201 से 300 के बीच का वायु गुणवत्ता सूचकांक मान किस श्रेणी में आता है?
- A.मध्यम
- B.खराब
- C.बहुत खराब
- D.गंभीर
सही उत्तर
B. खराब
व्याख्या
सही उत्तर B, खराब है। राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक की छह पट्टियाँ हैं: 0 से 50 अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब और 401 से 500 गंभीर। जिस प्रदूषक के पर्याप्त आँकड़े उपलब्ध हों, उसके लिए उप-सूचकांक निकाला जाता है, और इन उप-सूचकांकों में सबसे खराब उस दिन का एक्यूआई बनता है, तथा उसके लिए जिम्मेदार प्रदूषक को प्रमुख प्रदूषक बताया जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि मध्यम श्रेणी 101 से 200 तक है। विकल्प C गलत है क्योंकि बहुत खराब श्रेणी 301 से ही आरंभ होती है। विकल्प D गलत है क्योंकि गंभीर सबसे ऊपर की पट्टी है, 401 से 500 तक, जिसमें स्वस्थ व्यक्ति भी प्रभावित होते हैं और सामान्यतः आपातकालीन प्रतिबंध लगाए जाते हैं।
पूरा लेख पढ़ें: वायु प्रदूषण और वायु गुणवत्ता: प्रदूषक, एक्यूआई और कानून
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन द्वितीयक वायु प्रदूषक है?
- A.सल्फर डाइऑक्साइड
- B.कार्बन मोनोऑक्साइड
- C.परॉक्सीऐसिटिल नाइट्रेट
- D.कणिकीय पदार्थ
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. परॉक्सीऐसिटिल नाइट्रेट
व्याख्या
सही उत्तर C, परॉक्सीऐसिटिल नाइट्रेट है। द्वितीयक प्रदूषक किसी स्रोत से कभी छोड़ा नहीं जाता; वह वायुमंडल में ही तब बनता है जब प्राथमिक प्रदूषक एक-दूसरे से या सूर्य के प्रकाश से क्रिया करते हैं। परॉक्सीऐसिटिल नाइट्रेट, जिसे सामान्यतः पैन लिखा जाता है, सूर्य के प्रकाश में नाइट्रोजन के ऑक्साइड तथा बिना जले हाइड्रोकार्बन से बनता है, और धरातलीय ओजोन के साथ यही द्वितीयक प्रदूषक का मानक उदाहरण है। विकल्प A गलत है क्योंकि सल्फर डाइऑक्साइड सीधे उन चिमनियों से निकलती है जिनमें सल्फरयुक्त कोयला और तेल जलते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि कार्बन मोनोऑक्साइड ईंधन के अपूर्ण दहन से सीधे निकलती है, मुख्यतः वाहनों के इंजनों में। विकल्प D गलत है क्योंकि कणिकीय पदार्थ दहन, निर्माण, सड़क की धूल तथा उद्योग से सीधे छोड़ा जाता है, इसलिए ये तीनों प्राथमिक प्रदूषक हैं।
प्रकाश रासायनिक धूम कोहरे का मुख्य अंश निम्नलिखित में से कौन है?
- A.सल्फर डाइऑक्साइड
- B.ओजोन
- C.मेथेन
- D.कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ओजोन
व्याख्या
सही उत्तर B, ओजोन है। प्रकाश रासायनिक धूम कोहरा, जिसे लॉस एंजिल्स धूम कोहरा भी कहते हैं, गर्म, शुष्क और धूप वाले मौसम में तब बनता है जब वाहनों के निकास से निकले नाइट्रोजन के ऑक्साइड और बिना जले हाइड्रोकार्बन पराबैंगनी प्रकाश में क्रिया करते हैं। इसके मुख्य ऑक्सीकारक अंश धरातलीय ओजोन, परॉक्सीऐसिटिल नाइट्रेट और ऐल्डिहाइड हैं, इसीलिए इसे ऑक्सीकारक धूम कोहरा कहा जाता है और इसीलिए यह आँखों तथा गले में जलन करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि सल्फर डाइऑक्साइड परंपरागत या लंदन धूम कोहरे की पहचान है, जो अपचायक है और ठंडी, आर्द्र वायु में बनता है। विकल्प C गलत है क्योंकि मेथेन धान के खेतों, पशुओं और कचरा भराव क्षेत्रों से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैस है, धूम कोहरे का अंश नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड वैश्विक तापन बढ़ाती है, पर धूम कोहरे का घटक नहीं है।
कार्बन मोनोऑक्साइड मनुष्यों के लिए मुख्यतः इसलिए खतरनाक है क्योंकि वह:
- A.हीमोग्लोबिन से जुड़कर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है
- B.जल में घुलकर प्रबल अम्ल बनाती है
- C.समतापमंडल की ओजोन परत को नष्ट करती है
- D.महीन धूल के रूप में कूपिकाओं में बैठ जाती है
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. हीमोग्लोबिन से जुड़कर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है
