2023 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत गुरुत्वीय तरंग संसूचक लाइगो-इंडिया किस राज्य में बनाया जा रहा है?
- A.महाराष्ट्र
- B.कर्नाटक
- C.उत्तराखंड
- D.असम
सही उत्तर
A. महाराष्ट्र
व्याख्या
सही उत्तर A, महाराष्ट्र है, जहां हिंगोली जिले में स्थल चुना गया है। गुरुत्वीय तरंग संसूचक अंग्रेजी के एल आकार का व्यतिकरणमापी है, जिसकी दोनों भुजाएं चार-चार किलोमीटर लंबी हैं और उनकी लंबाई में उस सूक्ष्म परिवर्तन को देखा जाता है जो टकराते कृष्ण विवरों या न्यूट्रॉन तारों से आई तरंग पृथ्वी से गुजरते समय पैदा करती है। स्रोत की दिशा तय करने के लिए संसूचक दूर-दूर होने चाहिए, इसलिए भारतीय वेधशाला संयुक्त राज्य के दो तथा इटली के एक संसूचक के साथ काम करेगी। B, C और D स्थल के रूप में गलत हैं, भले वहां अन्य शोध सुविधाएं हों, और विद्यार्थी इस परियोजना को कर्नाटक में रख देते हैं क्योंकि खगोल विज्ञान के अनेक संस्थानों के कार्यालय बेंगलुरु में हैं। हर भुजा में निर्वात नली होगी जिसमें लेसर किरणें चलेंगी, और बहुत सा उपकरण अमेरिकी परियोजना से आ रहा है।
पूरा लेख पढ़ें: भारत की दूरबीनें और वेधशालाएं: स्थल और तथ्य
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंजायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (जीएमआरटी) किस नगर के पास है?
- A.उत्तराखंड का नैनीताल
- B.महाराष्ट्र का पुणे
- C.तेलंगाना का हैदराबाद
- D.केरल का तिरुवनंतपुरम
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व्याख्या
सही उत्तर B, महाराष्ट्र का पुणे है। यह सरणी नारायणगांव के पास खोडद में है, पुणे से लगभग अस्सी किलोमीटर उत्तर, उस समतल भूमि पर जिसे कम मानव-जनित रेडियो व्यवधान के कारण चुना गया, और इसका संचालन टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान का राष्ट्रीय रेडियो खगोल भौतिकी केंद्र करता है। A यानी नैनीताल वह जिला है जिसमें देवस्थल है, जहां आर्यभट्ट संस्थान की प्रकाशिक दूरबीनें हैं, इसलिए विकल्पों में ये दोनों स्थल अक्सर बदल दिए जाते हैं। C में इस प्रकार की कोई बड़ी रेडियो सरणी नहीं है, भले वहां अन्य वैज्ञानिक संस्थान हों। D विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र का नगर है, जो प्रक्षेपण यान बनाता है, वेधशाला नहीं है। जीएमआरटी को मीटर तरंगदैर्घ्य और महाराष्ट्र के साथ याद रखें। यह सरणी लगभग 100 से 1,500 मेगाहर्ट्ज की पट्टी में काम करती है, जिसमें पल्सर और हाइड्रोजन बादलों का अध्ययन होता है।
जीएमआरटी सरणी में कितनी परवलयिक तश्तरियां हैं और प्रत्येक का व्यास कितना है?
- A.पैंतालीस मीटर की तीस तश्तरियां
- B.तीस मीटर की पंद्रह तश्तरियां
- C.तीस मीटर की पैंतालीस तश्तरियां
- D.पचास मीटर की बारह तश्तरियां
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व्याख्या
सही उत्तर A, पैंतालीस मीटर की तीस तश्तरियां है। इनमें चौदह तश्तरियां लगभग एक किलोमीटर के केंद्रीय वर्ग में पास-पास खड़ी हैं, और शेष सोलह तीन भुजाओं में वाई आकार में लगभग पच्चीस किलोमीटर तक फैली हैं, जिससे सरणी को भरे छिद्र की संवेदनशीलता और चौड़े छिद्र का विभेदन दोनों मिलते हैं। तश्तरियां रस्सी के ढांचे पर तने हल्के तार-जाल से बनी हैं, और यही डिजाइन उन्हें भारत में बनाने योग्य सस्ता बनाया। B दोनों अंक कम बताता है। C दोनों आंकड़े आपस में बदल देता है, और परीक्षक ठीक यही जाल जल्दबाज विद्यार्थी के लिए रखता है। D किसी भारतीय सुविधा से मेल नहीं खाता। केंद्रीय वर्ग में चौदह और तीन भुजाओं पर सोलह तश्तरियां, यही बंटवारा परीक्षा कक्ष तक साथ ले जाने योग्य है।
भारत की सबसे बड़ी प्रकाशिक दूरबीन, 3.6 मीटर देवस्थल प्रकाशिक दूरबीन, किस संस्थान द्वारा संचालित है?
