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GK24
भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्यह्रास से संभावित रूप से क्या होगा?

  1. A.भारतीय निर्यात विदेशी खरीदारों के लिए सस्ता और आयात महँगा हो जाएगा
  2. B.भारतीय निर्यात विदेशी खरीदारों के लिए महँगा और आयात सस्ता हो जाएगा
  3. C.डॉलर ऋण चुकाने की रुपया लागत घट जाएगी
  4. D.आयातित कच्चे तेल की कीमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा

सही उत्तर

A. भारतीय निर्यात विदेशी खरीदारों के लिए सस्ता और आयात महँगा हो जाएगा

व्याख्या

सही उत्तर A है। रुपये के मूल्यह्रास पर हर डॉलर से अधिक रुपये मिलते हैं, इसलिए रुपये में तय कीमत वाली भारतीय वस्तु विदेशी खरीदार को कम डॉलर में पड़ती है और निर्यात अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाता है, जबकि हर आयातित वस्तु पहले से अधिक रुपये माँगती है। विकल्प B गलत है क्योंकि वह यह संबंध उलट देता है; निर्यात महँगा और आयात सस्ता होना मूल्यवृद्धि का परिणाम है। विकल्प C गलत है क्योंकि डॉलर में तय ऋण चुकाने में मूल्यह्रास के बाद अधिक रुपये लगते हैं, और इसी कारण बाह्य वाणिज्यिक उधारी वाली कंपनियों को रुपया कमजोर होने पर नुकसान होता है। विकल्प D गलत है क्योंकि कच्चा तेल डॉलर में खरीदा जाता है और भारत के आयात बिल का बड़ा भाग है, इसलिए कमजोर रुपया तेल की लागत बढ़ाता है, परिवहन तथा विनिर्माण की लागत में जुड़ता है और आयातित महँगाई लाता है। विदेश में काम करने वालों के प्रेषण से भी अधिक रुपये मिलते हैं, जो इस प्रश्न का सामान्य अतिरिक्त कथन है।

पूरा लेख पढ़ें: विदेशी मुद्रा और विनिमय दर: अवधारणा और नीति

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Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · UPSC Civil Services Prelims 2022कठिन

भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सांकेतिक प्रभावी विनिमय दर (नीर) में वृद्धि रुपये की मूल्यवृद्धि दर्शाती है। 2. वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (रीर) में वृद्धि व्यापार प्रतिस्पर्धा में सुधार दर्शाती है। 3. अन्य देशों की तुलना में घरेलू महँगाई की बढ़ती प्रवृत्ति से नीर और रीर के बीच अंतर बढ़ने की संभावना रहती है। उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. केवल 1 और 3

व्याख्या

सही उत्तर C, केवल 1 और 3 है। कथन 1 सही है क्योंकि नीर साझेदार देशों की मुद्राओं की टोकरी के मुकाबले रुपये का व्यापार भारित सूचकांक है, इसलिए सूचकांक बढ़ने का अर्थ है कि रुपया सांकेतिक रूप से मजबूत हुआ। कथन 3 सही है क्योंकि रीर नीर को सापेक्ष कीमतों के लिए समायोजित करती है, इसलिए जब घरेलू महँगाई विदेशी महँगाई से तेज चलती है तो दोनों सूचकांक अलग होने लगते हैं। कथन 2 गलत है और इसी कारण विकल्प A, B और D असफल होते हैं: रीर का बढ़ना बताता है कि रुपया वास्तविक रूप में महँगा हुआ, जिससे भारतीय वस्तुएँ विदेश में महँगी पड़ती हैं और व्यापार प्रतिस्पर्धा सुधरती नहीं, घटती है। विकल्प A गलत है क्योंकि वह कथन 2 को स्वीकार करता है और सही कथन 3 को छोड़ देता है, विकल्प B गलत है क्योंकि वह कथन 2 लेता है और सही कथन 1 छोड़ता है, तथा विकल्प D गलत है क्योंकि वह तीनों को, दोषपूर्ण दूसरे कथन सहित, सही मान लेता है।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · UPSC Civil Services Prelims 2022कठिन

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की कठोर मौद्रिक नीति से पूँजी पलायन हो सकता है। 2. पूँजी पलायन से उन कंपनियों की ब्याज लागत बढ़ सकती है जिन पर पहले से बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) है। 3. घरेलू मुद्रा का अवमूल्यन ईसीबी से जुड़े मुद्रा जोखिम को घटा देता है। उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. केवल 1 और 2

व्याख्या

सही उत्तर A, केवल 1 और 2 है। कथन 1 सही है क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त होने पर वहाँ प्रतिफल आकर्षक हो जाता है और पोर्टफोलियो धन उभरते बाजारों से बाहर निकलने लगता है, जिसे पूँजी पलायन कहते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि ऐसा बहिर्वाह रुपये को कमजोर करता है और जोखिम प्रीमियम बढ़ाता है, इसलिए बाह्य वाणिज्यिक उधारी चुका रही कंपनी को रुपये में अधिक देना पड़ता है और पुनर्वित्त महँगा मिलता है। कथन 3 गलत है और इसी से शेष विकल्प तय हो जाते हैं: घरेलू मुद्रा का मूल्य गिरने पर डॉलर में चुकाए जाने वाले ऋण का मुद्रा जोखिम घटता नहीं, बढ़ता है, क्योंकि हर डॉलर की अदायगी अब अधिक रुपये माँगती है। विकल्प B गलत है क्योंकि वह दोषपूर्ण तीसरा कथन लेता है और सही पहला छोड़ता है, विकल्प C गलत है क्योंकि वह कथन 3 लेकर कथन 2 छोड़ देता है, और विकल्प D गलत है क्योंकि वह तीनों को सही मानता है।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 09 Sept, 2024, Shift 1आसान

भारत में विदेशी निवेश को प्रायः किस चुनौती का सामना करना पड़ता है?

