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GK क्विजभारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज: सेट 9

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
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इस क्विज के बारे में

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज़ (सेट 9) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 13 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: सिंधु घाटी सभ्यता, संवैधानिक विकास 1858–1947, मुगल साम्राज्य और अन्य। ये सभी प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · Prelims GS Paper I, 10 Oct 2021आसान

निम्नलिखित प्राचीन नगरों में से कौन-सा बाँधों की श्रृंखला बनाकर और पानी को आपस में जुड़े जलाशयों में ले जाकर जल संचयन और प्रबंधन की विस्तृत प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है?

  1. A.धोलावीरा
  2. B.कालीबंगा
  3. C.राखीगढ़ी
  4. D.रोपड़
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. धोलावीरा

व्याख्या

सही उत्तर है A, धोलावीरा। गुजरात के कच्छ के रण में स्थित यह हड़प्पाई नगर अपने बाँधों, नालियों और पत्थर के जलाशयों की श्रृंखला के लिए प्रसिद्ध है। धोलावीरा खदीर बेट द्वीप पर दो मौसमी नालों, मनहर और मनसर, के बीच बसा है। यहाँ के लोगों ने नालों पर छोटे बाँध बनाए, पानी को नालियों से मोड़ा और नगर के चारों ओर चट्टान काटकर बने बड़े जलाशयों में जमा किया, जो सूखे मौसम का समझदार हल था। आर.एस. बिष्ट द्वारा खोदे गए इस स्थल पर दस बड़े हड़प्पाई अक्षरों वाला एक सूचना-पट्ट भी मिला, और यह 2021 में यूनेस्को विश्व धरोहर बना। विकल्प B गलत है, क्योंकि राजस्थान का कालीबंगा जुते हुए खेत और अग्नि वेदिकाओं के लिए जाना जाता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि हरियाणा का राखीगढ़ी सबसे बड़े हड़प्पाई स्थलों में गिना जाता है, जल प्रबंधन के लिए नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि पंजाब का रोपड़ मालिक के साथ दफनाए गए कुत्ते के लिए जाना जाता है। परीक्षा टिप: धोलावीरा यानी जलाशय और सूचना-पट्ट; लोथल यानी गोदीवाड़ा।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC Pre GS, 12 Jan 2020आसान

ब्रिटिश भारत में साम्प्रदायिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था निम्नलिखित में से किस अधिनियम द्वारा की गई थी?

  1. A.भारतीय कौंसिल अधिनियम, 1892
  2. B.मिंटो-मार्ले सुधार, 1909
  3. C.मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार, 1919
  4. D.भारत सरकार अधिनियम, 1935
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मिंटो-मार्ले सुधार, 1909

व्याख्या

सही उत्तर है B, मिंटो-मार्ले सुधार, 1909। 1909 के भारतीय परिषद अधिनियम, यानी मार्ले-मिंटो सुधार, ने पहली बार मुसलमानों को पृथक निर्वाचन दिया, जिसमें मुस्लिम सदस्यों को केवल मुस्लिम मतदाता ही चुन सकते थे। इससे पहले 1906 में आगा ख़ाँ के नेतृत्व में शिमला प्रतिनिधिमंडल ने लॉर्ड मिंटो से अलग प्रतिनिधित्व की माँग की थी और उसी वर्ष मुस्लिम लीग बनी थी। इसी कारण लॉर्ड मिंटो को ‘सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक’ कहा जाता है। इस अधिनियम ने विधान परिषदों का आकार भी बढ़ाया और सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा वायसराय की कार्यकारी परिषद में पहुँचने वाले पहले भारतीय बने। विकल्प A गलत है, क्योंकि 1892 के अधिनियम ने केवल अप्रत्यक्ष चुनाव और बजट पर चर्चा का अधिकार दिया। विकल्प C गलत है, क्योंकि 1919 के अधिनियम ने सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व को सिखों, भारतीय ईसाइयों, आंग्ल-भारतीयों और यूरोपीयों तक बढ़ाया, उसकी शुरुआत नहीं की। विकल्प D गलत है, क्योंकि 1935 के अधिनियम ने इसे दलित वर्गों, महिलाओं और श्रमिकों तक और फैलाया। परीक्षा टिप: पृथक निर्वाचन 1909 में मिंटो से शुरू हुआ, 1919 और 1935 में इसका विस्तार हुआ।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 1 Oct 2023मध्यम

अकबर द्वारा फतेहपुर सीकरी में निर्मित किस इमारत में बौद्ध स्थापत्य कला का अनुसरण किया गया था?

