30 सितंबर 2026 तक भारत की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता कितनी थी?
- A.48.75 गीगावाट
- B.59.20 गीगावाट
- C.68.40 गीगावाट
- D.75.10 गीगावाट
सही उत्तर
B. 59.20 गीगावाट
व्याख्या
सही उत्तर 59.20 गीगावाट है। चेन्नई में विंडर्जी इंडिया 2026 के उद्घाटन पर केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने 30 सितंबर 2026 तक स्थापित पवन क्षमता इसी स्तर पर बताई और कहा कि देश 2030 तक 100 गीगावाट पवन क्षमता पार करने की मजबूत स्थिति में है। विकल्प A, C और D में दिए आंकड़े इस मौके पर बताए ही नहीं गए थे। उसी संबोधन से दो और आंकड़े याद रखने लायक हैं: वित्त वर्ष 2026 में जुड़ी 6.05 गीगावाट क्षमता, जो किसी एक साल में भारत की सबसे बड़ी पवन बढ़ोतरी है, और यह उम्मीद कि वित्त वर्ष 2027 में बढ़ोतरी इससे भी अधिक रहेगी। स्थापित क्षमता, सालाना रिकॉर्ड बढ़ोतरी और 2030 का लक्ष्य, ये तीनों आंकड़े परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाने वाले हैं, इसलिए इन्हें एक साथ याद करना चाहिए।
पूरा लेख पढ़ें: प्रल्हाद जोशी ने चेन्नई में 8वां विंडर्जी इंडिया 2026 खोला
अभ्यास प्रश्न
विंडर्जी इंडिया 2026 के 8वें संस्करण का उद्घाटन किस शहर में हुआ?
- A.चेन्नई
- B.अहमदाबाद
- C.नई दिल्ली
- D.बेंगलुरु
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व्याख्या
सही उत्तर चेन्नई है। पवन ऊर्जा के इस वैश्विक सम्मेलन का 8वां संस्करण वहीं 8 अक्टूबर 2026 को खुला और यह 7 से 9 अक्टूबर तक चला। शहर का चुनाव तमिलनाडु की पवन ऊर्जा में भूमिका से मेल खाता है, और उद्घाटन समारोह में राज्य के ऊर्जा संसाधन तथा विधि मंत्री सी. टी. आर. निर्मल कुमार शामिल हुए और उन्होंने राज्य की रीपावरिंग नीति पर बात की। विकल्प B अहमदाबाद, विकल्प C नई दिल्ली और विकल्प D बेंगलुरु में ऊर्जा से जुड़े कई आयोजन होते हैं, लेकिन यह सम्मेलन वहां नहीं हुआ। इस संस्करण का आकार भी ध्यान रखें: 20 से अधिक देशों के करीब 400 प्रदर्शक, 500 प्रतिनिधि तथा डेनमार्क, जर्मनी और स्पेन के अलग देश मंडप। उद्घाटन पर तमिलनाडु में ऊर्जा परिवर्तन और भारतीय पवन क्षेत्र की संविदा व्यवस्था पर दो रिपोर्ट भी जारी हुईं।
विंडर्जी इंडिया 2026 में किन तीन देशों ने अपने अलग देश मंडप लगाए?
- A.डेनमार्क, जर्मनी और स्पेन
- B.नॉर्वे, फ्रांस और जापान
- C.डेनमार्क, नीदरलैंड और स्वीडन
- D.जर्मनी, इटली और पुर्तगाल
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व्याख्या
सही उत्तर डेनमार्क, जर्मनी और स्पेन है। चेन्नई के इस आयोजन में इन्हीं तीन देशों के अलग मंडप लगे, जहां 20 से अधिक देशों के करीब 400 प्रदर्शक और 500 प्रतिनिधि भी जुटे। विकल्प B, C और D में पवन ऊर्जा के जाने-माने देशों के नाम मिलाए गए हैं, इसलिए वे सही लगते हैं, लेकिन इस संस्करण के लिए बताई गई सूची पहली ही है। उसी समारोह में घोषित समझौते भी याद रखने चाहिए, क्योंकि परीक्षा में वे भी पूछे जा सकते हैं: आईडब्ल्यूटीएमए-बीडब्ल्यूई वैश्विक समझौता ज्ञापन, आईडब्ल्यूटीएमए-पीटीबी आशय पत्र और आईडब्ल्यूटीएमए-ओईसीडी सहयोग, जिनका मकसद भारतीय पवन क्षेत्र में बेहतर तकनीक लाना है। कई राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों को भूमि उपलब्ध कराने, समय पर मंजूरी देने और रास्ते के अधिकार के विवाद सुलझाने के लिए सम्मानित भी किया गया।
बैठक का मुख्य केंद्र रहा गोमती उद्गम स्थल किस जिले में स्थित है?
