आर्थिक दृष्टि से, 19वीं शताब्दी में भारत में ब्रिटिश शासन का एक परिणाम क्या था?
- A.भारतीय हस्तशिल्प के निर्यात में वृद्धि
- B.भारतीयों के स्वामित्व वाले कारखानों की संख्या में वृद्धि
- C.भारतीय कृषि का वाणिज्यीकरण
- D.शहरी जनसंख्या में तीव्र वृद्धि
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, भारतीय कृषि का वाणिज्यीकरण। ब्रिटिश शासन ने भारतीय किसानों को अपने भोजन के बजाय बिक्री और निर्यात के लिए फसलें उगाने की ओर धकेला।
भारी भू-राजस्व नकद में चुकाना पड़ता था, इसलिए किसान नील, कपास, जूट, अफ़ीम, चाय और गन्ने जैसी नकदी फसलों की ओर मुड़े, जो ब्रिटिश उद्योग और व्यापार की ज़रूरत पूरी करती थीं। रेलवे और 1869 में स्वेज़ नहर खुलने से भारतीय खेत विश्व बाज़ार से जुड़ गए। इस वाणिज्यीकरण से किसानों को प्रायः नुकसान हुआ: वे साहूकारों के कर्ज़ में फँसे और कीमतों की गिरावट व अकाल की मार झेलने लगे।
A गलत है क्योंकि मशीन से बने सस्ते ब्रिटिश माल ने भारतीय हस्तशिल्प को बर्बाद कर दिया और उनका निर्यात बहुत घट गया। B गलत है क्योंकि भारतीयों के कारखाने धीरे-धीरे और देर से बढ़े, मुख्यतः बंबई और अहमदाबाद की कपड़ा मिलें। D गलत है क्योंकि पुराने शिल्प नगरों के पतन से नगरीकरण घटा; शहरी जनसंख्या का हिस्सा तेज़ी से नहीं बढ़ा।
Exam tip: 19वीं शताब्दी का ब्रिटिश शासन = वि-औद्योगीकरण, ग्रामीणीकरण और कृषि का वाणिज्यीकरण।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित स्वतंत्रता सेनानियों पर विचार कीजिए:
1. बारींद्र कुमार घोष
2. जोगेश चंद्र चटर्जी
3. रासबिहारी बोस
उपर्युक्त में से कौन ग़दर पार्टी से सक्रिय रूप से जुड़ा था/जुड़े थे?
- A.1 और 2
- B.केवल 2
- C.1 और 3
- D.केवल 3
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तीनों में से केवल रासबिहारी बोस ने ग़दर पार्टी के साथ सक्रिय रूप से काम किया। ग़दर पार्टी की स्थापना 1913 में सैन फ़्रांसिस्को में उत्तरी अमेरिका के भारतीयों ने की थी, जिसके नेताओं में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भकना थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किस घटना के बाद गांधीजी ने, जो लगातार अस्पृश्यता का विरोध करते रहे और सभी क्षेत्रों से इसके उन्मूलन की अपील करते रहे, 'हरिजनों' के उत्थान को अपने राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया?
- A.पूना समझौता
- B.गांधी-इरविन समझौता (दिल्ली समझौता)
- C.भारत छोड़ो आंदोलन के समय कांग्रेस नेतृत्व की गिरफ़्तारी
- D.भारत सरकार अधिनियम, 1935 का लागू होना
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सितंबर 1932 के पूना समझौते के बाद गांधीजी ने हरिजनों के उत्थान को अपने काम का केंद्रीय अंग बना लिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मध्यकालीन भारत में "फनम" शब्द किसके लिए प्रयुक्त होता था?
- A.वस्त्र
- B.सिक्के
- C.आभूषण
- D.हथियार
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फनम सोने (और बाद में चाँदी) का एक छोटा सिक्का था, जो मध्यकाल में दक्षिण भारत में व्यापक रूप से चलता था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
(दल : उसके नेता)
1. भारतीय जनसंघ : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
2. सोशलिस्ट पार्टी : सी. राजगोपालाचारी
3. कांग्रेस फ़ॉर डेमोक्रेसी : जगजीवन राम
4. स्वतंत्र पार्टी : आचार्य नरेंद्र देव
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
- A.केवल एक
- B.केवल दो
- C.केवल तीन
- D.सभी चार
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युग्म 1 और 3 सही हैं; युग्म 2 और 4 में नेताओं के नाम आपस में बदल दिए गए हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चौरी-चौरा घटना के बाद गिरफ़्तार किए गए लोगों को कानूनी बचाव किसने प्रदान किया?
- A.सी. आर. दास
- B.मदन मोहन मालवीय और कृष्ण कांत
- C.डॉ. सैफ़ुद्दीन किचलू और ख़्वाजा हसन निज़ामी
- D.एम. ए. जिन्ना
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मालवीय ने कृष्ण कांत मालवीय के साथ मिलकर चौरी-चौरा मामले के आरोपी किसानों की पैरवी की थी। 5 फ़रवरी 1922 को गोरखपुर ज़िले के चौरी-चौरा में पुलिस की गोलीबारी के बाद असहयोग आंदोलन के स्वयंसेवकों की भीड़ ने थाने में आग लगा दी, जिसमें 22 पुलिसकर्मी मारे गए।
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