व्याख्या
सही उत्तर A, हीमोग्लोबिन से जुड़कर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है है। कार्बन मोनोऑक्साइड रक्त के हीमोग्लोबिन से ऑक्सीजन की तुलना में लगभग दो सौ गुना अधिक सरलता से जुड़ती है, और इस प्रकार बनी कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन ऑक्सीजन नहीं ले जा सकती। इससे ऊतकों को ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे सिरदर्द और चक्कर आते हैं, और बंद कमरे में जलती अंगीठी या चालू इंजन के साथ बेहोशी तथा मृत्यु हो जाती है। विकल्प B गलत है क्योंकि घुलकर ऑक्सीकृत होकर वर्षा में सल्फ्यूरिक तथा नाइट्रिक अम्ल देने वाली गैसें सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि समतापमंडलीय ओजोन का क्षय क्लोरोफ्लोरो कार्बन तथा हैलोन करते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि कूपिकाओं में बैठना पीएम2.5 जैसे महीन कणिकीय पदार्थ का वर्णन है, किसी गैस का नहीं। यह भी याद रखें कि कार्बन मोनोऑक्साइड रंगहीन और गंधहीन है, इसीलिए उसकी उपस्थिति की कोई चेतावनी नहीं मिलती, और उससे बचाव का सबसे सरल उपाय हवादार कमरा है।
नाइट्रोजन के ऑक्साइड के साथ कौन सी गैस अम्ल वर्षा के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है?
- A.कार्बन मोनोऑक्साइड
- B.मेथेन
- C.सल्फर डाइऑक्साइड
- D.आर्गन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. सल्फर डाइऑक्साइड
व्याख्या
सही उत्तर C, सल्फर डाइऑक्साइड है। सल्फरयुक्त कोयला और तेल जलने पर निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड वायुमंडल में ऑक्सीकृत होकर सल्फर ट्राइऑक्साइड बनती है, जो जल की बूँदों में घुलकर सल्फ्यूरिक अम्ल देती है। नाइट्रोजन के ऑक्साइड इसी प्रकार नाइट्रिक अम्ल देते हैं, और दोनों मिलकर ऐसी वर्षा लाते हैं जिसका पीएच लगभग 5.6 से नीचे चला जाता है, जो घुली कार्बन डाइऑक्साइड से हल्की अम्लीय बनी सामान्य वर्षा का मान है। विकल्प A गलत है क्योंकि कार्बन मोनोऑक्साइड हीमोग्लोबिन पर असर करने वाला विष है और वर्षा में अम्ल नहीं बनाती। विकल्प B गलत है क्योंकि मेथेन ग्रीनहाउस गैस है और अम्लीय नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि आर्गन उत्कृष्ट गैस है, रासायनिक रूप से निष्क्रिय है, और ऐसी क्रियाओं में कोई भाग ही नहीं लेती। अम्ल वर्षा झीलों तथा मिट्टी का पीएच घटाती है, मिट्टी के खनिजों से विषैला ऐलुमिनियम मुक्त करती है और चूना पत्थर तथा संगमरमर की इमारतों का क्षरण करती है, इसीलिए उसे सीमाओं के पार जाने वाली प्रदूषण समस्या माना जाता है।
ताजमहल के संगमरमर को होने वाली वह हानि, जिसे सामान्यतः 'मार्बल कैंसर' कहा जाता है, मुख्यतः किससे होती है?
- A.कार्बन डाइऑक्साइड
- B.सल्फर डाइऑक्साइड
- C.क्लोरोफ्लोरो कार्बन
- D.धरातलीय ओजोन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सल्फर डाइऑक्साइड
व्याख्या
सही उत्तर B, सल्फर डाइऑक्साइड है। आगरा के आसपास उद्योग और यातायात से निकली सल्फर डाइऑक्साइड वायु में ऑक्सीकृत होकर सल्फ्यूरिक अम्ल के रूप में नीचे आती है, जो संगमरमर के कैल्सियम कार्बोनेट पर आघात करती है। पत्थर की चमक चली जाती है, वह पीला पड़ जाता है और उसकी सतह गड्ढेदार तथा परतदार हो जाती है, और इस क्षय का प्रचलित नाम मार्बल कैंसर है। इसी हानि की चिंता से ताज ट्रैपेजियम क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर प्रतिबंध लगे। विकल्प A गलत है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड वर्षा को केवल हल्का अम्लीय बनाती है और वैश्विक तापन का कारण है, इस क्षरण का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि क्लोरोफ्लोरो कार्बन ओजोन परत का क्षय करते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि धरातलीय ओजोन फेफड़ों, फसलों और रबड़ को हानि पहुँचाती है, संगमरमर को नहीं।