A.मुंबई और गुजरात राज्य
- B.चेन्नई और केरल राज्य
- C.कोलकाता तथा उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र और असम राज्य
- D.दिल्ली और पंजाब राज्य
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सही उत्तर: C. कोलकाता तथा उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र और असम राज्य
व्याख्या
सही उत्तर है कोलकाता तथा उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र और असम राज्य। इन्हें सामान्य सीमा से बाहर रखा गया और दोगुनी सीमा दी गई, क्योंकि कोलकाता उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से चीनी लेकर पूर्वी भारत तथा पूर्वोत्तर तक पहुंचाता है, जबकि असम के लिए ऊंचा आंकड़ा वहां की भौगोलिक स्थिति, सामान ढोने की व्यवस्था और उपभोक्ताओं के हित को देखते हुए तय हुआ। विकल्प A, B और D में दूसरे बड़े शहर और राज्य गिनाए गए हैं, जो व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, मगर इस आदेश में इनमें से किसी को छूट नहीं मिली। याद रखने लायक बात यह है कि छूट आपूर्ति के रास्ते के आधार पर दी गई है, शहर के आकार के आधार पर नहीं — कोलकाता पूर्व का प्रवेश द्वार है, इसलिए कड़ी राष्ट्रीय सीमा से पूर्वोत्तर की आपूर्ति पर असर पड़ता।
2014-15 से 2025-26 के दौरान समर्थन मूल्य पर कितने गेहूं की खरीद हुई?
- A.2254 लाख मीट्रिक टन
- B.2302 लाख मीट्रिक टन
- C.3715 लाख मीट्रिक टन
- D.3921 लाख मीट्रिक टन
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सही उत्तर: C. 3715 लाख मीट्रिक टन
व्याख्या
सही उत्तर 3715 लाख मीट्रिक टन है। 2014-15 से 2025-26 तक समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं की कुल मात्रा इतनी रही। विकल्प A यानी 2254 लाख मीट्रिक टन गलत है, क्योंकि यह 2004-05 से 2013-14 की पहले वाली अवधि का गेहूं आंकड़ा है। विकल्प B यानी 2302 लाख मीट्रिक टन भी गलत है, क्योंकि वह उसी पुरानी अवधि में छहों रबी फसलों की कुल खरीद है, अकेले गेहूं की नहीं। विकल्प D यानी 3921 लाख मीट्रिक टन इसी वजह से उलटे क्रम में गलत है, क्योंकि वह 2014-15 से 2025-26 तक छहों रबी फसलों की खरीद बताता है, न कि केवल गेहूं की। भुगतान भी इसी ढर्रे पर चला, जहां गेहूं उत्पादकों को बाद की अवधि में 7.31 लाख करोड़ रुपये मिले, पहले की अवधि के 2.56 लाख करोड़ रुपये की तुलना में।
विपणन सीजन 2027-28 के लिए किस रबी फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य में सबसे अधिक पूर्ण वृद्धि की गई?
- A.गेहूं
- B.चना
- C.कुसुम
- D.जौ
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सही उत्तर: C. कुसुम
व्याख्या
सही उत्तर कुसुम है। विपणन सीजन 2027-28 के लिए कुसुम का समर्थन मूल्य 675 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया, जो छह अधिदेशित रबी फसलों में सबसे बड़ी रुपये वाली वृद्धि है। दूसरे स्थान पर सरसों और रेपसीड रहे, जिनमें 413 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई। विकल्प A गेहूं गलत है, क्योंकि गेहूं में सबसे कम केवल 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई, भले ही लागत पर उसका मार्जिन 106 प्रतिशत के साथ सबसे चौड़ा है। विकल्प B चना गलत है, क्योंकि चना में 83 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई, जो कुसुम से बहुत कम है। विकल्प D जौ भी गलत है, क्योंकि जौ में 136 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई और वह भी कुसुम के आंकड़े से काफी पीछे है। मसूर में 390 रुपये की वृद्धि हुई और वह पूर्ण वृद्धि के क्रम में तीसरे स्थान पर रही।
विपणन सीजन 2027-28 के रबी एमएसपी में अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर सबसे बड़ा मार्जिन किस फसल का है?
- A.गेहूं
- B.कुसुम
- C.मसूर
- D.चना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. गेहूं
व्याख्या
सही उत्तर गेहूं है। अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत की तुलना में अपेक्षित प्रतिफल गेहूं के लिए 106 प्रतिशत बैठता है, जो इस सीजन की छह अधिदेशित रबी फसलों में सबसे अधिक है। विकल्प B कुसुम गलत है, क्योंकि कुसुम इस सूची में सबसे नीचे 50 प्रतिशत के मार्जिन पर है, हालांकि रुपये के लिहाज से उसमें सबसे बड़ी वृद्धि हुई। विकल्प C मसूर गलत है, क्योंकि उसका मार्जिन 92 प्रतिशत है, जो गेहूं से और सरसों-रेपसीड के 96 प्रतिशत से भी कम है। विकल्प D चना गलत है, क्योंकि चना का मार्जिन 59 प्रतिशत है, जो जौ के 58 प्रतिशत से थोड़ा ही ऊपर है। यह मार्जिन उस लागत पर नापा जाता है जिसमें किराये का श्रम, पट्टे की भूमि का किराया, बीज, उर्वरक, सिंचाई शुल्क, मूल्यह्रास, कार्यशील पूंजी पर ब्याज और पारिवारिक श्रम का अनुमानित मूल्य शामिल रहता है।