मुख्य सामग्री पर जाएं
GK24
राष्ट्रीयमध्यम

17वीं अखिल भारतीय पेंशन अदालत में कितनी लंबित शिकायतें सुनवाई के लिए ली गईं?

  1. A.648
  2. B.756
  3. C.897
  4. D.1,024

सही उत्तर

C. 897

व्याख्या

सही उत्तर 897 है। 17वीं अखिल भारतीय पेंशन अदालत में पारिवारिक पेंशनभोगियों और अति वरिष्ठ पेंशनभोगियों की 897 लंबित शिकायतें विचार के लिए सूचीबद्ध की गई थीं, और इनमें से 756 का निपटारा सुनवाई के दिन ही कर दिया गया, जिससे निपटान दर 84.2 प्रतिशत रही। विकल्प B में दिया 756 वह संख्या है जो निपटाई गई शिकायतों की है, ली गई शिकायतों की नहीं, और यही इस प्रश्न का सबसे आम जाल है क्योंकि दोनों आंकड़े एक ही वाक्य से आते हैं। विकल्प A और D इस अदालत से जुड़े आंकड़े ही नहीं हैं। अभ्यर्थी दोनों संख्याएं साथ याद रखें — 897 सूचीबद्ध, 756 निपटीं, 84.2 प्रतिशत दर, और सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में डॉ. जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई। शेष मामलों पर बाद में कार्रवाई के लिए छोड़ा गया।

पूरा लेख पढ़ें: 17वीं पेंशन अदालत: 897 में से 756 शिकायतें निपटीं

Read in English
Q1.राष्ट्रीयआसान

अखिल भारतीय पेंशन अदालत का आयोजन कौन सा विभाग करता है?

  1. A.पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग
  2. B.प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग
  3. C.कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग
  4. D.व्यय विभाग
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग

व्याख्या

सही उत्तर पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग है, जो कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अधीन आता है। यह अदालत उसी स्थायी व्यवस्था का हिस्सा है जिसे इस विभाग ने इसलिए बनाया है कि पेंशनभोगी की शिकायत सीधे सुनी जा सके और संबंधित मंत्रालय या विभाग भी उसी कमरे में उपस्थित रहे। 17वां संस्करण नई दिल्ली के भारतीय लोक प्रशासन संस्थान स्थित टी. एन. चतुर्वेदी स्मृति सभागार में हुआ और मामले संयुक्त सचिव (पेंशन) ने मंत्री के समक्ष रखे। विकल्प B प्रशासनिक सुधार और आम लोक शिकायतों का काम देखता है, पेंशन मामलों का नहीं। विकल्प C सरकारी कर्मचारियों के सेवा मामलों से जुड़ा है और विकल्प D सार्वजनिक व्यय से। इनमें से कोई भी पेंशन अदालत नहीं बुलाता।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

17वीं पेंशन अदालत में कौन सी ई-पुस्तिका जारी की गई?

  1. A.पेंशन आपके द्वार
  2. B.पारिवारिक पेंशनभोगियों के जीवन में सुगमता
  3. C.डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र पुस्तिका
  4. D.वरिष्ठ नागरिकों के लिए जीवन सुगमता
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. पारिवारिक पेंशनभोगियों के जीवन में सुगमता

व्याख्या

सही उत्तर पारिवारिक पेंशनभोगियों के जीवन में सुगमता है। यह ई-पुस्तिका सुनवाई के दौरान जारी की गई और इसके साथ 16वीं पेंशन अदालत की सफलता की कहानियों वाली पुस्तिकाएं भी जारी हुईं; दोनों प्रकाशनों का उद्देश्य यह दिखाना था कि सीधी सुनवाई से पेंशनभोगियों और उनके परिवारों को क्या मिला। बाकी तीन नाम सुनने में सही लगते हैं लेकिन इस अवसर पर जारी नहीं हुए। डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र का जिक्र मंत्री के भाषण में अवश्य आया, जहां उन्होंने व्यापक जागरूकता अभियानों की मांग की ताकि बुजुर्ग पेंशनभोगी डिजिटल पहचान और चेहरा पहचान आधारित सत्यापन से प्रमाण पत्र जमा कर सकें, पर उस नाम की कोई पुस्तिका जारी नहीं हुई। पुस्तिका का नाम संस्करण संख्या, तिथि और स्थान के साथ याद रखें।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र किस मंत्रालय के अधीन काम करता है?