  1. A.शेख सलीम चिश्ती का मकबरा
  2. B.बुलन्द दरवाजा
  3. C.पंचमहल
  4. D.तुर्की सुल्ताना का महल
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. पंचमहल

व्याख्या

सही उत्तर है C, पंचमहल। पंचमहल पाँच मंज़िला खुला मंडप है, जिसकी हर मंज़िल नीचे वाली से छोटी होती जाती है और सबसे ऊपर एक छोटी गुंबददार छतरी है। यह सीढ़ीनुमा, पिरामिड जैसी बनावट बौद्ध विहार की याद दिलाती है, इसलिए कहा जाता है कि इसमें बौद्ध स्थापत्य का अनुसरण हुआ है। यह 176 नक्काशीदार स्तंभों पर खड़ा है और इसकी मंज़िलों पर दीवारें नहीं हैं, इसलिए इसमें हवा खुलकर आती है; राजमहल की स्त्रियाँ इसका उपयोग आराम करने और महल के आँगनों को देखने के लिए करती थीं। फतेहपुर सीकरी में हिंदू, बौद्ध और इस्लामी शैलियों का मेल अकबर की उदार रुचि को दिखाता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि शेख सलीम चिश्ती का मकबरा सफेद संगमरमर की सूफी दरगाह है, जो अपनी बारीक जालियों के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प B गलत है, क्योंकि बुलन्द दरवाजा अकबर की गुजरात विजय की याद में बना विशाल प्रवेश द्वार है। विकल्प D गलत है, क्योंकि तुर्की सुल्ताना का महल अपनी दीवारों की समृद्ध नक्काशी के लिए जाना जाने वाला छोटा मंडप है, बौद्ध बनावट के लिए नहीं। परीक्षा टिप: पंचमहल = पाँच मंज़िलें, बौद्ध विहार शैली; बुलन्द दरवाजा = गुजरात विजय।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC PCS Pre GS-I, 15 Dec 2019आसान

मुस्लिम लीग एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए “सी.आर. फॉर्मूला” किसने बनाया था?

  1. A.जवाहरलाल नेहरू
  2. B.राजगोपालाचारी
  3. C.चित्तरंजन दास
  4. D.वी. पी. मेनन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. राजगोपालाचारी

व्याख्या

सही उत्तर है B, राजगोपालाचारी। सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) ने 1944 में पाकिस्तान के सवाल पर कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच बने गतिरोध को तोड़ने के लिए यह फॉर्मूला दिया था। इसके अनुसार लीग स्वतंत्रता की माँग का समर्थन करेगी और अंतरिम सरकार बनाने में कांग्रेस का साथ देगी। युद्ध के बाद एक आयोग उत्तर-पश्चिम और पूर्व के मुस्लिम-बहुल ज़िलों की सीमा तय करेगा और वहाँ के सभी वयस्कों का जनमत संग्रह तय करेगा कि वे अलग होंगे या नहीं। सितंबर 1944 में बंबई में हुई गांधी-जिन्ना वार्ता इसी फॉर्मूले पर हुई, पर जिन्ना ने इसे ठुकरा दिया, क्योंकि वे पूरा पंजाब और बंगाल तथा केवल मुसलमानों का मतदान चाहते थे। विकल्प A गलत है, क्योंकि जवाहरलाल नेहरू ने यह योजना नहीं बनाई थी। विकल्प C गलत है, क्योंकि चित्तरंजन दास ने 1923 में स्वराज पार्टी बनाई थी और 1925 में ही उनका निधन हो गया था। विकल्प D गलत है, क्योंकि वी. पी. मेनन ने जून 1947 की विभाजन योजना का मसौदा बनाया और बाद में रियासतों के विलय में मदद की। परीक्षा टिप: सी.आर. फॉर्मूला 1944, गांधी-जिन्ना वार्ता सितंबर 1944, वेवेल योजना 1945।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CPO · 27 Jun 2024, Shift 2आसान

लॉर्ड डलहौज़ी द्वारा अवध का विलय किस वर्ष हुआ?

  1. A.1857
  2. B.1850
  3. C.1856
  4. D.1858
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1856

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1856। लॉर्ड डलहौज़ी ने फरवरी 1856 में, 1848 से 1856 तक चले अपने गवर्नर जनरल काल के अंतिम सप्ताहों में, अवध का विलय किया। इसका आधार कुशासन बताया गया, व्यपगत सिद्धांत नहीं: नवाब वाजिद अली शाह के उत्तराधिकारी थे, इसलिए अंग्रेज़ों ने उनके शासन को भ्रष्ट घोषित करके उन्हें हटाया और कलकत्ता भेज दिया। इससे बंगाल सेना के उन बहुत से सिपाहियों में रोष फैला जो अवध से आते थे, और यह 1857 के विद्रोह का एक कारण बना, जिसमें बेगम हज़रत महल ने लखनऊ में संघर्ष का नेतृत्व किया। A गलत है क्योंकि 1857 स्वयं विद्रोह का वर्ष है, जो विलय के एक साल बाद भड़का। B गलत है क्योंकि 1850 के आसपास डलहौज़ी व्यपगत सिद्धांत से छोटे राज्य ले रहे थे, जैसे 1848 में सतारा और 1853 में झाँसी, पर अवध तब तक नहीं छुआ गया था। D गलत है क्योंकि 1858 में भारत सरकार अधिनियम से कंपनी का शासन खत्म हुआ और ताज ने शासन संभाला। परीक्षा टिप: अवध 1856 में कुशासन के आरोप पर; सतारा, झाँसी और नागपुर व्यपगत सिद्धांत से।