- A.भारतीय तारा भौतिकी संस्थान
- B.आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान
- C.भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला
- D.रमन शोध संस्थान
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व्याख्या
सही उत्तर B, आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान है, जो नैनीताल में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है और पुरानी उत्तर प्रदेश राज्य वेधशाला से विकसित हुआ। यह दूरबीन बेल्जियम के सहयोग से बनी और लगभग 2,450 मीटर ऊंची देवस्थल श्रेणी पर 2016 में सक्रिय हुई, और उसी स्थल पर 1.3 मीटर फास्ट ऑप्टिकल दूरबीन तथा चार मीटर द्रव दर्पण दूरबीन हैं। A कवालूर, हनले और कोडईकनाल चलाता है, देवस्थल नहीं। C यानी अहमदाबाद की प्रयोगशाला उदयपुर सौर वेधशाला तथा माउंट आबू की अवरक्त दूरबीनें चलाती है। D बेंगलुरु में है और गौरीबिदनूर का रेडियोहेलियोग्राफ चलाता है, इसलिए हर विकल्प एक वास्तविक संस्थान है पर दूरबीनें भिन्न हैं। देवस्थल श्रेणी के विकास से पहले यही संस्थान नैनीताल के मनोरा शिखर की पुरानी दूरबीनें चलाता था।
भारतीय खगोलीय वेधशाला की दो मीटर हिमालयन चंद्र दूरबीन किस स्थल पर है?
- A.लद्दाख का हनले
- B.माउंट आबू का गुरुशिखर
- C.तमिलनाडु का कवालूर
- D.महाराष्ट्र का खोडद
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व्याख्या
सही उत्तर A, लद्दाख का हनले है। भारतीय खगोलीय वेधशाला वहां ठंडे रेगिस्तान में लगभग 4,500 मीटर पर है, जो विश्व के सबसे ऊंचे और शुष्कतम प्रेक्षण स्थलों में है, जहां जलवाष्प बहुत कम और कृत्रिम प्रकाश लगभग शून्य होने से आकाश असाधारण रूप से स्वच्छ तथा अंधेरा रहता है। दूरबीन को बेंगलुरु के पास होसकोटे केंद्र से उपग्रह संपर्क द्वारा दूर-नियंत्रण से चलाया जाता है, जिससे प्रेक्षकों की यात्रा बच जाती है। B पर भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला की अवरक्त दूरबीनें हैं। C पर उसी संस्थान की 2.34 मीटर वैणु बाप्पू दूरबीन है जो हनले भी चलाता है, इसी कारण दोनों में भ्रम होता है। D जीएमआरटी रेडियो सरणी का स्थल है और वहां कोई प्रकाशिक दूरबीन नहीं है। उसी स्थल पर परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान की उच्च तुंगता गामा किरण दूरबीनें भी हैं, जिन्हें इतनी ही स्वच्छ हवा चाहिए।
निम्नलिखित में कौन 1899 में स्थापित वह सौर वेधशाला है जिसमें सूर्य के सौ वर्ष से अधिक के दैनिक चित्र सुरक्षित हैं?
- A.वैणु बाप्पू वेधशाला, कवालूर
- B.कोडईकनाल सौर वेधशाला
- C.गौरीबिदनूर रेडियो वेधशाला
- D.देवस्थल वेधशाला
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व्याख्या
सही उत्तर B, कोडईकनाल सौर वेधशाला है, जो तमिलनाडु की पलनी पहाड़ियों में 1899 में तब बनी जब सौर कार्य पुरानी मद्रास वेधशाला से स्वच्छ हवा वाले पर्वतीय स्थल पर ले जाया गया। यह अब भारतीय तारा भौतिकी संस्थान का अंग है, और सौर बिंब, सौर कलंक तथा वर्णमंडल के दैनिक चित्रों का उसका अंकीकृत अभिलेख विश्व के सबसे लंबे सतत सौर अभिलेखों में है, जिससे वह दीर्घ सौर चक्रों के अध्ययन के लिए बहुमूल्य है। A तारों और मंदाकिनियों की रात्रिकालीन प्रकाशिक वेधशाला है। C सूर्य को देखती है पर रेडियो आवृत्तियों पर और बहुत बाद में बनी। D इक्कीसवीं सदी का प्रकाशिक स्थल है, जहां इस प्रकार का सौर कार्यक्रम नहीं है। उसके सौर कलंक चित्र तथा स्पेक्ट्रोहेलियोग्राम आज पिछली सौ वर्ष की सौर सक्रियता का पुनर्निर्माण करने में काम आते हैं।