आनुवंशिक इंजीनियरी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आनुवंशिक इंजीनियरी की तकनीक में पुनर्योगज DNA का निर्माण, जीन क्लोनिंग और जीन स्थानांतरण शामिल हैं। 2. प्रतिबंधन एंज़ाइम DNA को विशिष्ट स्थानों पर काटते हैं। 3. प्रतिबंधन एंज़ाइम पूरे द्वि-रज्जुक DNA को दो रज्जुकों में अलग कर देते हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.1 और 2
- C.1 और 3
- D.2 और 3
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, 1 और 2। आनुवंशिक इंजीनियरी में पुनर्योगज DNA, क्लोनिंग और जीन स्थानांतरण का प्रयोग होता है, और प्रतिबंधन एंज़ाइम DNA को विशिष्ट स्थलों पर काटते हैं; पर वे DNA के दोनों रज्जुकों को अलग नहीं करते, इसलिए कथन 3 गलत है।
प्रतिबंधन एंज़ाइम प्राकृतिक रूप से जीवाणुओं में पाए जाते हैं और "आणविक कैंची" कहलाते हैं। हर एंज़ाइम एक छोटे, विशिष्ट क्षार अनुक्रम को पहचानता है, जो अक्सर पैलिंड्रोम होता है, जैसे EcoRI के लिए GAATTC, और उस स्थान पर DNA के दोनों रज्जुकों को काटता है, जिससे प्रायः चिपचिपे सिरे बनते हैं। ऐसे कटे जीन को DNA लाइगेज़ की मदद से प्लाज़्मिड जैसे वाहक में जोड़कर पुनर्योगज DNA बनाया जाता है, जिसे फिर क्लोन करके पोषी कोशिका में पहुँचाया जाता है। DNA के दोनों रज्जुकों को अलग करना अलग काम है, जो PCR में ताप से और कोशिका में हेलिकेज़ एंज़ाइम से होता है।
A गलत है क्योंकि कथन 2 भी सही है। C और D गलत हैं क्योंकि दोनों में गलत कथन 3 शामिल है।
Exam tip: प्रतिबंधन एंज़ाइम = आणविक कैंची; DNA लाइगेज़ = आणविक गोंद; प्लाज़्मिड = वाहक।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. मिट्टी के अकार्बनिक यौगिकों से नाइट्रोजन का पौधों और जंतुओं में प्रोटीन बनाने तक और फिर वापस लौटने का चक्रण नाइट्रोजन चक्र कहलाता है। 2. हैबर प्रक्रम द्वारा अमोनिया बनाना एक ऊष्माशोषी अभिक्रिया है। 3. यूरिया को उच्च ताप और उच्च दाब पर अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड की क्रिया से संश्लेषित किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही नहीं है/हैं?
- A.1 और 3
- B.2 और 3
- C.केवल 2
- D.केवल 1
उत्तर देखें
हैबर प्रक्रम ऊष्माक्षेपी है, ऊष्माशोषी नहीं: नाइट्रोजन और हाइड्रोजन मिलकर अमोनिया बनाते हैं और ऊष्मा छोड़ते हैं। हैबर प्रक्रम में N2 + 3H2 ⇌ 2NH3 अभिक्रिया हर दो मोल अमोनिया पर लगभग 92 kJ ऊष्मा देती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पौधों में जाइलम वाहिकाओं के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही नहीं है?
- A.जाइलम वाहिकाओं की कोशिका भित्ति लिग्निनयुक्त होती है।
- B.फ्लोएम चालनी नलिकाएं संरचना में जाइलम वाहिकाओं के समान होती हैं।
- C.मृत जाइलम वाहिकाएं पौधों को संरचनात्मक सहारा देती हैं।
- D.जाइलम वाहिकाओं से जल का परिवहन होता है।
उत्तर देखें
फ्लोएम की चालनी नलिकाएं जाइलम वाहिकाओं जैसी नहीं होतीं: चालनी नलिकाएं पतली भित्ति और चालनी पट्टिकाओं वाली जीवित कोशिकाएं हैं, जबकि परिपक्व जाइलम वाहिकाएं मोटी लिग्निनयुक्त भित्ति वाली मृत, खोखली नलियां हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सक्रिय रूप से श्वसन करते ऊतकों में कार्बन डाइऑक्साइड के उच्च आंशिक दाब के कारण हीमोग्लोबिन द्वारा ऑक्सीजन छोड़ने की व्याख्या निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्रभाव सबसे अच्छी तरह करता है?
- A.हाल्डेन प्रभाव
- B.एली प्रभाव
- C.बोर प्रभाव
- D.ईगल प्रभाव
उत्तर देखें
कार्बन डाइऑक्साइड और अम्लता बढ़ने पर हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन से बंधने की क्षमता घट जाती है, इसे बोर प्रभाव कहते हैं; इससे ऑक्सीजन वहीं छूटती है जहां ऊतकों को इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →धमनियों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही नहीं है?
- A.इनका भीतरी आस्तर शल्की अंतःकला से बना होता है।
- B.इनकी मध्य परत चिकनी पेशी और प्रत्यास्थ तंतुओं से बनी होती है।
- C.इनकी बाहरी परत कोलेजन तंतुओं वाले तंतुमय संयोजी ऊतक से बनी होती है।
- D.धमनियों की भित्ति अन्य सभी रक्त वाहिकाओं में सबसे पतली होती है।
उत्तर देखें
धमनियों की भित्ति सभी रक्त वाहिकाओं में सबसे मोटी होती है, सबसे पतली नहीं, क्योंकि वे हृदय से रक्त को ऊंचे दाब पर दूर ले जाती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सी एक अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी नहीं है?
- A.जल में कैल्शियम ऑक्साइड का घुलना
- B.वनस्पति पदार्थ का अपघटन होकर कम्पोस्ट बनना
- C.लेड नाइट्रेट का अपघटन
- D.सोडियम हाइड्रॉक्साइड का जल के साथ तनुकरण
उत्तर देखें
लेड नाइट्रेट तेज़ गर्म करने पर ही टूटता है, यानी यह अभिक्रिया ऊष्मा लेती है और ऊष्माशोषी है। गर्म करने पर लेड नाइट्रेट से लेड ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का भूरा धुआं और ऑक्सीजन बनते हैं: 2Pb(NO3)2 → 2PbO + 4NO2 + O2।
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