Q6.भारतीय इतिहासपूछा गया: हरियाणा · HPSC HCS Prelims GS, 24 Jul 2022मध्यम

उत्तर-वैदिक काल में, ‘बलि’ शब्द का अर्थ है

  1. A.बलिदान
  2. B.कर
  3. C.शक्तिशाली जमींदार
  4. D.आमदनी/आय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कर

व्याख्या

सही उत्तर है B, कर। उत्तर-वैदिक काल तक बलि राजा द्वारा वसूला जाने वाला नियमित कर बन चुकी थी। ऋग्वैदिक काल में बलि एक स्वैच्छिक भेंट थी, जो प्रजा या हारे हुए कबीले अपने मुखिया को देते थे, अक्सर पशु या अनाज के रूप में। लगभग 1000 ई.पू. के बाद जब राज्य बड़े होने लगे और गंगा के मैदान में स्थायी खेती फैली, तो यह भेंट एक अनिवार्य भुगतान में बदल गई। इस काल के ग्रंथों में इससे जुड़े राजकीय अधिकारियों के नाम मिलते हैं, जैसे भागदुघ, जो राजा का हिस्सा वसूलता था, और संग्रहीतृ, जो कोषाध्यक्ष था। इसी आय से राजा अपना दरबार और स्थायी सेना चला पाता था। विकल्प A गलत है, क्योंकि बलिदान या यज्ञ के लिए अलग शब्द था, और यहाँ बलि का अर्थ राजा को दिया जाने वाला भुगतान है। विकल्प C गलत है, क्योंकि बलि किसी व्यक्ति का नाम नहीं, बल्कि दी जाने वाली राशि या वस्तु है। विकल्प D गलत है, क्योंकि आय बहुत सामान्य शब्द है, जबकि बलि खास तौर पर राजा का हिस्सा थी। परीक्षा टिप: ऋग्वैदिक बलि स्वैच्छिक भेंट थी; उत्तर-वैदिक काल में यह अनिवार्य कर बनी और भागदुघ इसे वसूलता था।

Q7.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019मध्यम

निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए :

1. रामकृष्ण मिशन की स्थापना

2. आर्य समाज की स्थापना

3. ब्रह्म समाज की स्थापना

4. परमहंस मंडली की स्थापना

उपर्युक्त का सही कालानुक्रमिक क्रम निम्नलिखित में से कौन सा है?

  1. A.1, 2, 3, 4
  2. B.2, 3, 4, 1
  3. C.3, 4, 1, 2
  4. D.3, 4, 2, 1
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 3, 4, 2, 1

व्याख्या

सही उत्तर है D, 3, 4, 2, 1। इन चारों की तिथियाँ क्रम से 1828, 1849, 1875 और 1897 हैं। राजा राममोहन राय ने 1828 में कलकत्ता में ब्रह्म सभा बनाई, जो आगे चलकर ब्रह्म समाज कहलाई। परमहंस मंडली 1849 में बंबई में बनी, जो जाति-बंधन और मूर्तिपूजा का विरोध करने वाली एक गुप्त संस्था थी। स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में बंबई में आर्य समाज की स्थापना की और "वेदों की ओर लौटो" का नारा दिया। स्वामी विवेकानंद ने 1893 की शिकागो धर्म संसद से लौटने के बाद 1897 में रामकृष्ण मिशन बनाया। विकल्प A गलत है, क्योंकि इसमें चारों में सबसे बाद वाला रामकृष्ण मिशन सबसे पहले रखा गया है। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें 1875 का आर्य समाज 1828 के ब्रह्म समाज से पहले रखा गया है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इसमें 1897 का रामकृष्ण मिशन 1875 के आर्य समाज से पहले आ गया है। परीक्षा टिप: ब्रह्म समाज 1828, परमहंस मंडली 1849, आर्य समाज 1875, रामकृष्ण मिशन 1897।

Q8.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · Prelims GS Paper I, 16 Jun 2024मध्यम

प्राचीन भारत के संदर्भ में, गौतम बुद्ध सामान्यतः निम्नलिखित में से किन उपाधियों से जाने जाते थे?

1. नायपुत्त

2. शाक्यमुनि

3. तथागत

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.1, 2 और 3
  4. D.उपर्युक्त में से कोई भी गौतम बुद्ध की उपाधि नहीं है
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. केवल 2 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है B, केवल 2 और 3। शाक्यमुनि और तथागत बुद्ध की उपाधियाँ हैं, जबकि नायपुत्त महावीर का नाम है। शाक्यमुनि का अर्थ है 'शाक्यों के मुनि', यानी कपिलवस्तु का वह कुल जिसमें सिद्धार्थ जन्मे थे। तथागत का अर्थ है 'जो इस प्रकार चला गया', और पालि ग्रंथों में बुद्ध स्वयं के लिए यही शब्द प्रयोग करते हैं। नायपुत्त (नातपुत्त) का अर्थ है 'नाय या ज्ञातृक कुल का पुत्र', और बौद्ध ग्रंथ महावीर को निगंठ नातपुत्त कहते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि सूची में नायपुत्त ही वह नाम है जो बुद्ध का नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि यह दो सही उपाधियों के साथ नायपुत्त भी जोड़ देता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि तीन में से दो नाम सचमुच बुद्ध की उपाधियाँ हैं। बुद्ध की अन्य उपाधियाँ सुगत और भगवत हैं, जबकि महावीर को जिन और वर्धमान भी कहा जाता है। परीक्षा टिप: शाक्यमुनि और तथागत यानी बुद्ध, निगंठ नातपुत्त यानी महावीर।

Q9.भारतीय इतिहासपूछा गया: बिहार · BPSC 65th CCE Pre, 2019मध्यम

बिहार में स्वराज दल की स्थापना किसने की?