  1. A.विधि एवं न्याय मंत्रालय
  2. B.सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
  3. C.संस्कृति मंत्रालय
  4. D.शिक्षा मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय

व्याख्या

सही उत्तर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय है, जिसके अधीन नई दिल्ली का डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र चलता है और जिसने वहां दूसरे माधव मेनन स्मृति व्याख्यान की जानकारी दी। विकल्प A लुभाता है क्योंकि आयोजन कानून और न्याय पर था तथा उसमें मुख्य न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश और महान्यायवादी मौजूद रहे, मगर यह केंद्र उस मंत्रालय के अधीन नहीं है। विकल्प C और D उन मंत्रालयों के नाम हैं जो राजधानी में दूसरे सांस्कृतिक तथा शैक्षिक संस्थान चलाते हैं, इस केंद्र से उनका नाता नहीं है। केंद्र ने यह व्याख्यान कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन के साथ मिलकर कराया, इसके निदेशक कर्नल आकाश पाटिल ने स्वागत भाषण दिया और एसोसिएशन की संयुक्त महासचिव ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। इसलिए केवल विकल्प B सही है।

Q4.राष्ट्रीयआसान

दूसरे माधव मेनन स्मृति व्याख्यान का विषय क्या था?

  1. A.नए भारत के लिए विधि शिक्षा
  2. B.अंतिम नागरिक तक न्याय की पहुंच
  3. C.जजिंग विद कंपैशन: ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग इन द प्रैक्टिस ऑफ लॉ
  4. D.इंडियन पर्सनल लॉ: यूनिटी एंड डाइवर्सिटी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. जजिंग विद कंपैशन: ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग इन द प्रैक्टिस ऑफ लॉ

व्याख्या

सही उत्तर जजिंग विद कंपैशन: ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग इन द प्रैक्टिस ऑफ लॉ है। डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र ने कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन के साथ यह व्याख्यान कराया, जिसमें न्यायाधीश, विधि के शिक्षक और वकील जुटे और न्यायिक प्रक्रिया के मानवीय पक्ष तथा न्याय देने में करुणा, सहानुभूति और संवेदनशीलता की जगह पर विचार हुआ। विकल्प D जाल है, क्योंकि वह उसी समारोह में जारी दो पुस्तकों में से एक का नाम है, व्याख्यान का विषय नहीं। विकल्प A और B दूसरे विधि सम्मेलनों तथा विधिक सहायता अभियानों में चलने वाले वाक्य हैं और इस आयोजन का विषय नहीं हैं। यह व्याख्यान श्रृंखला प्रोफेसर एन. आर. माधव मेनन की याद में होती है, जिनके काम ने देश में विधि शिक्षा की शक्ल बदली, इसलिए विषय, स्थान और संस्करण साथ याद रखने चाहिए।

Q5.राष्ट्रीयमध्यम

डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में दूसरा प्रोफेसर (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन स्मृति व्याख्यान किसने दिया?

  1. A.मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत
  2. B.न्यायमूर्ति विक्रम नाथ
  3. C.महान्यायवादी आर. वेंकटरमणी
  4. D.प्रोफेसर एस. शिवकुमार
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ

व्याख्या

सही उत्तर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ हैं, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। उन्होंने करुणा के साथ न्याय देने के विषय पर व्याख्यान दिया और कहा कि न्याय का मानवीय रुख कानून के सिद्धांतों, निष्पक्षता तथा संवैधानिक मूल्यों में टिका रहना चाहिए। विकल्प A भारत के मुख्य न्यायाधीश का नाम है, जिन्होंने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और वहीं दो विधि पुस्तकें जारी कीं, मगर व्याख्यान उन्होंने नहीं दिया। विकल्प C भारत के महान्यायवादी का नाम है, जिन्होंने प्रोफेसर माधव मेनन के जीवन और योगदान पर विशेष विचार रखे। विकल्प D उन दोनों पुस्तकों के लेखक तथा कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष का नाम है, जिन्होंने भी सभा को संबोधित किया। चारों कार्यक्रम में मौजूद थे, इसलिए सवाल इसी पर टिका है कि व्याख्यान किसने दिया।