- A.पीलीभीत, उत्तर प्रदेश
- B.गया, बिहार
- C.इटावा, उत्तर प्रदेश
- D.प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
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व्याख्या
सही उत्तर पीलीभीत, उत्तर प्रदेश है, जहां गोमती का उद्गम है और जिसके पुनरुद्धार तथा समेकित विकास का मास्टर प्लान राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की 68वीं कार्यकारी समिति की बैठक में दिसंबर 2025 में मंजूर हुआ था। विकल्प B यानी गया, बिहार इस प्रश्न के लिए गलत है, हालांकि बिहार का उल्लेख बैठक में निरंजना या फल्गु नदी के प्रस्तावित पुनरुद्धार के संदर्भ में आया। विकल्प C यानी इटावा गलत है, पर यह समीक्षा में उन उत्तर प्रदेश के शहरों में शामिल है जहां यमुना के लिए परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, जैसे मथुरा-वृंदावन, कोसी-छाता, आगरा और फिरोजाबाद। विकल्प D यानी प्रयागराज यहां गलत है, क्योंकि उसका नाम विश्व नदी दिवस पर चले स्वच्छता अभियानों के शहरों में आया। यह भी याद रखें कि गोमती स्थल के लिए 1 एमएलडी का प्रकृति आधारित संयंत्र मंजूर हुआ है।
बैठक की समीक्षा के अनुसार नमामि गंगे कार्यक्रम में कितनी परियोजनाएं और कितनी लागत स्वीकृत हुई है?
- A.33,266 करोड़ रुपये की 427 परियोजनाएं
- B.43,266 करोड़ रुपये की 527 परियोजनाएं
- C.53,266 करोड़ रुपये की 627 परियोजनाएं
- D.23,266 करोड़ रुपये की 327 परियोजनाएं
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 43,266 करोड़ रुपये की 527 परियोजनाएं है, जो अगस्त 2026 तक की स्थिति है और इनमें 368 परियोजनाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं। बाकी विकल्प गलत हैं, क्योंकि उनमें परियोजनाओं की संख्या या लागत बदल दी गई है और ऐसे भ्रमित करने वाले विकल्प पहला अंक बदलकर बनाए जाते हैं। दोहराते समय मुख्य आंकड़ों के साथ सीवरेज के उप-आंकड़े भी रखें, यानी 219 स्वीकृत सीवरेज परियोजनाओं में 147 पूरी हुईं, स्वीकृत 6,603 एमएलडी उपचार क्षमता में से अब तक 4,339 एमएलडी बनी और स्वीकृत 5,245 किलोमीटर सीवर नेटवर्क में से 4,615 किलोमीटर जमीन पर तैयार हुआ। मंत्री ने इसी समीक्षा में एजेंसियों तथा राज्य सरकारों से कहा कि लंबित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और भूमि संबंधी अड़चनें दूर करें, ताकि चल रही परियोजनाएं समय पर पूरी हों।
गंगा पुनरुद्धार संबंधी अधिकार प्राप्त कार्यबल की 20वीं बैठक की अध्यक्षता किसने की?
- A.केंद्रीय पर्यावरण मंत्री
- B.केंद्रीय जल शक्ति मंत्री
- C.एनएमसीजी के महानिदेशक
- D.केंद्रीय शहरी कार्य मंत्री
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व्याख्या
सही उत्तर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल हैं, जिन्होंने नई दिल्ली में इस बैठक की अध्यक्षता की। विकल्प A गलत है, क्योंकि नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत नदी पुनरुद्धार का काम जल शक्ति मंत्रालय के पास है, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पास नहीं, भले विषय पर्यावरण से जुड़ा हो। विकल्प C गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल बैठक में शामिल हुए और कार्यक्रम की प्रगति रखी, पर कार्यबल की अध्यक्षता मंत्री करते हैं। विकल्प D भी गलत है, हालांकि सीवेज के काम और शहर स्वच्छता कार्य योजनाओं में शहरी निकायों की बड़ी भूमिका रहती है। यह भी याद रखें कि बैठक में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी मौजूद थे और यह कार्यबल गंगा बेसिन की सर्वोच्च समीक्षा संस्था है।