  1. A.श्रीकृष्ण सिंह
  2. B.रामलाल शाह
  3. C.बंकिम चंद्र मित्र
  4. D.शचींद्रनाथ सान्याल
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. श्रीकृष्ण सिंह

व्याख्या

सही उत्तर है A, श्रीकृष्ण सिंह। श्रीकृष्ण सिंह, जिन्हें श्रीकृष्ण सिन्हा के नाम से भी जाना जाता है, के नेतृत्व में 1923 में स्वराज दल की बिहार शाखा बनी। स्वराज पार्टी की स्थापना 1 जनवरी 1923 को चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने की थी, जो परिषदों में जाकर भीतर से सरकार का विरोध करना चाहते थे। इसकी नींव दिसंबर 1922 में बिहार के गया में हुए कांग्रेस अधिवेशन में पड़ी, जहाँ दास अध्यक्ष थे और परिषद-प्रवेश का उनका प्रस्ताव गिर गया। 'बिहार केसरी' कहे जाने वाले श्रीकृष्ण सिन्हा बाद में बिहार के पहले मुख्यमंत्री बने और 1946 से 1961 में अपने निधन तक इस पद पर रहे। विकल्प B गलत है, क्योंकि रामलाल शाह ने बिहार में स्वराज दल की स्थापना नहीं की। विकल्प C गलत है, क्योंकि बंकिम चंद्र मित्र को भी इसका श्रेय नहीं जाता। विकल्प D गलत है, क्योंकि शचींद्रनाथ सान्याल क्रांतिकारी थे, जिन्होंने 1924 में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन बनाई। परीक्षा टिप: गया अधिवेशन 1922, स्वराज पार्टी 1923, बिहार शाखा श्रीकृष्ण सिन्हा के नेतृत्व में।

Q10.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · NDA (II) 2024, 1 Sep 2024आसान

तक्षशिला प्राचीन भारत के निम्नलिखित में से किस महाजनपद की राजधानी थी?

  1. A.कुरु
  2. B.काशी
  3. C.गांधार
  4. D.अवंति
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. गांधार

व्याख्या

सही उत्तर है C, गांधार। बौद्ध ग्रंथों में छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपद गिनाए गए हैं, और उत्तर-पश्चिम में पेशावर व रावलपिंडी क्षेत्र वाले गांधार की राजधानी तक्षशिला थी, जो आज पाकिस्तान में इस्लामाबाद के पास है। तक्षशिला उत्तरापथ व्यापार मार्ग पर थी और विद्या का प्रसिद्ध केंद्र बनी, जिसे परंपरा पाणिनि, चाणक्य और वैद्य जीवक से जोड़ती है। इसके खंडहर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। बाद में कुषाणों के समय गांधार कला शैली के लिए भी यह क्षेत्र प्रसिद्ध हुआ। A, कुरु, की राजधानी दिल्ली के पास इंद्रप्रस्थ थी और हस्तिनापुर दूसरा केंद्र था। B, काशी, की राजधानी वाराणसी थी। D, अवंति, मालवा में था, जिसकी राजधानी उज्जैन और दक्षिण में महिष्मती थी। परीक्षा टिप: जोड़ों में याद रखें: गांधार-तक्षशिला, अवंति-उज्जैन, कोसल-श्रावस्ती, वत्स-कौशांबी, और मगध-राजगीर, बाद में पाटलिपुत्र।

Q11.भारतीय इतिहासपूछा गया: हरियाणा · HSSC CET Group C, 5 Nov 2022, Shift 1मध्यम

कॉलम I में दिए गए हरियाणा के जिलों के प्राचीन नाम कॉलम II में दिए गए उनके वर्तमान नामों से सुमेलित कीजिए:

कॉलम I: I. साइरशैक, II. कानौड, III. कपिस्थल, IV. पांडुप्रस्थ

कॉलम II: a. सिरसा, b. कैथल, c. पानीपत, d. महेंद्रगढ़

  1. A.I-b, II-c, III-d, IV-a
  2. B.I-a, II-d, III-b, IV-c
  3. C.I-d, II-a, III-b, IV-c
  4. D.I-c, II-b, III-a, IV-d
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. I-a, II-d, III-b, IV-c