  1. A.अत्यधिक विदेशी प्रतिस्पर्धा
  2. B.अस्थिर नियामकीय वातावरण
  3. C.कुशल श्रमिकों का अभाव
  4. D.उपभोक्ता आधार का अभाव
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अस्थिर नियामकीय वातावरण

व्याख्या

सही उत्तर B, अस्थिर नियामकीय वातावरण है। विदेशी निवेशक देश में विदेशी मुद्रा लाते हैं और उन्हें पूर्वानुमेय नियम चाहिए; भारत के संदर्भ में सबसे अधिक गिनाई जाने वाली कठिनाई नियामकीय अनिश्चितता ही है, अर्थात बदलते नियम, अनेक विभागों और राज्यों में बँटी मंजूरियाँ तथा लंबे चलने वाले विवाद। विकल्प A गलत है क्योंकि अन्य विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा किसी भी खुले बाजार की सामान्य विशेषता है और वह निवेश रोकने वाली बाधा नहीं; निवेशक प्रतिस्पर्धा के लिए ही आते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि भारत में इंजीनियरों, प्रबंधकों और कम लागत वाले श्रमिकों का बड़ा भंडार है और श्रम आपूर्ति को प्रायः देश की ताकत बताया जाता है, भले ही कुछ विशेष कौशलों की कमी हो। विकल्प D गलत है क्योंकि बहुत बड़ा घरेलू उपभोक्ता बाजार भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को खींचने वाले मुख्य आकर्षणों में है, चुनौती नहीं। याद रखिए कि स्थिर और सरल नियम निवेश प्रवाह का सबसे बड़ा आकर्षण माने जाते हैं।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम अर्थात फेमा ने निम्नलिखित में से किस कानून की जगह ली?

  1. A.विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973
  2. B.बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949
  3. C.एकाधिकार तथा प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969
  4. D.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973

व्याख्या

सही उत्तर A, 1973 का विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम है। फेरा विदेशी मुद्रा को दुर्लभ संसाधन मानता था, अनुमति के बिना अधिकांश लेनदेन वर्जित करता था और उल्लंघन को आपराधिक अपराध बनाता था। यह बंद अर्थव्यवस्था के अनुकूल था और 1991 के बाद अव्यावहारिक हो गया, इसलिए संसद ने 1999 में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम पारित किया, जो 2000 में लागू हुआ, लेनदेन को तब तक अनुमत मानता है जब तक प्रतिबंधित न हो और उल्लंघन को दीवानी मामला मानता है। विकल्प B गलत है क्योंकि 1949 का बैंककारी विनियमन अधिनियम बैंकों के लाइसेंस और पर्यवेक्षण से संबंधित है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1969 का एमआरटीपी अधिनियम एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार से जुड़ा था और स्वयं 2002 के प्रतिस्पर्धा अधिनियम से बदला गया। विकल्प D गलत है क्योंकि 1992 के सेबी अधिनियम ने प्रतिभूति बाजार नियामक को वैधानिक शक्तियाँ दीं। फेरा 1973 और फेमा 1999 की जोड़ी तथा यह तथ्य कि फेमा रिजर्व बैंक चलाता है, साथ याद रखिए।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारत ने आईएमएफ के अनुच्छेद आठ की शर्तें किस वर्ष स्वीकार कीं, जिससे रुपया चालू खाते पर पूर्ण परिवर्तनीय हो गया?

  1. A.1991
  2. B.1993
  3. C.1994
  4. D.1999
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1994

व्याख्या

सही उत्तर C, 1994 है। भारत ने अगस्त 1994 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुच्छेद आठ की शर्तें स्वीकार कीं, जिसका अर्थ है कि वस्तु और सेवा व्यापार, यात्रा, शिक्षा, प्रेषण तथा ब्याज भुगतान के लिए रुपये को स्वतंत्र रूप से बदला जा सकता है। विकल्प A गलत है क्योंकि 1991 भुगतान संतुलन संकट और जुलाई में रुपये के दो चरणों वाले अवमूल्यन का वर्ष है, जो सुधार का आरंभ था, पूर्णता नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि मार्च 1993 में उदारीकृत विनिमय दर प्रबंध प्रणाली की दोहरी दर को एकल बाजार आधारित दर में मिलाया गया, जो परिवर्तनीयता से एक कदम पहले था। विकल्प D गलत है क्योंकि 1999 में फेमा पारित हुआ। पूँजी खाता आज भी केवल आंशिक परिवर्तनीय है, और यही भेद इन तिथियों के साथ परीक्षाओं में पूछा जाता है।