व्याख्या

सही उत्तर है B, I-a, II-d, III-b, IV-c। साइरशैक सिरसा का पुराना नाम है, जिसका उल्लेख महाभारत में मिलता है। कानौड, जिसे कनोड भी लिखा जाता है, महेंद्रगढ़ का पहले का नाम था; 1860 के दशक में पटियाला के महाराजा नरेंद्र सिंह ने यहाँ के किले का नाम अपने पुत्र महेंद्र सिंह के नाम पर रखा, जिससे कस्बे को मौजूदा नाम मिला। कपिस्थल, यानी कपि या हनुमान का स्थान, कैथल का प्राचीन नाम है। पांडुप्रस्थ, यानी पांडवों का नगर, पानीपत का पुराना नाम है; परंपरा के अनुसार यह उन पाँच गाँवों में से था, जो पांडवों ने युद्ध टालने के लिए माँगे थे, और सोनीपत तब स्वर्णप्रस्थ था। विकल्प A गलत है, क्योंकि इसमें साइरशैक को कैथल और पांडुप्रस्थ को सिरसा से जोड़ा गया है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इसमें साइरशैक को महेंद्रगढ़ और कानौड को सिरसा से जोड़ा गया है। विकल्प D गलत है, क्योंकि इसमें साइरशैक को पानीपत और कपिस्थल को सिरसा से जोड़ा गया है। परीक्षा टिप: सिरसा = साइरशैक, महेंद्रगढ़ = कानौड, कैथल = कपिस्थल, पानीपत = पांडुप्रस्थ, सोनीपत = स्वर्णप्रस्थ।

Q12.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 12 Feb 2025, Shift 1मध्यम

अशोक के शिलालेखों में मुख्य रूप से कौन-सी भाषा और लिपि का प्रयोग हुआ था?

  1. A.संस्कृत और देवनागरी
  2. B.पालि और खरोष्ठी
  3. C.प्राकृत और ब्राह्मी
  4. D.यूनानी और लैटिन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. प्राकृत और ब्राह्मी

व्याख्या

सही उत्तर है C, प्राकृत और ब्राह्मी। अशोक के ज्यादातर अभिलेख आम लोगों की बोली प्राकृत में और ब्राह्मी लिपि में लिखे गए, ताकि प्रजा उसके धम्म का संदेश समझ सके। ब्राह्मी लिपि को सबसे पहले 1837 में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ा, और इन अभिलेखों में राजा को 'देवानांपिय पियदसि' यानी देवताओं का प्रिय कहा गया है। उत्तर-पश्चिम में, आज के पाकिस्तान के पास, यही प्राकृत खरोष्ठी लिपि में लिखी गई, और अफगानिस्तान के कंधार में अभिलेख यूनानी और अरामाइक में मिले। A गलत है क्योंकि अशोक ने अभिलेखों में संस्कृत का प्रयोग नहीं किया और देवनागरी लिपि कई सदियों बाद विकसित हुई। B गलत है क्योंकि खरोष्ठी केवल शाहबाजगढ़ी और मानसेहरा जैसे कुछ उत्तर-पश्चिमी अभिलेखों में है, और पालि बौद्ध ग्रंथों की भाषा है, अभिलेखों की नहीं। D गलत है क्योंकि यूनानी केवल कंधार में मिलती है और लैटिन का प्रयोग कभी नहीं हुआ। परीक्षा टिप: अशोक के अभिलेख, प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि; प्रिंसेप ने 1837 में पढ़े।

Q13.भारतीय इतिहासपूछा गया: हरियाणा · HPSC HCS Prelims GS, 11 Feb 2024कठिन

सूची I का मिलान सूची II से कीजिए:

सूची I: a. दिमुन, b. मकन या मगन, c. मेलुहा, d. उर

सूची II: i. सिन्ध प्रदेश, ii. मेसोपोटामिया स्थित बंदरगाह, iii. बहरीन द्वीप, iv. मकरान तट (बलूचिस्तान)

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. A.a-ii, b-iii, c-iv, d-i
  2. B.a-iv, b-i, c-iii, d-ii
  3. C.a-ii, b-iii, c-i, d-iv
  4. D.a-iii, b-iv, c-i, d-ii
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. a-iii, b-iv, c-i, d-ii

व्याख्या

सही उत्तर है D, a-iii, b-iv, c-i, d-ii। ये नाम मेसोपोटामिया के कीलाक्षर (क्यूनिफॉर्म) लेखों में उन क्षेत्रों के लिए आते हैं, जिनसे हड़प्पा वासियों का व्यापार होता था। मेलुहा को आमतौर पर सिंध सहित सिंधु क्षेत्र माना जाता है; लेखों में लिखा है कि मेलुहा के जहाज़ कार्नेलियन, लाजवर्द, ताँबा, सोना और बढ़िया लकड़ी लाते थे। दिमुन की पहचान फ़ारस की खाड़ी के बहरीन द्वीप से होती है, जहाँ हड़प्पा शैली की मुहरें और बाट मिले हैं। मगन या मकन को मकरान तट और उसके पास के ओमान से जोड़ा जाता है, जहाँ से ताँबा आता था। उर मेसोपोटामिया का सुमेरियन बंदरगाह नगर था, जहाँ सिंधु घाटी की मुहरें और कार्नेलियन के मनके मिले हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि उसमें दिमुन को मेसोपोटामिया का बंदरगाह और मेलुहा को मकरान तट बताया गया है। विकल्प B गलत है, क्योंकि उसमें दिमुन को मकरान तट और मगन को सिंध बताया गया है। विकल्प C गलत है, क्योंकि उसमें दिमुन को मेसोपोटामिया में और उर को मकरान तट पर रखा गया है। परीक्षा टिप: मेलुहा यानी सिंधु क्षेत्र, दिमुन यानी बहरीन, मगन यानी मकरान या ओमान; लोथल का गोदीबाड़ा समुद्री व्यापार का सबूत है।

Q14.भारतीय इतिहासपूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC PCS Pre GS-I, 14 May 2023आसान

‘मिलिन्द पन्हो’ राजा मिलिन्द तथा एक बौद्ध भिक्षु के मध्य संवाद रूप में है। वह भिक्षु थे

  1. A.नागार्जुन
  2. B.नागसेन
  3. C.कुमारिल भट्ट
  4. D.नागभट्ट
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नागसेन

व्याख्या

सही उत्तर है B, नागसेन। पालि ग्रंथ ‘मिलिन्दपन्हो’ (राजा मिलिन्द के प्रश्न) में बौद्ध भिक्षु नागसेन और राजा मिलिन्द के बीच लंबा प्रश्नोत्तर दर्ज है। मिलिन्द दरअसल हिन्द-यवन (इंडो-ग्रीक) राजा मिनांडर प्रथम है, जिसने ईसा पूर्व दूसरी सदी में शाकल (आज का सियालकोट) से शासन किया। नागसेन आत्मा, पुनर्जन्म और कर्म पर राजा की शंकाओं का उत्तर सरल उदाहरणों से देते हैं; सबसे प्रसिद्ध रथ का उदाहरण है, जिसमें रथ केवल अपने हिस्सों का नाम है, वैसे ही ‘मैं’ भी बदलते अंशों का नाम है। बौद्ध परंपरा के अनुसार मिनांडर ने बौद्ध धर्म अपना लिया था। विकल्प A गलत है, क्योंकि नागार्जुन लगभग दूसरी सदी ईस्वी के महायान दार्शनिक थे, जिन्होंने माध्यमिक (शून्यवाद) मत दिया। विकल्प C गलत है, क्योंकि कुमारिल भट्ट सातवीं-आठवीं सदी के मीमांसा दार्शनिक थे, जिन्होंने वैदिक कर्मकांड का पक्ष लिया। विकल्प D गलत है, क्योंकि नागभट्ट गुर्जर-प्रतिहार वंश के संस्थापक राजा थे, भिक्षु नहीं। परीक्षा टिप: मिलिन्द = मिनांडर (हिन्द-यवन राजा, राजधानी शाकल); ग्रंथ में उसके गुरु = नागसेन।

Q15.भारतीय इतिहासपूछा गया: बिहार · BPSC 68th CCE Pre, 12 Feb 2023मध्यम

बंगाल में महालवाड़ी बंदोबस्त की व्यवस्था किसने शुरू की थी?

  1. A.लॉर्ड हेस्टिंग्स
  2. B.लॉर्ड कॉर्नवालिस
  3. C.होल्ट मैकेंज़ी
  4. D.उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. होल्ट मैकेंज़ी

व्याख्या

सही उत्तर है C, होल्ट मैकेंज़ी। कंपनी के अधिकारी होल्ट मैकेंज़ी ने 1822 में बंगाल प्रेसीडेंसी के उत्तर-पश्चिमी प्रांतों के लिए महालवाड़ी व्यवस्था बनाई। इसमें पूरे गाँव या जागीर को, जिसे महाल कहा जाता था, एक इकाई माना गया और लगान गाँव के समुदाय या उसके मुखियाओं के साथ तय हुआ, जो मिलकर उसे चुकाने के ज़िम्मेदार थे। स्थायी बंदोबस्त के उलट, इसमें लगान समय-समय पर बदला जाता था। लॉर्ड विलियम बेंटिक के समय यह व्यवस्था सुधारी गई और आगरा व अवध तक फैली, और बाद में पंजाब व मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भी लागू हुई। विकल्प A गलत है, क्योंकि लॉर्ड हेस्टिंग्स उस समय गवर्नर-जनरल थे और आंग्ल-नेपाल युद्ध व तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध के लिए जाने जाते हैं, इस व्यवस्था को बनाने के लिए नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि लॉर्ड कॉर्नवालिस 1793 में बंगाल, बिहार और ओडिशा में स्थायी बंदोबस्त लाए थे। विकल्प D गलत है, क्योंकि महालवाड़ी व्यवस्था केवल होल्ट मैकेंज़ी ने बनाई। परीक्षा टिप: स्थायी बंदोबस्त कॉर्नवालिस 1793, रैयतवाड़ी मुनरो और रीड, महालवाड़ी होल्ट मैकेंज़ी 1822।

Q16.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · NDA (I) 2023, 16 Apr 2023आसान

समुद्रगुप्त की 'प्रयाग प्रशस्ति' की रचना निम्नलिखित में से किसने की?

  1. A.हरिषेण
  2. B.चंद बरदाई
  3. C.विशाखदत्त
  4. D.कालिदास
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. हरिषेण

व्याख्या

सही उत्तर है A, हरिषेण। प्रयाग प्रशस्ति, जिसे इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख भी कहते हैं, गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त (लगभग 335 से 375 ई.) की संस्कृत में लिखी प्रशंसा है, जिसे उनके दरबारी कवि और मंत्री हरिषेण ने रचा; हरिषेण संधिविग्रहिक (युद्ध और शांति मंत्री) और कुमारामात्य पद पर थे। यह अभिलेख इलाहाबाद किले में रखे अशोक स्तंभ पर खुदा है और उन राजाओं की सूची देता है जिन्हें समुद्रगुप्त ने उत्तर में उखाड़ फेंका और दक्षिण में हराकर छोड़ दिया; इसीलिए इतिहासकार उन्हें भारत का नेपोलियन कहते हैं। चम्पू शैली में लिखी यह प्रशस्ति उन्हें कवि और संगीतज्ञ भी बताती है। B, चंद बरदाई, ने बारहवीं शताब्दी में पृथ्वीराज रासो लिखा। C, विशाखदत्त, ने चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य पर नाटक मुद्राराक्षस लिखा। D, कालिदास, अभिज्ञानशाकुंतलम् और मेघदूत के कवि, चंद्रगुप्त द्वितीय से जुड़े हैं, इस अभिलेख से नहीं। परीक्षा टिप: हरिषेण, प्रयाग प्रशस्ति, समुद्रगुप्त; रविकीर्ति, ऐहोल अभिलेख, पुलकेशिन द्वितीय।

Q17.भारतीय इतिहासपूछा गया: RRB JE · CBT-1, 17 Dec 2024, Shift 1मध्यम

1927 में महाराष्ट्र में डॉ. बी.आर. आंबेडकर के नेतृत्व में जलाशयों, मंदिरों और विद्यालयों जैसे सार्वजनिक संसाधनों तक पहुँच के लिए शुरू किए गए आंदोलन का नाम क्या था?

  1. A.शहादा आंदोलन
  2. B.बंबई किसान विद्रोह
  3. C.खेड़ा सत्याग्रह
  4. D.महाड़ सत्याग्रह
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. महाड़ सत्याग्रह

व्याख्या

सही उत्तर है D, महाड़ सत्याग्रह। 20 मार्च 1927 को डॉ. बी.आर. आंबेडकर हज़ारों लोगों के साथ महाराष्ट्र के आज के रायगढ़ ज़िले में स्थित महाड़ के चवदार तालाब पहुँचे और उसका पानी पीकर दलितों के सार्वजनिक जलस्रोतों के उपयोग के अधिकार की घोषणा की। बंबई विधान परिषद 1923 में ही ऐसे सार्वजनिक स्थान सबके लिए खोलने का प्रस्ताव पारित कर चुकी थी, फिर भी सवर्ण निवासी दलितों को रोकते थे। दिसंबर 1927 के दूसरे सम्मेलन में आंदोलन आगे बढ़ा और मनुस्मृति की प्रतियाँ सार्वजनिक रूप से जलाई गईं। इसके बाद आंबेडकर ने 1930 में नासिक में कालाराम मंदिर प्रवेश सत्याग्रह चलाया। A गलत है क्योंकि शहादा आंदोलन 1970 के दशक में धुले ज़िले के भील आदिवासियों का आंदोलन था। B गलत है क्योंकि बंबई क्षेत्र के किसान विद्रोह, जैसे 1875 के दक्कन दंगे, साहूकारों के ख़िलाफ़ थे, जातिगत भेदभाव के ख़िलाफ़ नहीं। C गलत है क्योंकि 1918 का खेड़ा सत्याग्रह गांधीजी ने गुजरात में लगान माफ़ी के लिए चलाया था। परीक्षा टिप: महाड़ 1927 = पानी (चवदार तालाब); कालाराम 1930 = मंदिर प्रवेश; दोनों के नेता आंबेडकर।

Q18.भारतीय इतिहासपूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC PCS Pre GS-I, 12 Jun 2022आसान

जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड के विरोध में किसने ब्रिटिश सरकार की ‘नाइटहुड’ की उपाधि को लौटा दिया था?

  1. A.मु. अली जिन्ना
  2. B.रवीन्द्रनाथ टैगोर
  3. C.रामेश्वर सिंह
  4. D.शंकरन नायर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रवीन्द्रनाथ टैगोर

व्याख्या

सही उत्तर है B, रवीन्द्रनाथ टैगोर। 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल डायर के सैनिकों ने निहत्थी भीड़ पर गोलियाँ चलाईं, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए। मई 1919 के अंत में टैगोर ने वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड को पत्र लिखकर 1915 में मिली ‘नाइट’ की उपाधि लौटा दी और लिखा कि ऐसे सम्मान अब अपमान का प्रतीक बन गए हैं। 1913 में ‘गीतांजलि’ के लिए साहित्य का नोबेल पा चुके कवि के इस विरोध की गूँज पूरी दुनिया में सुनाई दी। विकल्प A गलत है, क्योंकि मुहम्मद अली जिन्ना ने मार्च 1919 में रौलट एक्ट के विरोध में इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल से इस्तीफ़ा दिया था; उन्होंने कोई नाइटहुड नहीं लौटाई। विकल्प C गलत है, क्योंकि दरभंगा के महाराजा रामेश्वर सिंह सरकार के समर्थक थे और उन्होंने कोई उपाधि नहीं छोड़ी। विकल्प D गलत है, क्योंकि सर सी. शंकरन नायर ने नाइटहुड नहीं लौटाई, बल्कि वायसराय की कार्यकारी परिषद से इस्तीफ़ा दिया था। परीक्षा टिप: टैगोर ने 1919 में नाइटहुड लौटाई, गांधीजी ने 1920 में कैसर-ए-हिन्द पदक लौटाया।

Q19.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC Pre GS, 25 Jul 2021मध्यम

भीमबेटका को किसने खोजा था?

  1. A.डॉ. एच. डी. सांखलिया
  2. B.डॉ. श्याम सुंदर निगम
  3. C.डॉ. विष्णुधर वाकणकर
  4. D.डॉ. राजबली पाण्डेय
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. डॉ. विष्णुधर वाकणकर

व्याख्या

सही उत्तर है C, डॉ. विष्णुधर वाकणकर। उज्जैन के पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने 1957–58 में भोपाल के पास रेल यात्रा करते हुए भीमबेटका की चट्टानें देखीं और फिर इन शैलाश्रयों की विस्तार से खोज की। भीमबेटका रायसेन ज़िले में, भोपाल से लगभग 45 किमी दक्षिण में, विंध्य पहाड़ियों के दक्षिणी छोर पर स्थित है। यहाँ के 700 से अधिक शैलाश्रयों में पाषाण काल से मध्यकाल तक के चित्र हैं, जिनमें शिकार, नृत्य और पशुओं के दृश्य हैं; इसलिए यह भारत में मानव जीवन के सबसे पुराने प्रमाणों में गिना जाता है। यूनेस्को ने 2003 में भीमबेटका के शैलाश्रयों को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। विकल्प A गलत है, क्योंकि एच. डी. सांखलिया नावदाटोली और नेवासा जैसे स्थलों की खुदाई के लिए जाने जाते हैं, भीमबेटका की खोज के लिए नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि इतिहासकार श्याम सुंदर निगम ने यह स्थल नहीं खोजा। विकल्प D गलत है, क्योंकि राजबली पाण्डेय प्राचीन भारत के इतिहासकार थे, इसके खोजकर्ता नहीं। परीक्षा टिप: भीमबेटका, रायसेन ज़िला, वाकणकर द्वारा 1957–58 में खोज, 2003 में विश्व धरोहर।

Q20.भारतीय इतिहासपूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 1 Oct 2023कठिन

निम्नलिखित में से किसके द्वारा ‘सुरकोटड़ा’ नामक हड़प्पा संस्कृति के स्थल की खोज की गई थी?

  1. A.एस. आर. राव
  2. B.बी. बी. लाल
  3. C.जगतपति जोशी
  4. D.वाई. डी. शर्मा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. जगतपति जोशी

व्याख्या

सही उत्तर है C, जगतपति जोशी। गुजरात के कच्छ जिले में स्थित हड़प्पा स्थल सुरकोटड़ा की खोज पुरातत्वविद् जगतपति जोशी ने 1964 में की थी और बाद में 1971-72 में उन्होंने ही यहाँ उत्खनन किया। यह स्थल घोड़े की मानी गई हड्डियों के लिए सबसे अधिक जाना जाता है, जो हड़प्पा बस्ती के लिए एक दुर्लभ दावा है, साथ ही पत्थर और कच्ची ईंटों से बने किलेबंद दुर्ग और आवासीय भाग के लिए भी। जोशी ने ही 1967-68 में कच्छ में धोलावीरा की खोज की थी, जिस महान हड़प्पा नगर का उत्खनन बाद में आर. एस. बिष्ट ने किया। विकल्प A गलत है, क्योंकि एस. आर. राव गुजरात के हड़प्पा बंदरगाह नगर लोथल के उत्खनन के लिए जाने जाते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि बी. बी. लाल का नाम बी. के. थापर के साथ राजस्थान के कालीबंगा के उत्खनन से जुड़ा है। विकल्प D गलत है, क्योंकि वाई. डी. शर्मा पंजाब के रोपड़ (रूपनगर) के उत्खनन से जुड़े हैं। परीक्षा टिप: कच्छ के सुरकोटड़ा और धोलावीरा, दोनों जगतपति जोशी ने खोजे; लोथल एस. आर. राव का, कालीबंगा लाल और थापर का।

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